Saturday, 16 February 2013

♥शब्दों के मोती.♥


♥♥♥♥शब्दों के मोती.♥♥♥♥
आँखों में कुछ सपने बुनकर,
अपने मन की बोली सुनकर,
फिर से एक कविता लिखता हूँ,
मैं शब्दों के मोती चुनकर!

नहीं पता के इस कविता में,
कौनसा रस है, अलंकार है!
नहीं पता के इस कविता का,
जीवन कितना यादगार है!
नहीं पता के इस कविता में,
कितनी खामी और कमी है,
नहीं पता के इस कविता का,
लेखन कितना असरदार है!

किन्तु फिर भी मुझे चमकता,
शब्दों में आशा का दिनकर!
फिर से एक कविता लिखता हूँ,
मैं शब्दों के मोती चुनकर!"

...चेतन रामकिशन "देव"...
दिनांक-१६.०२.२०१३

Friday, 15 February 2013

♥प्यार का बसंत..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥प्यार का बसंत..♥♥♥♥♥♥♥♥
पीले फूलों की खुश्बू है, बरस रही बरसात!
बारिश की बूंदें लाईं हैं, खुशियों की सौगात!
चलो बसंती हो जायें हम, इन फूलों के संग,
बारिश की प्यारी बूंदों से, कहेंगे दिल की बात!

सखी मुझे हर मौसम में, भाये तेरा साथ!
मुझे कभी न तन्हा करना, नहीं छुड़ाना हाथ!

सखी तेरे ही प्रेम से हर्षित, हैं मेरे दिन रात!
पीले फूलों की खुश्बू है, बरस रही बरसात..

उपवन देखो खिले खिले हैं, धुली वनों की देह!
सखी कभी न कम करना तुम, अपना ये स्नेह!
सुख दुख के हम तुम साथी हैं, प्रेम है अपना "देव",
बड़े भाग्य से मिलता जग में, प्रेम का ये स्नेह!

बारिश में तो और भी प्यारा, लगे तुम्हारा रूप!
तुम छाया हो प्रकृति की, नैसर्गिक स्वरूप!

तेरे साथ से बन जाती है, देखो बिगड़ी बात!
पीले फूलों की खुश्बू है, बरस रही बरसात!"

...........चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-१६.०२.२०१३

Thursday, 14 February 2013

♥अंतर्मन का ध्यान.♥


♥♥♥अंतर्मन का ध्यान.♥♥♥
अंतर्मन का ध्यान तुम्हीं हो!
अधरों की मुस्कान तुम्हीं हो!
जो ह्रदय को झंकृत कर दे.
ऐसा सुन्दर गान तुम्हीं हो!

तुम अम्बर के तारों जैसी!
शीतल किन्ही फुहारों जैसी!
तुम्हें देखकर कहता हूँ मैं,
तुम हो मधुर बहारों जैसी!

तुम्ही "देव" की पथ-प्रदर्शक,
सही-गलत का ज्ञान तुम्हीं हो!
जो ह्रदय को झंकृत कर दे.
ऐसा सुन्दर गान तुम्हीं हो!"

.....चेतन रामकिशन "देव".....
दिनांक-१४.०२.२०१३

Tuesday, 12 February 2013

♥एहसान ..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥एहसान ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दौलत से कभी प्यार को, पाया नहीं जाता!
एहसान मोहब्बत में, जताया नहीं जाता!

पढ़ लेते हैं वो मेरी, निगाहों में दर्द को,
चाहकर भी यहाँ दर्द, छुपाया नहीं जाता!

चुन चुन के मैंने लफ्ज, सजाए हैं गीत में,
चोरी का गीत मुझसे तो, गाया नहीं जाता!

न याद रखें वो, मेरी तस्वीर को लेकिन,
पर रूह के रिश्तों को, भुलाया नहीं जाता!

हर कोई नहीं "देव" है, हमदर्द यहाँ पर,
दुनिया को अपना दर्द, सुनाया नहीं जाता!"

..........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-१२.०२.२०१३


Monday, 11 February 2013

♥प्यार की धारा..♥


♥♥♥♥♥♥♥प्यार की धारा..♥♥♥♥♥♥♥♥
न मन में तेरे खोट है, न दिल में बदी है!
अच्छाई भी जिन्दा हैं सखी, तू जो यदि है!
जब भी तुझे देखा, मेरा चेहरा चमक उठा,
तू प्यार की धारा से भरी,कोई नदी है!

