Saturday, 14 July 2012

♥♥♥♥♥सावन की मुलाकात..♥♥♥♥♥♥


बड़ी हरियाली है, सावन की घटा छाई है!


मुझसे मिलने जो मेरी सजनी चली आई है!


बड़ी सुन्दर, बड़े प्यारे से, निखरते रंग में,


मानो तो चांदनी, धरती पे उतर आई है!


आपके रूप के चर्चे हैं, सारे फूलों में,

देखकर तुम को सखी, हर कली मुस्काई है!


अपने शब्दों से तुम्हें, कैसे अलंकृत कर दूँ,

मेरे शब्दों में सखी, तू ही तो समाई है!


तेरी आँखों में सखी, मैंने झांककर देखा,

उनमे मेरी मूरत है मेरी, मेरी ही परछाई है!"


...........चेतन रामकिशन "देव".................

♥जिंदगी में चलो...♥



♥♥♥♥♥♥जिंदगी में चलो...♥♥♥♥♥♥♥♥
जिंदगी में चलो महान ये इक , काम करें!
लोग जो याद करें, ऐसा अपना नाम करें !

जो भरी धूप में हम सब को, छांव देती है,
आओ उस माँ का अदब और हम सलाम करें!

एक सा खून है, मानव की ही संतान हैं हम,
न ही हिंसा, न भेद, न ही कत्ले-आम करें!

सिर्फ दौलत के लिए, सच को बेचकर के हम,
किसी का प्यार, यकीं, न कभी नीलाम करें!

"देव" इंसानियत के प्यार में जिन्दा रहकर,
प्यारी प्यारी सी सुबह और हसीं शाम करें!"

...."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव"......

♥रिमझिम बूंदे..♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥रिमझिम बूंदे..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥


सावन की रिमझिम बूंदों से, भीग रहा है, मेरा तन-मन!


कृषक भी खुश, पंछी भी खुश, सचमुच प्यारा होता सावन!


सावन की सुन्दर बेला में, नव अंकुर को जन्म मिला है!


पत्तों पर शबनम बिखरी है, इन्द्रधनुष सा रंग खिला है!

बागों में सावन के झूले, लगते हैं कितने मनभावन!

सावन की रिमझिम बूंदों से, भीग रहा है, मेरा तन-मन!"

..................चेतन रामकिशन "देव"........................

♥सावन की सुगंध..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥सावन की सुगंध..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
ये सावन का महीना, सौंधी खुश्बू ले के आया है!
है फूलों पर चढ़ा यौवन, भ्रमर भी मुस्कुराया है!

हवा भी शीत है मनमीत, मौसम भी सुहाना है!
हमे मन का, हमे रूह का, मिलन दिल का कराना है!
इन्ही बूंदों की रिमझिम में, मयूरा नृत्य करता है,
हमे भी प्यार का नगमा, सखी जी गुनगुनाना है!

है बिखरा प्यार का अहसास, हर दिल खिलखिलाया है!
ये सावन का महीना, सौंधी खुश्बू ले के आया है....

सखी शाखों पे देखो, कोकिला भी गीत गाती है!
ये देखो बूंद बारिश की, सखी मन को लुभाती है!
तुम्हारी ओढ़नी पर जो, कढ़े हैं फूल रेशम से,
सखी उनमे भी सावन की घटा से जान आती है!

सखी सावन ने सूखी धरती में अंकुर उगाया है!
ये सावन का महीना, सौंधी खुश्बू ले के आया है....

सखी प्रकृति के सम्मुख चलो अब सर झुकाते हैं!
इसी प्रकृति की कृपा से, हम सब खिलखिलाते हैं!
ए प्रभुवर प्रकृति से, है मेरी इक और अभिलाषा,
हंसी उनकी भी खिल जाए, जो बस आंसू बहाते हैं!

सुनो ए "देव" सावन ने, मेरा चिंतन जगाया है!
ये सावन का महीना, सौंधी खुश्बू ले के आया है!"

