Friday, 2 March 2012

♥♥हमजोली...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हमजोली...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी सूरत गुलों के जैसी, कोयल के जैसी बोली है!
रंग बिरंगी तितली जैसी, तू खुशियों की रंगोली है!
बुरे वक्त में साहस देती, अपनापन भी देती है तू,
तू ही मेरे दुःख को समझे, तू ही मेरी हमजोली है!"
.............चेतन रामकिशन "देव".......................

Wednesday, 29 February 2012

♥♥यूपी में मतदान..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥यूपी में मतदान..♥♥♥♥♥♥♥
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!
शेष चरण के लिए लगाई, हर नेता ने जान!

आज सांय के 5 वजे तक, होगा बस प्रचार!
नेता बाँट रहे जनता को, हाथ जोड़कर प्यार!
अपने दल को श्रेष्ठ बताकर देते हैं ये लोभ,
और दलों पर नेता करते, मन भरके प्रहार!

कहीं मुलायम करते देखो माया का अपमान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

दमखम दिखता कांग्रेस में, माया भी तैयार!
और सपा ने भी ताने हैं,अपने सब हथियार!
भाजपा ने भगवा रंग का, खूब दिखाया झंडा,
और अजित नल से करते हैं, पानी की बौछार!

बीजेपी की निंदा करते, आज वही कल्याण!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

६ तारीख को मिल जाएगी, जीत किसी को हार!
किसी की नैय्या डूबेगी तो, किसी की होगी पार!
किसी के दर तो जीत खुशी की दीप जला डालेगी,
"देव" पराजय कहीं पे देगी, आँखों में जलधार!

जाने किसको शूल मिलेंगे, किसका होगा मान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!"

"उत्तर प्रदेश में ६ चरणों का चुनाव बीत चूका है और अंतिम चरण का चुनाव ३ मार्च को होगा! बसपा जहाँ दुबारा वापसी का जोरदार संकेत दे रही है तो वहीँ कांग्रस और रालोद भी जुटे हुए हैं! भाजपा, सपा और अन्य दल भी अपने अपने दावे ठोंक रहे हैं! ६ तारीख में ज्ञात हो जायेगा कि किसकी विजय हुयी, फ़िलहाल तो अंतिम चरण में वोट डालने का अनुभव लेते हैं!"


चेतन रामकिशन "देव"
०१-०३-२०१२


सर्वाधिकार सुरक्षित!

Tuesday, 28 February 2012

♥आज का आदमी..♥


♥♥♥♥आज का आदमी..♥♥♥♥
आदमी क्यूँ बदलता जा रहा है!
भावना क्यूँ मसलता जा रहा है!

प्रेम से अब कोई मतलब नहीं है,
दिल को ऐसे कुचलता जा रहा है!

कौनसी हसरतें चाहता है जाने,
जाने किस ओर चलता जा रहा है!

देखकर और की खुशियाँ न जाने,
अपने-आपे में जलता जा रहा है!

"देव" अब खून के रिश्ते कहाँ हैं,
आदमी सबको छलता जा रहा है!"


" पता नहीं क्यूँ वक़्त बदला है या आदमी, पर आदमी अब आदमी जैसा दिखता तो है पर भीतर से इन्सानियत मरती जा रही है! तो आइये कोशिश करें के अपने भीतर के आदमी को जिन्दा रख सकें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२९.०२.२०१२

Sunday, 26 February 2012

♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥


♥♥♥♥♥♥♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भूख प्यास का कफन लपेटे, मानो लाश के जैसा तन है!
गौर से देखो जरा इधर भी, मुफलिस का ऐसा जीवन है!

कोई तो चुनता कूड़ा रददी, एक वक़्त की रोटी खातिर,
कहीं किसी के हाथ में देखो, भीख मांगने का बर्तन है!

क्या नीति है मेरे मुल्क की, इतना अंतर करती है जो,
कोई तो तरसे पाई-२ को, किसी के हिस्से ढेरों धन है!

इनके दर्द की शिफा करे जो, देश में ऐसा नहीं सियासी,
छोटे से छोटा नेता भी, अब तो मुफलिस का दुश्मन है!