ये तेरी मोहब्बत, मेरे दिल का करार है!
बारिश की बूंद जैसी, तू रिमझिम फुहार है!

तुझसे ही मेरी जिंदगी से, फूलों से लदी है!
न मन में तेरे खोट है, न दिल में बदी है!"

.........चेतन रामकिशन "देव".........
दिनांक-११.०२.२०१३

Sunday, 10 February 2013

♥दमकती धूप..♥


♥♥♥♥♥♥दमकती धूप..♥♥♥♥♥♥♥♥
सूरज का उजाला है, दमकती ये धूप है!
जीवन कभी सुन्दर, कभी होता कुरूप है!
किन्तु कभी जीवन से, कोई खेद न करना,
हँसना कभी, रोना यही, जीवन का रूप है!

फूलों की त्वचा है, कभी दुख का पठार है!
जीवन में सुनामी, कभी सुख की बहार है!

जीवन का सदा ऐसा ही, होता स्वरूप है!
सूरज का उजाला है, दमकती ये धूप है..

जीवन कभी एक अंश पे, स्थिर नही होता!
जीवन सदा उल्लास का, सागर नहीं होता!
जीवन में "देव"आती हैं, उलझन नई नई,
जीवन सदा तारों भरा, अम्बर नहीं होता!

खोना कभी पाना, यही जीवन की गति है!
जीवन में कभी हर्ष, कभी दुख की क्षति है!

जीवन कभी सूखा, कभी देखो अनूप है!
सूरज का उजाला है, दमकती ये धूप है!"

..........चेतन रामकिशन "देव".........
दिनांक-११.०२.२०१३

Saturday, 9 February 2013

♥प्रेम का आत्मसात..♥


♥♥♥♥♥♥प्रेम का आत्मसात..♥♥♥♥♥♥
एहसास में मैं तुमसे, मुलाकात करूँगा!
हाथों में लेके हाथ, मैं तुमसे बात करूँगा!
चाहे हो मुझसे दूर, तुम हजारों मील पर,
मैं तेरे लिए प्रेम की, बरसात करूँगा!

हँसना कभी, रोना कभी, होता है प्यार में!
पाना कभी, खोना कभी, होता है प्यार में!

तेरी याद से रौशन मैं, हर एक रात करूँगा!
एहसास में मैं तुमसे, मुलाकात करूँगा..

तेरी ही मोहब्बत से, ये एहसास पले हैं!
कुछ कांटे भी मिलें हैं, तो कुछ फूल खिले हैं!
चाहत को अपनी "देव", दबा मैं नहीं सकता,
मुझको तेरी चाहत से , ये जज्बात मिले हैं!

एहसास की दुनिया का , सफ़र खुशगवार है!
ये सच है तुमसे मिलने को, दिल बेकरार है!

मिलते ही तुमसे, तुमको आत्मसात करूँगा
एहसास में मैं तुमसे, मुलाकात करूँगा!"

............चेतन रामकिशन "देव"...........
दिनांक-०९.०२.२०१३

Friday, 8 February 2013

♥निर्धन के अश्रु.♥


♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन के अश्रु.♥♥♥♥♥♥♥♥
बचपन बिलख रहा है, जवानी भी रो रही है!
मेरे देश में निर्धन की दशा, ऐसी हो रही है!
सुनता नहीं कोई भी यहाँ, इनके दर्द को,
कानून भी चुप-चाप है, सत्ता भी सो रही है!

मरते हुए निर्धन को, दवा मिल नही पाती!
न जल उसे मिलता है, हवा मिल नहीं पाती!

निर्धन की जिंदगी, बड़ी गुमनाम हो रही है!
बचपन बिलख रहा है, जवानी भी रो रही है....

निर्धन के हित में, कोई न आवाज उठाये!
है कौन जो निर्धन को गले, अपने लगाये!
निर्धन का दर्द "देव", नहीं कोई समझता,
बेशक कोई निर्धन, यहाँ दुख अपना सुनाये!

निर्धन की वेदना यहाँ, सुनता नहीं कोई!
निर्धन के पथ से शूल भी, चुनता नहीं कोई!

