Sunday, 7 June 2015

♥♥रंगहीन...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥रंगहीन...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
 मन का क्षेत्र बहुत घायल है और नयनों में व्यापक जल है। 
झुलस गयीं हैं अधर पंखुड़ी और चित्त में कोलाहल है। 
चिंतित चिंतन की रेखायें, मानवता का अंत देखकर,
भाव यहाँ दोहन की वस्तु, और यहाँ अपनों का छल है। 

प्रेम के बदले यहाँ दंड है, तरह तरह के मानक होते। 
लोग किसी के जीवन में क्यों, पीड़ाओं के अंकुर बोते। 
प्राण निकलते हैं बिंद बिंद कर, और सभी करते अनदेखा।
औरों पर आरोप लगाते, भूल के अपना लेख जोखा। 

मदिरा की प्याली कैसे, कह दूंगा मैं गंगाजल है। 
मन का क्षेत्र बहुत घायल है और नयनों में व्यापक जल है... 

केश रंग से हीन हो गये, ऊर्जा, क्षमता मंद हो गयी। 
एक उजाले की खिड़की थी, वो भी अब तो बंद हो गयी। 
"देव" जहाँ में मुझको मिटटी, और उनको रेशम कहते हैं। 
हमे ज्ञात किन अवस्थाओं में, हम देखो पीड़ा सहते हैं। 

अब लगता है हर एक मंजिल, मेरी दृष्टि से ओझल है। 
मन का क्षेत्र बहुत घायल है और नयनों में व्यापक जल है। " 


....................चेतन रामकिशन "देव"……................
दिनांक-०७.०६.२०१५
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Saturday, 6 June 2015

♥दीवार...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दीवार...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जो चाहत रूह तक पहुंचे, नहीं अब प्यार वो शायद।
खड़ी रिश्तों के आँगन में, कोई दीवार है शायद।

वो माँ है बेटियों की ओर, मुंह कर सोच में डूबी,
पढ़ा उसने सना खूँ से, अभी अखबार है शायद।

हैं अपने मुल्क में भूखे, लटक जाते हैं कड़ियों पर,
मगर गैरों को दौलत दे, अजब सरकार है शायद।

जो लफ़्ज़ों का मसीहा हो, लिखे आवाज़ रूहों की,
कलमकारों में क्या ऐसा, कोई खुद्दार है शायद।

अमन की बात करते हैं, मेरे दिल में छुरा घोंपें,
यही देखा है लोगों का, छुपा किरदार है शायद।

मसल देते हैं पल भर में, किसी का फूल जैसा दिल,
मोहब्बत अब ज़माने में, कोई व्यापार है शायद।

सजा है बेगुनाहों को,  गज़ब कानून की फितरत,
यहाँ कातिल की चोखट पर, सजा दरबार है शायद।

मुझे इलज़ाम देते हैं, मेरी आँखों को भी पानी,
ग़मों की हर घड़ी देखो, ये पैदावार है शायद।

नहीं सुनता हूँ अब दिल की, सुनो मैं "देव" पत्थर का,
थपेड़े दर्द के सहना, मेरा संसार है शायद। "

.....चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-०७.०६.२०१५
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Wednesday, 3 June 2015

♥♥उजाले...♥♥

♥♥♥♥♥♥उजाले...♥♥♥♥♥♥♥
अपने आंसू मेरे हवाले करो। 
जिंदगानी में तुम उजाले करो। 

जो मेरे लफ्ज़ तुमको दुख देते,
फूंककर उनके रंग काले करो।  

दर्द तेरा मुझे भी होता है,
अपने पांवों में तुम न छाले करो। 

मेरी खातिर क्यों इस कदर अर्पण,
खुद को रोटी के न यूँ लाले करो। 

तुमको गिरने नहीं मैं दूंगा सुनो,
खुद को इतने भी न संभाले करो। 

प्यार है मुझसे तो कहो खुलकर,
अपने होठों पे यूँ न ताले करो। 

"देव" तेरा वजूद अम्बर सा,
मेरे क़दमों में सर न डाले करो। "

