Tuesday, 20 November 2012

♥प्यार तुम्हारा..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्यार तुम्हारा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्यार तुम्हारी आँखों में है, और जादू तेरी बातों में!
दिन भी तेरी याद में गुजरे, याद तू ही आती रातों में!

तेरा हँसना मन को भाये, तुझे देखकर दिल मुस्काए!
बिना तुम्हारे मेरे हमदम, इक पल को भी चैन न आये!
याद तेरी ही ख्वाब में ढलकर, मेरी निंदिया में आती है,
और तेरी सुन्दरता हमदम, अंधकार में दीप जलाये!

मन को राहत देती है तू, जैसे मिलती बरसातों में!
प्यार तुम्हारी आँखों में है, और जादू तेरी बातों में!"

................चेतन रामकिशन "देव"...................

♥मेरी नजर..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मेरी नजर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नजर है मेरी अम्बर पर, मुझे दुनिया पे छाना है!
मुझे कुछ नाम करना है, मुझे मंजिल को पाना है!
नहीं मैं हार से डरकर, कभी हथियार डालूँगा,
चलेगी साँस जब तक, ज़िन्दगी को आजमाना है!"
..................चेतन रामकिशन "देव"....................


Monday, 19 November 2012

♥माँ (मखमली घास)♥


♥♥♥♥♥माँ (मखमली घास)♥♥♥♥♥♥
माँ कली, माँ सुमन, मखमली घास है!
माँ ही रिमझिम सितारों का आकाश है!
माँ धरा की तरह हमको पोषित करे,
माँ के ह्रदय में ममता का आवास है!

माँ की हर एक खुशी उसकी संतान है!
माँ ही धरती पे ईश्वर की पहचान है!

माँ ही है सत्यता, माँ ही विश्वास है!
माँ कली, माँ सुमन, मखमली घास है...

माँ की जाति नही, न कोई धर्म है!
माँ तो है भावना, माँ सुखद कर्म है!
माँ की सुन्दर छवि है अनोखी बड़ी,
माँ कभी सख्त है, माँ कभी नर्म है!

माँ के आशीष में हर्ष विधमान है!
माँ ही प्रथम गुरु, माँ कुशल ज्ञान है!

माँ बड़ी साहसी, माँ ही आयास है!
माँ कली, माँ सुमन, मखमली घास है...

माँ की पावन छवि को हमारा नमन!
माँ की वाणी मधुर जैसे हो प्रवचन!
माँ ने ही "देव" हमको रचा है यहाँ,
माँ ही संतान का भार करती वहन!

माँ बड़ी ही धवल, माँ तो गुणवान है!
माँ तो संतान के मुख की मुस्कान है!

माँ का वंदन करो, माँ नहीं दास है!
माँ कली, माँ सुमन, मखमली घास है!"

"
माँ-एक ऐसा शब्द, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में ममता का भण्डार है, स्नेह का महा सागर है, अपनत्व का आकाश है, माँ की पावन छवि अनवरत वन्दनीय है, माँ का आशीष रेगिस्तान की धूप में जल की शीतलता तो शीत ऋतू में गुनगुनी धूप प्रदान करता है! तो आइये इस दिव्य स्वरूप माँ को नमन करें..."

सर्वाधिकार सुरक्षित!
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!
(उक्त रचना मेरी माँ कमला देवी एवं माँ प्रेम लता जी को सादर समर्पित)

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२०.११.२०१२ 

Saturday, 17 November 2012

♥उजाले की किरण.. ♥


♥♥♥♥♥♥♥उजाले की किरण.. ♥♥♥♥♥♥♥♥
अंधेरों से उजालों की तरफ विस्तार करना है!
हमे मन की निराशा पे कड़ा प्रहार करना है!

चलो अपने मनों से द्वेष की खाई मिटाकर के,
हमे मानव से मानवता के नाते प्यार करना है!

