Sunday, 8 December 2013

♥♥♥मिसाल ...♥♥

♥♥♥♥♥मिसाल ...♥♥♥♥♥♥
बाद मरने के भी मिसाल रहे!
जिंदगी इतनी बेमिसाल रहे!

हर अँधेरा वज़ूद खो देगा,
अपने हाथों में जो मशाल रहे!

भूल से भी दुखे किसी का दिल,
अपने दिल को मगर मलाल रहे!

हमने दुनिया में क्या किया आकर,
अपने आपे से ये सवाल रहे!

प्यार मुझको जहां में जबसे हुआ,
हर घड़ी उसका ही ख्याल रहे!

रौंद दें जो वतन के दुश्मन को,
खून में अपने वो उबाल रहे!

"देव" वो रात में भी जगमग हो,
जिसके दिल में यहाँ ज़माल रहे!"

........चेतन रामकिशन "देव"……।
दिनांक-०८.१२.२०१३

Saturday, 7 December 2013

♥♥शीत ऋतू की लंबी रातें...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥शीत ऋतू की लंबी रातें...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है!
सपनों में भी दस्तक देता, मेरे दिल को ऐसा गम है!
बेचैनी का कोहरा छाया, धवल उजाला भी बेदम है,
बदन हमारा कांप रहा और, ओस दुखों की बेहद नम है!

न कोई हमदर्द मिला है, दिल की बातें दिल में रह गईं!
सारी खुशियां और उम्मीदें, पलक झपकते देखो बह गईं!

छांटे से भी छंट नहीं पाता, दिल पे छाया इतना तम है!
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है....

जब भी कुछ लिखना चाहा तो, भाव गमों के ही आते हैं!
सुबह सवेरे दिवस रात में, गम के बादल छा जाते हैं!
"देव"जिसे तुम अपना मानो, लोग वही क्यूँ खो जाते हैं,
जिनसे चाहत की आशा हो, वो ही नफरत बो जाते हैं!

नहीं पता कब दिन निकलेगा, इसी सोच में लग जाता हूँ!
गर भूले से झप्पी आये, तो ख्वाबों में जग जाता हूँ!

पीड़ा की बरसात कराये, कितना बेदर्दी मौसम है!
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है!"

..................चेतन रामकिशन "देव"….............
दिनांक-०७.१२.२०१३

Friday, 6 December 2013

♥♥रंग प्रेम का...♥♥

♥♥♥रंग प्रेम का...♥♥♥♥
प्रेम ऋषि की बोली जैसा!
प्रेम सुखद रंगोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा!

प्रेम, भावना की ज्योति है!
प्रेम सदा उज्जवल मोती है!
प्रेम हो जिसके मन में उसकी,
सोच नहीं विकृत होती है!

प्रेम सुगन्धित फूलों सा है,
प्रेम है चन्दन, रोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा …।

प्रेम सलिल एहसासों में है!
प्रेम अटल विश्वासों में है!
"देव" प्रेम है प्रेरक शक्ति,
प्रेम नवल प्रयासों में है!

प्रेम जनम है, प्रेम गति है,
है परिणय की डोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा!"

....चेतन रामकिशन "देव"…।
दिनांक-०६.१२.२०१३

Thursday, 5 December 2013

♥♥तुम्हारे हाथ की छुअन...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥तुम्हारे हाथ की छुअन...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं!
तेरे प्यार में बनके दीपक, घने तिमिर में जलना चाहूं!
निशा दिवस के हर लम्हे में, सखी तुम्ही से मिलना चाहूं,
छुअन तुम्हारे हाथ की पाकर, मैं फूलों सा खिलना चाहूं!

तुमसे ही अभिषेक हमारा और तुम्ही से अभिनंदन है!
सखी तुम्हारी एहसासों से, मेरे दिल में स्पंदन है!

तेरे प्यार की नरम धूप को, मैं चेहरे पे मलना चाहूं!
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं....

हम दोनों आपस में मिलकर, जीवन पथ तैयार करेंगे!
साथ खुशी को बाँटेंगे हम, कांटे भी स्वीकार करेंगे!
"देव" सदा हम एक दूजे का, प्रेम निहित सत्कार करेंगे,
हम दोनों एकजुट होकर के, हर मुश्किल को पार करेंगे! 

यदि जलाशय न होगा तो, अपने आंसू पी लेंगे हम!
एक दूजे के ज़ख्मों को भी, प्यार-वफ़ा से सी लेंगे हम!