"
सावन का महीना, जब भी आता है, प्रेम के रंग-बिरंगे शब्दों से, आकाश के पटल पर इन्द्रधनुष की रचना होने लगती है! बारिश की बूंद सूखी धरती पे अंचल पर जब गिरती है तो सौंधी खुश्बू से वातावरण सुगन्धित हो जाता है! प्रेमालाप होता है, प्रकृति सावन की बूंदों से धुलकर यौवन पूर्ण हो जाती है! अपने इन टूटे-फूटे शब्दों से, सावन का स्वागत करने का प्रयास भर किया है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-११.०७.२०१२

♥♥तेरी यादों से..♥♥



♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी यादों से..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी यादों से भला, दिल को अलग कैसे करूँ,
मेरे सीने में भी दिल है, कोई पाषाण नहीं!

तुम न आये तो मैंने देख ली तस्वीर तेरी,
बिन तुझे देखे गुजरती है, सुबह, शाम नहीं!

अपने ही अश्क पिए, प्यार की हिफाज़त में,
कभी भूले से भी, तुमको किया बदनाम नहीं!

प्यार न बिकता है, न इसको खरीदा जाये,
प्यार बाज़ार में बिकता हुआ, सामान नहीं!

दूर रहके भी "देव" चाहा, तुम्हें पूजा है,
तू मेरा अपना है, कोई अजनबी इन्सान नहीं!"

.........चेतन रामकिशन "देव"..................

Tuesday, 10 July 2012

♥जो साथ तेरा..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जो साथ तेरा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मुझे किसी की नहीं जरुरत, जो साथ तेरा है मेरे संग में!
हवा में खुश्बू में महक रही है, रंगा है ये दिल तुम्हारे रंग में!

तुम्हारी चाहत से जिंदगी में, सुकुन पाया, आराम पाया!
मिली है जबसे तेरी मोहब्बत, लगे खुदा से ईनाम पाया!
तुम्हारे हाथों में हाथ लेकर, चला हूँ जब भी मैं जिंदगी में,
न पथ में आई कोई भी मुश्किल, हमेशा हमने मुकाम पाया!

कदम हमारे थिरक रहे हैं, तुम्हारी चाहत की इस तरंग में!
मुझे किसी की नहीं जरुरत, जो साथ तेरा है मेरे संग में!"

.........................चेतन रामकिशन "देव"........................

Monday, 9 July 2012

♥वक़्त(बदलाव का असर)..♥


♥♥♥♥♥♥♥वक़्त(बदलाव का असर)..♥♥♥♥♥♥♥♥
जिनको अपने दिल में रखा, वो ही हमसे दूर हो गए!
मेरी आँखों के सपने भी, एक पल में ही चूर हो गए!

नहीं किसी ने समझा मेरी, रंजो-गम की बीमारी को,
बिना दवा के ज़ख्म देखिए, रिस रिस कर नासूर हो गए!

वो जब तक मुफ़लिस थे तब तक, बातों में नरमी रखते थे,
उनको जब से मिली है दौलत, वो तब से मगरूर हो गए!

किस्मत जिनके साथ है उनकी, अब भी तूती बोल रही है,
लेकिन जिनसे रूठी किस्मत, वो पल में बेनूर हो गए!

कभी किसी के बुरे वक़्त में, "देव" नहीं उपहास उड़ाना,
इसी वक़्त के हाथ सिकंदर, पोरस भी मजबूर हो गए!""

.....................चेतन रामकिशन "देव"............................

Sunday, 8 July 2012

♥गर्म खून आबाद नहीं है...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥गर्म खून आबाद नहीं है...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
महापुरुषों के पदचिन्हों पर, हम चलने की आदत भूले!
हम अपने उल्लास में देखो, माँ जननी और भारत भूले!

गाँधी, विस्मिल और सुभाष की, कुर्बानी भी याद नहीं है!
कमरे के चित्रों में शामिल, अब मनमथ, आजाद नहीं हैं!
देश के दुश्मन देश में घुसकर, मासूमों को मार रहे हैं,
हम लोगों के जिस्म में लेकिन, गर्म खून आबाद नहीं है!

आजादी के दीवानों की, हम सब आज शहादत भूले!
महापुरुषों के पदचिन्हों पर, हम चलने की आदत भूले!"

