Friday, 16 March 2012

♥भ्रूण में बालिका...♥


♥♥♥♥भ्रूण में बालिका...♥♥♥♥♥
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला!
उसके पालन का देखो इरादा टला!

मात को उसका आगम नहीं भा रहा!
और पिता क्रोध में देखो चिल्ला रहा!
मानो सारी हंसी को ग्रहण लग गया,
गीत खुशियों के, कोई नहीं गा रहा!

हर्ष की धूप का मानो सूरज ढला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला.....

पुत्र होता तो खुशियों में होते मगन!
गीत गाते सभी, घर में होता हवन!
बालिका देखकर हर खुशी मिट गई,
देखो रोने लगे हर किसी के नयन!

बालिका से ही होती जलन क्यूँ भला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला......

बालिका भी तो मानव की संतान है!
न ही निर्जीव है, न ही निष्-प्राण है!
बालिका भी तो है "देव" इन्सान ही,
उसकी सूरत में भी देखो भगवान है!

बालिका से ही होता क्यूँ हमको गिला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला!"


"बालिका की भ्रूण हत्या, अभी भी बदस्तूर जारी है!
एक तरफ कन्या को देवी का रूप मन जाता है और दूसरी तरफ उसको दुनिया देखने से पहले ही कुचल दिया जाता है! आखिर हम क्यूँ नहीं समझते, कि बालिका भी सजीव है और वो भी पुत्र की तरह ही आवश्यक है! तो आइये जरा चिंतन करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१७.०३.२०१२


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♥हंसी और हिम्मत..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥हंसी और हिम्मत..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलो जरा हंसकर भी देखो, यूँ मुंह लटकाकर क्यूँ बैठे हो!
चलो स्याह से बाहर आओ, तिमिर में आकर क्यूँ बैठे हो!
कभी हैं गम तो कभी खुशी है और जीवन है नाम इसी का,
चलो बढ़ो हिम्मत से आगे, तुम घबराकर क्यूँ बैठे हो!"
......."शुभ-दिन"...........चेतन रामकिशन "देव".........

♥सिर्फ तुम....♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सिर्फ तुम....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिना तुम्हारे मेरे हमदम, मैं हूँ इक पत्थर की  मूरत,
इस दुनिया में बिना रूह के तन का कोई मोल नहीं है!
किसी और के पीछे देखो, नहीं भागता मेरा मनवा,
मेरे दिल में खोट न कोई, नियत डांवा-डौल नहीं है!"
..............चेतन रामकिशन "देव".......................

Thursday, 15 March 2012

♥आदमी या दैत्य...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आदमी या दैत्य...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हम सिक्कों की खनक में सारी अपनायत को भुला रहे हैं!
हम दौलत की प्यास में देखो, रिश्तों में विष मिला रहे हैं!
"देव" सुना था यहाँ शवों की, मुक्ति अग्नि से होती थी,
आज मगर हम दानव बनकर, जिन्दों को भी जला रहे हैं!"
.........."शुभ-दिन"......चेतन रामकिशन "देव".............


♥♥इंतज़ार..♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥इंतज़ार..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमदम मेरे मुझे तुम इतना इंतज़ार क्यूं करवाते हो !
दिन बीते यादो में तेरी, रात को तारे गिनवाते हो!
मेरी बेचैनी का तुम पर, कोई असर नहीं होता है,
और परेशां मुझे देखकर, तुम छुप-२ के मुस्काते हो!"

"
प्रेम का हिस्सा है इंतजार और शरारत! शरारत में जब हमदम छुपकर इंतजार की तड़प देखते हैं तो एक असीम प्रेम अनुभूति मिलती है और उससे ज्यादा आनंद तब आता है जब द्वितीय पक्ष रूठ जाता है और उसे मनाया जाता है! "

चेतन रामकिशन "देव"

Wednesday, 14 March 2012

♥खुदा..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥खुदा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खुदा का नूर जब भी चांदनी बनकर बरसता है!
अँधेरा दूर होता है, नया सूरज निकलता है!

