Wednesday, 28 May 2014

♥♥मैं हूँ पत्थर..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥मैं हूँ पत्थर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरी हसरत, मेरे एहसास मुझमें रहने दो!
मैं हूँ पत्थर के मुझे दर्द यहाँ सहने दो!

बांध टूटेगा तो आयेगी सुनामी कोई,
इसीलिए आँखों से मेरी ये अश्क़ बहने दो!

मैं सही हूँ ये मेरा दिल भी जानता है सुनो,
सारी दुनिया को जो कहना है, उसे कहने दो!

लोग महफ़िल में बड़े ही सवाल करते हैं,
मुझे तन्हा मुझे गुमनाम जरा रहने दो!

मेरे चेहरे पे खिंची दर्द की लकीरों से,
वास्ता आखिरी पल तक हमारा रहने दो!

ये महल तुम ही रखो, तुमको ही मुबारक हों,
मुझे माँ बाप का छोटा सा घर वो रहने दो!

"देव" उम्मीद है ये तुम मुझे मिलोगे कभी,
फ़ासला अपने दरम्यान भले रहने दो! "

.........चेतन रामकिशन "देव"……..
दिनांक- २९.०५.२०१४

1 comment:

राजेंद्र कुमार said...

नमस्कार
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