Sunday, 24 April 2011

♥जुदाई (सूनेपन का दौर )♥♥♥♥,

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जुदाई (सूनेपन का दौर )♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
"सूनी सूनी आंख तरसती, सूना मन का आंगन!
सूनी सी पहचान हो गई, सूना सा अभिवादन!
सूने सूने पथ पर अब, चलना दुष्कर लगता है,
सूना सूना जीवन करके, चला गया मनभावन!


जीता हूँ अब सिर्फ नाम को, जीवन नहीं बचा है!
गम की धूप में चेहरा झुलसा, झुलसी मेरी त्वचा है!

इतना सब कुछ सहता हूँ, पर प्यार उसी को करता!
वो शामिल है मेरे खून में, रोम रोम में वसता.....................


अपनी खिड़की के परदे भी, उसने गिरा दिए हैं!
मेरे खून से लिखे ख़त भी, उसने जला दिए हैं!
साथ जिएंगे, साथ मरेंगे, साथ नहीं छोड़ेंगे,
अपने लाभ की खातिर, सारे वादे भुला दिए हैं!

रंग हर्ष के धुंधले पड़ गए, जीवन नहीं रचा है!
गम की धूप में चेहरा झुलसा, झुलसी मेरी त्वचा है!

उसके चित्र बनाकर के, श्रृंगार उसी को करता!
वो शामिल है मेरे खून में, रोम रोम में वसता.........................

प्यार नहीं कोई वस्त्र पुराना, जिसको बदला जाए!
प्यार नहीं कोई खेल जिस्म का, जिसको खेला जाए!
अपने लाभ की आंधी में,तुम प्यार को नहीं लपेटो,
प्रेम तो अमृत रस है, जो जीवन में घोला जाए!

प्रेम बिना सब कुछ सूना है, प्रेम ने जहाँ रचा है!
गम की धूप में चेहरा झुलसा, झुलसी मेरी त्वचा है!

"देव" मेरे मन का स्वामी, सत्कार उसी को करता!
वो शामिल है मेरे खून में, रोम रोम में वसता!"


" प्यार को सहेजकर रखो, ये कोई व्यर्थ की वस्तु नहीं बल्कि जीवन कि सुखद ईमारत का आधार है!-चेतन रामकिशन (देव)"



♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ separation (solitarily round) ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
"lonely eyes lonely pines, empty courtyard of the mind!
Identified as the lonely, lonely little greeting!
suna lonely path now seems difficult to walk,
Lonely by lonely life, went pleasing!

I won the only name now, do not save lives!
Sad face in the scorching sun, burnt my skin!

Bears so much, but I do only for love!
It is included in my blood, flows in the veins.................



Even my window screen, he has fallen!
Written letter from my blood, even if he burned down!
Live together, die together, with no leave,
For the sake of their profits, all promises are forgotten!

Have dim the joy of color, life is not staged!
Sad face in the scorching sun, burnt my skin!

By his picture in mind, to make do the same!
It is included in my blood, flows in the veins.........................


Love an old garment, which is changed!
Love of a sports body, which is played!
Blowing your benefits, you do not love wrap
Love the nectar juice, which is diluted in life!

Without love, everything is heard, which is staged by love!


Sad face in the scorching sun, burnt my skin!

"Dev" is the master of my mind, respect does the same!
It is included in my blood, flows in the veins!"


"Keep saving love, it's a useless thing rather pleasant building that is the foundation of life!-chetan ramkishan (Dev)"

Friday, 22 April 2011


कच्चे मकान 
"  जरा तुम झांककर देखो, इधर कच्चे मकानों में!
   नहीं चूल्हा तलक जलता, इन्ही इन आशियानों में!

अनेकों लोग हैं बेबस, अनेको पेट हैं भूखे,
मगर सरकार चलती है, रहीसों के ठिकानो में!

  नहीं मिलता उन्हें खद्दर, नहीं मिलता कोई अस्तर,
  उम्र है बीतती जिनकी, मगर जिन कारखानों में!

बड़े ही खोखले लगते, सियासत दार के दावे,
गरीबों के हकों का अन्न भी, यहाँ बिकता दुकानों में!

   जरा तुम देख लो अब "देव", इसी भारत की तस्वीरें,
   अनगिनत लोग सोते हैं, खुले इन आसमानों में!"

" भारत की इस बदरंग तस्वीर को बदलने के लिए हमे भी अपने स्तर से सार्थक प्रयास करने होंगे! वर्ना ये सियासत दार हिंदुस्तान को बेच देंगे!-चेतन रामकिशन(देव)"



Wednesday, 20 April 2011

♥ Friendship (a sacred relationship) ♥ ♥, दोस्ती( एक पावन सम्बन्ध)♥ ♥


दोस्ती( एक पावन सम्बन्ध)
" तुम्हारी दोस्ती का जब मुझे, एहसास होता है!
  मेरी तो रात हंसती है, मेरा दिन खास होता है!"