.....चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-०३.०६.२०१५ 
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Tuesday, 2 June 2015

♥प्रेम-दर्शन...♥

♥♥♥♥♥♥प्रेम-दर्शन...♥♥♥♥♥♥♥♥
चित्त हर्षित हो, भाव खिल जाये। 
प्रेम की गंध मुझमे घुल जाये। 
तेरे दर्शन निकट से होंगे जब,
चन्द्रमा मानो मुझको मिल जाये। 

प्रेम के पथ पे होगा जब भी मिलन। 
मन से फूटेंगी भावना की किरन। 
शब्द धीमे से लाज खायेंगे,
बोलते पर रहेंगे अपने नयन। 

प्रेम रंगों से चित्रकारी हो,
चित्र परिणय दिशा में ढ़ल जाये।  
तेरे दर्शन निकट से होंगे जब,
चन्द्रमा मानो मुझको मिल जाये। 

तुम कथन प्रेम का जो व्यक्त करो। 
कांपते अधरों को सशक्त करो। 
हर दिवस रात मेरे साथ रहो,
खुद को क्षण भर भी न विलुप्त करो। 

रूप उज्जवल ये देखकर तेरा,
हर दिशा का तिमिर भी धुल जाये। 
तेरे दर्शन निकट से होंगे जब,
चन्द्रमा मानो मुझको मिल जाये। 

तुम ही सौंदर्य हो कविता का। 
तुम ही प्रभाव को सुचिता का। 
"देव" तुमसे हो मन मेरा शीतल,
तुम ही आधार हो सरिता का। 

प्रेम अपना जो होगा ताकतवर,
देखो चट्टान तक भी हिल जाये।  
तेरे दर्शन निकट से होंगे जब,
चन्द्रमा मानो मुझको मिल जाये। "

.....चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-०२.०६.२०१५ 
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Wednesday, 27 May 2015

♥♥बेड़ी...♥♥

♥♥♥♥♥♥बेड़ी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जागती रात, अश्क़ बहते रहे। 
दर्द अपना खुदी से कहते रहे। 

उसके आने की आस में देखो,
चांदनी हम झुलस के सहते रहे। 

रेत के जैसे ख्वाब ही थे मेरे,
ठेस लगते ही देखो ढ़हते रहे। 

आदमी होने का हुनर न जिसे,
हम खुदा उसको रोज कहते रहे। 

ये तड़प और कितनी बेचैनी,
करवटें हम बदलके रहते रहे। 

खून निकला नहीं कटी बेड़ी,
अपनी एड़ी के घाव सहते रहे। 

 "देव" दिल के चीर दिखाना पड़ा,
वो मेरे सच को, झूठ कहते रहे। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-२७.०५.२०१५ 
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Tuesday, 26 May 2015

♥रंजिश...♥

♥♥♥♥♥♥♥रंजिश...♥♥♥♥♥♥♥♥
कितनी रंजिश जता रहा है वो। 
मुझको पत्थर बता रहा है वो। 

जो मेरे दर्द से जुड़ा था कभी,
आज मुझको सता रहा है वो। 

जिसने बोला था सुबह आऊंगा,
शाम से लापता रहा है वो। 

उसने लिखा था प्रेम का जो खत,
आज तक बेपता रहा है वो। 

"देव" लिखता जो प्रेम के मुक्तक,
मुझको नफरत बता रहा है वो। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-२६.०५.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Sunday, 24 May 2015

♥♥जुर्म...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥जुर्म...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्यार है जुर्म तो, जला दो हमें। 
ख़ाक में आओ तुम, मिला दो हमें। 