मेरी सांस में घुल जाओ, मैं तेरी सांस में घुलना चाहूं!
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं!"

...............चेतन रामकिशन "देव"…............
दिनांक-०५.१२.२०१३

Wednesday, 4 December 2013

♥♥रेशमी एहसास..♥♥

♥♥♥♥♥♥रेशमी एहसास..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरे एहसास में रेशम की तरह रहती हो!
कभी गंगा कभी झेलम की तरह बहती हो!

मेरे आँखों में दमकती हो मोतियों की तरह,
मेरी आवाज़ में सरगम की तरह रहती हो!

न उदासी मेरे चेहरे पे, ठिकाना ढूंढे,
प्यार के मखमली मौसम की तरह रहती हो!

जड़ लिया तुमको मोहब्बत की हर निशानी में,
मेरे जज़्बात में नीलम की तरह रहती हो!

"देव" तुमसे ही मेरी हर सुबह निराली है,
रात में चांदनी पूनम की तरह रहती हो!"

..........चेतन रामकिशन "देव"….......
दिनांक-०५.१२.२०१३

♥♥हथकरघे की सूनी डोरी ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥हथकरघे की सूनी डोरी ♥♥♥♥♥♥♥♥
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है!
गांधी का चरखा भी देखो, अब लोगों ने ठुकराया है!
हाँ ये सच है नयी मशीनें, काम बड़ी जल्दी करती हैं,
लेकिन देखो इनके कारण, कामगार मन मुरझाया है!

मनरेगा की मजदूरी से, नहीं साल भर चूल्हा जलता!
देश के भोले मजदूरों को, नहीं खुशी का लम्हा मिलता!

हर नेता ने, हर अफसर ने, इनके दुख को झुठलाया है!
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है...

आज फावड़े धूल फांकते, नयी मशीनें दमक रहीं हैं!
आज कुदालें चुप रहतीं और दरांती सुबक रही हैं!
"देव" मशीनें चलें भले पर, मजदूरों की शामत न हो,
उसके घर में भूख प्यास से, जान किसी की आहत न हो!

देश के भोले मजदूरों ने, हर पल ही बलिदान किया है!
खून पसीना खूब बहाकर, भारत को बलवान किया है!

देख के मजदूरों की हालत, आँख में पानी भर आया है!
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है!"

..................चेतन रामकिशन "देव"…..............
दिनांक-०५.१२.२०१३

Tuesday, 3 December 2013

♥♥अपना ईमां..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥अपना ईमां..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चंद सिक्कों के लिए अपना ईमां मत बेचो!
तुम सियासत के लिए सच की दुकां मत बेचो!

बड़ी मेहनत से गरीबों ने घर बनाये हैं,
अपनी कोठी के लिए उनके मकां मत बेचो!

रोक सकते हो तो रोको ज़हर की चिमनी को,
किसी मज़लूम के चूल्हे का धुआं मत बेचो!

जो बुजुर्गों ने हमें प्यार वफ़ा सिखलाई,
अपनी नफरत के लिए तुम वो निशां मत बेचो!

आबरू है यहाँ लड़की को जान से ज्यादा,
अपनी बहशत के लिए उसका जहां मत बेचो!

भले दुनिया में हक़ीक़त की डगर मुश्किल है,
अपनी आसानी को पर, सच के बयां मत बेचो!

"देव" कुछ तो यहाँ रक्खो लिहाज कसमों की,
अपने मतलब के लिए, अपनी जबां मत बेचो!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…..........
दिनांक-०३.१२.२०१३

Monday, 2 December 2013

♥♥♥कट जायेगा सफ़र ..♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥कट जायेगा सफ़र ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा!
मिल जायेगी हमें सफलता, यदि लक्ष्य का होश रहेगा!
फूल खिलेंगे पतझड़ में भी, जब तक मन में जोश रहेगा, 
किस्मत कैसे सुधरेगी जब, मेहनत में ही दोष रहेगा!

नाकामी के भाव संजोकर, नहीं उजाला मिल सकता है!
बिन साहस के कोई सपना, नहीं जहां में खिल सकता है!

नहीं रहो तुम भाग्य भरोसे, वरना तो अफसोस रहेगा!
कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा.....

