Thursday, 12 September 2013

♥♥♥गुजरे पल....♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥गुजरे पल....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जोड़ के छोटी छोटी कड़ियाँ, प्यार का एक घर बना रहा था!
घर के आँगन के पौधों को, मैं अपनायत सिखा रहा था!
मगर वक़्त के तूफानों ने, सब कुछ तहस नहस कर डाला,
अभी तलक तो मैं सपनों को, सीढ़ी एक एक गिना रहा था!

नहीं पता था इस जीवन में, मंजर ऐसे भी आयेंगे!
नाम हथेली पे लिखे जो, वो लम्हों में मिट जायेंगे!
जो हमको अपना कहकर के, देते थे अपनायत हर पल,
वही लोग खंजर लेकर के, मुझको दुश्मन बतलायेंगे!

मैं अपनी रोती आँखों को, चुप चुप होना सिखा रहा था!
जोड़ के छोटी छोटी कड़ियाँ, प्यार का एक घर बना रहा था!

हाँ पर ऐसे द्रश्य देखकर, मुझे तजुर्बा बहुत मिला है!
टूटे फूटे गुलदस्ते में, सपनों का फिर फूल खिला है!
"देव" मेरे इस दर्द ने मुझको, मंत्र दिया फिर से जीने का,
इसीलिए आगे बढ़ने को, मैंने खुद का घाव सिला है!

फिर जीवन में आस जगी जब, मैं गुजरे पल भुला रहा था!
जोड़ के छोटी छोटी कड़ियाँ, प्यार का एक घर बना रहा था!"

................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-१३.०९.२०१३

Wednesday, 11 September 2013

♥♥जीवन का नियम.♥♥

♥♥♥जीवन का नियम.♥♥♥
कभी जहर तो कभी दवा है!
कभी घुटन तो कभी हवा है!

कभी दर्द तो कभी खुशी है,
कभी हैं आंसू, कभी हंसी है!

कभी हार तो कभी जीत है,
कभी है रंजिश, कभी प्रीत है!

कभी रिक्त है, कभी भरा है!
कभी है धुंधला, कभी खरा है!

कभी सुमन है, कभी खार है,
कभी दिलासा, कभी मार है!

कभी दंड है, कभी है मुक्ति!
कभी है उलझन, कभी है युक्ति!

कभी है कोमल, कभी चुभन है!
कभी है ज्वाला, कभी अमन है!

कभी सरल है, कभी विषम है!
इस जीवन का यही नियम है!

हंसकर चाहें,
रोकर चाहें,
इसी नियम पर चलते जाओ!

याद करेगी,
"देव" ये दुनिया,
दीपक बनकर जलते जाओ!"

…चेतन रामकिशन "देव"….
दिनांक-१२.०९.२०१३

Tuesday, 10 September 2013

♥♥एहसासों का रिश्ता....♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥एहसासों का रिश्ता....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मन के दर्पण पर अंकित है, छवि तुम्हारी प्यारी प्यारी!
एहसासों का रिश्ता तुमसे, तुमसे दिल की नातेदारी!
अपनी छाया देकर के तुम, मन को शीतल कर देती हो,
सखी तेरे बिन सूनी लगती, मुझको तो ये दुनियादारी!

जब तुम हंसती मुस्काती हो, तो सरसों के फूल बरसते!
सखी तेरे दर्शन पाने को, हर पल मेरे नैन तरसते!
और जब दर्शन हो जाते हैं, तो मन पुलकित हो जाता है!
तेरी सोच में, तेरे ख्वाब में, मेरा ये दिल खो जाता है!

तुमको पाकर झूम रहा मैं, महक रही है ये फुलवारी!
मन के दर्पण पर अंकित है, छवि तुम्हारी प्यारी प्यारी…।

हर पीड़ा की दवा तुम्हीं हो, एहसासों की खान तुम्ही हो!
इस दुनिया में मेरे प्रेम की, एक सुन्दर पहचान तुम्ही हो!
"देव" तुम्हारी प्यारी सूरत, मेरी रूह में समा रही है!
प्यार बिना सब कुछ सूना है, मुझको वो ये बता रही है!

तुमको पाकर सूख गयी है, वो आंसू की नदिया खारी!
मन के दर्पण पर अंकित है, छवि तुम्हारी प्यारी प्यारी!"

.....................चेतन रामकिशन "देव"....................
दिनांक-१०.०९.२०१३

Monday, 9 September 2013

♥पीड़ा का विध्वंस.