मुझसे रिश्ता नहीं, तो क्या गम है,
एक लम्हे में तुम, भुला दो हमें। 

अब दवाओं का, न असर कोई,
कोई कड़वा ज़हर, पिला दो हमें। 

हमने तो जिंदगी तुम्हे सौंपी,
तुम जो चाहो, वही सिला दो हमें। 

तेरी राहों को, मैं नहीं रोकूँ,
मौत की नींद तुम, सुला दो हमें। 

लडख़ड़ायें जो न कदम मेरे,
बिन सहारे के तुम, चला दो हमें। 

ये जहाँ मेरे बिन, रुकेगा नहीं,
उम्र भर चाहें, फासला दो हमें। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक-२४.०५.२०१५  
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Tuesday, 19 May 2015

♥♥ममता...♥♥

♥♥♥♥♥ममता...♥♥♥♥♥♥♥
मुझपे ममता का रंग डाला है। 
मेरी आँखों में जो उजाला है। 

बस दुआ देके दर्द खींच लिया,
माँ तेरा प्यार भी निराला है। 

तेरी हिम्मत की दाद देता हूँ,
कितनी मुश्किल से हमको पाला है। 

तुमने तालीम दी हक़ीक़त की,
हमके गिरते हुये संभाला है। 

माँ तेरी हर छुअन है फूलों सी,
तुमने काँटा हर एक निकाला है। 

मेरी ख्वाहिश जो कर सको पूरी,
मेरी आदत में खुद को ढ़ाला है। 

"देव" माँ को सुकून है मुझसे,
मुझको भी माँ का नाम आला है। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- २०.०५.२०१५
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Saturday, 16 May 2015

♥♥इंतजार...♥♥

♥♥♥♥♥♥इंतजार...♥♥♥♥♥♥♥
मुझको ये इंतजार भाता नही। 
बिन तुम्हारे क़रार आता नही। 

तेरी सूरत है बस निगाहों में,
हर किसी पे तो प्यार आता नहीं। 

मेरे सपनों की आरज़ू तुम हो,
बिन तेरे ख्वाब मैं सजाता नहीं। 

बिन तेरे लय है, न ही लफ्ज़ कोई,
कंठ भी कोई गीत गाता नहीं। 

तुझको आने में न पड़े मुश्किल,
सोचकर दीप मैं बुझाता नहीं। 

बिन तेरे पतझड़ों के साये हैं,
प्यार का मेघ कोई छाता नहीं। 

"देव" तुम बिन बहुत अँधेरा है,
चाँद आँखों में जगमगाता नहीं। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- १६.०५.२०१५
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Friday, 15 May 2015

♥♥हालात...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥हालात...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
न फिसल जाऊं, इसका डर है मुझे।
अपने हालात की खबर है मुझे।

मेरी आँखों में वो समाई है,
प्यार की आज भी, कदर है मुझे।

जलजले ने भले उजाड़ दिया,
आज भी प्यारा मेरा, घर है मुझे।

मुझको अमृत दिखाके न छेड़ो,
हाँ जहर पीने का, हुनर है मुझे।

रात भर चाँद से मुलाकातें,
धूप भी दिन में बेअसर है मुझे।

तूने रस्ते में मुझको छोड़ा मगर,
आज भी तेरी ही, फिकर है मुझे।

"देव "  हर रोज तेरी राह तकूं,
तुम न आओगे ये, खबर है मुझे। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- १५ .०५.२०१५
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Wednesday, 13 May 2015

♥♥कहो कुछ अब...♥♥

♥♥♥♥♥कहो कुछ अब...♥♥♥♥♥♥
रात खामोश है, कहो कुछ अब। 
ऐसे चुप चुप नहीं, रहो तुम अब। 

मैं नदी बनके, तुममें खो जाऊं,
बनके सागर जरा, बहो तुम अब। 

प्यार में हक़ है, अपनेपन का तुम्हे,
अजनबी मुझको न, कहो तुम अब। 

अपने आग़ोश में समा लो मुझे,
दूरियां कोई न, सहो तुम अब। 

लोग पढ़कर जो हमको याद करें,
दास्तां प्यार की, कहो तुम अब। 

अपनी आँखों से तुमको छूना है,
कोई परदे में न, रहो तुम अब। 

"देव" तुमको सुना दूँ हाले-दिल,
अपने जज़्बात तो, कहो तुम अब। "

