Tuesday, 24 January 2012


♥♥♥♥♥♥♥कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी....♥♥♥♥♥♥♥♥
भारत माँ के तन से बहता,खून जिन्हें लगता है पानी!
भारत माँ के घाव देखकर, जो रखते हैं सुप्त जवानी!
जिन लोगों को देश के झुक जाने से कोई लाज नहीं,
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी!

जिन लोगों का मन नहीं जानता, देश प्रेम का अर्थ!
ऐसे लोगों का जन्म व्यर्थ है और मरना भी व्यर्थ!

जिन लोगों ने भारत की कीमत कभी नहीं पहचानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी.......

जो जन अपने लाभ में करते हैं भारत को नीलाम!
जो जन धर्मवाद में करते, इस देश में कत्ले-आम!
जिन लोगों के काटनी चाही है चैन अमन की डोरी,
तारीखों में कभी न रोशन होता इन लोगों का नाम!

ऐसे लोग नहीं बन सकते हैं, कभी भी प्रेरणावान!
जिन्होंने अपने कदम के नीचे रखा है हिंदुस्तान!

आजादी के किरदारों की झूठी लगती जिन्हें कहानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी.......

जिस धरती पे जन्म लिया, वो धरती माँ जैसे प्यारी!
हमको अपनी गोद में रखे, जन्म-मरण की नातेदारी!
"देव"कभी भी उन लोगों की नम आँखों से याद न आए,
जिन लोगों ने देश के संग में, हर पल की कोई गद्दारी!

मातृभूमि की करें वंदना, आओ करें इसका सम्मान!
हम नहीं करेंगे, नहीं सहेंगे,  इस भारत का अपमान!

जिन लोगों ने मातृभूमि के लिए कोई सोच न ठानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी!"


" देश में पैदा होने मात्र से, हम देशवासी तो कहलाये जा सकते हैं, परन्तु देश-प्रेमी नहीं! और हमारा कर्तव्य है कि, हम जिस देश में जन्म लें, उस देश से प्रेम करें, तो आइये चिंतन करें!"


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२५.०१.२०१२





Sunday, 15 January 2012

♥♥माँ की ममता ♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ की ममता ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
माँ की ममता ऐसे पावन, जैसे गंगाजल होता है!
माँ के आंचल के भीतर ही वायु अम्बर थल होता है!
माँ दुनिया में सर्वोत्तम है, माँ जैसा दूजा न कोई,
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है!

माँ ही अपना दूध पिलाकर, इस जीवन को सिंचित करती!
नहीं प्यास से पीड़ित रखती, नहीं अन्न से वंचित करती!

माँ का तो व्यवहार सदा ही चन्दन सा शीतल होता है!
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है........

माँ के नैनों में एक जैसी होती, उसकी हर संतान!
वो प्रेषित करती है ममता, सभी को एक समान!
अपनी संतानों के हित में, वो अपना दुःख भी भूले,
माँ अपने मन से चाहती है, सभी का हो उत्थान!

कभी न अपनी संतानों को देती, माँ मिथ्या का ज्ञान!
कभी क्रोध को निकट ना लाती,  ना कोई अभिमान!

माँ के मन में भेदभाव न, न ही कोई छल होता है!
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है....

माँ की छवि के सम्मुख लगते शब्द हमारे अल्प!
कभी नहीं हो पाता जग में, माँ का कोई विकल्प!
अपने सुख की आकांक्षा में, माँ को ना दो शोक,
माँ का हम सम्मान करेंगे, मन में लो संकल्प!

कोई नहीं कर सकता इस जग में, माँ जैसा बलिदान!
इस स्रष्टि के उदय-मरण तक, जीवित माँ का नाम!

माँ नामक इस शब्द में, एक असीमित बल होता है!
माँ की ममता ऐसे पावन, जैसे गंगाजल होता है!"