..........."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव".................



Saturday, 7 July 2012

♥दिल का कागज़..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दिल का कागज़..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हम अपने दिल के कागज़ पर, अनुभूति के पल लिखते हैं!
कभी हंसी लिखते चेहरे की, कभी नयन का जल लिखते हैं!

जो लेखक अपने शब्दों से, भेदभाव की महिमा गाते!
जो लेखक अपने शब्दों से, बस हिंसा का पाठ पढ़ाते!
ऐसे लेखक सारा जीवन, रहते हैं बस अंधकार में,
जो लेखक अपने शब्दों से, मानवता के दीप बुझाते!

हम लिखते हैं समरसता को, न दंगा, न छल लिखते हैं!
हम अपने दिल के कागज़ पर, अनुभूति के पल लिखते हैं!"

..........."शुभ-दिन".......चेतन रामकिशन "देव"...........

♥तुम ही तुम...♥


 ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तुम ही तुम...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम इच्छा हो, तुम आशा हो, तुम जीवन की अभिलाषा हो!
 तुम मेरे शब्दों की क्षमता, तुम शब्दों की परिभाषा हो!

तुम उपवन हो, तुम यौवन हो, जीवन का संगीत तुम्ही हो!
तुम ही साहस, तुम ही यश हो, और हमारी जीत तुम्ही हो!
तुम वंदन में, अभिनन्दन में, तुम ही मेरी अनुभूति में,
तुम ही कविता, तुम ही लेखन, और कंठ का गीत तुम्ही हो!

तुमसे सब कुछ सीख रहा हूँ, तुम ही मेरी जिज्ञासा हो!
तुम मेरे शब्दों की क्षमता, तुम शब्दों की परिभाषा हो!"


.........................चेतन रामकिशन "देव"...........................


Friday, 6 July 2012

♥करो परिश्रम...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥करो परिश्रम...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
करो परिश्रम सही दिशा में, निश्चित ही परिणाम मिलेगा!
अच्छे अच्छे काम करो तुम, जग में सुन्दर नाम मिलेगा!

नाकामी से डरकर खुद को, जीते जी मृतक न मानो!
सपने भरकर तुम आँखों में, अपनी शक्ति को पहचानो!
कभी किसी के बहकावे में, झूठ को सच का नाम न देना,
अपनी बुद्धि और चिंतन से, सही गलत का मतलब जानो!

नेक, नियत के पथ पर चलकर, मन को भी आराम मिलेगा!
करो परिश्रम सही दिशा में, निश्चित ही परिणाम मिलेगा!"

.............."शुभ-दिन"...........चेतन रामकिशन "देव"...........

Thursday, 5 July 2012

♥श्रंगार अधूरा..♥

♥♥♥श्रंगार अधूरा..♥♥
शब्दों का श्रंगार अधूरा,
तुम बिन ये संसार अधूरा!

दूर गए हो जबसे हमदम,
तब से है दीदार अधूरा!

तुम बिन आंगन सूना लगता,
चौखट पर ख़ामोशी पसरी!

तुम बिन कंगना चूड़ी चुप हैं,
आँखों को न भाए कजरी!

जिस दिन से परदेस गए हो,
तब से है घर-वार अधूरा!"

.....चेतन रामकिशन "देव"......

♥कुछ तो..♥



♥♥♥♥कुछ तो..♥♥♥♥♥
कुछ तो खोया खोया सा है!
मन भी रोया रोया सा है!
क्यूँ अपने आंसू से मैंने,
चेहरा धोया धोया सा है!

सड़कों की फुटपाथों पर जब,
नंगे भूखे तन दिखते हैं!
भारत में ही जन्मे जब वो,
खद्दरधारी जन बिकते हैं!
देश का कृषक भूख के कारण,
जब फांसी पर चढ़ जाता है!
तब तब ही मेरी आँखों से,
बरबस आंसू बह जाता है!

लोगों ने भी बीज द्वेष का,
मन में बोया बोया सा है!
कुछ तो खोया खोया सा है!
मन भी रोया रोया सा है!"