यहाँ कानून के दर पर भले इन्साफ न हो पर .
वहां उसकी अदालत में, सही इंसाफ मिलता है!

यहाँ इन्सान मनमानी भला कब तक चलाएगा,
खुदा जब रूठ जाता है तो सारा जग दहलता है!

कभी मायूस न होना खुदा जो साथ न दे तो,
खुदा भी आदमी का इम्तिहां लेने निकलता है!

खुदा की शान में मैं और ज्यादा " देव" क्या लिखूं
नहीं दिखता मगर हर शे पे उसका हुक्म चलता है!"


"
उस अद्रश्य शक्ति को चाहें जिस नाम से पुकारो, उसका अस्तित्व तो कहीं न है, वो भले ही न दिखता हो पर उसके अस्तित्व को सही रखने पर सुखमय, सफलता भी देता है, और जब उसी के अस्तित्व को नजरंदाज किया जाता है तो वो कभी सुनामी, कभी जलजले, कभी हार देकर मानव को पुन सचेत भी करता है! मेरा ये मानना है, आपका क्या मानना है?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१४.०२.२०१२


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Sunday, 11 March 2012

♥♥वीर नरेंद्र...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥वीर नरेंद्र...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सत्य के पथ पर चला सदा वो, शत्रु को ललकारा!
अपने आप को घिरा देख भी, वो हिम्मत न हारा!
हे दिव्यपुरुष ये नाम तुम्हारा, सूरज सा चमकेगा,
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा!

देश की इन सरकारों से पर आस नहीं है इंसाफी की!
है लूली सरकार को आदत, इन गुंडों की बैसाखी की!

जल्द ही वो दिन आएगा, हिल जाएगा शासन सारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, नरेंद्र जी नाम तुम्हारा.....

देश की और सूबे की सत्ता, अब गुंडों से भरी पड़ी है!
सच्चाई का गला दबाने, जगह जगह ये फौज खड़ी है!
लेकिन सच्चाई का सूरज नहीं अमावस से मरता है,
झूठ हो चाहें कितना भारी लेकिन सच ने जंग लड़ी है!

हमे जागना होगा लोगों, युद्ध भी इनसे करना होगा!
सत्ता के गलियारों को, शुद्ध भी हमको करना होगा!

इन गुंडों से जंग लडेगा, एक दिन पूरा देश हमारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा.....

मेरे देश के लोगों सीखो, इस सुपुत्र की कुर्बानी से!
जंग लड़ो इस गुंडेपन से, मक्कारी से बेईमानी से!
नहीं नींद से जागोगे तो, यूँ ही लुटना-मरना होगा,
चलो बचाओ आगे आकर, देश को ऐसी वीरानी से!

गूंगे- बहरे नहीं बनो तुम, ताकत का दीदार कराओ!
सत्ता में शामिल गुंडों की, ये मैली सरकार गिराओ!

आओ कुचल दें मिल-जुलकर, गुंडागर्दी का ये नारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा"

“मध्य प्रदेश में कार्यरत आई.पी.एस. नरेंद्र जैसे वीर पुरुष की कुर्बानी से सीख लेनी होगी! सत्ता में शामिल इन गुंडों को अपनी ताकत का एहसास करना होगा! यदि अपना अस्तित्व बचाना है, सच्चाई को जीवित रखना है तो चापलूसी करने की धारणा से स्वयं को मुक्त करना होगा! जागना होगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१२.०३.२०१२


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♥♥जरुरत....♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जरुरत....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
यदि भुलाना आसां होता, तो हम तुमसे फरियाद न करते!
सुबह से लेकर शाम ढले तक, बस तुमको ही याद न करते!
यदि तुम्हारे बिन रह लेते, तो क्यूँ विनती करते हम तुमसे,
तेरी याद में तड़प-तड़प कर, हम चैन-सुकूं बरबाद न करते!"
........................चेतन रामकिशन "देव".............................