......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- १३ .०५.२०१५
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Tuesday, 12 May 2015

♥♥मेरी सूरत में...♥♥


♥♥♥♥मेरी सूरत में...♥♥♥♥
मेरी सूरत में तुम समाई हो। 
सांस बनकर करीब आई हो। 

तुमको देखूं तो रंग खिल जायें,
बनके रिमझिम फुहार छाई हो। 

तेरे छूने से चैन मिल जाये,
तुम मेरे दर्द की दवाई हो। 

मेरे ग़ज़लों का नूर है तुमसे,
और तुम ही मेरी रुबाई हो। 

तुम हमेशा को पास आ जाओ,
दूर जाने की न बुराई हो। 

हर जनम में तुम्हारा साथ मिले,
बस खुदा की यही खुदाई हो। 

"देव" मेरी हो तुम मेरी रहना,
न कभी कहना के पराई हो। "'

.......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- १२.०५.२०१५

" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Sunday, 10 May 2015

♥♥♥माँ...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरे क़दमों में सर झुका लूं माँ। 
जन्नतें मैं ज़मीं पे, पा लूं माँ। 

मैंने देखा नहीं कभी रब को,
मंदिरों में तुझे सजा लूं माँ। 

तेरा किरदार  है बहुत उम्दा,
तुझको पलकों पे, मैं छुपा लूं माँ। 

मुझको मखमल की जब जरुरत हो,
तेरे आँचल में सर छुपा लूं माँ। 

मेरी उस लम्हा भूख मिट्टी है,
तेरे हाथों से अन्न खा लूं माँ। 

तुझको काँटा नहीं चुभे कोई,
तेरी राहों में फूल डालूं माँ। 

हर जनम तेरी कोख से जन्मूँ,
"देव " बस ये दुआ निभा लूं माँ। "

 .......चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- १०.०५.२०१५

Wednesday, 6 May 2015

♥आदमी हूँ...♥

♥♥♥♥♥♥आदमी हूँ...♥♥♥♥♥♥♥
आदमी हूँ नहीं खुदा करिये। 
मुझको खुद से नहीं जुदा करिये। 

जो बदलकर मुझे करो उल्फत,
प्यार में ऐसी न अदा करिये। 

जिनको न कद्र हो मोहब्बत की,
उनपे दिल अपना न फ़िदा करिये। 

जिनके बिन जिंदगी अधूरी रहे,
भूल से उनको न विदा करिये। 

हो जरुरत जिन्हे सहारे की ,
बोझ बन उन पे न लदा करिये। 

लोग बख्शें जो लानतें हर पल,
नाम की ऐसी न सदा करिये। 

"देव" जो  बेचते यहाँ सच को,
झूठ की उनकी, न निदा करिये। "

.........चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- ०६.०५.२०१५

Tuesday, 5 May 2015

♥ बेजुबान... ♥

♥ ♥ ♥ ♥ बेजुबान... ♥ ♥ ♥ ♥
झूठ पे इत्मीनान करना पड़ा। 
खुद को ही बेजुबान करना पड़ा। 

जलजले ने उजाड़े घर जब से,
आसमां को मकान करना पड़ा। 

मेरे कातिल वो, पर मेरी चाहत,
उनके हक़ में बयान करना पड़ा। 

हारके जिंदगी से मरना नहीं,
गिरते गिरते उठान करना पड़ा। 

वक़्त न ली जो आज फिर करवट,
उनको मेरा बखान करना पड़ा। 

बेइमां कहके वो मुझे खुश थे,
आप छलनी, ईमान करना पड़ा। 

"देव" जिंदा पे तो हुई न कदर, 
खुद को मरकर, महान करना पड़ा। "