देख के इनके तंग हाल को "देव" निगाहें भर आती है,
मुफलिस के घर में तो देखो, साँझ सवेरे करुण रुदन है!"



"मुफलिसी में जीने वाले लोगों से ही पूछा जा सकता है कि, मुफलिसी का दर्द क्या होता है~ देश की नीतियां ऐसी हैं कि एक व्यक्ति पाई-पाई को तरसता है तो वहीँ एक व्यक्ति हजारों करोरों की सम्पत्ति का स्वामी होता है! राजनीति के सौदागर तो इनके जख्मों पर सिर्फ नमक छिड़कते हैं! इन मजलूमों को जागना होगा, इस घुटन से बचना है तो क्रांति तो लानी होगी!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२७.०२.२०१२

Friday, 24 February 2012

♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारा प्रेम हमारे मन को आकर्षित कर देता है!
अधरों पर मुस्कान सजाकर, जीवन हर्षित कर देता है!
प्रेम तुम्हारा हर संकट में, हमको बल करता है प्रेषित,
अपनी आँखों की निंदिया भी, हमें समर्पित कर देता है!"
.....................चेतन रामकिशन "देव"......................

Wednesday, 22 February 2012

♥♥♥टीस...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥टीस...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कोई नजदीक रहकर भी मेरी परवाह नहीं करता,
कोई पर दूर रहकर भी, मेरी खातिर दुआ करता!

मेरे अपनों ने तो मुझको हमेशा घाव ही बख्शे,
कोई पर गैर होकर भी, मेरे दुःख की दवा करता!

मेरे अपनों ने तो मेरी ख़ुशी को जमके लूटा था,
कोई पर गैर होकर भी, मुझे खुशियाँ फिदा करता!

रगों का खून मिलने भर से अपनापन नहीं आता,
आजकल खून का रिश्ता ही, ज्यादा दगा करता!

किसी पे जुल्म होने का तमाशा देखते हैं "देव",
यहाँ मजलूम के हक में, नहीं कोई निदा करता!"


"जिंदगी में ऐसे पल भी आते हैं जिसमे खूने के रिश्ते तक बदल जाते हैं~ जीवन भर साथ देने की बात करने वाले और वादा करने वाले बदल जाते हैं, तो दिल में एक तीस उठती है! कुछ शब्द जोड़ने का प्रयास किया है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२२.०२.२०१२

Monday, 20 February 2012

♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!
माँ की छवि बड़ी प्यारी है, माँ तो है अभिराम!

माँ का अर्थ बड़ा व्यापक है, माँ का ह्रदय विशाल!
माँ के आशीर्वाद से थमती, समस्याओं की चाल!
माँ की लोरी करती झंकृत, माँ देती मधुर दुलार,
माँ का ज्ञान हमारे साथ में, बनकर रहता ढाल!

माँ के मन में कभी न आते, दुरित भावना माम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम...

माँ के नाम भले कितने हों,  एक है जीवन दर्शन!
अम्मी हो या माँ हो मम्मी, सभी प्यार का दर्पण!
भले ही इस जीवन और जग में, ढेरों हों सम्बन्धी,
जीवन में पर विस्मृत न हो, अपनी माँ का अर्पण!

माँ की ममता के आगे न लगता कभी विराम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!

सदा ही संतानों के हित में, माँ करती है त्याग!
सदा सुनाती है माँ हमको, प्यार का मीठा राग!
माँ का वंदन यदि नही तुम करते हो जीवन में,
व्यर्थ है पूजन करने जाना, हरिद्वार, प्रयाग!

माँ का वंदन किये बिना तो, निष्फल है हर काम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!"


"माँ- प्रक्रति की सबसे अनमोल रचना! यूँ तो हर एक सम्बन्ध चाहें पिता हो, भाई हो, बहिन हो, मित्र हों, पति हो या पत्नी, अपनत्व तो देते ही हैं परन्तु माँ का अपनत्व इन सबसे बढ़कर है! ये सब हों और माँ न हो तो जीवन में ममता नहीं मिलती क्यूंकि ममता माँ के ही ह्रदय से ही उद्भव होती है, तो आइये माँ का सम्मान करें!"

