Tuesday, 9 April 2013

♥♥काश समझते मेरे मन.♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥काश समझते मेरे मन.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
काश समझते मेरे मन को, काश मेरे दिल को पढ़ पाते!
न ही मुझसे दूरी करते, न ही मुझसे नजर चुराते!

बिना मेरा दिल पढ़े भला तुम, कैसे मेरे भाव समझते!
अपनेपन के भावों के बिन, कैसे मेरे घाव समझते!
"देव" अगर तुम इक अक्षर भी, पढ़ लेते मेरी चाहत का,
तो तुम मेरे दर्द समझकर, आँखों का सैलाब समझते!

मुझे गिराकर तुम यूँ हमदम, अगली सीढ़ी न चढ़ जाते!
काश समझते मेरे मन को, काश मेरे दिल को पढ़ पाते!"

..................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-०९.०४.२०१३

Monday, 8 April 2013

♥♥तन्हा रात .♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तन्हा रात .♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
फिर से तन्हा रात आ गयी, चुपके चुपके रोना होगा!
जबरन अपनी आंख मूंदकर, हमको फिर से सोना होगा!

नहीं पता था प्यार में हमको, दर्द मिलेगा इतना सारा,
गुमसुम गुमसुम होगा ये दिल, चैन भी अपना खोना होगा!

नहीं कोई गिरते इन्सां को, यहाँ सहारा देता यारों,
अपने ही कंधे पर हम को, अपना ये तन ढ़ोना होगा!

तुमसे कोई गिला नहीं है, नहीं शिकायत मुझको कोई,
शायद मेरी किस्मत में ही, ये सब देखो होना होगा!

"देव" न कोई पढ़ ले मेरी, रोनी सूरत के लफ्जों को,
दिन निकले से पहले अपनी, सूरत को फिर धोना होगा!"

.................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-०८.०४.२०१३




Friday, 5 April 2013

♥♥मेरी ख्वाहिश..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मेरी ख्वाहिश..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सारी दुनिया जीत के मैंने, नहीं सिकंदर बनना चाहा!
मजलूमों का खून बहाकर, नहीं धुरंधर बनना चाहा!
बस ऐसा बनना चाहा के, जिसे देखकर दुनिया खुश हो,
हसरत रखी सदा झील की, नहीं समुन्दर बनना चाहा!

जिस मानव के जीवनपथ में, अच्छाई की लय होती है!
उस मानव की इक दिन देखो, सारे जग में जय होती है!

न आंधी की मुझे तमन्ना, नहीं बबंडर बनना चाहा!
सारी दुनिया जीत के मैंने, नहीं सिकंदर बनना चाहा...

न दौलत की हसरत दिल में, न महलों के जैसा घर हो!
सदा रहे जीवित मानवता, गलत काम से मुझको डर हो!
"देव" मैं अपनी नजरों को बस, मिला सकूँ खुद की नजरों से,
मेरी इच्छा नहीं कभी भी, मेरे क़दमों में अम्बर हो!

सच की राह पे चलने वाले, भले ही कुछ पीड़ा पाते हैं!
लेकिन इक दिन आता है जब, सच के लम्हें मुस्काते हैं!

न चाहत है तलवारों की, न ही खंजर बनना चाहा! 
सारी दुनिया जीत के मैंने, नहीं सिकंदर बनना चाहा!"

.................चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-०५.०४.२०१३

Wednesday, 3 April 2013

♥♥फुर्सत.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥फुर्सत.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज दर्द के गलियारों से, दो पल फुर्सत के लाया हूँ!
खुली हवा में सांसें ली हैं और जी भर के मुस्काया हूँ!

फुर्सत के इन दो लम्हों का, मंजर देखो बड़ा ही प्यारा!
नदियाँ मुझसे मिलने दौड़ीं, हरियाली ने मुझे दुलारा!
"देव" हमेशा इन लम्हों की, याद रहेगी मेरे दिल को,
इन छोटे से दो लम्हों ने, मन से दुख का बोझ उतारा!

आज मिली है इतनी फुर्सत, गिरकर देखो उठ पाया हूँ!
आज दर्द के गलियारों से, दो पल फुर्सत के लाया हूँ!"

...................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-०३.०४.२०१३


Tuesday, 2 April 2013

♥♥मखमल का दिल.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मखमल का दिल.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पत्थर जैसी इस दुनिया में, मखमल का दिल ढूंढ रहा हूँ!
जिसकी ठंडक दिल को भाए, ऐसा आँचल ढूंढ रहा हूँ!