...."शुभ-दिन"..चेतन रामकिशन "देव"

Tuesday, 3 July 2012

♥निर्धन की बेटी....♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन की बेटी....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चन्द्र किरण जैसी बेटी का, रिश्ता जाने कैसे तय हो!
सोच रहा है निर्धन कैसे, महंगाई में दूल्हा क्रय हो!

बिना दहेज़ के निर्धन की बेटी का, साथी कौन बनेगा!
धन-दौलत की भीड़ में कोई, उस निर्धन को कहाँ चुनेगा!
हर दूल्हे की कीमत देखों, लाखों रूपये से ऊपर है,
निर्धन की बेटी की पीड़ा, विक्रय दूल्हा कहाँ सुनेगा!

निर्धन बेटी सोच रही है, कब उसका जीवन सुखमय हो!
चन्द्र किरण जैसी बेटी का, रिश्ता जाने कैसे तय हो.....

धन-दौलत की आकांक्षा है, न उनको गुणवान चाहिए!
वो चाहें बस मोटर गाड़ी, न उनको सम्मान चाहिए!
ऐसे बिकने वाले दुल्हे, खुद से नजर मिलायें कैसे,
जिनको न ही रूह का रिश्ता, जिनको न ईमान चाहिए!

निर्धन बेटी सोच रही है, दूर भला कब उसका भय हो!
चन्द्र किरण जैसी बेटी का, रिश्ता जाने कैसे तय हो.....

निर्धन रोता फूट फूट कर और बेटी की आंख भी नम है!
कितना भी दे दो दूल्हे को, फिर भी उसको लगता कम है!
"देव" दहेज़ का दानव जाने, कब तक जीवित रहेगा यूँ ही,
सोच सोच कर ही निर्धन का, जीते जी ही निकला दम है!

न जाने कब देवी रूपी, इस प्यारी बेटी की जय हो!
चन्द्र किरण जैसी बेटी का, रिश्ता जाने कैसे तय हो!"

" समाज में दहेज़ कलंक बनता जा रहा है, धन कुबेरों और धनिक वर्ग के द्वारा दहेज़ की परंपरा को प्रसारित किये जाने से यह संकट अब निर्धन और छोटे परिवारों को भी घेरने लगा है! समाज में दहेज़ के सम्बन्ध में अनेकों ह्रदय विदारक घटनायें दिन प्रतिदिन घट रही हैं, लेकिन सोचना होगा, दहेज़ कोई वरदान नहीं है, अपने हाथों में काम करने की शक्ति हो तो, हम स्वयं भी अपना घर भर सकते हैं!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०४.०७.२०१२

♥तेरे कंधे पर..♥


♥♥♥♥♥♥तेरे कंधे पर..♥♥♥♥♥♥
तेरे कंधे पर सर रखके सो जाऊ!
सखी तुम्हारी इन आँखों में खो जाऊ!

तुमने इतना प्यार मुझे सिखलाया है,
नफरत में भी प्यार के अंकुर बो जाऊ !

मुझे नहीं कागज़ के टुकड़ों की चाहत,
तेरे प्यार की दौलत से खुश हो जाऊ!

बोध कराया तुमने ही तो करुणा का,
मैं औरों का दर्द देखके रो जाऊ!

दुरित भावना "देव" के मन में आए तो,
तेरे प्यार के गंगाजल से धो जाऊ!"

.........चेतन रामकिशन "देव"............

Sunday, 1 July 2012

♥मर्यादित जीवनधारा...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मर्यादित जीवनधारा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मर्यादित जीवनधारा हो, नैतिकता का समावेश हो!
मानवता के प्रति ह्रदय में, न हिंसा न कोई द्वेष हो!

अपनेपन के दीप जलाकर, तुम जग में उजियारा कर दो!
प्यार, वफ़ा और कोमलता से, सारे जग को प्यारा कर दो!
अंतर्मन में कभी न अपने, ईर्ष्या के तुम भाव जगाना,
मन की सोच को पावन करके , गंगा की जल धारा कर दो!

