Monday, 12 December 2011

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कभी ना खोना सहनशीलता, संयम से रहना सीखो तुम!
करो झूठ का अंत मनों से,सच को सच कहना सीखो तुम!
जीवन का दुःख से भी नाता, फूलों की बस सेज नहीं है,
जैसे सुख को अपनाते हो, दुःख को भी सहना सीखो तुम!"
------------"शुभ-दिन"------चेतन रामकिशन "देव"------

3 comments:

avanti singh said...

बहुत ही गहरे अर्थ छुपे है आप की इस रचना में......ये पंक्तियाँ विशेष पसंद आई ....गंगा के तट पर जाकर के, जो पीते "किनले" का पानी,
ऐसे खद्दरधारी आखिर कैसे साफ करेंगे गंगा!

वो जिनको मतलब है खुद से, झोली जो भरते हैं अपनी,
उनके जाने देश बिके या बिक जाए ध्वज तिरंगा!.....इस सार्थक रचना के लिए बधाई स्वीकारें....

chetankavi said...

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अविन्ति जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद! आपका स्नेह अनमोल है!
•♫♪"*♪♫•*¨*•.¸¸चेतन रामकिशन "देव"❤¸•♫♪"*♪♫•*•♫♪❤¸

सतीश कुमार चौहान said...

छोटी छोटी बाते बडे बडे अर्थ