"माँ, अद्वितीय है! कोई नहीं उस जैसा! हमारे हर्ष के लिए अपने सुख की
सभी कामनाओं को त्याग देती है माँ, क्यूंकि माँ को सबसे बड़ा सुख उसकी संतानों के हर्ष से मिलता है! तो आइये इस अनमोल चरित्र माँ को नमन करें!


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---१६.०१.२०१२


Tuesday, 10 January 2012

♥क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....♥

♥♥♥♥♥♥♥क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....♥♥♥♥♥♥♥
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
कभी भ्रूण के रूप में मरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
आज भी उसकी जीवन धारा का रुख, उसके हाथ नहीं है,
औरो के नियमों में चलती,क्यूंकि उसका नाम है लड़की!

अपने मन की आवाजों को भी, अधरों के द्वारे न लाती!
कमरे के इक कोने में जाकर, चुपके चुपके नीर बहाती!

झूठ-मूठ की हँसी में फिरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....

सारे कुल की मर्यादा का, बोझ उसी के सर होता है!
खुद मर्जी से उड़ न पाए, पिंजरे जैसा घर होता है!
फूंक-२ के कदम रखे वो, रहती है सहमी सहमी सी,
अपने अरमानों को मारे, जाने कैसा डर होता है!

आसमान की तरफ देखकर, वो केवल अफ़सोस जताए!
घर के भीतर इतनी बंदिश, मन ही मन वो रोष जताए!

अश्कों को आँखों में भरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....

जाने कब तक नन्ही लड़की, भ्रूण रूप में मौत सहेगी!
जाने कब तक नन्ही लड़की, इन आँखों में नीर भरेगी!
"देव" न जाने कब तक उसको अन्यायों के शूल चुभेंगे,
जाने कब तक नन्ही लड़की, इच्छाओं का दमन करेगी!

इतने सारे विष को पीकर, कभी किसी को बुरा न कहती!
मर्यादा के नाम पे लड़की, जुल्मों को भी चुप चुप सहती!

झूठ-मूठ की हँसी में फिरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!"


"लड़की---कभी भ्रूण के रूप में मार दी जाती है तो, कहीं वो मर्यादाओं के नाम पर,
घर में ही कैद कर ली जाती है! लड़की की ये बेबसी, ये लाचारी जाने कभी समाप्त होगी भी या नहीं, या फिर वो ऐसे ही ...........मिटती रहेगी, बुझती रहेगी?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१०-०१-२०१२









Monday, 9 January 2012

♥♥♥♥♥♥♥तुम तन्हाई में जान न देना...♥♥♥♥♥♥♥
तुम न कहना बुरा वक्त को, कुदरत को इल्जाम न देना!
ए हमदम मेरी मजबूरी को, तुम धोखे का नाम न देना!

मेरे दिल में केवल तुम हो, नहीं किसी का साया आया!
नहीं किसी के सपने देखे, नहीं किसी को गले लगाया!
हर पल तेरी ही यादों में, दिवस, रात और सुबह शाम है,
तेरी सूरत जब भी चाही, पलक बंद कर पास बुलाया!

मैं जल्दी से आऊंगा वापस, तुम तन्हाई में जान न देना!
तुम न कहना बुरा वक्त को, कुदरत को इल्जाम न देना!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०९.०१.२०१२





Sunday, 8 January 2012

♥♥चित्र( स्मृति का दर्पण)♥


♥♥♥♥♥♥♥♥चित्र( स्मृति का दर्पण)♥♥♥♥♥♥♥♥
बीते कल की, बीते पल की, याद दिलाते चित्र हमारे!
आँखों के सम्मुख आ जाते, भूले बिसरे सभी नजारे!

कभी आंख को आंसू देते, कभी खुशी के दीप जलाते!
कभी किसी बिछड़े अपने की, स्मृति को पास बुलाते!
मीलों की लम्बी दूरी को, चित्र मिटा देते एक पल में,
परदेसों में रहने वाले, अपनों को भी निकट दिखाते!

चित्र हमारे मन मंदिर में, बीते पल की छवि उभारे!
आँखों के सम्मुख आ जाते, भूले बिसरे सभी नजारे!"

