Thursday, 7 April 2011

♥ daughter (how did a stranger!) ♥ ♥ बेटी( कैसे हुई पराई!)♥


♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ बेटी( कैसे हुई पराई!)♥ ♥ ♥
देखो मेरी इन आँखों में, दर्द भरी है लाली छाई!
चेहरा भी है सिमटा सिमटा, और आँखें भी हैं सूनी !
मेरा दिल भी मांस का और भाव भी सांस सांस का,
 सारी दुनिया कहती लेकिन, बेटी तो है रकम पराई!

   एक लड़की कहती है लेकिन, चुप चुप ख़ामोशी की धुन में!
   माथे छाई शिकन की बदली ,और मन भी डूबा उलझन में!  
उसी कोख से बेटा जन्मा, उसी कोख से बेटी आई!
कोई मुझे समझाए आखिर, बेटी कैसे हुई पराई………………..

जिस दिन मैं घर में आती हूँ, सब लक्ष्मी का रूप बताते!
मंदिर की देहरी पर जाकर, दीप जलाते, शीश झुकाते!
सब कहते हैं अपनी बेटी, बेटे से ना कम निकलेगी,
आज मगर ये कहने वाले, बेटी का हैं नीर बहाते!
   एक लड़की दिखती है लेकिन, खोई खोई सी उपवन में!
  माथे छाई शिकन की बदली ,और मन भी डूबा उलझन में! 

उसी दूध से बेटा पलता, और बेटी की हुई सिंचाई!
कोई मुझे समझाए आखिर, बेटी कैसे हुई पराई………………..

नहीं हैं कमतर बेटे होते , ना बेटी भी होती कम है!
पीड़ा का माहौल देखकर ,उसकी आंख भी होती नम है!
लेकिन भेदभावों के चलते, बेटी के मनोभाव टूटते,
कदमो में है शूल चुभन तो, "देव" कंठ में करुण रुदन है!
  एक लड़की है मिटती है लेकिन, अपने घर के ही आँगन में!
  माथे छाई शिकन की बदली ,और मन भी डूबा उलझन में! 
बेटी ने मर्यादित होकर, घर की हर पल लाज बचाई!
कोई मुझे समझाए आखिर, बेटी कैसे हुई पराई!”

*बेटी को पराया ना करिए, ये तो अनमोल है जी! -चेतन रामकिशन(देव)"


♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ daughter (how did a stranger!) ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

"Look me in the eyes, the redness dominated painful!
Face the ends closed, and eyes are barren!
My heart of flesh and feeling the breath of breath,
 
 But the world says, is the daughter sum stranger!

   But the girl says, up to the tune of silence up!
     The forehead wrinkle line, and even dipped confused mind!

Son, born of the same womb, the daughter came the same womb!
After someone explain to me, daughter How did a stranger……………..

The day will come at home, as all calls to Bhagaven!
Go to the temple, deep burn, head bowed!
Everyone says my daughter, my son will not be less than,
But people say that today, daughter has tears!

    A girl looks, but gloomily in garden!
      The forehead wrinkle line, and even dipped confused mind!

Same milk multiplies son, and daughter were irrigated!
After someone explain to me, daughter How did a stranger……………..


There son are not less , is not too little daughter!
Seeing an atmosphere of pain, his eyes are moist too!
But because of discrimination, breaking daughter's attitude,
If the prick in the foot, "Dev" is the cry in the throat!


     A girl fade, but the courtyard of his house!
     The forehead wrinkle line, and even dipped confused mind!

Daughter through the sobering, house honor saved every moment!
After someone explain to me, daughter How did a stranger!”


*Do not estranged daughter! daughter is precious!-chetan ramkishan (Dev)"



2 comments:

शोभा राजपुरोहित said...

Bhoot hi achha likhte hai aap..

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत ही सुंदर रचना .......संवेदनशील भाव.....