Thursday, 4 July 2013

♥♥तेरी तस्वीर..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी तस्वीर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!
तुझसे मिलने को दिल तरसा, नयनों ने बरसातें की हैं!

तुझको अपने पास बिठाकर, दिल का हाल बताना चाहूँ!
बिन तेरे कितना तड़पा हूँ, मैं तुमको दिखलाना चाहूँ!
लेकिन देखो "देव" विरह की, ये बेला पूरी नहीं होती,
भले विरह के भावों को मैं, कितना भी झुठलाना चाहूँ!

तुम बिन मैंने जाग जाग कर, देखो पूरी रातें की हैं!
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!"

....................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-०४.०७.२०१३

Wednesday, 3 July 2013

♥♥निर्धन का गलियारा..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन का गलियारा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है!
निर्धन के सपनों में देखो, न सुन्दर संसार कोई है!
यहाँ हुकूमत का हर नेता, करता अपने हित की बातें,
निर्धन का जो हित करती हो, न ऐसी सरकार कोई है!

सड़क किनारे फुटपाथों पर, निर्धन अक्सर मर जाते हैं!
और देश के नेता केवल, झूठे आंसू बिखराते हैं!

कुदरत भी मासूम को मारे, न दोषी को मार कोई है!
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है...

एक ही दल की बात नहीं है, सब दल ऐसा ही करते हैं!
जनता का धन लूटपाट कर, बस अपनी झोली भरते हैं!
"देव" हमें अब इन लोगों से, युद्ध की रचना करनी होगी,
इसीलिए तो हावी हैं ये, हम जो लड़ने से डरते हैं!

दमन यदि सहते जायेंगे, तो उद्धार नहीं हो सकता!
निर्धन अपने जीवन का फिर, रचनाधार नहीं हो सकता!

श्वेत वस्त्र पहनें नेता पर, न उम्दा किरदार कोई है!
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है!"

.....................चेतन रामकिशन "देव"......................
दिनांक-०४.०७.२०१३

♥♥मिलेंगे हम तुम..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मिलेंगे हम तुम..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
यकीं है मुझको दुआ पे अपनी, जहाँ में फिर से मिलेंगे हम तुम!
विरह के मौसम का अंत होगा, के फूल बनकर खिलेंगे हम तुम!

जुदाई हो चाहें कितनी लम्बी, मगर मिलन की न आस टूटे!
ये तन मिले ने भले ही तन से, मगर न रूहों का साथ छूटे!
मैं "देव" दिल से सदा तुम्हारा, यकीन तेरा रहेगा कायम,
कभी जो रूठें तो मान जायें, कभी न दिल की ये प्रीत रूठे!

जहाँ भी हमको दुआयें देगा, के साथ फिर से चलेंगे हम तुम!
यकीं है मुझको दुआ पे अपनी, जहाँ में फिर से मिलेंगे हम तुम!"

.........................चेतन रामकिशन "देव"................................
दिनांक-०३.०७.२०१३

Tuesday, 2 July 2013

♥♥प्यार का आइना.♥♥

♥♥♥♥प्यार का आइना.♥♥♥♥♥♥
वो मेरे प्यार का, आइना तक नहीं!
ख्वाब जिसने मेरा, एक बुना तक नहीं!

फूल कागज के बस वो, दिखाता रहा,
ख़ार लेकिन कभी, एक चुना तक नहीं! 

जिसके अश्कों को, मैंने पिया रात दिन,
दर्द उसने मेरा पर, सुना तक नहीं!

वो तो अपनी सजावट में उलझा रहा,
ज़ख्म उसने मेरा एक, गिना तक नहीं!

"देव" वो प्यार मेरा, क्या समझेगा अब,
जिसने धड़कन को मेरी, सुना तक नहीं!"

............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-०२.०७.२०१३

Monday, 1 July 2013

♥♥दो कदम.. ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥दो कदम.. ♥♥♥♥♥♥♥
दो कदम भी मेरे साथ चल न सके!
जो तिमिर में दीया बनके जल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके!

