Wednesday, 16 May 2012

♥एकता की डोर..♥


♥♥♥♥♥एकता की डोर..♥♥♥♥♥♥

सितमगर के सितम सहने की आदत छोड़नी होगी!
हमे रिश्तों की यह ज़ंजीर फिर से जोड़नी होगी!
वो ताकत जो शरारत से हमें आपस में लड़वाए,
हमे एक डोर में बंधकर, वो ताकत तोड़नी होगी!

........"शुभ-दिन".....चेतन रामकिशन "देव"............

Sunday, 13 May 2012

♥उल्लास है माँ...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥उल्लास है माँ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

मेरी आँखों की चमक, चेहरे का उल्लास है माँ!
सात रंगों की सजावट भरा, आकाश है माँ!
माँ की तुलना नहीं, उपमा नहीं हो सकती है,
धरती पर ईश के स्वरूप का आभास है माँ!

मेरी पीड़ा में भी, माँ मुझको सहारा देती!
मेरी किश्ती को भी तूफां में किनारा देती!

मेरी सच्चाई का पालक, मेरा विश्वास है माँ!
मेरी आँखों की चमक, चेहरे का उल्लास है माँ!"

"
विश्व माँ दिवस पर अपनी दोनों माताओं और संसार की प्रत्येक माँ को
समर्पित पंक्तियाँ"

चेतन रामकिशन "देव"

♥उलफ़त भरे एहसास.♥


♥♥♥♥♥♥उलफ़त भरे एहसास.♥♥♥♥♥♥♥

दिल में उलफ़त भरे एहसास जगाना सीखो!
अपने आंसू ज़रा हिम्मत से सुखाना सीखो!

झूठ के किस्से कसीदों से न कुछ पाओगे
छोड़ के झूठ ज़रा, सच को निभाना सीखो!

जिंदगी दर्द से लबरेज़ है पहले ही बहुत ,
हो सके तो किसी रोते को, हँसाना सीखो!

धर्म के नाम पे लोगों को ना गुमराह करो
हिन्दू मुस्लिम नहीं इन्सान बनाना सीखो!"

.."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"...

Saturday, 12 May 2012

♥♥प्रतीक्षा की पीड़ा.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रतीक्षा की पीड़ा.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूँ, सखी सुबह की प्रथम किरण से!
हमारी मूरत भी घिस रही है, दुखों की वायु के इस क्षरण से!
तुम्हारे बिन लगते हैं अधूरे, मेरा दिवस और सखी निशा भी,
सखी तुम आकर के शीघ्रता से, जरा बचा लो हमे मरण से!"

......................चेतन रामकिशन "देव".......................

Friday, 11 May 2012

♥प्यार भरा स्पर्श..♥♥


♥♥♥♥♥♥प्यार भरा स्पर्श..♥♥♥♥♥♥♥♥

कभी किसी रोते के सर पर, प्यार से हाथ फिराकर देखो!
सुकूं मिलेगा तुमको यारों, सच का साथ निभाकर देखो!


अपने पथ में फूलों की तो, चाह सभी को रहती लेकिन,
कभी मगर तुम गैर के पथ से, कांटा कोई हटाकर देखो!


इस दुनिया में जीते जी ही, पाओगे जन्नत सी खुशियाँ,
अपनी माँ के क़दमों में तुम, गर्दन जरा झुकाकर देखो!"


दिल के दर्द को दिल में रखकर, "देव" नहीं बारूद बनाना,
दोस्त के कंधे पे सर रखकर, अपना हाल सुनाकर देखो!"


.........."शुभ-दिन"......चेतन रामकिशन "देव"...........

Tuesday, 8 May 2012

♥♥♥तुम्हारा प्यार..♥♥♥


♥♥♥♥♥♥तुम्हारा प्यार..♥♥♥♥♥♥

जब से मैंने प्यार तुम्हारा पाया है!
जीवन का हर क्षण देखो मुस्काया है!
अब राहों में मुझको चुभते शूल नहीं,
तुमने फूलों का जो जाल बिछाया है!

प्यार तुम्हारा सपनों का आधार बना!
प्यार तुम्हारा शब्दों का उद्गार बना!

प्यार तुम्हारी नई रोशनी लाया है!
जब से मैंने प्यार तुम्हारा पाया है.......