♥♥♥♥♥♥♥♥पीड़ा का विध्वंस...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भाव पक्ष अश्रु से भीगा, करुण पक्ष में मन रोया है!
जिसको बहुत निकट समझा था, वही भीड़ में क्यूँ खोया है!
अनुभूति की फसल पकेगी, कैसे अपने मन से कह दूँ,
मिटटी ने भी उगला उसको, मैंने जो अंकुर बोया है!

बहुत निवेदन किया था मैंने, और आस्था बतलाई थी!
और दशा इस पीड़ित मन की, मैंने उसको दिखलाई थी!
एक क्षण को भी उसने देखो, नीर नहीं सोखा आँखों से,
मैंने जिसकी अभिवादन में, सुख की दौलत ठुकराई थी!

तन की दशा हुयी जड़वत है, न जागा ये, न सोया है!
भाव पक्ष अश्रु से भीगा, करुण पक्ष में मन रोया है….

कभी भूल से भी न उसको, तनिक क्षति भी पहुंचाई थी!
जिसको मैंने सही गलत की, व्यापक नीति समझाई थी!
"देव" मगर उस अपने ने ही, मार दिया है अनुभूति को,
जिसको मैंने अपनी पीड़ा और व्याकुलता बतलाई थी!

नहीं मिला कोई भी अपना, स्वयं ही अपना शव ढ़ोया है!
भाव पक्ष अश्रु से भीगा, करुण पक्ष में मन रोया है!"

..................चेतन रामकिशन "देव"...................
दिनांक-०९.०९.२०१३

Sunday, 8 September 2013

♥♥♥तेरी मूरत....♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी मूरत....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दूर न जाना पल भर को भी, मेरे साथ सदा रहना है!
सखी पूजकर तेरी मूरत, तुझको अपना रब कहना है!
अपने मन के एहसासों में, वसा लिया है तुझको मैंने,
नहीं हमें विरह भावों का, दर्द यहाँ एक पल सहना है!

प्यार भरे ढाई अक्षर से, मन पे तेरा नाम लिखा है!
सखी तेरे पावन चिंतन को, मैंने अपना धाम लिखा है!

नहीं थमेगा प्यार ये अपना, हमको जल बनकर बहना है!
दूर न जाना पल भर को भी, मेरे साथ सदा रहना है…।

सखी प्यार की सुन्दर किरणें, पावन ज्योति के जैसी हैं!
बनें आत्मा का आभूषण, सुन्दर मोती के जैसी हैं!
जब से सखी हमारे मन पर, प्यार भरे बादल छाये हैं!
तब से देखो द्वेष, न इर्ष्या, कभी हमारे घर आये हैं!

सखी प्यार का हम दोनों को, जग में परचम लहराना है!
साथ बहायेंगे हम आंसू, साथ साथ में मुस्काना है!
"देव" कभी जब अपनी आयु, पूरी हो जाये जीवन की,
एक दूजे की खातिर हमको, नया जन्म फिर से पाना है!

सखी तुम्हारे आदर्शों से, मुझको सच को सच कहना है!
दूर न जाना पल भर को भी, मेरे साथ सदा रहना है!"

..................चेतन रामकिशन "देव".....................
दिनांक-०९.०९.२०१३

"
प्रेम-एक ऐसा शब्द, जिसमे अपनत्व का सागर छुपा है, प्रेम जिस सम्बन्ध के साथ भी हो, चाहें सखी के संग, चाहें समाज, चाहें परिवार, चाहें मानवता के संग, यदि वो समर्पण भावना से निहित है तो निश्चित रूप से गहरे आत्मिक सुख की अनुभूति देता है, तो आइये समर्पित भावों के साथ प्रेम का विस्तार करें!"

"सर्वाधिकार सुरक्षित"
"मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित"

Saturday, 7 September 2013

♥♥प्रेम का दीपक....♥♥

♥♥♥♥♥♥♥प्रेम का दीपक....♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चित्त में तेरी छवि है, आत्मा में तू वसी है!
प्रेम का तू दिव्य दीपक, तू बड़ी सुन्दर सखी है!
हर घड़ी तेरा ये जीवन, हर्ष के पथ पे रहे बस,
तू ही आशा, तू ही उर्जा, और तुझसे हर खुशी है!

तुमसे शब्दों की तरंगे, तुमसे भावों की मधुरता!
जो न मिलता साथ तेरा, तो नहीं जीवन सुधरता!