 माँ की ममता को समर्पित रचना....

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२१.०२.२०१२


Monday, 13 February 2012

♥आखिर ये विरोध क्यूँ?♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आखिर ये विरोध क्यूँ?♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ!
प्रेम तो करता है अभिनंदित, है बिना प्रेम सब व्यर्थ!

इसी दिवस को बड़े शोर से, पश्चिम की संतान बताते!
किन्तु अपनी संतानों को, पश्चिम के परिधान दिलाते!
फादर, टीचर, मदर डेस क्या,पश्चिम का उपहार नहीं हैं,
इसी दिवस को क्यूँ आखिर, लुटता, डिगता मान बताते!

प्रेम न नैतिकता से करता, कभी मानव को अपदस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ...

दोहरी सोच का धारण करके, वैलेंटाइन नहीं रुकेगा!
हम पश्चिम को चाहेंगे तो, कैसे अंकुर नहीं उगेगा!
पश्चिम के रंगों में देखो हम सब बढ़ चढ़कर रंगते हैं,
जब देंगे अंग्रेजी शिक्षा, तो कैसे ये पैगाम थमेगा!

हम सब हर्षित होकर रहते हैं, पश्चिम के अंतरस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ...

ये सच है एक दिवस में नहीं सिमटती प्रेम की धारा!
प्रेम तो व्यापक जीवन है, प्रेम रहित जीवन बेकारा!
वैलेंटाइन तभी रुकेगा, जब पश्चिम से मुख मोडेंगे,
दो नावों पे पग रखने से, न मिल पाए कभी किनारा!

"देव" हम सब ही करते हैं, इस पश्चिम को स्वस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ!"


"हम एक तरफ पश्चिम का आवरण अन्य सभी दिवसों को धूमधाम से मनाते हैं! पश्चिम की शिक्षा प्रणाली को हमने अपने बच्चों की जीवन धारा से जोड़ लिया है और हम दोहरी नीति के चलते वैलेंटाइन का विरोध करते हैं! आखिर क्यूँ, अपने आप से पूछिए, क्या ये उचित है? मेरे ख्याल से तो ये अनुचित है और तानाशाही है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१४.०२.२०१२

Thursday, 9 February 2012

♥कलम का देवता...


♥♥♥♥♥♥♥♥कलम का देवता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम का देवता बनना, नहीं आसान है इतना,
कलम सच्चाई का जज्बा, कलम बलिदान चाहता है!

नहीं हिन्दू, नहीं मुस्लिम, न सिख न पारसी कोई,
कलम का देवता हर ओर बस इन्सान चाहता है!

नहीं ख्वाहिश के उसके घर बहे दौलत भरा झरना,
नहीं मखमल दलाली की, वो बस ईमान चाहता है!

नहीं थमता कलम उसका, नहीं अल्फाज का सौदा,
सितारों की तरह अल्फाज की पहचान चाहता है!

कलम का देवता बनने की ख्वाहिश वो नहीं रक्खे,
हुकूमत से कलम के नाम जो एहसान चाहता है!"


" कलम के साथ वफादारी करने वालों को, हुकूमत से किसी प्रलोभन की कोई आकांक्षा नहीं होती, वो भूखे पेट रह सकता पर बिक नहीं सकता! आज हिंदुस्तान की सरकार (सोशल साईट) अभिव्यक्ति पर पाबन्दी लगाने चाहती है, पर देश के बड़े बड़े दिखने वाले रचनाकार, लेखक आवाज नहीं उठाते, मेरे ख्याल से कलम का देवता सो गया है!"

....चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---१०-०२-२०१२

Wednesday, 8 February 2012

♥♥हिंदुस्तान..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हिंदुस्तान..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश!
जग में सबसे सुन्दर-२, भारत का गणवेश!

आगंतुक का स्वागत होता माथे तिलक लगाकर!
उनका मन भी हर्षित होता, इस भूमि पर आकर!
भारत भूमि की संस्कृति,  लगती उनको प्यारी,
वो भी इसको अपनाते हैं, अपना शीश झुकाकर!