तुम सच के संवाहक बनना, मिथ्या जैसा नहीं भेष हो!
मर्यादित जीवनधारा हो, नैतिकता का समावेश हो!"

.........."शुभ-दिन".......चेतन रामकिशन "देव"......

♥प्रेम का एहसास..♥


♥♥प्रेम का एहसास..♥♥
मैंने तुमसे प्यार किया है,
नहीं पता प्रमाणित करना!
तुमसे सीखी है कोमलता,
नहीं पता प्रताड़ित करना!

मुझको तेरी आंख के आंसू, अब हमदम अपने लगते हैं!
सखी तेरी आँखों के सपने, अब मुझको अपने लगते हैं!

तुम शब्दों की अनुभूति पर,
नहीं पता परिभाषित करना!
मैंने तुमसे प्यार किया है,
नहीं पता प्रमाणित करना!"

......चेतन रामकिशन "देव".......



Saturday, 30 June 2012

♥धवल प्रेम...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥धवल प्रेम...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गुलाबी रंग अधरों का, तुम्हारे केश हैं प्यारे!
नयन ऐसे चमकते हैं, गगन में जैसे हैं तारे!

हँसी है आपकी सुंदर, मधुरता से भरी बोली!
तुम्हारे प्रेम ने खुशियों से, भर दी है मेरी झोली!
है दर्पण सोच का सुन्दर, नहीं मन में कोई छल है,
तुम्हारे प्रेम में शुद्धि, हो चन्दन, जैसे हो रोली!

तुम्हारा प्रेम में मन जीतने के, हैं हुनर सारे!
गुलाबी रंग अधरों का, तुम्हारे केश हैं प्यारे!"

..............चेतन रामकिशन "देव".................

Friday, 29 June 2012

♥मातृभूमि के लिए..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥मातृभूमि के लिए..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥


मातृभूमि के लिए ह्रदय में , कुर्बानी के भाव रखो तुम!


अपने चिंतन और शब्दों मे , सत्यपूर्ण प्रभाव रखो तुम!


माँ का आँचल मैला न हो और आंचल पर दाग लगे न!


देश में अपने किसी कार्य से, हिंसा वाली आग लगे न!


देश के मानव एक सूत्र में बंधकर प्रेम के दीप जलायें,


मानवता जो खंडित करदे , दिल में ऐसा राग जगे न!


शत्रु ने जो दिए देश को, सम्मुख वो सब घाव रखो तुम!


मातृभूमि के लिए ह्रदय में, कुर्बानी के भाव रखो तुम!"


........"शुभ-दिन"......चेतन रामकिशन "देव".........

Thursday, 28 June 2012

♥विरह की पीड़ा ♥


♥♥♥♥♥♥♥विरह की पीड़ा ♥♥♥♥♥♥♥
तेरे बिन ना सुमन, ना कली खिल रही!
मेरे जीवन की हर्षित, किरण ढल रही!
अब विरह भाव को मुक्त कर दो जरा,
ना दिवस शीत है, रात भी जल रही!

क्रोध की भावना से, ना दण्डित करो!
मेरे कोमल ह्रदय को, ना खंडित करो!

तेरे बिन प्रेम की, रीत ना चल रही!
तेरे बिन ना सुमन, ना कली खिल रही........

तेरे बिन शूल पांवो में चुभने लगे!
वो सफलता भरे, पग भी रुकने लगे!
तेरे बिन हैं तिमिर के मनोभाव बस,
अब पथों के उजाले भी, बुझने लगे!

प्रेम की भावना का, ना उपहास कर!
इस तरह हर्ष का, तू नहीं ह्रास कर!

तेरे बिन प्रेम की, रीत ना चल रही!
तेरे बिन ना सुमन, ना कली खिल रही!"

"प्रेम, में विरह बहुत पीड़ा देती है! प्रेम और विरह का सम्बन्ध भी है, किन्तु फिर भी अपनी तरफ से प्रयास करियेगा कि, आपने द्वारा किसी को विरह ना मिले! क्यूंकि, विरह की पीड़ा, व्यक्ति को हतो-उत्साहित करती है!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२८.०६.२०१२