प्रेम का जिनके मन, कोष कोई नहीं!
दर्द देकर कहें, दोष कोई नहीं!
ऐसे लोगों को इन्सान कैसे कहूँ,
तोड़कर दिल जिन्हें रोष कोई नहीं!

रंग चाहत का मैं उनपे क्या डालता,
जो मेरे सुख में देखो, मचल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके..

दिल किसी का, दुखाकर मैं सो न सकूँ!
बीज नफरत का मैं दिल में बो न सकूँ!
"देव" ये मेरी आदत है और आरजू,
झूठ का रिश्ता मैं देखो, ढ़ो न सकूँ!

मन को उम्मीद है, कल को बदलेंगे वो,
दर्द के आज पल जो, बदल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके!"

..........चेतन रामकिशन "देव".........
दिनांक-०२.०७.२०१३

Sunday, 30 June 2013

♥♥माँ( एक अनमोल शख्सियत)♥♥

♥♥माँ( एक अनमोल शख्सियत)♥♥
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं!
धरती पे माँ के जैसा, कोई खुदा नहीं!
आया जो बुरा वक़्त तो, अपने बदल गए,
माँ ऐसे वक़्त में भी, होती जुदा नहीं!

माँ है तो रोशनी है, माँ है तो खुशी है!
माँ है तो आदमी के, अधरों पे हंसी हैं!

माँ की छुअन से बढ़कर, कोई दवा नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं...

पोषण की भावना है, नेकी का पाठ है!
माँ सूर्य की लाली है, पूनम की रात है!
दुनिया की कोई उलझन, उसको न सताए,
जिस आदमी के सर पे, जो माँ का हाथ है!

माँ प्रेम की घोतक है, ममता की खान है!
बच्चों से उसकी खुशियाँ, बच्चों में जान है!

बच्चों की गलती माँ को, लगती खता नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं....

माँ है तो जिंदगी में, कोई कमी नहीं!
माँ से बड़ा न अम्बर, और ये जमीं नहीं!
सुन "देव" माँ के दिल को, कोई ठेस न देना,
माँ को यहाँ रुलाकर, कोई सुखी नहीं!

माँ प्रेम का सागर है, आशाओं की नदी!
ममता है अमर माँ की, देखो युगों, सदी!

माँ की तरह बच्चों पर, कोई फिदा नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं!"


"
माँ-एक ऐसी शख्शियत, जिसका वजूद इंसान के जीवन में, सर्वोच्च है! माँ, है तो जन्म है, माँ है तो ममता है, माँ है तो लालन, पालन, पोषण है! माँ, दुनिया में माँ का कोई विकल्प नहीं, तो आइये माँ, को नमन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०१.०७.२०१३

"मेरी ये रचना, मेरी माँ कमला देवी जी एवं प्रेम लता जी को समर्पित"
"
सर्वाधिकार सुरक्षित"
मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!




♥♥चाँद से सुन्दर..♥♥

♥♥♥♥♥♥चाँद से सुन्दर..♥♥♥♥♥
तु मिली है मुझे मेरी तकदीर से,
अच्छे लोगों की वरना कमी है बहुत!

लोग तो चाँद को, यूँ ही सुन्दर कहें,
वरना तू चाँद से भी, हसीं है बहुत!

भीगकर मेरा मन, मेरा तन झूमता,
ये मोहब्बत की बारिश, घनी है बहुत!

एक पल को भी, तू दूर जाना नहीं,
मेरी आँखों में तुम बिन, नमी है बहुत!

न सताओ मुझे, अब तो आ जाओ तुम,
रात अपने लिए ही, थमी है बहुत!

तू मिली तो मुझे, देख ऐसा लगा,
मेरी तकदीर सच में, धनी है बहुत!

"देव" तुम बिन, मुझे कुछ नहीं चाहिए,
तुमसे ही मेरी दुनिया, बनी है बहुत!"

........चेतन रामकिशन "देव"........
दिनांक-३०.०६.२०१३

Friday, 28 June 2013

♥♥गम से डरना नहीं ..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥गम से डरना नहीं ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गम से डरना नहीं जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे!
अपने मन के इरादों को जिन्दा रखो, एक दिन जीत पर तुम पहुँच जाओगे!