आसमान के तारे अपनी, झोली में तुम भरना सीखो!
नही रहो तुम सहमे सहमे, खुद को साबित करना सीखो!
"देव" नहीं तुम भूले से भी, नाकामी से डरना सीखो,
नहीं हारकर मुरझाना तुम, जोश रगों में भरना सीखो!

नहीं सीखकर आता कोई, ज्ञान सभी को जग में मिलता! 
जो करते हैं कदर प्यार की, उन्हें प्यार का सागर मिलता!

तभी मिला सकते हो नजरें, जब ये मन निर्दोष रहेगा!
 कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा!"

...................…चेतन रामकिशन "देव"…..............
दिनांक-०२.१२.२०१३ 

Sunday, 1 December 2013

♥♥♥गुमसुम चाँद..♥♥♥

♥♥♥♥गुमसुम चाँद..♥♥♥♥
गुमसुम चाँद दिखाई देता!
गम का शोर सुनाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता!

लम्हे दिन के कटे न तुम बिन,
निशा मेरी खामोश गुजरती!
तुम बिन सावन पतझड़ सा है,
सूनी ये मधुमास गुजरती!

आह मेरे अधरों से निकले,
कोई नहीं दवाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता …

आँख से आंसू बह जाते हैं,
दुख के बादल मुस्काते हैं!
बिना तुम्हारे इस दुनिया में,
हम तो तन्हा रह जाते हैं!

शीत ऋतू में तन मन कांपे,
कोई न गरम सिकाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता …

शब्दों में भी दर्द जगा है,
गीत खुशी के लिख नहीं पाता!
"देव" तुम्हारे बिन आँखों को,
कोई सपना दिख नहीं पाता!

सब देते हैं छिलन खार की,
कोई नहीं नरमाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता!"

..…चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-०१.१२.२०१३

Saturday, 30 November 2013

♥खुशियों की बारिश..♥

♥♥♥♥♥♥खुशियों की बारिश..♥♥♥♥♥♥♥
धवल चांदनी रात का आगमन हो!
मोहब्बत के जल से धुला सबका मन हो!
न हिंसा रहे, न ही नफरत दिलों में,
हो खुशियों की बारिश के फैला अमन हो!

जलें दीप मन में, उजालों का रंग हो!
यहाँ जिंदगी में खुशी सबके संग हो!

न कोई हो तन्हा, न कोई दुखन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो...

न हिन्दू न हमको मुसलमान बनकर!
यहाँ हमको जीना है इंसान बनकर!
नहीं हमको देने हैं आंसू किसी को,
यहाँ हमको जीना है मुस्कान बनकर!

मोहब्बत भरे जब यहाँ दिल मिलेंगे!
तो जीवन में खुशबु के गुलशन खिलेंगे!

न दिल में जहर हो, न कोई अगन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो....

सफ़र ये हक़ीक़त का आसान होगा!
अगर दिल में अपने जो ईमान होगा!
सुनो "देव" उस घर की बढ़ जाये रौनक,
वो जिस घर में बेटी का सम्मान होगा!

मोहब्बत से बढ़कर खजाना नही है!
हमें दिल किसी का दुखाना नहीं है!

हो दिल सबका उजला, भले काला तन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो!"

....…चेतन रामकिशन "देव"…....
दिनांक-३०.११.२०१३

Friday, 29 November 2013

♥♥चांदनी रात के उजालों से..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥चांदनी रात के उजालों से..♥♥♥♥♥♥♥
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे!
अपने दिल की तमाम नफरत को, प्यार के भाव से भुला देंगे!
ख्वाब तेरे तुम्हारी आँखों के, अपने हाथों से हम खिला देंगे,
तन का रिश्ता तो बस पलों का है, रूह से रूह हम मिला देंगे!

तेरे कदमों के साथ चलकर के, मंजिलों की तलाश करनी है!
अपने जीवन की ये डगर हमदम, तेरी चाहत से खास करनी है!

गोद में मेरी, सर को रख देना, प्यार से हम तुम्हें सुला देंगे!
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे......

जिंदगी का सिंगार तुमसे है, हर तड़प का क़रार तुमसे है!
होने को तो है ये जहाँ लेकिन, मेरा तो सिर्फ प्यार तुमसे है!
"देव" पतझड़ से मेरे जीवन में, प्यार की ये फुहार तुमसे है,
फूल जैसे खिला मेरा चेहरा, जिंदगी में बहार तुमसे है!

तेरी राहों के सारे काँटों को, अपने हाथों से दूर करना है!
प्यार को ये जहां गुनाह कहे, मुझको पर ये कसूर करना है!