उनको अद्भुत लगता है, भारत का परिवेश!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश....

इस भूमि के पटल पे होता, कई धर्मों का पालन!
सब धर्मों का सार सिखाता, मानवता का धारण!
मंदिर मस्जिद हमे सिखाते, प्यार भरा सदभाव,
गुरुद्वाए और चर्च में होता, प्रेम भरा उच्चारण!

प्यार भरी तकरीरें होतीं, प्यार भरे उपदेश!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश.....

जन्म हमारा हुआ यहाँ पर, बड़े भाग्य की बात!
एक दूसरे के सुख-दुःख में,सभी का रहता साथ!
"देव" हमारे इस भारत की, शान सभी से प्यारी,
रामू हामिद साथ में फिरते, थाम के अपने हाथ!

न देखें हम किसी देश को, मन में भरके द्वेष!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश!"

"भले ही इस देश में नेताओं ने नफरत के अंकुर बोकर, भ्रष्टाचार के द्वारा देश को कितने भी पीछे धकेलने की कोशिश की हो, पर फिर भी भारत जैसे देश कोई दूसरा नहीं है!"

चेतन रामकिशन "देव"

Wednesday, 1 February 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम एक आवश्यकता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी!
प्रेम से महक उठे घर-आंगन, प्रेम में झूमे चाहरदीवारी!
प्रेम बिना फीकी पड़ जाती, हर रिश्ते की रंग-रंगोली,
प्रेम के रंग से खिल जाती है, हर रिश्ते की नातेदारी!

प्रेम बिना इन्सान तो केवल,पत्थर का टुकड़ा होता है!
मन भी रहता उदासीन और दुखी-दुखी मुखड़ा होता है!

प्रेम बिना तो हो जाती है, मीठे जल की झील भी खारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी....

प्रेम बिना तो अपनायत की, होली निश जलती है!
प्रेम बिना माँ की ममता भी,हमको झूठी लगती है!
प्रेम बिना तो रस्म सी लगती, पूजा और इबादत,
प्रेम बिना मानव की बोली, तीरों जैसे चुभती है!

प्रेम रहित मानव तो बस, हिंसा के अंकुर बोता है!
नहीं जिंदगी जीता है वो, वो केवल जीवन ढोता है!

प्रेम रहित इन्सान तो केवल, होते कंटक के व्यापारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी...

ए इंसानों चलो प्रेम को, मन में धारण करना सीखो!
एक दूजे के घावों को तुम,प्रेम भाव से भरना सीखो!
बिना प्रेम के"देव" हमारा ये जीवन निष्फल होता है,
प्रेम भाव से एक दूजे को,अपने वश में करना सीखो!

प्रेम करो अपने जीवन से, प्रेम करो अच्छे कर्मों से!
प्रेम करो अच्छी बातों से,प्रेम करो तुम सब धर्मों से!

प्रेम की ताक़त से ही देखो, इस दुनिया में हिंसा हारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी!"


"प्रेम, इस छोटे से शब्द को अपने अंतर्मन में धारण करने मात्र से ये दुनिया अपनी लगने लगती है! इस संसार का हर व्यक्ति अपना लगने लगता है! प्रेम, समाज से जातिवाद, धर्मवाद, हिंसा, भेद-भाव, उंच-नीच मिटाने में सक्षम है, तो आइये प्रेम को धारण करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---०२.०२.२०१२





Friday, 27 January 2012

♥मात शारदे की कृपा...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥मात शारदे की कृपा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं!
आपके जन्मदिवस पर हे माँ, पुष्पों के उपवन खिलते हैं!

मात शारदे की कृपा से होती है, बुद्धि के चिंतन में वृद्धि!
आपके ही आशीष से मिलती, हमारे लेखन को सम्रद्धि!
मात शारदे यदि हमारे साथ में आपका स्नेह ना होता,
हमारे जीवन में न आती, कोई सफलता, न उपलब्धि!

हम शीश झुकाकर मात शारदे, तन्मय हो वंदन करते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं....