आसमान में मार धुँयें की, और रसायन पानी में है,
मैं गंगा के पानी में ही, अब गंगा जल ढूंढ रहा हूँ!

बिन पानी के जिन खेतों की, फसलें देखो झुलस रही हैं,
आज उन्ही खेतों की खातिर, गीला बादल ढूंढ रहा हूँ!

कौन कौन है ऐसा जिसने, इस जनता को नहीं छला हो,
आज सियासी भारत का मैं, इक ऐसा दल ढूंढ रहा हूँ!

"देव" नहीं सुनता है कोई, इस दुनिया में दर्द किसी का,
इसीलिए तो अपने दुख का, अब खुद ही हल ढूंढ रहा हूँ!"

...................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-०३.०४.२०१३



♥♥कंठ की प्यास.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कंठ की प्यास.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्यास कंठ की बुझ न पाई, बिन छाया के जला पथ में! 
लोग ठोकरें मार रहे हैं, पत्थर बनकर ढला हूँ पथ में!

जब जी चाहा मुझे रुलाया, करुण निवेदन भी ठुकराया, 
बिना तुम्हारे आंखें रोयीं, बिना तुम्हारे दिल मुरझाया!
फिर भी तुमसे गिला नहीं है, "देव" नहीं रंजिश है कोई,
किस्मत में जो लिखा होगा, वो सब मेरे हिस्से आया!

जिसको मैंने अपना माना, उसी के हाथों छला हूँ पथ में!
प्यास कंठ की बुझ न पाई, बिन छाया के जला पथ में!"

.................चेतन रामकिशन "देव"...................
दिनांक-०२.०४.२०१३

Monday, 1 April 2013

♥♥ताजमहल पर..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ताजमहल पर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
ताजमहल पर लिखा सबने, लेकिन मैं तुम पर लिखूंगा!
मैं मुफ़लिस का दर्द देखकर, अपनी आंखे तर लिखूंगा!

जब भी दर्द मिला है मुझको, मेरी माँ ने मुझे संभाला,
इसीलिए मैं माँ के दिल को, ममता का इक घर लिखूंगा!

जुर्म बढ़ गया इतना सारा, बेटी घर से निकल न पाए,
उस बेटी के नाजुक दिल का, सहमा सहमा डर लिखूंगा!

जिस दुनिया को देखा न हो, उस दुनिया में ले जाते हैं,
मैं अपने प्यारे ख्वाबों को, किसी परी के पर लिखूंगा!

झूठ बोलकर "देव" किसी से, अपनायत की चाह नहीं है,
सच्ची चाहत के सजदे में, बेशक अपना सर लिखूंगा!"

....................चेतन रामकिशन "देव"......................
दिनांक-०१.०४.२०१३ 

Saturday, 30 March 2013

♥तुम्हारा सम्बन्ध..♥


♥तुम्हारा सम्बन्ध..♥
ह्रदय के स्पंदन में हो!
तुम पूजा में, वंदन में हो!
तुमसे ही जीवन में उर्जा,
तुम जीवन के हर क्षण में हो!

मीत तुम्हीं हो, जीत तुम्हीं हो!
मेरे मन की प्रीत तुम्हीं हो!
हर मौसम की रंगत तुमसे,
तुम ही बारिश, शीत तुम्हीं हो!

हरियाली के हरे रंग में,
तुम फसलों में, तुम वन में हो!
तुमसे ही जीवन में उर्जा,
तुम जीवन के हर क्षण में हो...

तुम गीतों का भाव पक्ष हो,
तुम शब्दों का अलंकार हो!
तुम यमुना का शीतल पानी,
तुम गंगा की मधुर धार हो!

तुम्ही हमारी स्मरण शक्ति,
तुम्ही "देव" के यौवन में हो!
तुमसे ही जीवन में उर्जा,
तुम जीवन के हर क्षण में हो!"

....चेतन रामकिशन "देव"....
दिनांक-३१.०३.२०१३

Friday, 29 March 2013

♥♥गीतों के बोल.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥गीतों के बोल.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी याद में मेरे हमदम, कुछ गीतों के बोल लिखूंगा!
मैं अपने लफ्जों से अपने, जीवन का भूगोल लिखूंगा!

मेरे यारों शै उल्फत की, नहीं बाजारों में बिकती है,
इसीलिए मैं इस उल्फत को, हर पल ही बेमोल लिखूंगा!