दिल न छोटा करो दर्द को देखकर, दर्द को अपनी हिम्मत बनाकर रहो!
हर गलत सोच को मन से मुक्ति दिला, रूह से अपनी नजरें मिलाकर रहो!
अपने दिल को मोहब्बत से रौशन करो, नफरतों से यहाँ कुछ भी मिलता नहीं,
तुम मिटाकर निराशा का काला तिमिर, मन में आशा का दीपक जलाकर रहो!

दर्द की आह भी देखो दब जाएगी, सब्र का गीत जो तुम यहाँ गाओगे!
गम से डरना जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे...

ख्वाब देखो नए रोशनी के लिए, तंग दिल बनके तुम देखो रहना नहीं!
अपने हक के लिए तुम करो युद्ध भी, तुम हकों का दमन देखो सहना नहीं!
"देव" दुनिया में तुमको मिले दर्द पर, तुम किसी की खुशी को नहीं लूटना,
सच के साथी बनो, सच के प्रहरी बनो, सच को भूले से भी झूठ कहना नहीं!

तुम नजर रखके मंजिल पे मेहनत करो, एक दिन सारी दुनिया पे तुम छाओगे!
गम से डरना जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे!"

.............................चेतन रामकिशन "देव".....................................
दिनांक-२८.०६.२०१३

♥♥प्यार की कोशिश..♥♥

♥♥♥♥♥प्यार की कोशिश..♥♥♥♥♥♥
तुमको तुमसे चुराने की कोशिश में हूँ!
तुमको अपना बनाने की कोशिश में हूँ!

तुमसे मैं प्यार करता हूँ कितना सनम,
बस तुम्हें ये जताने की कोशिश में हूँ!

पढ़ लो चाहत को मेरी, निगाहों में तुम,
तुमसे नजरें मिलाने की कोशिश में हूँ!

एक अरसे से तरसा, महक के लिए,
प्यार का गुल खिलाने की कोशिश में हूँ!

"देव" तुमको किसी की नजर न लगे,
तुमको दिल में छुपाने की कोशिश में हूँ!"

............चेतन रामकिशन "देव"...........
दिनांक-२८.०६.२०१३

Thursday, 27 June 2013

♥♥♥इरादे..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥इरादे..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला!
बेशक ही जिंदगी में, गम है बहुत मिला!
उम्मीद है एक दिन, ये हालात बदलेंगे,
मिट जाएगा जीवन से, ये दुख का जलजला!

गम भी है, दर्द भी, यहाँ पर है खुशी भी!
आंसू हैं, बेबसी भी, चेहरे पे हंसी भी!

कांटे हों चाहें कितने, पर फूल है खिला!
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला...

यूँ बैठकर के कोई, काम होता नहीं है!
बेकार से हुनर का, दाम होता नहीं है!
तुम "देव" जरा देख लो, इतिहास की तरफ,
नाकारा आदमी का, नाम होता नहीं है!

मेहनत के भरोसे जो, अपना काम करते हैं!
ऐसे ही लोग जग में, अपना नाम करते हैं!

साहस हो इरादों में तो, पर्वत भी है हिला!
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला!"

............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२७.०६.२०१३

♥♥देख के तुझको.♥♥

♥♥♥♥♥♥♥देख के तुझको.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
देख के तुझको मेरे दिल को, खुशी मिलती है!
तेरी चाहत से मोहब्बत की, कली खिलती है!

मैंने जिस ओर भी देखा, नजर घुमाकर के,
तुम्हारे प्यार की दुनिया ही, सजी मिलती है!

जब भी देखा है मैंने, रात की गहराई में,
बस तेरे ख्वाब की, दुनिया ही वसी मिलती है!

अपने दिल में जो मैंने झांक के देखा हमदम,
तेरी सूरत की हसीं एक, परी मिलती है!

"देव" उस वक्त मेरा रंग निखर जाता है,
तेरे एहसास की जिस रोज नदी मिलती है!"