" चित्र भी अनमोल होते हैं! जब भी देखो तो यादें उनके साथ सरपट दौड़ी चली आती हैं!
कभी आंखें नम होती हैं तो कभी खुश! अपने चित्र को देखकर ये पंक्तियाँ मन में आयीं तो
अंकित कर दी हमने! आप भी चित्रों को संजोकर रखियेगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८-०१-२०१२




Friday, 6 January 2012

♥♥गरीब को सर्दी ने जो मारा♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥गरीब को सर्दी ने जो मारा♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा!
यहाँ वहां वो फिरा बहुत पर, अलाव का न मिला सहारा!
हैं खोखले अफसरों के दावे, के सर्दी से कोई मरा नहीं है,
इन्ही अलावों की लकड़ियों से, गर्म है उनके घरों में पारा!

गरीब लोगों के ही हकों पर, ना जाने डाका पड़ेगा कब तक!
अलाव के बिन ठिठुर-ठिठुर के, गरीब जाने मरेगा कब तक!

गरीब लोगों के आंसुओं के, ना जाने कब तक बहेगी धारा!
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा....

कहाँ हैं सत्ता की घोषणायें के सर्दी से कोई नहीं मरेगा!
गरीब लोगों की जिंदगी को, अलाव प्रतिदिवस जलेगा!
बंटेंगे कम्बल, बंटेंगी जर्सी, ना सर्दी में नंगा रहने देंगे,
न सर्दी उनको दुखी करेगी, न पाला उन पर असर करेगा!

मगर ये कहने की बात है बस, नहीं है सच्चाई का धरातल!
गरीब को न मिला था कल भी, गरीब को न मिलेगा कुछ कल!

गरीब लोगों की जिंदगी की, कोई बदलता नहीं नजारा !
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा.....

कहाँ गयीं हैं वो संस्थायें, गरीब हित का जो दावा करतीं!
कहाँ गयी है उनकी सेवा, क्यूँ उनकी आंखें नहीं हैं भरतीं!
गरीबों के हित की आड़ लेकर, गड़प रहे हैं सभी खजाने,
ना जाने ऐसे दुरित कर्म से, क्यूँ संस्थायें नहीं हैं डरतीं!

गरीबों की इन पुकारों को, ये "देव" भी अब नहीं हैं सुनते!
गरीब लोगों की जिंदगी से, खुदा भी कांटे नहीं हैं चुनते!

गरीब लोगों पे टूटता है, खुदा की कुदरत का कहर सारा!
गरीब लोगों की जिंदगी की, कोई बदलता नहीं नजारा !"


" सर्दी से बढ़ने वाली मौतों की संख्या निरंतर बढ़ रही है!
सरकारों के, अफसरों के दावे खोखले लगते हैं! अलाव की लकड़ियाँ चौराहे पर
जलने की बजाये अफसरों के घरों में पारा बढाती हैं! आखिर गरीब ठण्ड से कब तक मरता रहेगा!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०७.०१.२०१२
















Wednesday, 4 January 2012

♥♥♥♥♥♥क्यूँ ...♥♥♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥क्यूँ ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर!
क्यूँ बिकती है दवा यहाँ पर, क्यूँ दुखते हैं घाव यहाँ पर!

देखो उधर किसी कोने में, मनुज की प्रीती झुलस रही है!
उसके मन मंदिर में केवल, लोभ की बारिश बरस रही है!
अपनी आनंदों में केवल, आज का मानव डूब चूका है,
कहीं पे बीवी, कभी पे बहना, कहीं पे माता तरस रही है!

क्यूँ मिटता है यहाँ समर्पण, क्यूँ मिटते सदभाव यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर....

कोई घरों को फूंक रहा है, कोई किसी का यौवन लूटे!
कोई किसी का नीर बहाए, कहीं खून की धारा फूटे!
आज रगों में बहने वाला, खून भी पानी जैसा लगता,
अपनेपन का भी नाता अब, आज यहाँ पल भर में टूटे!