    तमन्ना दिल में जगती हैं, नज़ारे राह में रोशन,
    अँधेरी राह में भी, अब मगर प्रकाश होता है!

ग़मों की धूप पर पर्दा, नहीं तन्हाई के बादल,
ख़ुशी की बारिशों में अब, घना उल्लास होता है!

    अगर हो दोस्ती पावन, अगर अच्छी हो तहजीबें,
   नहीं होती कभी मुश्किल, नहीं अवकाश होता है!

मुबारक हो तुम्हे ए "देव", तुम्हारे दोस्त हैं उम्दा,
उन्हें भी प्यार है तुमसे, यही आभास होता है!

" सच्ची दोस्ती, सभी रिश्तों से ऊपर होती है! सच्चे दोस्त जीवन में सहयोग देते हुए,    उत्साहवर्धन करते हैं! तो आइये सच्ची दोस्ती करें ! -चेतन रामकिशन(देव)"


♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ Friendship (a sacred relationship) ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
"When your friendship to me feels!
  
I laughs the night, my day is special! "
   
   If desire arises in the heart, illuminating the path sights,
    
Darkness in the path, but the light is now!

Sad curtain on sunny, no clouds of loneliness,
Now in the rain of happiness, joy is intense!

   If friendship is sacred, you have good manners,
    
Is not never hard, does not leave!

You Happy "Dev", your friends are excellent,
You love them too, this is impression !”

"True friendship is above all relationships! true friends in life, giving support,encouragement to do! then come to true friendship!-chetan ramkishan (Dev)"



Tuesday, 19 April 2011

♥ जाने पापा कब समझेंगे ♥ ♥


जाने पापा कब समझेंगे  
" मेरा मुन्ना कहता है माँ, पापा ऐसा क्यूँ करते हैं!
  आम आदमी, मजदूरों से आखिर, इतना क्यूँ जलते हैं!
 वो कहते हैं मम्मी मुझसे, उस बस्ती ना जाया कर तू,
 उस बस्ती में बे-संसाधन, लोगों के बच्चे रहते हैं!

    जाने पापा कब समझेंगे, ये दौलत भगवान नहीं है!
    सोने के हों सिक्के बेशक, उनसे मिलती जान नहीं है!

मम्मी मेरे मन का मंथन , इन शब्दों से कहा ना जाए!
मैं इन्सां हूँ, वो इंसा हैं, दूर दूर अब रहा ना जाए …………….

लेकिन मम्मी मैंने भी, उस बस्ती के बच्चे देखें हैं!
हाथ भी मेरे जैसे उनके, और कान भी मुझ जैसे हैं!
मुझ जैसे ही चलते हैं वो, मेरी तरहा बातें करते,
जैसे मेरे होते मम्मी, उनके भी आंसू वैसे हैं!
   
      जाने पापा कब समझेंगे, ये दौलत भगवान नहीं है!
      वो भी मानव के वंशज हैं, वो कोई हैवान नहीं हैं!

दिन प्रतिदिन बदने वाला, अब ये मंजर सहा ना जाए!
मैं इन्सां हूँ, वो इंसा हैं, दूर दूर अब रहा ना जाए …………….

मम्मी, पापा को समझाओ, मानवता का पाठ पढाओ!
इक मालिक के हम सब बच्चे, उनको ये दर्पण दिखलाओ!
मेरे भी ये लाल लहू है, और लाल ही होता उनका,
हो सकता है मान भी जायें, उनको ये बातें बतलाओ!
  
       जाने पापा कब समझेंगे, ये दौलत भगवान नहीं है!
       उस घर में भी इंसा रहते, "देव" का घर शमशान नहीं है!

दिल घुटता है अब तो मेरा, इन आँखों से बहा ना जाए!
मैं इन्सां हूँ, वो इंसा हैं, दूर दूर अब रहा ना जाए!”

"देखिये जरा, बच्चे तक तो समझ गए हैं की, जातिवाद, धर्मवाद, अमीरी का अभिमान गलत है, तो चलो हम भी समझ जायें- चेतन रामकिशन (देव)"


Monday, 18 April 2011

♥ बेटी को मत मारो ♥ ♥ ♥,♥ Do not kill the daughter ♥ ♥


बेटी को मत मारो
" अपनी छोटी अंखियों से वो, सपने भी ना बुन पाई थी!
   जननी की मीठी लोरी भी, कानों से ना सुन पाई थी!
   एक गुफा से घर में रहती, वो चुप चुप खामोश अदा में,
   कोई मंजिल, कोई ठिकाना, रस्ता भी ना चुन पाई थी!
         इस हालत से जूझी लड़की, एक कूड़े के ढेर पड़ी है!
        उसके अंतिम दर्शन खातिर, शहर की सारी भीड़ खड़ी है!
मरते मरते जाते जाते, अंखियों को वो खोल रही है!
ना करना तुम फिर से ऐसा, ये वो सबसे बोल रही है!
      नारी हूँ मैं, समझो मुझको, नारी का ना खून बहाना!
     चन्दन रोली से भी ऊपर, तुम माथे पर हमे सजाना………………………