............चेतन रामकिशन "देव"..............
दिनांक-२७.०६.२०१३

Tuesday, 25 June 2013

♥♥विश्वास ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥विश्वास  ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी!
प्यार की दूरी कितनी हो पर, है उसमें एहसास जरुरी!
मानवता के पथ पे देखो, अच्छाई इतनी आवश्यक,
जैसे भू के सिरहाने पर, होता है आकाश जरुरी!

जो बस अपने हित की सोचें, वो मानवता खाक करेंगे!
जिनके मन में पाप भरा हो, वो क्या जग को पाक करेंगे!

मानवता में एक दूजे की, पीड़ा का आभास जरुरी!
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी....

झूठ बोलकर जो औरों के, दामन को गंदा करते हैं!
जो खुद होकर झूठ के पुतले, औरों की निंदा करते हैं!
"देव" जहाँ में उन लोगों को, एक दिन पछताना होता है,
जो मुफलिस का खून बेचकर, बस अपना धंधा करते हैं!

ऐसे लोगों ने ही जग में, मानवता को क्षीण किया है!
दुनिया को अँधेरा देकर, अपना घर प्रवीण किया है!

ऐसे लोगों से दूरी को, हर पल है प्रयास जरुरी!
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी!"

..................चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-२६.०६.२०१३

♥♥भीग गए अल्फाज ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥भीग गए अल्फाज ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे!
बड़े भाग्य से आया हमदम, प्रेम तुम्हारा मेरे द्वारे!
मैं लफ्जों की सुन्दरता से, करता हूँ सिंगार तुम्हारा,
तेरी मांग में भरता हूँ मैं, अनुभूति के चाँद सितारे!

मन को तुमसे प्रेम बहुत है, सखी बड़ी मनभावन हो तुम!
हरियाली सी हरी भरी हो, गंगाजल सी पावन हो तुम!

सखी तुम्हारे भीतर दिखते, कुदरत के नायाब नजारे!
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे...

तेरे प्यार के एहसासों से, जीवन में खुशियाँ आती हैं!
तेरे प्यार से अंतर्मन पे, भावों की बदली छाती हैं!
"देव" तुम्हारे प्यार से मुझको, अपनायत का बोध हुआ है,
सखी तुम्हारे प्यार की कलियाँ, मेरे मन को महकाती हैं!

प्यार यहाँ कुदरत जैसा है, प्यार का कोई मोल नहीं है!
शब्दकोश में प्रेम से बढ़कर, देखो कोई बोल नहीं है!


सखी तुम्हारे प्रेम से मैंने, अपने मन के दोष निखारे!
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे!"

.............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२५.०६.२०१३

Monday, 24 June 2013

♥♥चलें कुछ दूर...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥चलें कुछ दूर...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलें कुछ दूर हाथों में पकड़कर हाथ हम दोनों!
यकीं है सात जन्मों तक, रहेंगे साथ हम दोनों!

सुबह से शाम हो जाये, सवेरा या नया आये,
करेंगे एक दूजे से सदा ही, बात हम दोनों!

तुम्हारा दर्द मेरा है, मेरा हर गम तुम्हारा है,
करेंगे अपनी आँखों से, यहाँ बरसात हम दोनों!

चलेंगे साथ मिलकर के कंटीले रास्तों पर भी,
हर एक मुश्किल दे देंगे, यहाँ पर मात हम दोनों!

तुम्हारे बिन नहीं कटता है, देखो "देव" एक भी दिन,
रहेंगे चांदनी बनकर, यहाँ हर रात हम दोनों!"

...............चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-२४.०६.२०१३

♥♥सच्चाई की राह...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥सच्चाई की राह...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सच्चाई की राह पे चलकर,  मैंने बस इतना पाया है!
गैरों की तो बात छोड़िये, अपनों ने भी ठुकराया है!
जो मेरी आँखों में अक्सर, सपनों के अंकुर बोता था,
आज उसी ने देखो मेरा, एक एक सपना बिखराया है!

हाँ ये सच है सच के कारण, अपनों की दूरी सहता हूँ!
माँ ने सच का पाठ पढाया, इसीलिए पर सच कहता हूँ!

तेजाबी बारिश करता है, गगन में जो बादल छाया है!
सच्चाई की राह पे चलकर,  मैंने बस इतना पाया है..