मात शारदे आपका पूजन हम सबको शक्ति देता है!
समस्याओं से संघर्षों की, हम सबको युक्ति देता है!
मात शारदे आपका वंदन, जीवन में उजियारा करता,
मात शारदे आपका वंदन, मिथ्या से मुक्ति देता है!

भक्ति भाव से मात शारदे, आपका अभिनन्दन करते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं....

मात शारदे सदा ही हमको, अपने स्नेह से सिंचित करना!
कोई भूल यदि हो जाए तो, क्रोध कभी ना किंचित करना!
"देव" आपका इक यही निवेदन, मित्रों के संग में करता है,
अपनी संतानों को हे माता, ममता से वंचित ना करना!

आपके ही आशीष से माता, ज्ञान के नव-अंकुर पलते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं!"



" ज्ञान के देवी माँ सरस्वती जी के वंदन में, अभिनन्दन में, स्वागत में, सम्मान में, उक्त पंक्तियाँ जोड़ी हैं! मैं और आप सब तो अज्ञानी हैं, ज्ञान और विवेक तो माँ ही देती हैं! माँ को नमन करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि, उनकी कृपा सदा हम पर बनी रहे!"

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक---२८.०१.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित

Wednesday, 25 January 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥अपना ध्वज तिरंगा.. ♥♥♥♥♥♥
लहर रहा है शान से देखो, अपना ध्वज तिरंगा!
भारत माँ के चरण धो रही, निर्मल पावन गंगा!

आओ बनें हम गाँधी जैसे, सत्य, अहिंसा दूत!
भारत माँ के बनें चलो हम, सच्चे नेक सपूत!
आओ मिटा दें अपने मन मैले दुरित विचार,
बाबा भीमराव के जैसे हम, दूर करें सब छूत!

मन से मैली काई धोकर, मन को कर ले चंगा!
लहर रहा है शान से देखो, अपना ध्वज तिरंगा....

इस दिन को तुम भूले से भी, रस्म का न दो नाम!
इस दिवस की आकांक्षा में, मिट गए वीर जवान!
देश को इस मंजिल पे लाना, सरल नहीं था काम,
वीर-शहीदों का है इसमें, तप, जप और बलिदान!

अपने हित में न करना तुम भारत का तन नंगा!
लहर रहा है शान से देखो, अपना ध्वज तिरंगा......

आओ करें वीरों की खातिर, फूलों की बौछार!
यही वीर वंदन,चंदन और स्वागत के हकदार!
देश नहीं होता वीरों बिन, "देव" नहीं आजाद,
कभी न बन पाता जग में, भारत का किरदार!

अपने हित में न करना तुम भारत का तन नंगा!
लहर रहा है शान से देखो, अपना ध्वज तिरंगा...."

"गणतंत्र दिवस, मात्र कोई रस्म नहीं है! जो लोग इसे रस्म समझते हैं या बनाते हैं वो उन शहीदों के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं! ये दिन संकल्प का दिन है! इस दिन देश हित, समाज हित के लिए मन में कोई संकल्प लीजिये!"

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक---२६.०१.२०१२ 


सर्वाधिकार सुरक्षित
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

Tuesday, 24 January 2012


♥♥♥♥♥♥♥कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी....♥♥♥♥♥♥♥♥
भारत माँ के तन से बहता,खून जिन्हें लगता है पानी!
भारत माँ के घाव देखकर, जो रखते हैं सुप्त जवानी!
जिन लोगों को देश के झुक जाने से कोई लाज नहीं,
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी!

जिन लोगों का मन नहीं जानता, देश प्रेम का अर्थ!
ऐसे लोगों का जन्म व्यर्थ है और मरना भी व्यर्थ!

जिन लोगों ने भारत की कीमत कभी नहीं पहचानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी.......

जो जन अपने लाभ में करते हैं भारत को नीलाम!
जो जन धर्मवाद में करते, इस देश में कत्ले-आम!
जिन लोगों के काटनी चाही है चैन अमन की डोरी,
तारीखों में कभी न रोशन होता इन लोगों का नाम!