जहाँ देखो वहां दिखते हैं, जंगल ईंट पत्थर के,
हमे हरियाली से भूमि का अब श्रृंगार करना है!

सुनो मंदिर में अपनी वंदना करना मगर पहले,
हमे माता पिता के रूप का सत्कार करना है!

भले ही "देव" दुनिया में, बड़े धनवान हो जाना,
नहीं पर भूल के भी हमको अत्याचार करना है!"

............ (चेतन रामकिशन "देव") .............





♥♥तेरी तस्वीर..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी तस्वीर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी तस्वीर को अपनी मोहब्बत से सजाऊंगा!
तेरे गालों पे अपने प्यार का चन्दन लगाऊंगा!

मैं अम्बर के सितारों से, तुम्हारी मांग भर दूंगा!
गुलाबों के मधुर रस से, तेरे अधरों को रंग दूंगा!
मैं तेरे कान के झुमकों को देकर फूल का चेहरा,
तेरी आँखों में काले मेघ से काजल को भर दूंगा!


तेरे माथे पे सुन्दर चाँद की बिंदिया सजाऊंगा!
तेरी तस्वीर को अपनी मोहब्बत से सजाऊंगा!

मुझे फूलों की लड़ियों से तेरा गजरा बनाना है!
मुझे शबनम के मोती से, तेरा कंगन सजाना है!
तेरे वस्त्रों को हरियाली का सुन्दर आवरण देकर,
मुझे फूलों की खुश्बू को, तेरे भीतर वसाना है!

तेरी तस्वीर बनने पर उसे दिल से लगाऊंगा!
तेरी तस्वीर को अपनी मोहब्बत से सजाऊंगा!"

.............. (चेतन रामकिशन "देव") ..............

♥निर्धन का उपवास.♥


♥♥♥♥♥निर्धन का उपवास.♥♥♥♥♥
भूख है, प्यास है, कुछ नहीं खास है!
ये जमीं उसका घर, छत ये आकाश है!
और किसी देवता के भी पूजन के बिन,
मानो हर दिन गरीबों का उपवास है!

देश में निर्धनों का बुरा हाल है!
उनके जीवन में पीड़ा का जंजाल है!
कैसे संतान को कोई उपहार दे,
पास पैसे नहीं, इतना बेहाल है!

उसकी आँखों में आंसू का एहसास है!
और नेताओं के घर मधुमास है!
भूख है, प्यास है, कुछ नहीं खास है!
ये जमीं उसका घर, छत ये आकाश है!"

....... (चेतन रामकिशन "देव") .......

Friday, 16 November 2012

♥♥♥चांदनी रात.♥♥♥


♥♥♥♥♥♥चांदनी रात.♥♥♥♥♥
चांदनी रात है और तेरा साथ है!
मेरे हाथों में सजनी तेरा हाथ है!

इसकी बूंदें भी लगती बड़ी शबनमी,
ये जो तेरी मोहब्बत की बरसात है!

मेरा चेहरा भी फूलों सा खिलना लगा,
तेरी चाहत में ऐसी करामात है!

जिंदगी में नहीं अब कोई भी कमी,
जीत ही जीत है अब नहीं मात है!

मुझको अब "देव" कोई भी ख्वाहिश नहीं,
जब से मुझको मिला, ये तेरा साथ है!"

...... (चेतन रामकिशन "देव") ........

Thursday, 15 November 2012

♥आशाओं का इन्द्रधनुष..♥


♥♥♥♥♥♥♥आशाओं का इन्द्रधनुष..♥♥♥♥♥♥
निराशा के घने बादल नहीं जीवन में छाने दो!
तुम अपने मन को सपनों की नई दुनिया सजाने दो!
बिना आशाओं के तो लक्ष्य भी होते हैं भूमिगत,
नहीं मुश्किल से डरकर, तुम इरादे डगमगाने दो!