तेरे नूर की उजली किरणें, धवल चांदनी के जैसी हैं,
मैं तेरे प्यारे मुखड़े को, चाँद की तरह गोल लिखूंगा!

इस दुनिया में बिन मेहनत के, मंजिल पास नहीं आती है,
बिन हिम्मत के अपने कश्ती, हर पल डांवाडोल लिखूंगा!

"देव" यहाँ पर जिन लोगों को, भाता है बस खून खराबा,
मैं ऐसे लोगों के तन पर, जंगलीपन का खोल लिखूंगा!"

..................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-२९.०३.२०१३


Thursday, 28 March 2013

♥♥बादल के आंसू..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥बादल के आंसू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
विरह भाव से पीड़ित होकर, बादल के भी आंसू बरसे!
बादल के प्यासे नैना भी, सखी तेरे दर्शन को तरसे!

जिधर भी देखो उसी दिशा में, आंसू की नदियाँ बहती हैं!
सखी न जाने कब आएगी, मन ही मन अपने कहती हैं!
बादल का रंग तन्हाई में, "देव" तरसकर हुआ है काला,
कुछ कहने को शब्द नहीं हैं, ये नदियाँ चुप चुप रहती हैं!

इंतजार में सखी तुम्हारे, बीत गए हैं कितने अरसे!
विरह भाव से पीड़ित होकर, बादल के भी आंसू बरसे!"

......................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-२८.०३.२०१३

Wednesday, 27 March 2013

♥♥ख्वाहिशों की होली♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥ख्वाहिशों की होली♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
किसी का दिल यहाँ होली के, जैसे जल रहा होगा!
कोई अपनी अमीरी में, उफन कर चल रहा होगा!
कोई भूखा है अरसे से, मगर ईमान रखता है,
कोई पर अपने मकसद में, जहाँ को छल रहा होगा!

जो मुफलिस भी पनप जाये, यहाँ ऐसा नहीं होता!
कोई खरबों में जीता है, कहीं पैसा नहीं होता!
यहाँ पर "देव" मजलूमों की, अर्जी कौन सुनता है,
यहाँ पीड़ित जो चाहता है, कभी वैसा नहीं होता!

अदालत में भी मुफ़लिस का, मुकदमा टल रहा होगा!
किसी का दिल यहाँ होली के, जैसे जल रहा होगा!"

..................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-२७.०३.२०१३

Tuesday, 26 March 2013

♥♥मोहब्बत के रंग..♥♥


♥♥♥♥♥♥मोहब्बत के रंग..♥♥♥♥♥♥♥♥
रंग से रंग मोहब्बत का, मिलाया जाये!
आओ नफरत को यहाँ, जड़ से मिटाया जाये!

न ही हिन्दू, नहीं मुस्लिम, न इसाई कोई,
आओ खुद को जरा इंसान, बनाया जाये!

प्यार को दिल में, छुपाने से बढ़ी बेचैनी,
प्यार है जिससे चलो, उसका जताया जाये!

आज होली पे भले लकड़ियों में आग न हो,
अपने दिल में छुपी, नफरत को जलाया जाये!

उम्र भर जो मेरे चेहरे पे, "देव" दिखता रहे,
प्यार का रंग वही, सबको लगाया जाये!"

.........चेतन रामकिशन "देव"..............
दिनांक-२६.०३.२०१३

Monday, 25 March 2013

♥♥मेरी होली..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मेरी होली..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चाँद से ली है धवल चांदनी, सूरज से लाली लाया हूँ!
मैं होली पर तुझे भिगोने, बादल से पानी लाया हूँ!

सखी तेरी सुन्दर आँखों में, गहरा काजल भर दूंगा मैं!
सखी तेरे प्यारे चेहरे पर, रंग प्यार का मल दूंगा मैं!
सखी तुम्हारे माथे पर मैं, तिलक लगाऊंगा रोली का,
और तुम्हे तुलसी की भांति, "देव" मानकर जल दूंगा मैं!

बाहर से भी खिला खिला हूँ, भीतर से भी मुस्काया हूँ!
चाँद से ली है धवल चांदनी, सूरज से लाली लाया हूँ!"

...................चेतन रामकिशन "देव"...................
दिनांक-२५.०३.२०१३

Sunday, 24 March 2013

♥♥♥होश..♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥होश..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
होश में रहना जरुरी है, हिफाजत के लिए!
मार देंगे वो हमें वरना, सियासत के लिए!