प्यार तुम्हारा मेरे कलम की शक्ति है!
प्यार तुम्हारा हर पीड़ा की मुक्ति है!
प्यार तुम्हारा रेशम जैसा कोमल है,
प्यार तुम्हारा पूजा, वंदन, भक्ति है!

प्यार तुम्हारा मेरा तो सत्कार बना!
प्यार तुम्हारा शब्दों का श्रंगार बना!

प्यार ने देखो मीठा गीत सुनाया है! !
जब से मैंने प्यार तुम्हारा पाया है!"


"
प्रेम जहाँ होता है, वहां प्रेम करने वाले एक दूसरे को ख़ुशी देने के इए जुटे रहते हैं! वे खुद की ख़ुशी से उस वक़्त जयादा ख़ुशी महसूस करते हैं, जब उनका प्रेम करने वाला द्वितीय पक्ष प्रसन्न होता है! प्रेम सकारत्मक दृष्टिकोण देता है!"

"रचना मेरी प्रेरणा को समर्पित"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८.०५.२०१२

Sunday, 6 May 2012

♥♥फूलों के पथ ♥


♥♥♥♥♥♥♥फूलों के पथ ♥♥♥♥♥♥♥

जीवन में फूलों के पथ भी आयेंगे,
आज मगर तुम काँटों से डरते क्यूँ हो!

ये सच है के मौत तो एक दिन आएगी,
पर जीवन में जीते जी मरते क्यूँ हो!

जो दुनिया नफरत की आँखों से देखे,
काम ज़माने में ऐसा करते क्यूँ हो!

नहीं सुकूं मिलता है ऐसी दौलत से,
लूट-पाट कर अपना घर भरते क्यूँ हो!"

..."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव"...

Saturday, 5 May 2012

♥♥♥♥मेरी संगिनी..♥♥♥♥


♥♥♥♥मेरी संगिनी..♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥मेरी संगिनी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरी ख़ामोशी में भी, मुझसे बोलती हो तुम!
जिंदगी में ख़ुशी का रंग, घोलती हो तुम!
मेरे चेहरे की थकन, पल में ही मिट जाती है,
घर का दरवाजा जब भी, हंसके खोलती हो तुम!"
.............चेतन रामकिशन "देव"..................

Friday, 4 May 2012

♥आत्मविश्वास.♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आत्मविश्वास.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

अँधेरा नष्ट कर आकाश में सूरज निकल आया!
उजाले की किरण से रोशनी का रंग खिल आया!

आशाओं से मन का तिमिर, अब दूर कर दें हम!
दिलों में पनपी नफरत को जरा बेनूर कर दें हम!

किया संघर्ष तो सूखे में भी, पानी निकल आया!
अँधेरा नष्ट कर आकाश में सूरज निकल आया!"

......."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"........

Thursday, 3 May 2012

♥♥सच का दीपक..♥♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥सच का दीपक..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

गमों के खौफ से डरकर, कभी भयभीत न होना!
तुम अपनी जिंदगी से प्यार का संगीत न खोना!

जो सच के साथ रहते हैं, उन्ही का नाम होता है!
उन्ही का नाम हर इतिहास में अभिराम होता है!

जो चाहते हो सुकूं तो, झूठ के मनमीत न होना!
गमों के खौफ से डरकर, कभी भयभीत न होना!"

....."शुभ-दिन".......चेतन रामकिशन "देव".....

अभिराम-सुन्दर

Wednesday, 2 May 2012

♥नारी( अनमोल चरित्र)♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥नारी( अनमोल चरित्र)♥♥♥♥♥♥♥

नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है!
हर एक रिश्ते में नारी, प्रेम का आभास होती है!
हमारे दुःख में देती साथ वो हमदर्द बनकर के,
सदा ही चन्द्र किरणों का धवल प्रकाश होती है!

यदि नारी नहीं होती तो, सब कुछ विषम होता!
नहीं सहयोगिता होती, नहीं जीवन सुगम होता!

है नारी हर्ष की रूपक, सुखद उल्लास होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है......

हर सम्बन्ध में कर्तव्य का पालन वो करती है!
पुरुष की जिंदगी में प्यार का हर रंग भरती है!
हमारी मुश्किलों में भी, हमे सहयोग देती है,
हमे वो भूल से भी दुःख तड़प देने से डरती है!