.........चेतन रामकिशन "देव"…….
दिनांक- ०६.०५.२०१५

Tuesday, 21 April 2015

♥बिना तुम्हारे...♥

♥♥♥♥♥बिना तुम्हारे...♥♥♥♥♥♥♥♥
मिलन से जब वंचित होता हूँ। 
जाने क्यों कुंठित होता हूँ। 
कुछ भी भाता नही हृदय को,
क्षण क्षण मैं विचलित होता हूँ। 
इसीलिए प्रयास करो तुम, 
निश दिन मुझसे मिला भेंट का,
सखी तुम्हारे दर्शन से मैं,
फूलों सा पुलकित होता हूँ। 

तुमसे है सम्बन्ध प्रेम का, 
तुम बिन सब कुछ रिक्त लगे है। 
तुम बिन चाँद नहीं खिल पाता,
तुम बिन सूरज नहीं जगे है। 

बिना तुम्हारे दिशाहीन मैं,
पग पग पे भ्रमित होता हूँ। 
सखी तुम्हारे दर्शन से मैं,
फूलों सा पुलकित होता हूँ .... 

जब तुम आओ मैं मुस्काउंं,
मैं चोखट पे दीप जलाऊं। 
तुमसे ऐसा गठबंधन है,
बिन तुम्हारे न रह पाऊं। 
"देव" समूचे विश्व पटल पर,
न पर्याय तुम्हारा कोई,
इसीलिए ही तुमसे विरह,
नहीं जरा भी मैं सह पाऊं। 

तुमसे मिलकर जीवन पथ में,
मधु सा मैं मिश्रित होता हूँ। 
सखी तुम्हारे दर्शन से मैं,
फूलों सा पुलकित होता हूँ। "

....चेतन रामकिशन "देव"… 
दिनांक-२१.०४.२०१५ (CR सुरक्षित )

Saturday, 18 April 2015

♥♥♥पत्र तुम्हारे...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पत्र तुम्हारे...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
यदा कदा मैं पत्र तुम्हारे, जिस दिन भी खोला करता हूँ। 
तुम तो निकट नही होती हो, शब्दों से बोला करता हूँ। 
साथ जनम तक संग साथ की, जब पढता सौगंध तुम्हारी,
यही सोचकर के तुम आओ, द्वार पुन : खोला करता हूँ। 

जाने कितनी बार हजारों, यूँ ही तेरा पथ देखा है। 
आँख लगी तो मैंने तेरा, स्वर्ण सजीला रथ देखा है। 

तुम्हे देखकर स्वप्नों में भी, हर्षित हो, डौला करता हूँ। 
यही सोचकर के तुम आओ, द्वार पुन : खोला करता हूँ ... 

जब भी एकाकीपन होता, पूर्ण मनन पे तुम छाती हो। 
अपने नैना बंद करूँ तो, नज़र मुझे बस तुम आती हो। 
तेरी कविता का वो गायन, कान में अब भी मधु घोलता,
मुझे देखकर के परिसर में, मंद मंद तुम मुस्काती हो। 

अपने मन की परत परत पर, छवि तुम्हारी ही पाई है। 
याद मुझे आता है तेरा, संग संग होना सुखदायी है। 

तुमसे ज्यों का त्यों कह दूँ मैं, नहीं तनिक तौला करता हूँ। 
यही सोचकर के तुम आओ, द्वार पुन : खोला करता हूँ ...

पढ़ते पढ़ते पत्र की अंतिम, पंक्ति तक नैना जाते हैं।  
रिक्त अभी तक द्वार देखकर, फूल भी सारे मुरझाते हैं।  
"देव" निगाह जाती है मेरी, टंगी तुम्हारी तस्वीरों पर,
तब होता एहसास मुझे के, जाने वाले कब आते हैं। 

तब मैं फिर से नम आँखों से, पत्र तुम्हारा रख देता हूँ। 
यही सोचकर तेरे हाथ का, भोजन है मैं चख लेता हूँ। 

कार्यालय में जाने को मैं, इस्त्री फिर चोला करता हूँ।  
यही सोचकर के तुम आओ, द्वार पुन : खोला करता हूँ। "