ये दुनिया खुबसूरत है, ये जीवन भी बड़ा प्यारा!
गया एक बार जो जीवन, नहीं मिलता है दोबारा!

नहीं पथभ्रष्ट होकर अपनी उर्जा व्यर्थ जाने दो!
निराशा के घने बादल नहीं जीवन में छाने दो...

कभी आंखों पे पट्टी बांधकर निर्णय नहीं करना!
हताशा से कभी जीवन का तुम प्रणय नहीं करना!
ये मृत्यु आएगी सच है, सभी ये जानते भी हैं,
मगर मृत्यु की आहट से, कभी तुम भय नहीं करना!

नहीं जीवन को जीते जी हमे मृतक बनाना है!
दुखों के काल में भी हमको देखो मुस्कुराना है!

तुम अपने मन को आशा की नई सरगम सुनाने दो!
निराशा के घने बादल नहीं जीवन में छाने दो...

ये जीवन जंग जैसा है, यहाँ पर जय पराजय है!
कभी प्रसंग खुशियों का, कभी पीड़ा का आशय है!
सुनो तुम "देव" ये मानव का जीवन श्रेष्ठ है सबसे,
दुखों की दाह है किन्तु सुखों का भी जलाशय है!

कभी भूले से भी जीवन को, तुम संताप न समझो!
दुखद जीवन भी आए तो कभी तुम श्राप न समझो!

जगत में अपने जीवन को, जरा डटकर बिताने दो!
निराशा के घने बादल नहीं जीवन में छाने दो!"

"
जीवन -ये सच है कि, जीवन में समस्याओं, कठिनाइयों, परेशानियों का ज्वार भाटा आता है, दुखों की बेला आती है, किन्तु ये भी सच है कि, जीवन दुखों का भण्डार नहीं है! जीवन गतिशील है और गतिशीलता की अवस्था में ही ठोकर लगती हैं! जीवन, आशाओं के साथ जब यापन किया जाता है तो अभावों के पश्चात भी जीवन, प्रकृति का सबसे मधुर उपहार लगता है, तो आइये चिंतन करें...."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१६.११.२०१२ 

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!




♥♥खुशी की सौगात..♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥खुशी की सौगात..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अम्बर अपने चाँद से खुश है, धरती अपनी हरियाली से!
पानी खुश है सागर तल से, और उपवन अपने माली से!

मेरे जीवन को भी देखो, ख्वाब किसी के महकाते हैं!
उसके तौर तरीके मुझको, जीने का ढंग सिखलाते हैं!
मैंने उसकी तारीफों में, जब जब भी कुछ लिखना चाहा,
मेरे दिल के शब्द भी देखो, उसके सजदे झुक जाते हैं!

फूल तोड़कर देता है वो, खुद कांटे रखकर डाली से!
अम्बर अपने चाँद से खुश है, धरती अपनी हरियाली से!"

................ (चेतन रामकिशन "देव") .......................

Wednesday, 14 November 2012

♥♥प्रेम भरा सहयोग♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम भरा सहयोग♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मिला है जब से सखी तुम्हारा, प्रेम भरा सहयोग!
मुख मंडल को तेज मिला है, मन भी हुआ निरोग!

नहीं प्रेम मैला होता है, न ही दूषित भाव!
निहित प्रेम में होते हर क्षण, अपनेपन के भाव!
जात-पात और धन दौलत से, नहीं प्रीत का मोल,
प्रेम की संपत्ति पाकर के, मिटते सभी अभाव!

प्रेम तो एक जीवन दर्शन है, नहीं विलासी भोग!
मिला है जब से सखी तुम्हारा, प्रेम भरा सहयोग!"

................ (चेतन रामकिशन "देव") ................

♥♥दर्द के आंसू..♥♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दर्द के आंसू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दर्द के आंसू भी प्यारे हैं, खुशियों जैसे ही खारे हैं! 
पर जाने क्यूँ हार देखकर, हम अपनी हिम्मत हारे हैं!

