Wednesday, 17 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥कविता(एक उत्कृष्ट अभिव्यक्ति)♥♥♥♥♥♥♥♥
कभी कविता चाँद सी प्यारी, तारों जैसी झिलमिल लगती!
कभी कविता मित्र सरीखी, मानव दुःख में शामिल लगती!
कभी कविता प्रेम मिलन तो कभी विरह में गोते खाती, 
कभी कविता शिक्षक जैसी, पढ़ी-लिखी और काबिल लगती!

कविता भी बेहद अच्छी है, जो सुख दुख का बोध कराए!
कभी लौटकर बचपन में वो, बालक की भांति मुस्काए!

कभी कविता खद्दर जैसी, और कभी ये मलमल लगती!
कभी कविता चाँद सी सुन्दर, तारों जैसी झिलमिल लगती...

कभी कविता हरियाली के परिधानों में मन को भाती!
कभी कविता कोयल जैसे मधुर मधुर संगीत सुनाती!
कभी कविता बंजर भूमि और कृषक का दर्द उभारे,
कभी कविता मजदूरों के शोषण की तस्वीर दिखाती!

कविता भी बेहद अपनी है, ये आँखों में स्वप्न जगाए!
और कभी दर्पण की तरह, सच्चाई का चित्र दिखाए!

कभी कविता गर्म लहू तो, गंगाजल सी शीतल लगती!
कभी कविता चाँद सी प्यारी, तारों जैसी झिलमिल लगती...

कविता के रचनाकारों तुम, कविता का सम्मान बढ़ाना!
कविता को न दूषित करना, कविता का न शीश झुकाना!
"देव" कविता अपने मन की, और ह्रदय की अभिव्यक्ति है,
किन्तु अपनी प्रस्तुति से, हिंसा की न आग लगाना!

कविता को भी कुछ लोगों ने, अपने पथ से भटकाया है!
कुछ लोगों ने कविता से भी, जन मानस को भड़काया है!

कभी कविता दुरित विचारक, और कभी ये दलदल लगती! 
कभी कविता चाँद सी प्यारी, तारों जैसी झिलमिल लगती!"

"
कविता-मन की अभिव्यक्ति-चूँकि कलमकार समाज का दर्पण होता है, इसीलिए ऐसे में उसकी जिम्मेदारी और भी ज्यादा हो जाती है कि वो समाज को एक ऐसा द्रश्य दिखाए, जिससे पाठक का अंतर्मन, स्वस्थ भावना के साथ उन शब्दों से जुड़े और उन शब्दों का अनुकरण होने पर समाज में मानवीयता भंग न हो!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१८.१०.२०१२ 

"सर्वाधिकार सुरक्षित"
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

1 comment:

Madan Mohan Saxena said...

बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,,,,,,