क्यूँ रोती है आंख यहाँ पर, क्यूँ लुटते हैं ख्वाब यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर....

आज आदमी को मानव भी, कहने में आती है लज्जा!
औरों के घर रहें-गिरें पर, कायम हो अपने घर सज्जा!
"देव" ये कैसा लालच देखो, आज आदमी ने ओढा है,
मानवता की ढही ईमारत, टुटा- फूटा छत और छज्जा!

क्यूँ रोती है आंख यहाँ पर, क्यूँ लुटते हैं ख्वाब यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर!"

"आज मानवता जिस प्रकार से समाप्त होती जा रही है! मनवा सिर्फ अपने लालच के
मद में समाज, सदभाव, अपनायत को मिटाता चला जा रहा है, उससे कैसे मानवता
जीवित बच पायेगी?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक- ०५.०१.२०१२ 

यह रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!







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Monday, 2 January 2012

♥♥♥♥हमारी बहनें...♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हमारी बहनें...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमारी बहनें हैं चांदनी सी, हमारी बहनें खिला सुमन हैं!
हमारी बहनें हैं रागिनी सी, हमारी बहनें मधुर भजन हैं!
हमारी बहनें हैं परियों जैसी, हमारी बहनें घरों की शोभा,
हमारी बहनें हैं कोकिला सी, हमारी बहनें मधुर वचन हैं!

हमारी आंखें यदि सजल हों, हमारी बहनें ही चुप करातीं!
हमारी पीड़ा में साथ आकर, हमारे संग में कदम बढ़ातीं!

हमारी बहनें सदा सुंगंधित के जैसे चन्दन घुली पवन हैं!
हमारी बहनें हैं चांदनी सी, हमारी बहनें खिला सुमन हैं.....

हमारी बहनें हमारी खातिर, खुशी भी अपनी निसार कर दें!
हमारी बहनें हमारे पथ में, गुलों की महकी बहार कर दें!
हमारी बहनें ही बांधती हैं, कलाई में धागा प्रेम वाला,
हमारी बहनें हमारे घर में, हंसी की रिमझिम फुहार कर दें!

हमारी बहनें जो हमसे छोटी, हमें वो बेटी सा प्यार देती!
हमारी बहनें बड़ी जो हमसे, वो हमको माँ सा दुलार देती!

हमारी बहनें कड़ी दुपहरी में, छांव जैसे मधुर छुअन हैं!
हमारी बहनें हैं चांदनी सी, हमारी बहनें खिला सुमन हैं.....
   
हमारी बहनें रहें सलामत, हमारी है बस यही इबादत!
हमेशा इनको करार देना, हमेशा इनकी करो हिफाजत!
कभी हमें वो दिशा दिखाकर, सही गलत का करें इशारा,
कभी न मन में द्वेष रखें, सदा ही मन में रखें मोहब्बत!

हमारी बहनें तो मित्र बनकर, हमारी पीड़ा का हल सुझातीं!
हमारी बहनें हमारे हित में, सदा ही हितकर कदम उठातीं!

हमारी बहनें हैं कोमल के जैसे मखमल का आवरण हैं!
हमारी बहनें हैं चांदनी सी, हमारी बहनें खिला सुमन हैं!"


"बहनें, कभी दोस्त बनकर हमारे सहयोग की साथी बनती हैं तो
कभी हमारे हस्त में राखी का धागा बांधकर हमारी आयु वृद्धि,
हमारे हित की कामना करती हैं! बहनें अनमोल हैं!
तो आइये बहनों को नमन करें!

"ये रचना समर्पित है फेसबुक पे मिलीं मेरी गीता दीदी, अर्चना दीदी,
सरिता दीदी और नैनी जी के लिए! नमन इन्हें!"
   