हर इन्सां का मन मंदिर है, हर इंसा के मन में मस्जिद,
मानो तो मन के भीतर ही, गिरजाघर और गुरूद्वारे हैं! 

बस अपने ही दर्द को यारों, तुम सबसे ज्यादा न समझो,
फुटपाथों की ओर देखना, लाखों जन दुःख के मारे हैं!

बाल दिवस पर अखबारों में, इश्तहार छपते हैं बेशक,
लेकिन बालक मजदूरों के, जीवन में बस अंधियारे हैं!

"देव" ये सच है दर्द बहुत है, लेकिन बोझ नहीं है जीवन ,
इस जीवन में कभी दर्द तो, कभी ख़ुशी के फव्वारे हैं!"

.................  (चेतन रामकिशन "देव") .................

Monday, 12 November 2012

♥♥खुशियों का प्रकाश..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥खुशियों का प्रकाश..♥♥♥♥♥♥♥♥
सभी के घर हो दीवाली पर, खुशियों का प्रकाश!
दीपों की ज्योति से दमके, धरती और आकाश!

अपने मन में न रखो तुम, मैले, दुरित विचार!
मेल-जोल का भाव सिखाते, ये सारे त्यौहार!
दीप जलाने का आशय है, मन के उजले भाव,
जात-धर्म से ऊपर उठकर, करें सभी से प्यार!

बिना प्रेम के कड़वापन है, आती नहीं मिठास!
सभी के घर हो दीवाली पर, खुशियों का प्रकाश!"

..."शुभ-दीपावली"....चेतन रामकिशन "देव".....


♥♥♥♥♥♥♥कंगाली में क्या दीवाली.. ♥♥♥♥♥♥♥
है जिनके घर में अँधेरा, है जिनके घर में कंगाली!
है जिनका पेट भी भूखा, है जिनकी जेब भी खाली!
ये ऐसे लोग तो बस जूझते हैं जिंदगानी से,
कहाँ मनती है मुफ़लिस के यहाँ, होली ये दीवाली!

गरीबों के लिए क्या पर्व, क्या त्यौहार होता है!
गरीबों का तो हर दिन दर्द से, सत्कार होता है!

गरीबों के यहाँ सजती नहीं, मिष्ठान से थाली!
है जिनके घर में अँधेरा, है जिनके घर में कंगाली...

बड़े महंगे पटाखे हैं, बड़ी महंगी मिठाई है!
हुआ है रंग भी महंगा, बड़ी महंगी पुताई है!
भला कैसे जलाए तेल के दीपक वो अपने घर,
बढे दामों ने देखो तेल से, दूरी बढ़ाई है!

गरीबों के यहाँ बस दर्द के अंगार जलते हैं!
गरीबों को तो केवल रंज के उपहार मिलते हैं!

गरीबों के यहाँ तो दीप में जलती है बदहाली!
है जिनके घर में अँधेरा, है जिनके घर में कंगाली!"

............. (चेतन रामकिशन "देव") ..................

Saturday, 10 November 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥अधूरा काव्य.♥♥♥♥♥♥♥♥♥
काव्य अधूरा हुआ हमारा, हुए अधूरे गीत!
बिना तुम्हारे सखी हुआ है, रुधिर हमारा शीत!
तुम बिन आँखों से होती, अश्रु की बरसात,
बिना तुम्हारे जिया न जाए, ओ मेरे मनमीत!

मेरा निवेदन स्वीकारो तुम, करो विरह को दूर!
बिना तुम्हारे स्वप्न भी देखो, हुए हैं चकनाचूर!

मेरे जीवन की शक्ति है, सखी तुम्हारी प्रीत!
काव्य अधुरा हुआ हमारा, हुए अधूरे गीत...

