Sunday, 27 March 2011

मेरा पंछी मन,my Bird heart

♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ मेरा पंछी मन ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
" मेरा मन कहता है मुझसे, पंछी बनकर मैं उड़ जाऊ !
मेरे शहर में घुटन बहुत है, खुली हवा में, मैं फिर आऊ !

मेरे शहर में लोगों ने तो, मानवता में आग लगाई!
सारे इन्सां सोते हैं अब, रहते हिन्दू, सिख, इसाई!
एक तरफ ये खद्दरधारी , बहकाते हैं इन सारों को,
अपनों के ही दुश्मन बनके, सबने है तलवार उठाई!

मेरा मन कहता है मुझसे, पंछी बनकर मैं उड़ जाऊ !
नफरत की ये घुटन बहुत है, उल्फत की खुश्बू को पाऊ……………….

प्रेम करो तो प्रेम में धोखा, ऐतबार की जान निकलती!
जिसका दिल भी झांक के देखो, काली सी पहचान निकलती!
एक तरफ इन धनवानों ने, गोदामों पे डाला डेरा,
और देश के कृषक के घर, ना गेहूँ ना धान निकलती!

मेरा मन कहता है मुझसे, पंछी बनकर मैं उड़ जाऊ !
उर्जा सारी ख़त्म हो चुकी, सूरज से उर्जा ले आऊ!

पत्थर, पत्थर, पत्थर, पत्थर, जैसे टुकड़े हैं हर घर में!
ठीक तरह से चल नहीं पाते, और नज़र रखते अम्बर में!
देश के सारे युवा भी अब तो, बनना चाहते पल में राजा,
सोच नहीं पर उनकी उत्तम, और निश्चय भी नहीं जिगर में!

मेरा मन कहता है मुझसे, पंछी बनकर मैं उड़ जाऊ !
"देव" मुझे समझाता है ये, लौट के फिर वापस ना आऊ…………….

मेरा मन कहता है मुझसे, पंछी बनकर मैं उड़ जाऊ !
मेरे शहर में घुटन बहुत है, खुली हवा में, मैं फिर आऊ!”

" देश में ये जो आग धधक रही है! उसे बुझाने के लिए हमे आगे आना होगा, वरना आने वाला भविष्य अच्छा नहीं होगा! तो आइये अपने मन में सकारात्मकता पैदा करें! -चेतन रामकिशन (देव)'

नोट: यह रचना मेरे ब्लॉग www.chetankavi.blogspot.com में पूर्व प्रकाशित हो चुकी है |
"सर्वाधिकार सुरक्षित"



♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ my Bird heart ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
"My heart tells me, is I fly as a bird!
My city is very stuffy in the open air, I come again!

If people in my town, burned in humanity!
Insan sleep all now live Hindu, Sikh, Christian!
On the one hand these dirty leaders are seduced them all,
Become the enemy of our own, have all raised the sword!

My heart tells me, is I fly as a bird!
It has plenty of hate stuffy, finds the smell of love…………….

To love the love cheat, leave the life of faith!
Whose heart the eaves look, leave black identity!
On the one hand by the rich, put on the camp warehouses;
But the country's farmer's house, no wheat, no rice rises!

My heart tells me, is I fly as a bird!
Has power over all, get energy from the sun……….

Rock, rock, stone, such as pieces in every home!
Can not walk properly, and with an eye in the sky!
Now all the youth of the country, want to be king at the moment,
Not think on their best, and certainly not in mind!

My heart tells me, is I fly as a bird!
"Dev" I explain it now, not back come back again………..

My heart tells me, is I fly as a bird!
My city is very stuffy in the open air, I come again!”

"The country that is on fire! him to extinguish us will come forward, or will not come to a better future! then come to create positivity in my mind!-chetan ramkishan (Dev) '

Note: The creation www.chetankavi.blogspot.com my blog has been published in the before|
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1 comment:

अमि'अज़ीम' said...

bahut badiya............
hindi or english dono me....nya or adbhut pryaas ...
aabhar ba badaaya..