मेरे हाथों में तुम्हारे, प्रेम की मेहंदी रची है!
चित्त में तेरी छवि है, आत्मा में तू वसी है…

तुम जहाँ हो खुश रहो बस, आंख को आंसू मिले न!
दर्द की तपती अगन से, ये तुम्हारा दिल जले न!
"देव" तुझको जिंदगी में, कोई उलझन न सताए,
कोई तुझको ठेस न दे, और तेरा दिल छले न!

तुम लगन हो, आस्था हो, रूह का नाता तुम्हीं से!
और व्याकुल मन को मेरे, चैन भी आता तुम्हीं से!

तुमसे पथ में हैं सुमन और तुमसे ही दुनिया सजी है!
चित्त में तेरी छवि है, आत्मा में तू वसी है!"

............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-०७.०९.२०१३

Friday, 6 September 2013

♥♥♥♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दिल में हो दुख भले, चेहरे पे हंसी रख लेना,
कोई सुनता ही नहीं, दुख यहाँ ज़माने में,

बड़ी मुश्किल से यहाँ मिलती, जिंदगी देखो,
एक पल लगता है पर, जिंदगी गंवाने में!

नहीं मालूम है उसने, मुझे छोड़ा कैसे,
उम्र बीती मेरी जिस शख्स को, भुलाने में!

कैसे मुफ़लिस को बीमारी से, मिले छुटकारा,
दवा मिलती नहीं अश्कों से, दवाखाने में!

मेरे एहसास को आखिर वो समझता कैसे,
मेरे रिश्ते को लगा रस्म, जो बनाने में!

देखो उन लोगों के दिल भी, बड़े छोटे निकले,
नोट छपते हैं यहाँ, जिनके कारखाने में!

"देव" बेरंग जिंदगी है, मगर जीता हूँ,
अपनी तन्हाई के संग गुम हूँ, मुस्कुराने में!"

.............चेतन रामकिशन "देव"..............
दिनांक-०७.०९.२०१३

Thursday, 5 September 2013

♥♥जुगनू..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥जुगनू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
वक़्त के साथ कोई दांव, नया चलते हैं!
हम वो जुगनू हैं जो, दीपक की तरह जलते हैं!

ये यकीं है मेरा, तुम इसको न गुरुर कहो,
हम तो गम सहके भी, फूलों की तरह खिलते हैं!

गैर तो गैर हैं, मैं उनसे क्या शिकवा रखूं,
लोग अपने भी, रकीबों की तरह मिलते हैं!

लोग आते हैं बहुत, देखने हुनर मेरा,
हम जो हाथों से अपने, ज़ख्म कभी सिलते हैं!

आदमी तो बहुत हैं "देव", मगर इन्सां कम,
बड़ी मुश्किल से यहाँ, नेक बशर मिलते हैं!"

...........चेतन रामकिशन "देव".............
दिनांक-०६.०९.२०१३

Tuesday, 3 September 2013

♥♥एहसास की खुश्बू ..♥♥

♥♥♥♥एहसास की खुश्बू ..♥♥♥♥♥♥♥
मेरे एहसास की खुश्बू में, समाई है तू!
मेरी पाकीजा इबादत की, कमाई है तू!

तुझसे मिलकर मेरी आँखों में खुशी दिखती है,
मेरी बेचैन कराहों की, दवाई है तू!

थामकर हाथ तेरा मुझको, मिली है राहत,
घिरे तूफान से, बाहर मुझे लाई है तू!

तुझसा कोई भी सखी, है नहीं ज़माने में,
देख कुदरत ने तसल्ली से, बनाई है तू!

"देव" एहसास तेरे, दिल से न जुदा होंगे,
मेरे लफ्जों में ग़ज़ल बनके, समाई है तू!"

..........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-०३.०९.२०१३

Monday, 2 September 2013

♥♥♥हंसने का हुनर..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥हंसने का हुनर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गम में हंसने का हुनर, मेरे दिल ने पाया है!
दर्द ने मुझको भले, रोज ही सताया है!

आदमी आदमी का दर्द, समझता ही नहीं,
आदमी है या खुदा, तूने बुत बनाया है!

अपनी आँखों में जिसके ख्वाब, वसाये मैंने,
उसने शीशे की तरह, ख्वाब हर गिराया है!

ज़ख्म भी बख्शे मगर, उसको दुआ देता हूँ,
मेरे माँ बाप ने मुझको, यही सिखाया है!