Friday, 9 March 2012

♥♥यकीन-ए-इश्क..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥यकीन-ए-इश्क..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं उनकी बेवफाई की, शिकायत भी नहीं करती!
न दिल में बैर रखती हूँ, बगावत भी नहीं करती !

मुझे उनके सिवा चेहरा,  कोई लगता नहीं उम्दा,
किसी को देख भरने की, शरारत भी नहीं करती!

मेरा दिल टूट भी जाये, हर इक टुकड़े में वो होगा,
यही सोचकर दिल की, हिफाजत भी नहीं करती!

बड़ी अनमोल होती है, ये दौलत प्यार की लेकिन,
मैं उनसे प्यार करने में, खसासत भी नहीं करती!

मुझे एहसास है के "देव" वो पत्थर भी पिघलेगा,
मैं उनकी याद से अपनी, जमानत भी नहीं करती!"

"
जिंदगी में प्रेम और अपनत्व की लौ जिसके प्रति जलती है, वो उसे अपना लगता है, चाहें द्वितीय पक्ष उसे नजरंदाज करता हो! आज इसी सोच को केन्द्रित करते हुए, इक लड़की के मन में होने वाले इस द्वन्द को इन शब्दों से जोड़ने की कोशिश की है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०९.०३.२०१२


उक्त रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

Thursday, 8 March 2012

ये कैसी नारी-मुक्ति..


♥♥♥♥♥♥♥♥ये कैसी नारी-मुक्ति..♥♥♥♥♥♥♥♥
मंच-मात्र से भाषण देना, नारी का उत्थान नहीं है!
चंद नारियां उठी हैं ऊँची, बाकी की पहचान नहीं है!

नारी के उत्थान को हमको, गाँव-२ भी जाना होगा!
उसके अधिकारों के प्रति, उसे हमे समझाना होगा!
नारी को भी देना होगा, मूल-मंत्र शिक्षा का हमको,
नारी को भी मर्यादा का, ज्ञान हमे करवाना होगा!

हम सबको ये मानना होगा, नारी भी बेजान नहीं है!
चंद नारियां उठी हैं ऊँची, बाकी की पहचान नहीं है!"



"
आज महिला दिवस है! कुछ नारियों की बात छोड़ दें तो बहुसंख्यक नारियां अभी भी स्याह में गुम हैं, क्यूंकि जो नारियां उत्थान कर जाती हैं वे भी उनके विकास के लिए, उत्थान के लिए अपेक्षाकृत रचनात्मक कार्य नहीं कर पाती मात्र शहर की नारियों के उत्थान से नारी मुक्ति/ उत्थान असंभव है, क्यूंकि देश की बहुसंख्यक नारी गाँव में रहती है! तो उधर भी देखना होगा!"

"महिला शक्ति को नमन"
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८.०३.२०१२

Monday, 5 March 2012



♥♥♥♥♥♥♥♥समझा नहीं तुमने...♥♥♥♥♥♥♥
न जाने क्यूँ मेरे एहसास को समझा नहीं तुमने,
तुम्हे ही चाहा था मैंने तुम्हे दिल में वसाया था!

तुम्हारी आंख का आंसू हमेशा अपना ही समझा,
तुम्हारे दर्द को मैंने गले अपने लगाया था!

कभी तुम याद कर लेना, गए गुजरे हुए वो पल,
अँधेरी राह में तेरी कभी दीपक जलाया था!

तेरी यादों को सीने में दफन भी कर नहीं सकता,
तेरी यादों की खुश्बू में कभी मैं मुस्कुराया था!

भले ही भूल जाना तुम मुझे पत्थर नहीं कहना,
ये पत्थर काटकर मैंने, तेरा रस्ता बनाया था!"