निर्धन की जिंदगी, यहाँ नीलाम हो रही है!
बचपन बिलख रहा है, जवानी भी रो रही है!"

.............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-०८.०२.२०१३

Wednesday, 6 February 2013

♥दूरियां..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥दूरियां..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम भले ही मेरी नजरों से, दूर जाते हो!
मुझको दिन रात मगर, याद बहुत आते हो!

तेरी आँखों में भी, आंसू की बूँद दिखती हैं,
फिर भी न जाने मुझे, इतना क्यूँ सताते हो!

तुम जो आते हो तो, अँधेरा चला जाता है,
दीप बनकर के मेरे दिल में, जगमगाते हो!

तुमको नफरत है अगर, मेरे नाम से तो फिर,
मेरी तस्वीर को सीने से, क्यूँ लगाते हो!

इतना तो "देव" की, आँखों को पता है हमदम,
तुम भी गीतों को मेरे, दिल से गुनगुनाते हो!"

..........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-०६.०२.२०१३

Tuesday, 5 February 2013

♥मेरा आपा.. ♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मेरा आपा.. ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पतझड़ कभी, सावन कभी, बारिश ने भिगोया!
पर मैंने कभी हार के, आपा नहीं खोया!

गम की तपन से दिल मेरा फौलाद हो गया,
अश्कों ने कहा फिर भी मगर, मैं नहीं रोया!

हाँ सच है शराफत से, मुझे कुछ न मिल सका,
पर मैंने कभी जुल्म का, अंकुर नहीं बोया!

चिथड़ों में भी जीता रहा, तड़पा भी भूख से,
पर मैं किसी इन्सान को, ठग कर नहीं सोया!

ए "देव" पापियों की, भीड़ बढ़ गयी इतनी,
गंगा ने भी गुस्से में कोई, पाप न धोया!"

............चेतन रामकिशन "देव"...........
दिनांक-०५.०२.२०१३

♥प्रीत की डोर..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥प्रीत की डोर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
न ही मन में रुदन है कोई, न ही कोई शोर!
सखी बांध ली जबसे मैंने, तेरी प्रीत की डोर!
तिमिर मिटा है जीवन पथ से, हुआ नया प्रकाश,
सखी तुम्हारा प्रेम है जैसे, नयी नवेली भोर!

सखी तुम्हारी प्रीत है अद्भुत, सुन्दर है व्यवहार!
सदा ही मुझको प्रेरित करते, सखी तेरे उद्गार!

सखी तुम्हारा है प्रेम है व्यापक, नहीं है कोई छोर!
न ही मन में रुदन है कोई, न ही कोई शोर......

सखी तुम्हारे प्रेम से मेरे, स्वप्न हुए साकार!
सखी तुम्हारा प्रेम है जैसे, कुदरत का उपहार!
सखी तुम्हारे प्रेम ने मुझको, दिए खुशी के फूल,
सखी तुम्हारे प्रेम है जैसे, नदियों की जलधार!

सखी बड़ा ही प्यारा लगता, मुझे तेरा संवाद!
सखी तुम्हारे प्रेम से भूला, मैं तो सभी विवाद!

दृश्य बड़ा ही मनभावन है, वन में नाचे मोर!
न ही मन में रुदन है कोई, न ही कोई शोर.....

सखी तुम्हारी अनुभूति है, हर क्षण मेरे संग!
सखी तुम्हारे प्रेम से मिलते, इन्द्रधनुष के रंग!
सखी तुम्हारे प्रेम से देखो, "देव" हुए प्रसन्न,
सखी तुम्हारे प्रेम से मिलती, मन को सदा उमंग!

सखी तुम्हारे प्रेम का मिलना, बड़े भाग्य की बात!
सखी तुम्हारे प्रेम से हर्षित, मेरे दिन और रात!

सखी तुम्हारी भावुकता से, मन भी हुआ विभोर!
न ही मन में रुदन है कोई, न ही कोई शोर!"

"
प्रेम-जब परस्पर समर्पण के साथ ह्रदय में स्फुट होता है, तो निश्चित रूप से सकारात्मकता की प्राप्ति होती है! प्रेम की दीप्ति से, मन के अंधकार दूर हो जाते हैं, तो आइये इस दीप्ति को ग्रहण करें..."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०५.०२.२०१३

(मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित)
सर्वाधिकार सुरक्षित..