ये है हिन्दू,ये मुसलमा,ये इसाई है यहाँ,
बाँट हमने तो लिया ,खुद को इबादत के लिए!

फोड़ दो आँखे जो देखे हवस के अंदाज़ में ,
वरना पछताओगे तुम, अपनी शराफत के ले लिए!

फिक्र है किसको यहाँ पर मुल्क के जज्बात की,
लोग बनते हैं यहाँ नेता, तिजारत के लिए!

"देव" तुम जबसे मेरे दिल, की डगर पे आये हो,
जिंदगी लगती है कम ,मुझको मोहब्बत के लिए!"

...............चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-२५.०३.२०१३


Saturday, 23 March 2013

♥♥अँधा कानून..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥अँधा कानून..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कातिल तो क़त्ल करके, रिहा होने लगा है!
मजलूम तो हर रोज, तबाह होने लगा है!

कानून ने पट्टी, यहाँ आँखों पे बांध ली,
अब झूठ यहाँ, सच का गवाह होने लगा है!

सांसों को अपनी बेच के, ले आया दवाई,
लफ्जों के दिल में दर्द, अथाह होने लगा है!

बचपन भी रहा दर्द में, और दुख में जवानी,
अब देखो मेरा, गम से निकाह होने लगा है!

ए "देव" मेरे मुल्क का, कैसा निजाम है,
मैं सच को सच लिखूं तो, गुनाह होने लगा है!"

................चेतन रामकिशन "देव"...............
( २३.०३.२०१३)

Friday, 22 March 2013

♥♥ हालात..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ हालात..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपने हालात पे रोकर भी, क्या मैं पाउँगा!
सूखे पत्तों की तरह, पेड़ से गिर जाऊंगा!

याद आयेंगे तुम्हें, लम्हें मेरी चाहत के,
तेरी महफ़िल में गज़ल, जब मैं गुनगुनाऊंगा!

मुझको अंदाजा है, के जीत अभी मुश्किल है,
फिर भी तकदीर को, मैं अपनी आजमाऊंगा!

अपने माँ बाप से, जलने का हुनर सीखा है,
मैं अंधेरों से कभी, खौफ नहीं खाऊंगा!

चाँद पे घर हो तमन्ना, मैं "देव" रखता नहीं,
हाँ मगर सबकी निगाहों में, घर बनाऊंगा!"

............चेतन रामकिशन "देव".............
( २२.०३.२०१३)


♥♥खून की होली.♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥खून की होली.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खून की होली खेल रहा है, आज ये भारत देश!
भीग गया है खून से दामन, भीग रहा गणवेश!
फिजा में देखो गूंज रहा है, हत्याओं का शोर,
आज मनुज से लुप्त हो रहे, मानव के अवशेष!

प्रेम भाव के रंगों से अब, रंगत लुप्त हुयी है!
गुंजियों से भी अपनेपन की, खुशबु सुप्त हुयी है!

रहना सहना बदल गया, बदल गया परिवेश!
रक्त की होली खेल रहा है, आज ये भारत देश...

निर्ममता से आज हो रहा, नारी का अपमान!
भूख प्यास से निकल रही है, निर्धन जन की जान!
मंचों से कहते हैं नेता, भारत उदय हुआ है,
किन्तु आज भी फुटपाथों पे, सोता हिंदुस्तान!

नेताओं के घर उड़ता है, देखो रंग गुलाल!
इधर देश का निर्धन तबका, बेबस और कंगाल!

सच्चाई का गला रेतता, मिथ्या का आदेश!
रक्त की होली खेल रहा है, आज ये भारत देश...

रंग लगाने तक न सिमटे, होली का त्यौहार!
नहीं लुटे नारी की इज्ज़त, न हो अत्याचार!
"देव" न रखे कोई मानव, अपने मन में बैर, 
एक दूजे पे नहीं करें हम, पीड़ा की बौछार!

तभी आत्मा तक पहुंचेगा, होली का संगीत!
और जहाँ में हो जाएगी, मानवता की जीत!

चलो करें हम प्रेषित सबको, प्रेम का ये सन्देश!
रक्त की होली खेल रहा है, आज ये भारत देश!"
"
देश का कोई कोना, कोई स्थल, कोई स्थान, हिंसा, द्वेष से अछूता नहीं! लोग कभी मजहब के नाम पर खून बहाते हैं तो कभी दौलत के लिए..कभी कोई नारी की इज्ज़त को छिन्न-भिन्न कर देता है तो कभी नेताओं की उपेक्षा से, देश का निर्धन तबका भूखे पेट मर जाता है, चिंतन करना होगा, वरना " खून की होली" पर विराम नहीं लग सकता!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२२.०३.२०१३ 

"
सर्वाधिकार सुरक्षित.."
मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!"