चेतन रामकिशन "देव"    दिनांक--०३.०१.२०१२

Saturday, 31 December 2011


♥♥♥♥♥नया साल क्या देगा उनको....♥♥♥♥♥♥♥
भूख से पीड़ित तंगहाल है, नया साल क्या देगा उनको!
सर्दी जिनका बनी काल है, नया साल क्या देगा उनको!

जिनके तन पे हैं महंगे कपड़े, झूम रहे वो नए साल पे,
जिनके तन पे बस रुमाल है, नया साल क्या देगा उनको!

वो करते बारिश पैसों की, तरह तरह से जश्न मनायें,
भूख से जिनका बुरा हाल है, नया साल क्या देगा उनको!

शहर के धनवानों ने देखो, लाखों की मदिरा गटकी है,
जिनको पानी भी मुहाल है, नया साल क्या देगा उनको!

नए साल के नाम पे देखो, नशे में नंगे पांव थिरकते,
जिनके पैर की फटी खाल है, नया साल क्या देगा उनको!"


"
एक सवाल है अपने आप से,
नए साल से उनको क्या मिलेगा जिनका जीवन भूख, प्यास, बेरोजगारी, गरीबी,
जातिवाद, अस्पर्शता आदि के दंश को झेल रहा है?"
................
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--३१.१२.२०११



Tuesday, 27 December 2011

♥♥"ग़ालिब" को नमन♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥"ग़ालिब" को नमन♥♥♥♥♥♥♥♥
शब्दों के जादूगर "ग़ालिब" आपको मेरा सलाम!
युगों-युगों तक याद रहेगा, आपका ये शुभ नाम!

आपके शब्दों की ज्योति से मिटता है अँधियारा!
आपका लेखन मन मंदिर में करता है उजियारा!
यूँ तो और भी शायर-लेखक, पुस्तक में अंकित हैं,
मगर आपका काव्य कोष है, उन लोगों से न्यारा!

कोहिनूर हीरे सा चमके, आपका हर एक कलाम!
शब्दों के जादूगर "ग़ालिब" आपको मेरा सलाम.....

आपके शब्दों ने सिखलाया, सारे जग को प्यार!
आपके शब्दों ने सिखलाया, मिथ्या पर प्रहार!
शब्द हमारे बिल्कुल बौने, आपके कद के आगे,
आपके जैसा नहीं है कोई , जग में रचनाधार!

"देव" आपको करता "ग़ालिब",फिर सादर प्रणाम!
शब्दों के जादूगर "ग़ालिब" आपको मेरा सलाम!"

"शब्दों के जादूगर, महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब को आज उनके जन्मदिवस पर नमन!
अपने इन टूटे-फूटे शब्दों से उनकी शान में लिखा है हमने! हम उनके कद के सम्मुख कुछ भी लिखने की योग्यता नहीं रखते, बस उन्हें सम्मान देने के लिए हमने प्रयास भर किया है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक----२७.१२.२०११

Monday, 26 December 2011

♥प्रेम-समर्पण♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम-समर्पण♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
छवि तुम्हारे हमारे मन में, तुम्हारे मन में हमारी मूरत!
सदा ही जीवन के रास्ते पे, है हमको एक दूजे की जरुरत!

तुम्हारे बिन मैं सदा अधूरा, हमारे बिन तुम भी हो अधूरी!
सदा रखेंगे दिलों में चाहत, कभी ना आए जरा सी दूरी!
तुम्हारी खुश्बू से घर महकता, हमारी सांसें भी खिल रहीं हैं,
ना बन सके घर बड़ा तो क्या गम, दिलों में चाहत बड़ी जरुरी!

हमारा मन भी है साफ-सुथरा, तुम्हारा मन भी है खुबसूरत!
छवि तुम्हारे हमारे मन में, तुम्हारे मन में हमारी मूरत......

कभी मिले जो तुझे उदासी, तो हम तुम्हारी ख़ुशी बनेंगे!
तुम्हारी आंसू हमारी आँखों से धार बनकर सदा बहेंगे!
कभी जो हमको मिले निराशा, हमें तू अपना दुलार देना,
तुम्हारे मन का यकीन पाकर, दुखी पलों की चुभन सहेंगे!