बिना तुम्हारे सखी हुआ है, मन भी मेरा अधीर!
बिना तुम्हारे सखी हुआ है, निर्बल मेरा शरीर!
बिना तुम्हारे चित्त भी देखो, रहता बड़ा उदास,
जीवन को छलनी करते हैं, पीड़ा दायक तीर!

सुनो हमारा करुण रुदन तुम, सुनो दर्द के बोल!
बिना तुम्हारे नाव हमारी, सदा ही डांवा-डोल!

छिटक रही है मेरे हाथ से, हाथ में आई जीत!
काव्य अधुरा हुआ हमारा, हुए अधूरे गीत...

बिना तुम्हारे नहीं दमकते, दीवाली के दीप!
बिना तुम्हारे गुमसुम रहता, अम्बर में प्रदीप!
बिना तुम्हारे "देव" हुआ है, पत्थर सा निर्जीव,
बिना तुम्हारे मोती देखो, नहीं उगलते सीप!

बिना तुम्हारे मायूसी है, मुरझाये हैं फूल!
बिना तुम्हारे जीवन पथ में, अब चुभते हैं शूल!

बिना तुम्हारे हुआ बेसुरा, जीवन का संगीत!
काव्य अधुरा हुआ हमारा, हुए अधूरे गीत!"

"
विरह-किसी अपने के जीवन से चले जाने से, निश्चित रूप से, जीवन के प्रबल पक्ष में भी कमजोरी का ग्रहण लगता है! जीवन में हतो-उत्साहित भाव आते हैं और जीवन में अग्रसर होने की क्षमता पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है! तो आइये किसी के जीवन से, जाने से पहले चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-११.११.२०१२ 

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!















Friday, 9 November 2012

♥प्रेम( एक प्रकाश)♥


♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम( एक प्रकाश)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरे मन में हुआ है जब से, सखी तुम्हारा वास!
घनी अमावस की बेला में, खिल आया प्रकाश! 
सखी तुम्हारे प्रेम ने मन से, मिटा दिए हैं दोष,
सात रंगों के इंद्र धनुष में, ढल आया आकाश!

प्रेम की पावन अनुभूति से, हुई सुगन्धित सोच!
सच को सच कहने में भी अब, नहीं कोई संकोच!

प्रेम का मौसम सर्वोत्तम है, जैसे हो मधुमास! 
मेरे मन में हुआ है जब से, सखी तुम्हारा वास....

प्रेम न देखे जात-पात को, नहीं त्वचा के रंग!
प्रेम तो मानव को करता है, एक दूजे के संग!
प्रेम की किरणों से आते हैं चंचलता के भाव,
प्रेम की शक्ति से आती है मन में एक उमंग!

प्रेम भावना से धुलती है, दुरित सोच की धूल!
प्रेम भावना से खिलती है, जड़, अंकुर और फूल!

प्रेम में मीलों दूर का साथी, मन के रहता पास!
मेरे मन में हुआ है जब से, सखी तुम्हारा वास....

नहीं मात्र युगलों तक होता प्रेम का ये संसार!
इस भूमि से आसमान तक, प्रेम का है विस्तार!
नहीं संकुचित भाव सिखाता "देव" कभी ये प्रेम,
प्रेम भावना से स्फुट हो, जन जन का सत्कार!

प्रेम का धारण करके आओ, दूर करें संताप!
प्रेम है पावन पूजा वंदन, नहीं है कोई पाप!

प्रेम में सब एक जैसे होते, न मालिक, न दास!
मेरे मन में हुआ है जब से, सखी तुम्हारा वास!"


"
प्रेम-के भाव, मनुष्य के मन से दुरित विचारों और हिंसा की सोच को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं! प्रेम चाहें, सखी का हो या परिजनों का, मित्रों का हो या सम्बन्धियों का, पड़ोसियों का या सहकर्मियों का, जहाँ प्रेम होता है, वहां अपनत्व प्रबल होता है और सभी एक दूसरे के सहयोगी, तो आइये प्रेम करें...."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१०.११.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!