ऐसे लोग नहीं बन सकते हैं, कभी भी प्रेरणावान!
जिन्होंने अपने कदम के नीचे रखा है हिंदुस्तान!

आजादी के किरदारों की झूठी लगती जिन्हें कहानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी.......

जिस धरती पे जन्म लिया, वो धरती माँ जैसे प्यारी!
हमको अपनी गोद में रखे, जन्म-मरण की नातेदारी!
"देव"कभी भी उन लोगों की नम आँखों से याद न आए,
जिन लोगों ने देश के संग में, हर पल की कोई गद्दारी!

मातृभूमि की करें वंदना, आओ करें इसका सम्मान!
हम नहीं करेंगे, नहीं सहेंगे,  इस भारत का अपमान!

जिन लोगों ने मातृभूमि के लिए कोई सोच न ठानी!
ऐसे लोगों को आखिर में, कैसे लिख दूँ हिन्दुस्तानी!"


" देश में पैदा होने मात्र से, हम देशवासी तो कहलाये जा सकते हैं, परन्तु देश-प्रेमी नहीं! और हमारा कर्तव्य है कि, हम जिस देश में जन्म लें, उस देश से प्रेम करें, तो आइये चिंतन करें!"


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२५.०१.२०१२





Sunday, 15 January 2012

♥♥माँ की ममता ♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ की ममता ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
माँ की ममता ऐसे पावन, जैसे गंगाजल होता है!
माँ के आंचल के भीतर ही वायु अम्बर थल होता है!
माँ दुनिया में सर्वोत्तम है, माँ जैसा दूजा न कोई,
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है!

माँ ही अपना दूध पिलाकर, इस जीवन को सिंचित करती!
नहीं प्यास से पीड़ित रखती, नहीं अन्न से वंचित करती!

माँ का तो व्यवहार सदा ही चन्दन सा शीतल होता है!
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है........

माँ के नैनों में एक जैसी होती, उसकी हर संतान!
वो प्रेषित करती है ममता, सभी को एक समान!
अपनी संतानों के हित में, वो अपना दुःख भी भूले,
माँ अपने मन से चाहती है, सभी का हो उत्थान!

कभी न अपनी संतानों को देती, माँ मिथ्या का ज्ञान!
कभी क्रोध को निकट ना लाती,  ना कोई अभिमान!

माँ के मन में भेदभाव न, न ही कोई छल होता है!
माँ के आशीषों से सारी समस्याओं का हल होता है....

माँ की छवि के सम्मुख लगते शब्द हमारे अल्प!
कभी नहीं हो पाता जग में, माँ का कोई विकल्प!
अपने सुख की आकांक्षा में, माँ को ना दो शोक,
माँ का हम सम्मान करेंगे, मन में लो संकल्प!

कोई नहीं कर सकता इस जग में, माँ जैसा बलिदान!
इस स्रष्टि के उदय-मरण तक, जीवित माँ का नाम!

माँ नामक इस शब्द में, एक असीमित बल होता है!
माँ की ममता ऐसे पावन, जैसे गंगाजल होता है!"


"माँ, अद्वितीय है! कोई नहीं उस जैसा! हमारे हर्ष के लिए अपने सुख की
सभी कामनाओं को त्याग देती है माँ, क्यूंकि माँ को सबसे बड़ा सुख उसकी संतानों के हर्ष से मिलता है! तो आइये इस अनमोल चरित्र माँ को नमन करें!


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---१६.०१.२०१२


Tuesday, 10 January 2012

♥क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....♥

♥♥♥♥♥♥♥क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....♥♥♥♥♥♥♥
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
कभी भ्रूण के रूप में मरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
आज भी उसकी जीवन धारा का रुख, उसके हाथ नहीं है,
औरो के नियमों में चलती,क्यूंकि उसका नाम है लड़की!

अपने मन की आवाजों को भी, अधरों के द्वारे न लाती!
कमरे के इक कोने में जाकर, चुपके चुपके नीर बहाती!

झूठ-मूठ की हँसी में फिरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....