तुम्हारा चेहरा हमे हंसी दे, तुम्हे हंसा दे हमारी सूरत!
छवि तुम्हारे हमारे मन में, तुम्हारे मन में हमारी मूरत......

जहाँ हो दोनों दिलों में चाहत, वहां मौहब्बत भी खिलखिलाए!
तभी तो रस्ते का एक पत्थर भी "देव" बनकर के जगमगाए!
न खुद को ऊँचा, न उनको नीचा, रखो न मन में विभेद कोई,
न ऐसे घर में पनपती नफरत, दीवारें तक भी ख़ुशी मनाए!

तुम्हारी आशा जुड़ी है हमसे, हमारी तुमसे जुड़ी है हसरत!
छवि तुम्हारे हमारे मन में, तुम्हारे मन में हमारी मूरत!"

"प्रेम, समर्पण का नाम है! जहाँ समर्पण के साथ प्रेम होता है, वहां
नफरत के लिए, अहम् के लिए, उंच-नीच के लिए कोई रिक्त स्थान नहीं शेष रहता!
प्रेम का वातावरण सजीव को हो तो प्रफुल्लित करता ही है, मगर इस प्रेम के प्रभाव से
घर की निर्जीव वस्तुयें भी जीती जागती लगती हैं!"

.........................अपनी अनमोल प्रेरणा को समर्पित रचना.......................
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२७.१२.२०११

♥प्रेम का रोशन दीया बुझाना....♥

♥♥♥♥♥♥♥प्रेम का रोशन दीया बुझाना....♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रेम की चाहत बड़ी सरल है, बहुत कठिन है प्रेम निभाना!
आज तो लगने लगता देखो, कुछ दिन में ही प्रेम पुराना!

जन्म-जन्म मिलने के वादे, एक पल में खंडित करते हैं!
अपने मतलब की ख्वाहिश में, प्रेम को ये दंडित करते हैं!

इन लोगों को आसां लगता, प्रेम का रोशन दीया बुझाना!
प्रेम की चाहत बड़ी सरल है, बहुत कठिन है प्रेम निभाना!"
-------------------चेतन रामकिशन "देव"-------------------------





Saturday, 24 December 2011

♥♥एक अलौकिक शक्ति♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥एक अलौकिक शक्ति♥♥♥♥♥♥♥♥
बड़ा दिवस प्रकट करता है, एक आलौकिक शक्ति!
आओ करें अब तन्मय होकर, हम प्रभु की भक्ति!

प्रभु का स्मरण करने से, मिट जाता अज्ञान!
प्रभु हमको सदा बताते, सत्य पथों का ज्ञान!
प्रभु प्रेषित करते हमको, प्रेम भाव की ज्योति,
प्रभु के चरणों में मिलता, मानव को उत्थान!

प्रभु के स्नेह से मिलती, तिमिर से हमको मुक्ति!
बड़ा दिवस प्रकट करता है, एक आलौकिक शक्ति.....

भिन्न-भिन्न हैं चित्र प्रभु के, एक मगर स्वरूप!
उनकी छाया से मिटती है, समस्याओं की धूप!
प्रभु की आँखों में हर जन, होता एक समान,
प्रभु को भाता केवल मन, न तन का रंग-रूप!

प्रभु हमको सिखलाते हैं, हर मुश्किल की युक्ति!
बड़ा दिवस प्रकट करता है, एक आलौकिक शक्ति.......

आओ करें अपने चिंतन में, हम प्रभु का वास!
आओ करें हम सत्य पथों पे, चलने का प्रयास!
प्रभु के पदचिन्हों पर जो हम ले जायें जीवन,
"देव" हमारे जीवन में भी, आ जाए उल्लास!

प्रभु का स्मरण करने से, मिले सरल सी मुक्ति!
बड़ा दिवस प्रकट करता है, एक आलौकिक शक्ति!"