...................चेतन रामकिशन "देव"………………..
दिनांक-१८.०४.२०१५ (CR सुरक्षित )

Wednesday, 15 April 2015

♥♥हरफ़...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हरफ़...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
है मुझसे इस कदर नफ़रत, कभी ये बोल तो देते। 
छुपाया राज क्यों दिल में, कभी तुम खोल तो देते। 

बड़ा ही बेरहम होकर, मेरी सांसों को रोका था,
घुटन मैं हूँ जरा तुम कब्र का, मुंह खोल तो देते। 

वो जिनसे था तुम्हें मतलब, अशरफ़ी उनको दे डालीं,
किसी मुफ़लिस की मेहनत का, कभी तुम मोल तो देते।

तुम्हारा रूप चन्दन था, तेरी खुशबु भी प्यारी थी,
महक तुम प्यार की, सांसों में मेरी घोल तो देते।

नहीं कहना मुझे कुछ "देव", मैं खामोश हूँ बेहतर,
जुबां मिल जाती मुझको भी, हरफ़ तुम बोल तो देते। "

………........चेतन रामकिशन "देव"….................
दिनांक-१६.०४.२०१५ (CR सुरक्षित )  

Tuesday, 14 April 2015

♥♥जागता चाँद...

♥♥♥♥♥♥♥♥जागता चाँद...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जागता चाँद ये, मेरी तरह से आधा है। 
क्यों नहीं आया वो, जिससे मिलन का वादा है। 

मुझे तड़पाने को न आये, या फिर वक़्त नहीं,
मैं क्या जानूं के भला, उनका क्या इरादा है। 

मेरा ये हक़ है मिलन का, या फिर मेरे यारों,
मेरी उम्मीद ही उस आदमी से, ज्यादा है। 

मेरी किस्मत मुझे महबूब मिला, फूलों सा,
मेरा किरदार तो दुनिया में, बड़ा सादा है। 

एक लम्हे की जुदाई से, टूट जाता हूँ,
मेरा दिल तो बड़ा कमजोर, इश्क़ज़ादा है। 

मुझसे कहती हैं वो, आ जायेंगी वो मेरी हैं,
क़र्ज़ की तरह भला, इतना क्यों तकादा है। 

"देव" एहसास की, हर लौ पे तेरा नाम लिखा,
बिन मिले लगता ये, जीवन ही बेइरादा है। "

.............चेतन रामकिशन "देव"…............
दिनांक-१४.०४.२०१५  (CR सुरक्षित ) 

Sunday, 12 April 2015

♥♥निकटता...♥♥

♥♥♥♥♥निकटता...♥♥♥♥♥♥
तुम्हें जानने का मन होता,
निकट मानने का मन होता। 
तेरे पग में शूल चुभें न,
धूल छानने का मन होता। 
तुमसे हर पल बातचीत हो,
कुछ कहना, कुछ सुनना चाहूं,
सात जनम तक मिलन करेंगे,
यही ठानने का मन होता। 

प्रेम का सावन जब भी बरसे,
तुमको मैं बाँहों में भर लूँ। 
अपने जीवन के हर क्षण में,
बस तुमको ही शामिल कर लूँ। 

रात मिलन की कभी ढ़ले न,
गति थामने का मन होता। 
सात जनम तक मिलन करेंगे,
यही ठानने का मन होता ...

काव्य हमारा करो अलंकृत,
उसको अनुभूति से भर दो। 
मेरा आँगन तुम बिन सूना,
आकर इसको तुम घर कर दो। 
"देव" जगत में तुम मनभावन,
और तुम्ही प्यारी लगती हो,
मेरे सपने पंख पसारें,
तुम उनको निश्चय से भर दो। 

तुम संग हो तो सदा प्रेम का,
राग तानने का मन होता। 
सात जनम तक मिलन करेंगे,
यही ठानने का मन होता। "

.......चेतन रामकिशन "देव"….....
दिनांक-१२.०४.२०१५ (CR सुरक्षित )