Monday, 4 February 2013

♥सुगन्धित फूल..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सुगन्धित फूल..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सुगन्धित फूल के जैसी, मेरे दिल को लुभाती हो!
मेरी आँखों में सपनों की, नयी दुनिया वसाती हो!

मधुर हो तुम मधु जैसी, बड़ी कोमल हो रेशम सी!
हो गंगाजल सी तुम पावन, सखी सुन्दर हो झेलम सी!
तुम्हारा रूप है जैसे, दमकती लालिमा कोई,
अमावस थम गईं सारी, सखी तुम रात पूनम सी!

बड़ा आराम मिलता है, मुझे हँसना सिखाती हो!
सुगन्धित फूल के जैसी, मेरे दिल को लुभाती हो!"

................चेतन रामकिशन "देव"...............
दिनांक-०४.०२.२०१३

Friday, 1 February 2013

♥♥सपने..♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सपने..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रंग-बिरंगे गुब्बारों से, कुछ सपने आँखों में आते!
कभी किसी में आंसू बिखरें, कभी किसी में हम मुस्काते!

सपनों की दुनिया में बेशक, कभी धूप तो, कभी है छाया!
जो जीवन से दूर हुए हैं, इन सपनों ने उन्हें मिलाया!
शबनम की बूंदों के जैसे, सपने सचमुच ही प्यारे हैं,
इसीलिए तो इन आँखों से, सपनों का संसार रचाया!

कभी विरह की तान छेड़ते, कभी मिलन के दोहे गाते!
रंग-बिरंगे गुब्बारों से, कुछ सपने आँखों में आते!"

....................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-०१.०२.२०१३ 

Thursday, 31 January 2013

♥सहारा..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥सहारा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गमगीन जिंदगी को सहारा दिया तुमने!
भटकी हुई कश्ती को किनारा दिया तुमने!
तुमने ही जगाईं हैं, मेरे दिल में आरजू,
मुझको कभी चंदा, कभी तारा दिया तुमने!

जीवन को मेरे, प्यार के रंगों से सजाया!
तुमने ही अँधेरे में सखी, दीप जलाया!

पतझड़ को भी जाने का, इशारा दिया तुमने!
गमगीन जिंदगी को सहारा दिया तुमने!

अधरों से तेरे, प्यार भरे गीत सुनूँगा!
उपवन से तेरे वास्ते, कुछ फूल चुनूँगा!
हाँ सच है सखी, रूबरू तुमसे नहीं हुआ,
पर मिलने के तुमसे, मैं सदा ख्वाब बुनूँगा!

किस्मत से मेरी "देव", ये उपहार मिला है!
जीवन में तेरे प्यार से, हर रंग खिला है!

झुकती हुई डाली का, सहारा दिया तुमने!
गमगीन जिंदगी को सहारा दिया तुमने!"

............चेतन रामकिशन "देव".............
दिनांक-३१.०१.२०१३

Wednesday, 30 January 2013

♥प्यार का एहसास..♥♥


♥♥♥♥♥♥प्यार का एहसास..♥♥♥♥♥♥♥♥
जब से तुम्हारे प्यार का एहसास हो गया!
खुशियों से सराबोर ये, आकाश हो गया!

हमदम तेरी चाहत का, असर ऐसा हुआ है,
जैसे के अंधेरों में भी, प्रकाश हो गया!

तेरे प्यार की खुश्बू से, महकता है ये जहाँ,
जीवन से हर एक दर्द का, अवकाश हो गया!

इस प्यार ने सिखलाई है, इंसानियत मुझे,
औरों का गम भी, मुझको बड़ा खास हो गया!

है "देव" असर ये, मेरे दिल की दुआओं का,
जो दूर सा दिखता था, वही पास हो गया!"

.............चेतन रामकिशन "देव"............. 
दिनांक-३०.०१.२०१३

Tuesday, 29 January 2013

♥वेदना की यात्रा..♥


♥♥♥♥♥♥♥वेदना की यात्रा..♥♥♥♥♥♥♥♥
संध्या हुई तो वेदना के दीप जल गए!
छाया तिमिर तो धूप के शोले पिघल गए!
जिनसे रखी थी मन ने समर्थन की भावना,
वो लोग ही मुंह फेर के, हमसे निकल गए!