कुछ लम्हों को लहर झूठ की, भले खुशी से भर सकती है!
लेकिन इस दुनिया से देखो, नहीं हकीक़त मर सकती हो!
"देव" दिलों में सच की ताकत, सूरज बनकर करे उजाला,
लेकिन दिल में झूठ की रौनक, नहीं उजाला कर सकती है!

कागज के सुन्दर फूलों से, जीवन नहीं खिला सकते हैं!
झूठ बोलने बाले खुद से, नजरें नहीं मिला सकते हैं!

अल्प समय के बाद ही जग में, झूठ का पौधा मुरझाया है!
सच्चाई की राह पे चलकर,  मैंने बस इतना पाया है!"

...............चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-२४.०६.२०१३





Sunday, 23 June 2013

♥♥चांदनी के दीये..♥♥

♥♥♥♥♥चांदनी के दीये..♥♥♥♥♥
चांदनी के हजारों दीये जल गए!
आसमां में सितारों के गुल खिल गए!
प्यार की लहरें देखो मचलने लगीं,
एक दूजे से जब अपने दिल मिल गए!

प्यार से चांदनी भी, निखरने लगी!
हर तरफ रौशनी सी, बिखरने लगी!

लाज इतनी हुई है, लब सिल गए!
चांदनी के हजारों दिए जल गए...

चांदनी रात का ये मिलन खास है!
मैं तेरे पास हूँ, तू मेरे पास है!
तुमसे मिलकर मुझे "देव" ऐसा लगा,
मैं जमीं और तू मेरा आकाश है!

प्यार के सपने दिल में सजाते रहो!
प्यार जन्मों-जन्म तक निभाते रहो!

प्यार से अपने ख्वाबों के तन धुल गए!
चांदनी के हजारों दिए जल गए!"

......चेतन रामकिशन "देव"......
दिनांक-२३.०६.२०१३

♥♥दर्द की निशानी..♥♥

♥♥♥♥♥दर्द की निशानी..♥♥♥♥♥
जिंदगी से उलझकर ही रहने लगे!
आंख से आंसू दिन रात बहने लगे!

जो भी सपने सजाये थे मैंने कभी,
वक़्त की ठोकरों से वो ढहने लगे!

रौशनी ने पलटकर ही देखा नहीं,
हम अंधेरों को ही अपना कहने लगे!

प्यार में जो मिला वो निशानी समझ,
दर्द हंसकर के दिन रात सहने लगे!

वंदना जिसकी हम करते आये सदा,
उसकी धारा में जज्बात बहने लगे!

मेरे भीतर का कुंदन निखरने लगा,
हम गमों की तपिश जबसे सहने लगे!

"देव" अपनों ने मुड़कर नहीं देखा तो,
हम रकीबों को ही अपना कहने लगे!"

..........चेतन रामकिशन "देव"........
दिनांक-२३.०६.२०१३

Thursday, 20 June 2013

♥♥दर्द की धूप... ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दर्द की धूप... ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दर्द ने अधमरा है मुझे कर दिया, फिर से जीने का मुझको हुनर चाहिए!
दर्द की धूप में जल रहा हूँ बहुत, कोई राहत का मुझको शज़र चाहिए!
रास्ते बंद हैं सारी खुशियों के पर, फिर भी उम्मीद दिल में बची है जरा,
थोडा टुकड़ा मिले बस जमीं का मुझे, न ही चाहा के मुझको शिखर चाहिए!

रौशनी मंद है और अँधेरा घना, पर किसी से जरा भी शिकायत नहीं!
जिनको चाहा है उनको कहूँ बेवफा, मेरे दिल की मुझे ये इजाजत नहीं!

दर्द के इस सुलगते बियांबान में, एक पानी की मुझको लहर चाहिए! 
दर्द ने अधमरा है मुझे कर दिया, फिर से जीने का मुझको हुनर चाहिए...