"
प्रेम के एहसास को कोई समझकर भी अनदेखा कर देता है तो कोई किसी के काबिल नहीं होता!
पर प्रेम के भाव ये कैसे समझें कि कोई उसे नकार रहा है, क्यूंकि उस शख्स से अपनापन रोके भी तो कैसे जिसे वो अपने दिल में वसाकर वंदना करता है! प्रेम कभी मिट नहीं सकता, उसे उम्मीद होती है द्वितीय पक्ष उसका दर्द समझेगा! इसी दर्द को इन शब्दों से उकेरने का प्रयास किया है!  "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०६.०३.२०१२


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Sunday, 4 March 2012

♥♥प्रेम-दीप...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥प्रेम-दीप...♥♥♥♥♥♥
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी!
प्रेम का गीत तुमने सुनाया सखी!
प्रेम के रंगों में तुमने रंगकर हमें,
मेरे जीवन को सुन्दर बनाया सखी!

प्रेम से मेरा जीवन सरल कर दिया!
प्रेम से मेरा घर भी महल कर दिया!

गोद में शीश रखकर सुलाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी.....

प्रेम के तुमने देकर हमे शुभ-वचन!
क्रोध का अंत करके दिया है शमन!
मेरे जीवन को तुमने दिखाई दिशा,
स्वार्थ भावों की तुमने बुझाई दहन!

प्रेम से मेरा जीवन निखिल कर दिया!
मेरे पाषाण मन को सजल कर दिया!

प्रेम का पाठ तुमने पढाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी....

प्रेम का दीप मन में जले अनवरत!
प्रेम हिंसा के भावों को करता विरत!
प्रेम तुमने मुझे "देव" जबसे दिया,
न दुरित सोच है, न ही चिंतन गलत!

प्रेम से आत्मा को धवल कर दिया!
प्रेम से मेरा जीवन सबल कर दिया!

प्रेम का स्वप्न तुमने सजाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी!"

"
प्रेम, जीवन को न सिर्फ अपनत्व देता है अपितु प्रेम के द्वारा व्यक्ति को सकारात्मकता भी मिलती है! प्रेम के दीप जहाँ जलते हैं वहां पर हिंसा की सोच नहीं होती और व्यक्ति दुरित भावों को त्याग देता है! तो आइये प्रेम करें!


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०५.०३.२०१२


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♥मायूसी.....♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मायूसी.....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिना तुम्हारे मायूसी है, चैन-सुकूं सब कुछ खोया है!
आंखें भी अश्कों से भीगीं और सीने में दिल रोया है!
जिसने अपना हमको कहकर मेरे आंसू अपनाये थे,
आज उसी ने मेरी राह में, काँटों का पतझड़ बोया है!"
....................चेतन रामकिशन "देव"....................

Friday, 2 March 2012

♥♥हमजोली...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हमजोली...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी सूरत गुलों के जैसी, कोयल के जैसी बोली है!
रंग बिरंगी तितली जैसी, तू खुशियों की रंगोली है!
बुरे वक्त में साहस देती, अपनापन भी देती है तू,
तू ही मेरे दुःख को समझे, तू ही मेरी हमजोली है!"
.............चेतन रामकिशन "देव".......................

Wednesday, 29 February 2012

♥♥यूपी में मतदान..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥यूपी में मतदान..♥♥♥♥♥♥♥
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!
शेष चरण के लिए लगाई, हर नेता ने जान!

आज सांय के 5 वजे तक, होगा बस प्रचार!
नेता बाँट रहे जनता को, हाथ जोड़कर प्यार!
अपने दल को श्रेष्ठ बताकर देते हैं ये लोभ,
और दलों पर नेता करते, मन भरके प्रहार!

कहीं मुलायम करते देखो माया का अपमान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

दमखम दिखता कांग्रेस में, माया भी तैयार!
और सपा ने भी ताने हैं,अपने सब हथियार!
भाजपा ने भगवा रंग का, खूब दिखाया झंडा,
और अजित नल से करते हैं, पानी की बौछार!