जीवन में हर तरफ हमें, कंटक बहुत मिले!
हम भूख से पीड़ित हुए, विरह में हम जले!
मानव हैं मगर उनको, मुझपे आई न दया,
अपनों के ही हाथों से हैं, दिन रात हम छले!

मौसम वो सभी हर्ष के, देखो बदल गए!
संध्या हुई तो वेदना के दीप जल गए....

नयनों से भी अश्रु की धार बहने लगी है!
स्वप्नों की वो आधारशिला ढ़हने लगी है!
किन्तु मैं देखो "देव", यहाँ, हूँ अभी जीवित,
लगता है मेरी देह भी, दुःख सहने लगी है!

पीड़ा की तपती आग में, अश्रु उबल गए!
संध्या हुई तो वेदना के दीप जल गए!"

..............चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-२९.०१.२०१३

Monday, 28 January 2013

♥दर्द का चेहरा.♥



♥♥♥♥♥♥♥♥दर्द का चेहरा.♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दुनिया से अपने दर्द का चेहरा छुपा लिया! 
रोती हुई आँखों को भी, मैंने हंसा दिया!

जब से मिली है उनकी ये नूरानी मोहब्बत,
मैंने यहाँ गम से भरा, सूरज बुझा दिया!

नफरत का जहर, मुझपे नहीं करता है असर,
दिल में जो मैंने प्यार का, मंजर सजा लिया!

दिल कहता है ये झूठ है, पानी का बुलबुला,
लफ्जों को मैंने सच का, फलसफा सिखा दिया!

हिम्मत ने मेरी "देव", मुझे चाहा है इतना,
जीवन की मुश्किलों से भी, लड़ना सिखा दिया!"

.........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-२९.०१.२०१३


Sunday, 27 January 2013

♥आसमान..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥आसमान..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सपने हजार दिल में है, मन में उड़ान है!
छूना हमें एक रोज, यहाँ आसमान है!

आँखों को तेरे बिन, कोई चेहरा नहीं भाता,
बिन तेरे अधूरा हूँ मैं, तू मेरी जान है!

अपनों के दिए ज़ख्म, भले भर गए लेकिन,
पर दिल पे मेरे ज़ख्म का, अब तक निशान है!

वो साथ था जब तक, तो यहाँ रहती थीं खुशियाँ,
उसके बिना ये घर नहीं, खाली मकान है!

अब "देव" मुझे डर नहीं, तन्हाई का कोई,
मेरे साथ जो यादों का, हसीं बागवान है!"

.........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-२७.०१.२०१३

Saturday, 26 January 2013

♥♥जुगनू..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जुगनू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रात भर जुगनू की तरह, मैं जला करता हूँ!
अपनी तकदीर से न फिर भी गिला करता हूँ!

दर्द की आग में तपकर, ये हुनर पाया है,
फूल बनकर के मरुस्थल में, खिला करता हूँ!

है बुरा वक़्त के अपने न बदल जायें कहीं,
अपनी पहचान छुपाकर के, मिला करता हूँ!

तेरी रंजिश से कभी दिल के हुए जो टुकड़े,
आज उन टुकड़ों को, मैं फिर से सिला करता हूँ!

बड़ी मायूसी है पर "देव" नहीं हारा मैं,
वक़्त के साथ मैं, हंसकर के चला करता हूँ!"

..........चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२६.०१.२०१३






Friday, 25 January 2013

♥♥पत्थर के इन्सां..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥पत्थर के इन्सां..♥♥♥♥♥♥♥
जिंदगी के बिना, जिंदा भी यहाँ कैसे रहूँ!
कोई सुनता ही नहीं, दर्द यहाँ कैसे कहूँ!

मेरे आंसू ने मेरा हाल बताया दिल को,
दर्द होता है निगाहों को, बता कैसे बहूँ!

मैं हूँ मजलूम के फुटपाथ पे भी सो जाऊं,
भूख लगती है तो रोटी के बिना कैसे रहूँ!

एक दिन देखो मैं पिंजरे को तोड़ जाऊंगा,
बेगुनाह होके भी आखिर, मैं सजा कैसे सहूँ!

मेरा दिल कहता के "देव" चलो दूर कहीं,
होके इन्सां भला पत्थर की तरह कैसे रहूँ!"

............चेतन रामकिशन "देव".............
दिनांक-२५.०१.२०१३