Wednesday, 5 March 2014

♥भावों की चमक...♥

♥♥♥♥भावों की चमक...♥♥♥♥
जिनके भाव सरल होते हैं!
जिनके भाव सबल होते हैं!
उनका वंदन होता जग में,
जिनके भाव विमल होते हैं!

जो अपने हित की इच्छा में,
मानवता को नहीं मारते!

सदा आत्मा जीते उनकी,
लोग नहीं वो कभी हारते!

जन जन में सम्मान हो उनका,
जिनके भाव अछल होते हैं!
उनका वंदन होता जग में,
जिनके भाव विमल होते हैं...

कठिन परिश्रम जो करते हैं!
खून पसीना एक करते हैं!
जिनके मन में कर्मठता हो,
जीत वही अर्जित करते हैं!

साथ समय के चलते हैं जो,
उनके सब दुख हल होते हैं!
उनका वंदन होता जग में,
जिनके भाव विमल होते हैं...

जो सोने चांदी से पहले,
अपने मन को चमकाते हैं!
जो हिंसा के भाव मिटाकर,
प्रेम के मोती बरसाते हैं!
पाखंडों की सत्ता आगे,
जिनका शीश नहीं झुकता है,
"देव" जगत में ऐसे जन ही,
ध्वज प्रेम की लहराते हैं!

भले न तन हो उजला उनका,
किन्तु भाव कमल होते हैं!
उनका वंदन होता जग में,
जिनके भाव विमल होते हैं!"

....चेतन रामकिशन "देव"…...
दिनांक-०५.०३.२०१४

2 comments:

Tushar Raj Rastogi said...

आपकी यह पोस्ट आज के (०६ मार्च, २०१४) ब्लॉग बुलेटिन -ईश्वरीय ध्यान और मानव पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

Kaushal Lal said...

बहुत सुन्दर....