"देव" है खुद पे यकीं, मंजिलों का पाने का,
आज बेशक ही महल, रेत का बनाया है!"

...........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-०२.०९.२०१३

Sunday, 1 September 2013

♥♥एक गीत..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥एक गीत..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रूठ जाऊं मैं अगर, मुझको मनाने आना!
चांदनी रात में एक, गीत सुनाने आने!

बिन तेरे चुभते हैं, काँटों मेरे पैरों में सखी,
मेरी राहों में जरा, फूल बिछाने आना!

मेरी सूरत को न दुनिया की नजर लग जाये,
मेरी मूरत को जरा दिल में, छुपाने आना!

तुमसे दूरी न सही जाये, एक पल को भी,
आखिरी सांस तलक प्यार, निभाने आना!

"देव" ये जिस्म तो नश्वर है, ये मिट जायेगा,
रूह में मेरी सखी, खुद को समाने आना!"

...........चेतन रामकिशन "देव"...........
दिनांक-०१.०९.२०१३

Saturday, 31 August 2013

♥♥मिट्टी का दीपक..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मिट्टी का दीपक..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बेबस लोगों की पीड़ा को, इन लफ्जों में भरने निकला!
मिट्टी का दीपक होकर भी, नया उजाला करने निकला!
नहीं जरुरी संत का चोला, हर इन्सां को संत बनाये,
मैं अपने एहसास पूजकर, सुन्दर माला करने निकला!

जो मानवता की नीति से, दुनिया को अपना कहते हैं!
ऐसे लोग सदा लोगों की, रूहों में जिन्दा रहते हैं!

मैं अपने छोटे कदमों से, बड़ा सफर तय करने निकला!
बेबस लोगों की पीड़ा को, इन लफ्जों में भरने निकला।

भले ही घर आँगन छोटा हो, दिल को अपने बड़ा करो तुम!
सच कहने से न घबराना, गलत काम से डरा करो तुम!
"देव" नहीं छोटा होता है, कोई इंसां जात धर्म से,
हर इन्सां को मानव समझो, सोच को अपनी बड़ा करो तुम!

सही काम जो मेहनत का हो, नहीं कभी छोटा होता है!
जो रहता तकदीर भरोसे, वो इन्सां तो बस रोता है!

मैं मेहनत की आंच में तपकर, खुद को सुंदर करने निकला!
बेबस लोगों की पीड़ा को, इन लफ्जों में भरने निकला।"

.....................चेतन रामकिशन "देव"......................
दिनांक-०१-०९.२०१३

Friday, 30 August 2013

♥♥मेरे पास...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥मेरे पास...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दूरियां खत्म करो, मेरे पास हो जाओ!
मेरी गजलों का सखी, तुम लिबास हो जाओ!
अपने चेहरे की हंसी, नाम तेरे कर दूंगा,
दर्द से तुम जो कभी, गर उदास हो जाओ!

तेरी जुल्फों के लिए, फूल मैं बन जाऊंगा!
थाम के हाथ तुझे, रास्ता दिखाऊंगा!
देखके मुझको तेरे, होठों पे हंसी आये,
देखके तुझको सखी, मैं भी मुस्कुराऊंगा! 

प्यार ये अपना सखी, हमको अमर करना है!
हर जनम में तुझे पाने का, जतन करना है!

मेरे एहसास में रब बनके, वास हो जाओ!
दूरियां खत्म करो, मेरे पास हो जाओ!"

..........चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-३०.०८.२०१३

Thursday, 29 August 2013

♥♥थोड़ी सी जगह..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥थोड़ी सी जगह..♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरी मासूम मोहब्बत को तुम पनाह दे दो!
अपने दिल में मुझे थोड़ी सी, तुम जगह दे दो!

मैंने तुमसे ही उम्मीदें, यहाँ लगाईं हैं,
जरा बुझते हुए चराग को, हवा दे दो!

भरी दुनिया में नहीं कोई भी हमदर्द मेरा,
बड़ी मुश्किल में हूँ मैं, थोड़ी सी दुआ दे दो!

मेरे हर दर्द को, उस रोज शिफा मिल जाये,
अपने एहसास की, गर थोड़ी सी दवा दे दो!

"देव" मेरा भी इबादत में, यकीं हो जाये,
जो अगर मुझको, मोहब्बत का तुम खुदा दे दो!"