♥तुम ही कविता ♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तुम ही कविता ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम ही मेरी कविताओं का, परिचय हो, तुम्ही आशय हो!
तुम ही भावों की सुन्दरता, तुम्ही सरगम, तुम्ही लय हो!

तुम सूरज की किरणों जैसे, शब्दों में उर्जा भरती हो!
तुम चंदा की किरणों जैसे, शब्दों को उजला करती हो!
तुम गंगा के पानी जैसे, शब्दों को देकर शीतलता,
तुम शब्दों के अंत:कवच को, छूकर के धवला करती हो!

तुम ही दीपक, तुम ही बाती, एवं तुम ही ज्योतिर्मय हो!
तुम ही मेरी कविताओं का, परिचय हो, तुम ही आशय हो!"

.................. (चेतन रामकिशन "देव").........................

♥♥गम की दवा ♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥गम की दवा ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सोचा था कोई गम की दवा करने आ गया!
रंग,नूर,वफ़ा कोई ख़ुशी भरने आ गया!

उस शख्स ने घाव मेरे कर दिए गहरे,
मैं सोचता था जिसको रफू करने आ गया!

जीते जी कभी झांक कर देखा नहीं जिसने,
मरने के बाद वो भी दुआ करने आ गया!

पहले ही गम की गर्द से निकला भी न था मैं,
और फिर से कोई गम का धुआं करने आ गया!

मज़बूरी है ये "देव" कोई बुजदिली नहीं,
कोई शेर जो मुर्दों में गुजर करने आ गया!"

.......... (चेतन रामकिशन "देव") .........

Thursday, 8 November 2012

♥कल के भरोसे ♥


♥♥♥♥♥♥♥♥कल के भरोसे ♥♥♥♥♥♥♥♥
तकदीर के ही नाम को बदनाम मत करो!
कल के भरोसे टाल के, आराम मत करो!

दुनिया तुम्हारे नाम  से करने लगे जो घिन,
जीवन में कभी ऐसे गलत काम मत करो!

तुम प्रेम की सौगात को रखना संभाल के,
भूले से कभी प्रेम को नीलाम मत करो!

सच हो भले ही कड़वा मगर देता है सुकूं,
तुम झूठ की आवाज को प्रणाम मत करो!

कोई भी दर्द सहना "देव" है नहीं मुश्किल,
तुम दर्द को झुककर कभी सलाम मत करो!"

.......... (चेतन रामकिशन "देव") ..........

Wednesday, 7 November 2012

♥बहनें(खिलती फुलवारी)♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥बहनें(खिलती फुलवारी)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बड़ी लाडली बहन हमारी, लगती है फूलों की क्यारी!
जब वो हंसती गाती है तो, खिल जाए कोई फुलवारी!
माँ की तरह कभी वो मुझको, सही बात की रट लगवाए,
और कभी बूढी दादी बन, उसने मेरी नजर उतारी!

बहन कभी है मित्र सरीखी, कभी बहन अभिभावक बनती!
कभी वो हमको दिशा दिखाए, कभी नेह की वाहक बनती!

बहन कभी उजला दीपक है, कभी हर्ष की है पिचकारी!
बड़ी लाडली बहन हमारी, लगती है फूलों की क्यारी...

बिना बहन के घर का आँगन, लगता है बस खाली-खाली!
जिस घर में बहनें होती हैं, उस घर में होती खुशहाली!
बिन बहनों के पर्व अधूरे, सूनी है अमुआ की डाली,
बहनों से जगमग होते हैं, ईद, दशहरा और दिवाली!

बहन का ह्रदय बड़ा ही कोमल, बहन का ह्रदय बड़ा दयालु!
बहन सदा ही अपनापन दे, बहन सदा होती कृपालु!

बहन की बातें बड़ी ही मीठी, बहन की बातें शिष्टाचारी!
बड़ी लाडली बहन हमारी, लगती है फूलों की क्यारी...