तेरे जीवन की रौशनी को हम, अपना दिल भी यहाँ जला देंगे!
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे!"

..............…चेतन रामकिशन "देव"…........................
दिनांक-२९.११.२०१३ 

Thursday, 28 November 2013

♥♥♥मोहब्बत तुम्हारी..♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मोहब्बत तुम्हारी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मोहब्बत घुली है फिजा में तुम्हारी, के उपवन भी देखो महकने लगा है!
मचलता है मन बस तुम्हारी ही खातिर, तुम्हारे लिए दिल बहकने लगा है!  
भले एक चुप्पी है होठो पे लेकिन, ये दिल धीमे धीमे चहकने लगा है,
तुम्हारी मोहब्बत का एहसास करके, मेरा दिल ख़ुशी से लहकने लगा है! 

तुम्हारी जरुरत है दिल को हमेशा, भले दिन हो हमदम, भले रात हो!
न दौलत की हसरत कभी मेरे दिल को, है ख्वाहिश यही बस तेरा साथ हो!

मुलाकात की एक तमन्ना जगी है, मुलाकात को दिल चहकने लगा है! 
मोहब्बत तुम्हारी घुली है फिजा में, के उपवन भी देखो महकने लगा है....

खनक चूड़ियों की बजे स्वर तुम्हारा, के तुमसे ही भावों का उद्भव हुआ है!
के टूटी है चुप्पी तुम्ही से ग़मों की, के तुमसे ही जीवन में वैभव हुआ है!
सुनो "देव" आंगन में रौनक है तुमसे, के तुमसे ही जीवन में कलरव हुआ है,
मैं हर्षित हूँ पाकर तुम्हारी मोहब्बत, के तुमसे ही जीवन में उत्सव हुआ है!

अँधेरा मिटे एक झलक से तुम्हारी, तुम्हारी मोहब्बत उजालों का रंग है!
है तू मेरे जीवन में लाली सुबह की, के तू चांदनी की तरह मेरे संग है!

के तू बन गई है मोहब्बत की बारिश, के जब भी मेरा मन दहकने लगा है!
मोहब्बत तुम्हारी घुली है फिजा में, के उपवन भी देखो महकने लगा है!"

.........................…चेतन रामकिशन "देव"…...........................
दिनांक-२८.११.२०१३

Wednesday, 27 November 2013

♥♥उजाला ..♥♥

♥♥♥♥♥♥उजाला ..♥♥♥♥♥♥♥
अंधेरों से बढ़कर उजाला रहेगा!
ये सूरज हमेशा निराला रहेगा!

महज खूबसूरत बदन को न समझो,
अगर दिल हमारा जो काला रहेगा!

यहाँ जीत जायेगी एक दिन हक़ीक़त,
भले सच पे कितना भी ताला रहेगा!

नहीं लोग देखो वो इंसान होंगे,
वो नफरत का जिस दिल में जाला रहेगा!

जो लोगों को जीते मोहब्बत से अपनी,
वही देखो दुनिया में आला रहेगा!

नहीं मैं डिगूंगा कभी अपने पथ से,
कसम का तुम्हारी हवाला रहेगा!

 सुनो "देव" कैसे बनोगे शहद तुम,
जो अधरों में विषधर का छाला रहेगा!"

.....…चेतन रामकिशन "देव"….....
दिनांक-२८.११.२०१३

Sunday, 24 November 2013

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

Friday, 22 November 2013

अगर चांदनी बन मेरा..

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥अगर चांदनी बन मेरा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम!
बिखर जाऊंगा बनके लाली सुबह की, अगर सूर्य बनकर के प्रभात दो तुम!
मैं हंसकर करूँगा सफर साथ पूरा, जो हाथों में मेरे अगर हाथ दो तुम,
मेरे दिल में खुशियों की फसलें उगेंगी, अगर प्यार की एक बरसात दो तुम!

जो तुम साथ में हो तो चांदी क्या सोना, मोहब्बत तुम्हारी मुझे है जरुरी!
बिना तेरे कुछ भी नहीं मेरा जीवन, इनायत तुम्हारी मुझे है जरुरी!

मुझे देके हमदम सुबह सुबह प्यारी, सितारों से सुन्दर सजी रात दो तुम!
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम.....