बिना नारी के तो संतान का न जन्म संभव है!
बिना नारी के तो संसार की रचना असंभव है!

है नारी पुष्पों की माला, यही अधिवास होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है......

न नारी धन की भूखी है, महज सम्मान चाहती है!
सरल व्यवहार चाहती है, वो स्वाभिमान चाहती है!
भले पूजन न तुम उसका करो, देवी के रूपों में,
पुरुष के जैसा समतापूर्ण, वो आह्वान चाहती है!

जहाँ नारी नहीं होती, वहां न हर्ष होता है!
बिना नारी पुरुष जीवन, नहीं उत्कर्ष होता है!

ये नारी सप्तरंगी किरणों का, आकाश होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है!"

" नारी- संसार की रचना, कल्पना उसके बिना अधूरी है! नारी का अर्थ व्यापक है, वो उपभोग की वस्तु नहीं है, वो दास नहीं, वो धन और दौलत के अथाह भंडार नहीं चाहती, वो बस समता. स्वाभिमान और प्रेम चाहती है! तो आइये जरा चिंतन करें और नारी का सम्मान समता के साथ करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०३.०५.२०१२

उक्त रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!
सर्वाधिकार सुरक्षित!










Tuesday, 1 May 2012

♥♥♥♥♥♥प्यार का फीका रंग..♥♥♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥प्यार का फीका रंग..♥♥♥♥♥♥♥♥

प्यार का रंग भी फीका सा पड़ गया अब तो,
न ही जूही है, नहीं चंपा, न चमेली है!

मेरी खुशियों पे भी ताला सा पड़ गया अब तो,
जिंदगी जिंदगी नहीं है अब पहेली है!

आज उसने भी मुझे देखा है हैरत से यूँ,
जबकि वो साथ पढ़ी और साथ खेली है!

जिंदगी से मुझे हर लम्हा ही मिले आंसू,
ऐसा लगता है के बस मौत अब सहेली है!"

"
आज प्रेम के इस रूप को लिखने का मन हुआ,
प्रेम यदि हर्ष देता है तो पीड़ा भी!"

चेतन रामकिशन "देव"
 

♥♥♥♥♥♥♥♥शालीनता..♥♥♥♥♥♥♥♥♥

हमको थककर के कभी चूर नहीं होना है!
हमको मानवता से न दूर कभी होना है!


लोग जो याद करें हमको ऐसा बनना है,
हमको भूले से भी मगरूर नहीं होना है!


लोग जो तंज कसें हमपर लूटमारी का,
हमको इस तरह, मशहूर नहीं होना है!"


..."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव"...

Sunday, 29 April 2012

♥♥♥♥♥♥♥♥मजहबी उन्माद..♥♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मजहबी उन्माद..♥♥♥♥♥♥♥

रंगों को भेद न हो, मजहबी उन्माद न हो!
अपने हाथों से कभी दंगा और फसाद न हो!

एक जैसे ही हैं हम, सारे जहाँ के मानव,
सरहद के नाम पर, हिंसा कोई विवाद न हो!

जीवन भर के हम संगी-साथी, 
प्यार का रंग कभी बर्बाद न हो!

प्यार में जैसे भी हालात हों सह लेना पर,
भूल से कभी नफरत का घर आबाद न हो!

प्यार के रंग में हम "देव" डूब जायें बस,
हर्ष की मुरली बजे, दुख का शंखनाद न हो!"

..."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"...

Friday, 27 April 2012


♥♥♥♥♥माँ का प्यार..♥♥♥♥♥♥♥



मेरे सर पर तुम्हारा हाथ और संग में दुआयें हैं!


ख़ुशी की रोशनी रोशन, बहुत महकी हवायें हैं!


मेरी माँ आपके इस प्यार का, आभार कैसे दूँ!


हैं सागर सी सरीखी माँ तो मैं जलधार कैसे दूँ!


मेरे जीवन में माँ ने हर्ष के, दीपक जलायें हैं!


मेरे सर पर तुम्हारा हाथ और संग में दुआयें हैं!"




मेरी माँ प्रेमलता जी को समर्पित पंक्तियाँ!