बहनों को न दंड समझना, बहनों को न भार समझना!
बहनों को न शूल समझना, बहनों को न हार समझना!
"देव" न उनको शस्त्र समझना, न उनको प्रहार समझना!
बहनों को अपने जीवन का, एक सुन्दर सिंगार समझना!

बहन की बोली कोयल जैसी, हर भाई के मन को भाती!
कभी भाई पीड़ा में हो तो, वो अश्रु की नदी बहाती!

बहन सितारों जैसी जगमग, बहन चांदनी सी उजियारी!  
बड़ी लाडली बहन हमारी, लगती है फूलों की क्यारी!"

"
बहनें- कभी मित्र, कभी सहेली बनकर, कभी माँ की तरह ममता का प्रतिनिधित्व करने वाली, भाई की पीड़ा के क्षणों में, भाई को साहस और स्नेह देने वाली, बहनें वास्तव में सम्मान, स्नेह और वंदन के योग्य हैं..तो आइये बहनों का सम्मान करें.."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८.११.२०१२ 








Tuesday, 6 November 2012

♥मनमोहिनी..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥मनमोहिनी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बड़ी प्यारी, बड़ी सुन्दर छवि, कुदरत से पाई है!
तुम्हारे रूप से देखो, धरा भी जगमगाई है!
तुम्हारे प्रेम से मेरे ह्रदय को प्रेरणा मिलती,
तुम्हारे प्रेम ने ही हर्ष की ज्योति जलाई है!

तुम्हारा प्रेम है पावन, तुम्हारा प्रेम अनुपम है!
तुम्हारा प्रेम उर्जा है, तुम्हारा प्रेम अधिगम है!

तुम्हारे प्रेम ने संघर्ष की युक्ति सिखाई है!
बड़ी प्यारी, बड़ी सुन्दर छवि, कुदरत से पाई है...

तुम्हारे रूप के दर्शन से मन अभिभूत होता है!
दहन के भाव बुझते हैं, शमन आहूत होता है!
तुम्हारे प्रेम का वंदन, तुम्हारे प्रेम का पूजन,
तुम्हारे प्रेम से ही ज्ञान का सम्भूत होता है!

तुम्हारा प्रेम सरगम है, तुम्हारा प्रेम वादन है!
तुम्हारे प्रेम वर्षा है, तुम्हारा प्रेम सावन है!

तुम्हारे प्रेम ने ही फूलों की रंगत बढ़ाई है!
बड़ी प्यारी, बड़ी सुन्दर छवि, कुदरत से पाई है...

तुम्हारे प्रेम से ही शब्दों का श्रृंगार होता है!
तुम्हारे प्रेम से हर स्वप्न भी साकार होता है!
तुम्हारा प्रेम मुझको "देव" दूतों की तरह लगता,
तुम्हारे प्रेम से ही हर जगह सत्कार होता है!

तुम्हारा प्रेम युक्ति है, तुम्हारा प्रेम सिद्धि है!
तुम्हारा प्रेम चन्दन है, तुम्हारा प्रेम शुद्धि है!

तुम्हारे प्रेम ने ही चेतना मन की जगाई है!
बड़ी प्यारी, बड़ी सुन्दर छवि, कुदरत से पाई है!"

"
जिससे प्रेम होता है, ह्रदय में जिसका वास होता है, आत्मा जिसके प्रेम को अनुभूत करती है, वो व्यक्ति भले ही श्वेत हो, अश्वेत हो, किन्तु प्रेम के क्षेत्र में रंग भेद की नीति, धनिक-निर्धन नीति काम नहीं करती! प्रेम, एक ऐसी अनुभूति जो, आत्माओं से परिचय कराते हुए, परस्पर विलीन हो जाती है! तो आइये इस अनुभूति के संवाहक बनें..."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०७.११.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!