Thursday, 21 March 2013

♥♥चांदनी का सफर..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥चांदनी का सफर..♥♥♥♥♥♥♥
चाँद बनकर के जरा, साथ मेरे जलते रहो!
है सफ़र लम्बा जरा, साथ मेरे चलते रहो!

जिंदगी दर्द में भी, तुमको रास आएगी,
वक़्त के साथ मेरे यार, जरा ढ़लते रहो!

मेरा दावा है के सच्चाई छुप नहीं सकती,
झूठ के साथ भले, सारा जहाँ छलते रहो!

भूल से भी न कभी मौका, सही खो देना,
ऐसा न हो के सदा, हाथ यहाँ मलते रहो!

"देव" मखमल की तरह, जिंदगी हो जाएगी,
ख्वाब बनकर के निगाहों में, जरा पलते रहो!"

..............चेतन रामकिशन "देव"................
( २१.०३.२०१३)

♥♥जिंदा लाश..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥जिंदा लाश..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दर्द के डर से कभी, जिंदा लाश मत होना! 
देखकर गम को कभी, तुम उदास मत होना!

लोग तुमसे जो, यहाँ दूरी बना लें यारों,
झूठ का तुम कभी, ऐसा लिबास मत होना!

जिंदगी एक ही रिश्ते पे, खत्म होती नहीं,
कोई जाए भी मगर, तुम निराश मत होना!

चंद सिक्कों के लिए बेच दो, ईमान तलक,
अपनी इच्छाओं के, इतने भी दास मत होना!

"देव" जीवन में कभी हार, कभी जीत मिले,
हार जाओ भी मगर, तुम हताश मत होना!"

............चेतन रामकिशन "देव"...........
( २०.०३.२०१३)

Tuesday, 19 March 2013

♥♥मन की सरगम..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मन की सरगम..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरे मन की सरगम हो तुम, अंतर्मन का गान!
सखी तुम्हारे प्रेम से रहते, मेरे तन में प्राण!
तुम ज्योति जलते दीपक की, तुम सूरज की धूप,
तुम्ही चाँदनी की शीतलता, भोर का तुम आहवान!

सदा ही मेरे साथ चलीं तुम, थाम के मेरा हाथ!
हर पीड़ा में, हर उलझन में, दिया है तुमने साथ!

सखी तुम्हारे प्रेम से हो गई, हर मुश्किल आसान!
मेरे मन की सरगम हो तुम, अंतर्मन का गान....

तुम निर्देशन, तुम अवलोकन, तुम करती सहयोग!
सखी तुम्हारे प्रेम से देखो, मिटा दुखों का रोग!
तुम सावन की मधुरम वर्षा, तुम उपवन का फूल,
तुम्ही तेज हो मुखमंडल का, तुम्ही हर्ष का योग!

सखी तुम्हारे प्रेम से होता, उर्जा का संचार!
सखी तुम्हारे प्रेम से सुन्दर, लगता है संसार!

तुम गौरव हो जीवन पथ का, तुम मेरा सम्मान!
मेरे मन की सरगम हो तुम, अंतर्मन का गान..

बड़ा ही गहरा होता है ये, प्रेम का अदभुत रंग!
अंतिम क्षण तक साथ रहूँगा, सखी तुम्हारे संग!
सखी तुम्हारे प्रेम का जबसे, किया "देव" ने बोध,
तबसे हमको पीड़ा दुःख ने, नहीं किया है तंग!

बड़े ही प्यारे, बड़े ही सुन्दर, सखी तेरे उदगार!
सखी बड़ा ही सुखमय लगता, तेरे प्रेम का सार!

तुम्ही नयनों का दर्शन हो, तुम्ही हमारा ध्यान!
मेरे मन की सरगम हो तुम, अंतर्मन का गान!"
"
प्रेम-एक ऐसा सम्बन्ध, एक ऐसी अनुभूति, जिसका प्रकाश, जीवन के भौतिक तिमिर को ही नहीं अपितु मानसिक तिमिर को भी, उज्जवल करता है! प्रेम, जहाँ होता है वहां, अपनत्व की संभावनायें, अत्यंत प्रबल होती हैं! तो आइये प्रेम करें.."

"
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१९.०३.२०१३ 

"
मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व-प्रकाशित.."