......"शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"......



Thursday, 26 April 2012


♥♥♥♥♥♥ज़िन्दगी के मायने.♥♥♥♥♥♥♥♥♥

किसी के दिल को करार दे दो, किसी के दिल को दुलार दे दो!
किसी की आँखों के अश्क पीकर, ख़ुशी की मीठी फुहार दे दो!
किसी को तालीमी नूर दे दो, किसी के मन को निखार दे दो!
पड़े किसी को अगर जरुरत, तो जिंदगी भी उधार दे दो!

........"शुभ-दिन"..........चेतन रामकिशन "देव"...........

Wednesday, 25 April 2012

♥उल्फ़त के दीपक.


♥♥♥उल्फ़त के दीपक.♥♥♥

आओ उल्फ़त के दीपक जला दो जरा!
आओ तुम नफरतों को भुला दो जरा!

हाथ में हाथ लेकर, मोहब्बत के संग,
तुम दिलों को दिलों से, मिला दो जरा!

ख़ार नफरत के तो बस बहाते लहू,
तुम गुलाबों के उपवन खिला दो जरा!"

..."शुभ-दिन"..चेतन रामकिशन "देव"..

♥कलमकार....♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कलमकार....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम उठाकर लिखें चलो हम, सुन्दर-२ मनोभावों को!
कलम उठाकर लिखें चलो हम, सच्चाई के प्रभावों को!
कलमकार बनना है हमको, जात-धर्म से ऊपर उठकर,
कलम उठाकर लिखें चलो हम, गंगा जमुनी सद्भावों को!"
........"संध्या-प्रणाम"....चेतन रामकिशन "देव"..........


Tuesday, 24 April 2012

♥मन में उड़ान..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मन में उड़ान..♥♥♥♥♥♥♥♥

उम्मीद के पंखों से, मन में उड़ान रखना!
तुम अपनी निगाहों में, आसमान रखना!

एक पल में नहीं बनता है इतिहास जहाँ में!
हर पल ही नहीं मिलता है उल्लास जहाँ में!
बातें बनाने भर से, कहाँ मिलती है विजय,
तुम्हें जो जीतना है तो करो, प्रयास जहाँ में!

तन से भले बूढ़े हो पर मन जवान रखना!
उम्मीद के पंखों से, मन में उड़ान रखना!"

..."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"...

Monday, 23 April 2012

♥हिंसा का प्रचलन..♥

♥♥♥♥♥♥♥हिंसा का प्रचलन..♥♥♥♥♥♥♥
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है!
आंसू किसी के देख के, होती नहीं दुखन है!
इस मुल्क में अब हो रही मजहब पे लड़ाई,
हर ओर देखो खून से रंजित हुआ अमन है!

गाँधी के नाम को भी, बर्बाद कर रहे हम!
आपस में लड़ रहे हैं, फसाद कर रहे हम!

भूमि है लाल खून से, सहमा हुआ गगन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है....

अब खून की गंगा भी बहाने में डर नहीं है!
नफरत की दीवारें हैं, अब कोई घर नहीं हैं!
लड़ते हैं लोग आजकल छोटी सी बात पर,
उनके दिलों में नेह का, कोई असर नहीं है!

गाँधी की शांति को वो कमजोर बताते हैं!
इस देश के वो लोग जो हथियार उठाते हैं!

खिलते हुए गुलाब का, सूखा हुआ चमन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है....

हिंसा से कभी रूह को आराम नहीं मिलता!
हिंसा से कभी दिल को ईनाम नहीं मिलता!
"देव" क्या पाओगे, हिंसा के पथ पे चलकर,
हिंसा के पथ पे कोई, भगवान नहीं मिलता!

हिंसा का पाठ जिंदगी, सुधार नहीं सकता!
हिंसा का रंग जिंदगी, निखार नहीं सकता!

न जाने शांति का, कब होना आगमन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है!"


" महात्मा गाँधी का ये देश, हिंसा की आग में धधक रहा है! हिंसा कभी मजहब की तो कभी किसी के हकों को लूटने की! किन्तु अशांति पैदा करके आप तन का, धन का और दुरित भावना का उल्लास तो ले सकते हैं, पर रूह और ह्रदय का सुकूं नहीं! तो आइये चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२४.४.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!