Friday, 10 August 2012



♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन की बेबसी.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान!
बिना दवा के निकल रही है, मजदूरों की जान!
क्या समझेंगे सत्ताधारी, इन लोगों का दर्द,
उनको दुख की परिभाषा का, नहीं है कुछ भी ज्ञान!

बड़े दर्द में, आंसू पीकर, जीते हैं ये लोग!
और देश के नेता करते, बस इनका उपयोग!

फिर भी इनको देते माफ़ी, ये निर्धन इन्सान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान...

इन मजलूमों के संग होते, रोज ही अत्याचार!
इनके तन पर करते अफसर, लाठी की बौछार!
नहीं बीज कृषक को मिलता और न मिलता खाद,
इनकी फसल का दाम भी देखो, कम देती सरकार!

न अफसर, न नेता, देखो सुनते इनकी आह!
इनको तो हर पल होती है, धन-दौलत की चाह!

निर्धन लोगों के अधरों से, चली गयी मुस्कान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान...

जाने कब तक रहेंगे, इनके दर्दनाक हालात!
इनके हिस्से कब आयेंगे, हंसी भरे दिन रात!
इनके इष्ट "देव" भी इनका, नहीं समझते दर्द,
जाने कब इनके घर होगी, खुशियों की बरसात!

निर्धन लोगों के जीवन में, कदम कदम पर शूल!
इनके जीवन में नहीं खिलते, आशाओं के फूल!

निर्धन लोगों की चीखों को, नहीं सुने भगवान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान!"

"
देश-कुछ चुनिन्दा, चंद लोगों के अमीर होने से, खुशहाल नहीं होता! देश उस वर्ग के खुश होने से खुशहाल होता है, जो वर्ग खेत में फसल बोकर लोगों का पेट भरता है, जो वर्ग पहाड़ काट काट कर रास्ते तैयार करता है! देश को खुशहाली देनी है तो पहले इस निर्धन वर्ग को खुशहाल करना होगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-११.०८.२०१२




1 comment:

Reena Maurya said...

यही तो देश की विकट समस्या है..
अमीर और अमीर
गरीब और गरीब....
यथार्थ कहती रचना...