जिस जननी ने कोख में रखा, आज उसी ने ठोकर मारी!
और पिता कहते हैं माँ से, नहीं चाहिए नार तुम्हारी!
दोनों अब तो अग्नि बनकर, जिन्दा मुझको जला रहें हैं,
हमे चाहिए बेटा केवल, नहीं जरुरत हमे तुम्हारी!
       शब्द नहीं हैं लेकिन फिर भी, होठों को वो खोल रही है!
       ना करना तुम फिर से ऐसा, ये वो सबसे बोल रही है!
नारी ही जनती है बेटे, नारी को ना व्यर्थ बताना!
चन्दन रोली से भी ऊपर, तुम माथे पर हमे सजाना………………………

बहुत हो चुका खेल घिनोना, मन से दूषित सोच मिटाओ!
करो नहीं तुम वंदन बेशक, पत्थर की ना शिला बताओ!
बिन नारी के तरसोगे तुम, और नयनों से नीर बहेगा,
बेटे को भगवान समझकर, बेटी का ना गला कटाओ!
      इसी सोच का लावा लेकिन, "देव" की रग में घोल रही है!
      ना करना तुम फिर से ऐसा, ये वो सबसे बोल रही है!
नारी मस्तक का गौरव है, ना चरणों की धूल बताना!
चन्दन रोली से भी ऊपर, तुम माथे पर हमे सजाना!”

" लड़कियां भी एक इंसान होती हैं! उनमे भी लड़को के ही जैसे खून बहता है! वो भी समाज और परिवार को उच्च  शिखर पर ले जाने में सक्षम हैं! तो आइये कूड़े में पड़ी उस बेटी की बात मानते हुए, कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने में अपने स्तर से सहयोग करें!-चेतन रामकिशन(देव)"






♥♥ ♥ ♥  ♥ Do not kill the daughter ♥    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
"That your little eyes, was able to weave dreams are too!
  
The sweet lullaby of the mother, with ears could hear was not!
   
Lives in a cave house, in that quiet quiet quiet play,
   
A destination, a haven, have failed to choose way too much!
   
          This situation underwent girl, a garbage heap is lying!
                  
Her ultimate vision for the sake of the city is holding the whole crowd!

Are dying are dying, she is opening the eyes!
You do not do it again, it is telling that the most!
         
           'm female, understand me, not the woman to bleed!
                  
sandal will surpass, we adorn you on the forehead…………..

The mother placed in the womb, the offense kicked the same today!
 
Father says mother, girl you do not!
Both now as a fire, be burned alive to me,
Should we only son, we do not need you!
         
           Words but still, she is opening on the lips!
           You do not do it again, it is telling that the most!

Female produces sons, to tell women not to waste!
sandal will surpass, we adorn you on the forehead…………..

That's enough games, mind wipe contaminated thinking!
Do not you invocation of course, the stone not tell rock!
No woman will groan for you, and tears flow from eyes,
Son of God by understanding, not daughter neck bite!

            But that same thinking, "Dev" is the solution in the blood!
            You do not do it again, it is telling that the most!

Woman is the pride of head, not feet let the dust!
sandal will surpass, we adorn you on the forehead!”

"Girls are a human being! ones that blood flows just like the boys! that the society andfamily are able to carry high peak! then come to your level to curb female feticidecooperate! - Chetan ramkishan (Dev) "



Thursday, 14 April 2011

♥ वो पुरानी यादें(सुनहरा दौर ) ♥


वो पुरानी यादें(सुनहरा दौर )
"चलो चलकर वहां देखें, जहाँ इन्सान रहते हैं!
 जहाँ पत्थर के टुकड़ों में, अभी भगवान रहते हैं!
    जमाना ये नहीं करता है इज्ज़त अब मुहब्बत की,
    चलो राधा की चाहत में जहाँ, घनश्याम रहते हैं!
नहीं अब तो हमे कोई कहीं, कुर्बानियत दिखती,
चलो उस दौर में पन्ना के वो, बलिदान रहते हैं!
   नहीं मर्यादा दिखती है, नहीं रिश्तों, ना नातों में,
   चलों उस दौर में मर्यादा के, श्री राम रहते हैं!
यहाँ जाती के खंजर "देव", और मजहब की दीवारें,
चलो उस दौर में मीरा, जहाँ रसखान रहते हैं!"


"आज हम लोगों ने जातिवाद, धर्मवाद, अमीरी,स्वार्थ के वशीभूत होकर अपने देश की उस सुनहरी संस्कृति को भी अपमानित और कलुषित कर दिया है! तो आइये अब भी वक्त है, कुछ गुणात्मक सुधर करें!-चेतन रामकिशन(देव)"