.............चेतन रामकिशन "देव".............
दिनांक-३०.०८.२०१३

Wednesday, 28 August 2013

♥♥देखना चाहता है दिल...♥♥

♥♥♥♥♥♥देखना चाहता है दिल...♥♥♥♥♥♥♥
देखना चाहता है दिल, तुमको बार बार सखी!
तू ही एहसास मेरे दिल का है, करार सखी!
जिंदगी में नहीं खुशियों की, कमी है मेरी,
जब से बख्शा है मुझे तूने, अपना प्यार सखी!

सोचके तुझको मेरे दिल को, खुशी मिलती है!
मेरी अधरों को भी तुमसे ही, हंसी मिलती है!

मंद न करना कभी प्यार की रफ़्तार सखी!
देखना चाहता है दिल, तुमको बार बार सखी…

बांसुरी की भी धुनों में, तू समाई है सखी!
तूने ही सच की मुझे, राह दिखाई है सखी!
"देव" तकदीर मेरी, जो तुम्हारा प्यार मिला,
तेरी तस्वीर ही अब, दिल में लगाई है सखी!

मैं तेरे साथ में, अपने कदम बढ़ाऊंगा!
प्यार का दीप तेरे साथ, मैं जलाऊंगा!

हर घड़ी देना मुझे, अपना तू दीदार सखी!
देखना चाहता है दिल, तुमको बार बार सखी!"

..........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-२८.०८.२०१३

Tuesday, 27 August 2013

♥राधिका बनके जरा..♥


♥♥♥♥♥राधिका बनके जरा..♥♥♥♥♥♥♥
राधिका बनके जरा जमुना किनारे आना,
प्यार के गीत सखी साथ साथ गायेंगे!

देखकर चाँद हमे रोशनी बिखेरेगा,   
और तारे भी हमें देखके, मुस्कायेंगे!

प्यार से दिल नहीं भरता है, इस जनम में सखी, 
हर जनम में के, तुझे अपना हम बनायेंगे!

तू मेरी राधिका बनकर के, साथ में रहना,
हम किशन बनके, तेरी रूह में समायेंगे!

राधिका तू जो कभी "देव" के घर आएगी,
खिलते फूलों से तेरी राह, हम सजायेंगे!"

..........चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२७.०८.२०१३

Sunday, 25 August 2013

♥काला बाजार..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥काला बाजार..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
देश के चारों स्तंभों को, अब मैं तो बाजार लिखूंगा!
मैं मुफलिस की आंख से गिरते, अश्कों की बौछार लिखूंगा!
न हिन्दू दुश्मन, न मुस्लिम, न ही सिख, इसाई कोई,
देश के गद्दारों की खातिर, झाँसी की तलवार लिखूंगा!

देश के भीतर छुपे हुए, दुश्मन को सब मिलकर के छांटो!
देश का दुश्मन तो दुश्मन है, हिन्दू मुस्लिम में क्यूँ बाँटो!

मातृभूमि के हित में अपने, लहू की मैं तो धार लिखूंगा!
देश के चारों स्तंभों को, अब मैं तो बाजार लिखूंगा………

लोग करोड़ों इस भारत के, दो रोटी की खातिर मरते!
और देश के खद्दरधारी, अरबों का घोटाला करते!
"देव" देश में निर्दोषों को, यहाँ सजा मिलती है लेकिन,
सड़कों पे औरत की इज्ज़त, गुंडे देखो छलनी करते!

देश के भीतर ही देखो तुम, नहीं सुरक्षित देश की नारी!
और देश के युवा वर्ग को, मार रही है ये बेकारी!

जिसको फिक्र नहीं लोगों की, क्या उसको सरकार लिखूंगा!
देश के चारों स्तंभों को, अब मैं तो बाजार लिखूंगा!"

.....................चेतन रामकिशन "देव"...................
दिनांक-२६.०८.२०१३

Saturday, 24 August 2013

♥ माँ( दुआओं का खजाना)...♥



♥♥♥♥♥ माँ( दुआओं का खजाना)...♥♥♥♥♥♥
दुआ माँ के खजाने से, कभी भी कम नहीं होती!
कभी माँ अपने बच्चों को, सुलाए बिन नहीं सोती!
ये दुनिया जो भी है यारों, बदौलत माँ की ही तो है,
नहीं मिलता जनम हमको, अगर जो माँ नहीं होती!

माँ श्रद्धा है, माँ वंदन है, है माँ ही आस्था देखो!
दिखाए माँ ही बच्चों को, ये सच का रास्ता देखो!