सारे कुल की मर्यादा का, बोझ उसी के सर होता है!
खुद मर्जी से उड़ न पाए, पिंजरे जैसा घर होता है!
फूंक-२ के कदम रखे वो, रहती है सहमी सहमी सी,
अपने अरमानों को मारे, जाने कैसा डर होता है!

आसमान की तरफ देखकर, वो केवल अफ़सोस जताए!
घर के भीतर इतनी बंदिश, मन ही मन वो रोष जताए!

अश्कों को आँखों में भरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की.....

जाने कब तक नन्ही लड़की, भ्रूण रूप में मौत सहेगी!
जाने कब तक नन्ही लड़की, इन आँखों में नीर भरेगी!
"देव" न जाने कब तक उसको अन्यायों के शूल चुभेंगे,
जाने कब तक नन्ही लड़की, इच्छाओं का दमन करेगी!

इतने सारे विष को पीकर, कभी किसी को बुरा न कहती!
मर्यादा के नाम पे लड़की, जुल्मों को भी चुप चुप सहती!

झूठ-मूठ की हँसी में फिरती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!
भेदभाव की आग में जलती, क्यूंकि उसका नाम है लड़की!"


"लड़की---कभी भ्रूण के रूप में मार दी जाती है तो, कहीं वो मर्यादाओं के नाम पर,
घर में ही कैद कर ली जाती है! लड़की की ये बेबसी, ये लाचारी जाने कभी समाप्त होगी भी या नहीं, या फिर वो ऐसे ही ...........मिटती रहेगी, बुझती रहेगी?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१०-०१-२०१२









Monday, 9 January 2012

♥♥♥♥♥♥♥तुम तन्हाई में जान न देना...♥♥♥♥♥♥♥
तुम न कहना बुरा वक्त को, कुदरत को इल्जाम न देना!
ए हमदम मेरी मजबूरी को, तुम धोखे का नाम न देना!

मेरे दिल में केवल तुम हो, नहीं किसी का साया आया!
नहीं किसी के सपने देखे, नहीं किसी को गले लगाया!
हर पल तेरी ही यादों में, दिवस, रात और सुबह शाम है,
तेरी सूरत जब भी चाही, पलक बंद कर पास बुलाया!

मैं जल्दी से आऊंगा वापस, तुम तन्हाई में जान न देना!
तुम न कहना बुरा वक्त को, कुदरत को इल्जाम न देना!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०९.०१.२०१२





Sunday, 8 January 2012

♥♥चित्र( स्मृति का दर्पण)♥


♥♥♥♥♥♥♥♥चित्र( स्मृति का दर्पण)♥♥♥♥♥♥♥♥
बीते कल की, बीते पल की, याद दिलाते चित्र हमारे!
आँखों के सम्मुख आ जाते, भूले बिसरे सभी नजारे!

कभी आंख को आंसू देते, कभी खुशी के दीप जलाते!
कभी किसी बिछड़े अपने की, स्मृति को पास बुलाते!
मीलों की लम्बी दूरी को, चित्र मिटा देते एक पल में,
परदेसों में रहने वाले, अपनों को भी निकट दिखाते!

चित्र हमारे मन मंदिर में, बीते पल की छवि उभारे!
आँखों के सम्मुख आ जाते, भूले बिसरे सभी नजारे!"

" चित्र भी अनमोल होते हैं! जब भी देखो तो यादें उनके साथ सरपट दौड़ी चली आती हैं!
कभी आंखें नम होती हैं तो कभी खुश! अपने चित्र को देखकर ये पंक्तियाँ मन में आयीं तो
अंकित कर दी हमने! आप भी चित्रों को संजोकर रखियेगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८-०१-२०१२




Friday, 6 January 2012

♥♥गरीब को सर्दी ने जो मारा♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥गरीब को सर्दी ने जो मारा♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा!
यहाँ वहां वो फिरा बहुत पर, अलाव का न मिला सहारा!
हैं खोखले अफसरों के दावे, के सर्दी से कोई मरा नहीं है,
इन्ही अलावों की लकड़ियों से, गर्म है उनके घरों में पारा!

गरीब लोगों के ही हकों पर, ना जाने डाका पड़ेगा कब तक!
अलाव के बिन ठिठुर-ठिठुर के, गरीब जाने मरेगा कब तक!