"बड़ा दिन अर्थात प्रभु का दिवस! यूँ तो हर दिवस, हर रात, प्रभु की होती है, किन्तु जिस दिन
अलौकिक शक्तियाँ जन्मती हैं वह दिन निश्चित रूप से अनमोल होता है! आज अपने लघु शब्दों से प्रभु के लिए शब्द जोड़े! आप सभी को प्रभु सफलता, समरसता, सम्रद्धि दे, मेरी यही कामना है!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक- २५.१२.२०११
रचना प्रेरणा-







                                                                                                                  
♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥यादें♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्यार आपका याद रहेगा, साथ आपकी बातें होंगी!
सपनो में दीदार करूँ जो, ऐसी दिलकश रातें होंगी!

आज भीड़ में चले गए पर, कभी तो ऐसा पल आएगा!
मेरी याद का दिया तुम्हारे, मन मंदिर में जल जायेगा!

उस पल आपकी आँखों से भी, आंसू की बरसातें होंगी!
प्यार आपका याद रहेगा, साथ आपकी बातें होंगी!"
-----------------चेतन रामकिशन "देव".............................
♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥किसान दिवस ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नमन करें आओ कृषक को, उनको दें आभार!
ह्रदय से उनकी करें वंदना, उनको देकर प्यार!

कृषक तो अपने जीवन भर, हमको दे हरियाली!
किन्तु कृषक के घर में तो, हर पल है बदहाली!
नेताओं ने नहीं दिया है, आज भी कृषक-तोहफा,
किन्तु खुद के जन्मदिवस पर, ये करते दिवाली!

यदि न अन्न उगाये कृषक, मिट जाए बाजार!
नमन करें आओ कृषक को, उनको दें आभार!"

"आज किसान दिवस पर किसानों को नमन करें!
किसान इस देश को सम्रद्धि देने में पहले पायदान पर है,
किन्तु सरकारों की खराब नीति और सरकार में बढ़ते जा रहे पूंजीवादियों
के अस्तित्व से किसान बदहाल है! देश के कृषि मंत्री की परिजनों के नाम से अनेको मिलें हैं!
क्या उम्मीद रखी जा सकती है कि, ऐसे लोग कृषक हित में सोचेंगे!

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक----२३.१२.२०११

Wednesday, 21 December 2011


♪♫•*¨*•.¸¸❤¸¸❤¸¸.•*♪♫•*¨*•माँ.¸¸❤¸¸.*•♫♪❤¸*•♫¸¸❤¸¸.*•♫♪❤¸*•♫
सुमन की खुश्बू से घर महकता, मनों में आशाओं की किरण है!
कभी न उस घर में सूनापन हो, वो जिन घरों में माँ के चरण हैं!

चलो के माँ के सुनहरे आंचल में रखके मस्तक दुलार पायें!
किसी खुदा की ना हो जरुरत, यदि जो माँ का दीदार पायें!

आशीष माँ का हमारे संग में, सदा कवच जैसा आवरण हैं!
कभी न उस घर में सूनापन हो, वो जिन घरों में माँ के चरण हैं!"


•♫♪"*♪♫•*¨*•.¸"❤¸•♫♪"*♪♫•.¸"❤¸•♫♪"*♪♫¸¸❤¸¸.*•♫♪❤¸*•♫
----माँ, कोई पर्याय नहीं! कोई तुलना नहीं! अतुलनीय छवि! माँ को नमन!"
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२२.१२.११

Monday, 19 December 2011

♥ग्राम देवता की पीड़ा ♥♥


♥♥♥♥♥♥♥ग्राम देवता की पीड़ा ♥♥♥♥♥♥♥♥♥
ग्राम देवता की तंगी की, कोई ना सुने पुकार!
खाद,बीज का दाम बढ़ाए, देश की हर सरकार!
सबका पोषण करने वाला, खुद रहता है भूखा,
ग्राम देवता की आँखों से, बहे अश्क की धार!