भले ही क्रोध में हो माँ, मगर ममता नहीं खोती!
दुआ माँ के खजाने से, कभी भी कम नहीं होती…

मैं अपनी जिंदगानी में परेशां, जब भी होता हूँ!
मैं माँ की गोद रखकर के अपने सर को रोता हूँ!
मेरी माँ हाथ जब अपने, मेरे सर पर फिराती है,
हर एक उलझन मेरी मिटती, खुशी की नींद आती है!

समर्पण माँ से ज्यादा कोई देखो, कर नहीं सकता!
दुआ देती है माँ जितनी, कोई वो कर नहीं सकता!

माँ अपने दिल में देखो, द्वेष के अंकुर नहीं बोती !
दुआ माँ के खजाने से, कभी भी कम नहीं होती…

वो जिनके दिल में माँ के वास्ते, सम्मान होता है!
दुआ से माँ की उनका, हर सफर आसान होता है!
सुनो तुम "देव" भूले से भी, माँ को अश्क न देना,
के माँ के देखकर आंसू, वहां भगवान रोता है!

माँ रचना है, माँ पालन है, माँ बच्चों की विधाता है!
के माँ को देखकर बच्चों की, सूरत चैन आता है!

नहीं मिलता से दौलत से, यहाँ माँ नाम का मोती!
दुआ माँ के खजाने से, कभी भी कम नहीं होती!"

"
माँ, दुनिया का सबसे उच्च मानवीय सम्बन्ध, जिसका कोई विकल्प नहीं!
ममता से भरा ह्रदय, जो बच्चों के लाख दिल दुखाने के बाद भी, अपने मुख से बच्चों के प्रति कभी कोई बद्दुआ नहीं निकलती, तो आइये धरती पर विधाता का प्रतिरूप लिए, माँ के इस चरित्र को नमन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२५.०८.२०१३

" मेरी माँ कमला देवी जी एवं प्रेमलता जी को समर्पित"

"
सर्वाधिकार सुरक्षित,
मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!"

चित्र साभार-सम्मानित कवयित्री दीपिका जी!

Friday, 23 August 2013

♥♥ खुशी की आस ...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥ खुशी की आस ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है!
मुझे पाना है मंजिल को, सदा ये प्यास रखी है!
भले ही उम्र भर मैंने, यहाँ सब कुछ गंवाया है,
मगर माँ बाप की हर सीख, अपने पास रखी है!

ये दौलत रूह के रिश्तों के, जैसी हो नहीं सकती!
ये दौलत प्यार के पौधे, दिलों में बो नहीं सकती!

भले ही दर्द पाया पर, हकीक़त खास राखी है!
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है…

नहीं इंसान जो औरों के दुख में, काम न आये!
दुआ करना किसी के घर, गमों की शाम न आये!
सुनो तुम "देव" मुझको कद्र है, तेरी मोहब्बत की,
तुम्हे देखे बिना दिल को, मेरे आराम न आये!

अभावों में भी जो मंजिल को, अपनी ठान लेते हैं!
जो अपनी आत्मा तक देखो, खुद को जान लेते हैं!

उन्ही लोगों ने कायम आज तक, इतिहास रखी है!
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है!"

.................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-२३.०८.२०१३

♥ खुशी की आस ...♥

♥♥♥♥♥♥♥ खुशी की आस ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है!
मुझे पाना है मंजिल को, सदा ये प्यास रखी है!
भले ही उम्र भर मैंने, यहाँ सब कुछ गंवाया है,
मगर माँ बाप की हर सीख, अपने पास रखी है!

ये दौलत रूह के रिश्तों के, जैसी हो नहीं सकती!
ये दौलत प्यार के पौधे, दिलों में बो नहीं सकती!

भले ही दर्द पाया पर, हकीक़त खास राखी है!
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है…

नहीं इंसान जो औरों के दुख में, काम न आये!
दुआ करना किसी के घर, गमों की शाम न आये!
सुनो तुम "देव" मुझको कद्र है, तेरी मोहब्बत की,
तुम्हे देखे बिना दिल को, मेरे आराम न आये!

अभावों में भी जो मंजिल को, अपनी ठान लेते हैं!
जो अपनी आत्मा तक देखो, खुद को जान लेते हैं!

उन्ही लोगों ने कायम आज तक, इतिहास रखी है!
गमों की रात है लेकिन, खुशी की आस रखी है!"

................चेतन रामकिशन "देव"...............
दिनांक-२३.०८.२०१३