नासमझ बनके जो मुझको समझाते हैं, वो सुनेंगे दुखन क्या मेरे दर्द की!
वो यहाँ मुझको देंगे दवा क्या भला, जिसने पाई नहीं हो तपन दर्द की!
"देव" मैं अपने अश्कों को पीता रहा, उम्र के आखिरी छोर तक भी मगर,
कोई ऐसा मुझे पर नहीं मिल सका, जिसने समझी चुभन हो मेरे दर्द की!

थोड़ी हिम्मत बची है जिये जाऊंगा, अपने हाथों से मरना गवारा नहीं!
मेरी तन्हाई हर पल मेरे साथ है, क्या हुआ जो किसी का सहारा नहीं!

दर्द से लड़ जो सकूँ निहत्थे भी में, हौंसले का मुझे वो ज़हर चाहिए!
दर्द ने अधमरा है मुझे कर दिया, फिर से जीने का मुझको हुनर चाहिए!"

................................चेतन रामकिशन "देव".....................................
दिनांक-२०.०६.२०१३

Wednesday, 19 June 2013

♥♥कुदरत का कहर.. ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥कुदरत का कहर.. ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कुदरत के इस कहर के आगे, फिर इन्सां की हार हो गयी!
पल भर में ही खिलती क्यारी, उजड़ के देखो खार हो गयी!
जिस मंदिर के इर्द गिर्द अरसे से, गंगाजल बहता था,
आज उसी स्थल पे देखो, खून की गाढ़ी धार हो गयी!

पलक झपकते ही कुदरत ने, सब कुछ मटियामेट कर दिया!
जिस मानव को जनम दिया था, उसका ही आखेट कर दिया!

हँसते गाते लोगों के घर, पीड़ा की झंकार हो गयी! 
कुदरत के इस कहर के आगे, फिर इन्सां की हार हो गयी...

हाँ ये सच है इंसानों ने, इस कुदरत का दमन किया है!
लेकिन गलती हो जाने पर, कुदरत को ही नमन किया है!
"देव" यहाँ कुदरत के आगे, नहीं किसी की चल पाती है,
कुदरत ने खिलती बगिया को, देखो उजड़ा चमन किया है!

नहीं पता के इस कुदरत का, गुस्सा जाने कब कम होगा!
नहीं पता उजड़ी बगिया का, हरा भरा कब मौसम होगा!

जिस कुदरत ने जन्म दिया था, उसकी हम पर मार हो गयी!
कुदरत के इस कहर के आगे, फिर इन्सां की हार हो गयी!"

.........................चेतन रामकिशन "देव"........................
दिनांक-१९.०६.२०१३

Tuesday, 18 June 2013

♥♥भारी सांसें.. ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥भारी सांसें.. ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भारी सांसें उठ नहीं पातीं, कुछ पल को आराम चाहिए!
कई दशक से चलता आया, कुछ पल को विश्राम चाहिए!
जिसके दामन में सर रखकर, मैंने दर्द बताना चाहा,
वही शख्स कहता है मुझसे, उसे दुआ का दाम चाहिए!

बिना जुर्म के ही दुनिया ने, मुझको मुजरिम बना दिया है!
मेरी पीड़ा सुने बिना ही, अपना निर्णय सुना दिया है!

बिना कत्ल के ही अब मुझको, कातिल जैसा नाम चाहिए!
भारी सांसें उठ नहीं पातीं, कुछ पल को आराम चाहिए...

नहीं चुका हूँ, नहीं थका हूँ, मैं जीवन से डरा नहीं हूँ!
मिटटी को जड़वत रोके हूँ, बेशक ही मैं हरा नहीं हूँ! 
"देव" मेरे नाजुक से दिल ने, दुनिया के सदमे झेले हैं,
इसीलिए बस मुरझाया हूँ, लेकिन मन से मरा नही हूँ!

मैंने जिसकी खातिर देखो, अपना गाढ़ा खून बहाया!
उस इन्सां ने ही दुनिया में, मेरे दिल को बहुत रुलाया!

जो आँखों को सुकूं दे सके, मुझको वो गुलफ़ाम चाहिए!
भारी सांसें उठ नहीं पातीं, कुछ पल को आराम चाहिए!"

................चेतन रामकिशन "देव"..................
दिनांक-१९.०६.२०१३