गरीब लोगों के आंसुओं के, ना जाने कब तक बहेगी धारा!
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा....

कहाँ हैं सत्ता की घोषणायें के सर्दी से कोई नहीं मरेगा!
गरीब लोगों की जिंदगी को, अलाव प्रतिदिवस जलेगा!
बंटेंगे कम्बल, बंटेंगी जर्सी, ना सर्दी में नंगा रहने देंगे,
न सर्दी उनको दुखी करेगी, न पाला उन पर असर करेगा!

मगर ये कहने की बात है बस, नहीं है सच्चाई का धरातल!
गरीब को न मिला था कल भी, गरीब को न मिलेगा कुछ कल!

गरीब लोगों की जिंदगी की, कोई बदलता नहीं नजारा !
रुकी है धड़कन, लहू जमा है, गरीब को सर्दी ने जो मारा.....

कहाँ गयीं हैं वो संस्थायें, गरीब हित का जो दावा करतीं!
कहाँ गयी है उनकी सेवा, क्यूँ उनकी आंखें नहीं हैं भरतीं!
गरीबों के हित की आड़ लेकर, गड़प रहे हैं सभी खजाने,
ना जाने ऐसे दुरित कर्म से, क्यूँ संस्थायें नहीं हैं डरतीं!

गरीबों की इन पुकारों को, ये "देव" भी अब नहीं हैं सुनते!
गरीब लोगों की जिंदगी से, खुदा भी कांटे नहीं हैं चुनते!

गरीब लोगों पे टूटता है, खुदा की कुदरत का कहर सारा!
गरीब लोगों की जिंदगी की, कोई बदलता नहीं नजारा !"


" सर्दी से बढ़ने वाली मौतों की संख्या निरंतर बढ़ रही है!
सरकारों के, अफसरों के दावे खोखले लगते हैं! अलाव की लकड़ियाँ चौराहे पर
जलने की बजाये अफसरों के घरों में पारा बढाती हैं! आखिर गरीब ठण्ड से कब तक मरता रहेगा!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०७.०१.२०१२
















Wednesday, 4 January 2012

♥♥♥♥♥♥क्यूँ ...♥♥♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥क्यूँ ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर!
क्यूँ बिकती है दवा यहाँ पर, क्यूँ दुखते हैं घाव यहाँ पर!

देखो उधर किसी कोने में, मनुज की प्रीती झुलस रही है!
उसके मन मंदिर में केवल, लोभ की बारिश बरस रही है!
अपनी आनंदों में केवल, आज का मानव डूब चूका है,
कहीं पे बीवी, कभी पे बहना, कहीं पे माता तरस रही है!

क्यूँ मिटता है यहाँ समर्पण, क्यूँ मिटते सदभाव यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर....

कोई घरों को फूंक रहा है, कोई किसी का यौवन लूटे!
कोई किसी का नीर बहाए, कहीं खून की धारा फूटे!
आज रगों में बहने वाला, खून भी पानी जैसा लगता,
अपनेपन का भी नाता अब, आज यहाँ पल भर में टूटे!

क्यूँ रोती है आंख यहाँ पर, क्यूँ लुटते हैं ख्वाब यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर....

आज आदमी को मानव भी, कहने में आती है लज्जा!
औरों के घर रहें-गिरें पर, कायम हो अपने घर सज्जा!
"देव" ये कैसा लालच देखो, आज आदमी ने ओढा है,
मानवता की ढही ईमारत, टुटा- फूटा छत और छज्जा!

क्यूँ रोती है आंख यहाँ पर, क्यूँ लुटते हैं ख्वाब यहाँ पर!
क्यूँ बिकता है प्रेम यहाँ पर, क्यूँ बिकते हैं भाव यहाँ पर!"

"आज मानवता जिस प्रकार से समाप्त होती जा रही है! मनवा सिर्फ अपने लालच के
मद में समाज, सदभाव, अपनायत को मिटाता चला जा रहा है, उससे कैसे मानवता
जीवित बच पायेगी?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक- ०५.०१.२०१२ 

यह रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!







!