नज़ारे ख़ुशी के तुम्ही से हैं हमदम, मेरी जिंदगी का सहारा तुम्ही हो!
तुम्ही मेरी हिम्मत, यकीं मेरा तुमसे, के तूफां में मेरा किनारा तुम्ही हो!
सुनो "देव" मेरे कलम में वसे तुम, के शब्दों में भावों की धारा तुम्ही हो,
तुम्हे पाके देखो खिला मेरा जीवन, के किस्मत का मेरी सितारा तुम्ही हो!

है तुमसे ही सीखी इबादत ये मैंने, तेरे साथ ने मुझको पावन किया है!
मेरे मन को बख्शे मोहब्बत के बादल, के तुमने मेरे दिल को सावन किया है!

शहद मेरे कानों में घुलने लगेगा, अगर प्यार वाली मधुर बात दो तुम!
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम!"

.........................…चेतन रामकिशन "देव"..............................
दिनांक-२२ .११.२०१३

Friday, 15 November 2013

♥♥ख्वाबों के दीपक ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ख्वाबों के दीपक ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ!
मोहब्बत की बातें मैं करता हूँ हर पल, नहीं नफरतों का जहर जानता हूँ!
जो दिल ने कहा मेरे वो लिख रहा हूँ, नहीं मैं ग़ज़ल की बहर जानता हूँ!
जो लोगों को लूटे यकीं छलनी करके, मैं देखो नहीं वो हुनर जानता हूँ!

अँधेरा है बेशक मगर अपने दिल को, उजालों का झिलमिल ये आकाश देना!
जो समझो यहाँ दर्द तुम आदमी का, जरा अपने दिल को वो एहसास देना!

मुझे है मोहब्बत हक़ीक़त से देखो, नहीं झूठ की मैं लहर जानता हूँ!
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ...

मैं ख्वाबों के दीपक जलाने लगा हूँ, मैं सपनों की दुनिया वसाने लगा हूँ!
मैं लफ्जों को कागज़ पे लिखने लगा हूँ, मैं भावों की सरिता बहाने लगा हूँ!
सुनो "देव" अपने ग़मों को मैं देखो, इरादों की लौ पर तपाने लगा हूँ!
मैं अपने ही हाथों से जीवन को अपने, हुनर जीतने का सिखाने लगा हूँ!

कभी हारकर भी नहीं हारना तुम, नहीं अपने जीवन को तुम श्राप मानो!
तपोगे तो कुंदन भी बन जाओगे तुम, सदा अपने दुख को गरम ताप मानो!

नहीं होता जब तक यकीं मुझको खुद पर, मैं अपने इरादे नहीं ठानता हूँ!
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ!"

............................…चेतन रामकिशन "देव"..................................
दिनांक-१५.११.२०१३ 

Thursday, 14 November 2013

♥♥मोहब्बत की खुशबु ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मोहब्बत की खुशबु ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ!
तेरे प्यार की इस धवल रोशनी से, के मैं चांदनी सा निखरने लगा हूँ!
तुम्हारी छूअन से मैं फूलों की तरह, के बनकर के खुशबु बिखरने लगा हूँ!
तुम्हारे बिना था अमावस के जैसा, के अब बनके सूरज उभरने लगा हूँ!

तुम्हारी मोहब्बत के ये सिलसिले अब, नहीं आखिरी सांस तक कम करेंगे!
कभी तेरी आँखों में जो होंगे आंसू, तो हम अपनी आँखों को भी नम करेंगे!

तुमसे मोहब्बत हुई इतनी ज्यादा, के तुमसे बिछड़ने से डरने लगा हूँ!
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ.....

हैं तुमसे अनोखी हमारी ये रातें, के तुमसे अनोखे मेरे दिन हुए हैं!
तुम्हारी मोहब्बत से है खुशगवारी, के खुशियों से भीगे ये उपवन हुए हैं!
सुनो "देव" तेरी मोहब्बत से मन में, के चन्दन के मिश्रण से उबटन हुए हैं!
तुम्हारी मोहब्बत से पूजन किया है, तुम्हारी मोहब्बत से वंदन हुए हैं!

तुम्हारे बिना कुछ नहीं जिंदगी में, तुम्हारी जरुरत है अंतिम समय तक!
तुम्हारी मोहब्बत घुले शाम बनकर, तुम्हारी मोहब्बत हो सूरज उदय तक!

है तेरी फिकर मुझको खुद से भी ज्यादा, दुआ तेरी खातिर मैं करने लगा हूँ!
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव".................................
दिनांक-१४.११.२०१३