शरद ऋतू की सर्दी हो या मई- जून की ज्वाला!
कभी ना थककर घर में बैठे, खेतों का रखवाला!

फसलों की कीमत भी देखो, तय करती सरकार!
ग्राम देवता की तंगी की, कोई ना सुने पुकार.....

ग्राम देवता पर होते हैं, देश में अत्याचार!
ग्राम देवता की भूमि को, लूट रही सरकार!
ग्राम देवता की पीड़ा का उड़ता है उपहास,
ग्राम देवता पर पड़ती हैं, लाठी की बौछार!

ग्राम देवता हमको देता पोषण का सामान!
सरकारें करती हैं उसका केवल ये अपमान!

ग्राम देवता पर होता है निस दिन ही प्रहार!
ग्राम देवता की तंगी की, कोई ना सुने पुकार......

सरकारों अब करना छोड़ो कृषक का अपमान!
एक दिन इनकी शक्ति तुमको कर देगी वीरान!
इनकी ही मेहनत भरती है देश के कोषागार,
बिन कृषक के बिक जाएगा पल में हिंदुस्तान! 

ग्राम देवता के बिन सूनी इस भारत की शान!
कृषक से ही होती जग में भारत की पहचान! 

मरते दम तक उतर सके न, कृषक का उपकार!
ग्राम देवता की तंगी की, कोई ना सुने पुकार!"

" जीवन के लिए मिलने वाली उर्जा हेतु, उपयोग में लाये जाने
खाद्यान का निर्माता कृषक( ग्राम-देवता) इस देश में बेहद अपेक्षित जीवन जीने को विवश है!  देश के राजकोष में सबसे ज्यादा धन कृषि से आता है किन्तु ये सरकारें उस धन का चोथाई हिस्सा तक कृषि और कृषक के हित में नहीं लगातीं! वास्तव में ग्राम देवता सिसक रहा है!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१९.१२.२०११



Sunday, 18 December 2011

♪♫•*¨*•.¸¸❤¸¸.*•शहीदों को नमन¸¸❤¸¸.•*♪♫•*¨*•.¸¸❤¸¸.
नमी हवा में है आंसुओं की, ये आसमां भी बरस रहा है!
तुम्हारे जाने के बाद वीरों, ये देश अब भी तरस रहा है!

सलाम अशफाक तुमको मेरा,छवि तुम्हारी वसी नयन में!
दोबारा आओ धरा पे अपनी,  बहुत जरुरत हुई वतन में!

सफेदपोशों के हाथ देखो, ये अपना भारत झुलस रहा है!
नमी हवा में है आंसुओं की, ये आसमां भी बरस रहा है!

"बलिदान दिवस पर शहीदों को नमन करते हुए, "शुभ-दिन"
•♫♪"*♪♫•*¨*•.¸¸चेतन रामकिशन "देव"❤¸•♫♪"*♪♫•*•♫♪❤¸

Friday, 16 December 2011

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प्रेम है कोमल रेशम जैसा, हिंसा तो है शूल!
प्रेम जहाँ पुष्पों की माला, हिंसा है त्रिशूल!

प्रेम नहीं तो मानव जीवन लगता है पाषाण,
प्रेम नहीं तो शब्द भी लगते हैं जहरीले वाण!

प्रेम नहीं तो माँ जननी की माटी लगती धूल!
प्रेम है कोमल रेशम जैसा, हिंसा तो है शूल!

---"शुभ-दिन"---चेतन रामकिशन "देव"---
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आओ निकालें अपने मन से, मैले दुरित विचार!
जात धर्म से ऊपर उठकर करें मनुज से प्यार!

ईश्वर ने जब बिना भेद के दिया हमें ये जन्म!
हम आपस में क्यूँ फिर करते, भेदपूर्ण ये कर्म!

आओ गिरा दें जात-धर्म की स्वयंनिर्मित दीवार!
जात धर्म से ऊपर उठकर करें मनुज से प्यार!"
------"शुभ-दिन"--------चेतन रामकिशन "देव"--