बीजेपी की निंदा करते, आज वही कल्याण!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

६ तारीख को मिल जाएगी, जीत किसी को हार!
किसी की नैय्या डूबेगी तो, किसी की होगी पार!
किसी के दर तो जीत खुशी की दीप जला डालेगी,
"देव" पराजय कहीं पे देगी, आँखों में जलधार!

जाने किसको शूल मिलेंगे, किसका होगा मान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!"

"उत्तर प्रदेश में ६ चरणों का चुनाव बीत चूका है और अंतिम चरण का चुनाव ३ मार्च को होगा! बसपा जहाँ दुबारा वापसी का जोरदार संकेत दे रही है तो वहीँ कांग्रस और रालोद भी जुटे हुए हैं! भाजपा, सपा और अन्य दल भी अपने अपने दावे ठोंक रहे हैं! ६ तारीख में ज्ञात हो जायेगा कि किसकी विजय हुयी, फ़िलहाल तो अंतिम चरण में वोट डालने का अनुभव लेते हैं!"


चेतन रामकिशन "देव"
०१-०३-२०१२


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Tuesday, 28 February 2012

♥आज का आदमी..♥


♥♥♥♥आज का आदमी..♥♥♥♥
आदमी क्यूँ बदलता जा रहा है!
भावना क्यूँ मसलता जा रहा है!

प्रेम से अब कोई मतलब नहीं है,
दिल को ऐसे कुचलता जा रहा है!

कौनसी हसरतें चाहता है जाने,
जाने किस ओर चलता जा रहा है!

देखकर और की खुशियाँ न जाने,
अपने-आपे में जलता जा रहा है!

"देव" अब खून के रिश्ते कहाँ हैं,
आदमी सबको छलता जा रहा है!"


" पता नहीं क्यूँ वक़्त बदला है या आदमी, पर आदमी अब आदमी जैसा दिखता तो है पर भीतर से इन्सानियत मरती जा रही है! तो आइये कोशिश करें के अपने भीतर के आदमी को जिन्दा रख सकें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२९.०२.२०१२

Sunday, 26 February 2012

♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥


♥♥♥♥♥♥♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भूख प्यास का कफन लपेटे, मानो लाश के जैसा तन है!
गौर से देखो जरा इधर भी, मुफलिस का ऐसा जीवन है!

कोई तो चुनता कूड़ा रददी, एक वक़्त की रोटी खातिर,
कहीं किसी के हाथ में देखो, भीख मांगने का बर्तन है!

क्या नीति है मेरे मुल्क की, इतना अंतर करती है जो,
कोई तो तरसे पाई-२ को, किसी के हिस्से ढेरों धन है!

इनके दर्द की शिफा करे जो, देश में ऐसा नहीं सियासी,
छोटे से छोटा नेता भी, अब तो मुफलिस का दुश्मन है!

देख के इनके तंग हाल को "देव" निगाहें भर आती है,
मुफलिस के घर में तो देखो, साँझ सवेरे करुण रुदन है!"



"मुफलिसी में जीने वाले लोगों से ही पूछा जा सकता है कि, मुफलिसी का दर्द क्या होता है~ देश की नीतियां ऐसी हैं कि एक व्यक्ति पाई-पाई को तरसता है तो वहीँ एक व्यक्ति हजारों करोरों की सम्पत्ति का स्वामी होता है! राजनीति के सौदागर तो इनके जख्मों पर सिर्फ नमक छिड़कते हैं! इन मजलूमों को जागना होगा, इस घुटन से बचना है तो क्रांति तो लानी होगी!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२७.०२.२०१२

Friday, 24 February 2012

♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारा प्रेम हमारे मन को आकर्षित कर देता है!
अधरों पर मुस्कान सजाकर, जीवन हर्षित कर देता है!
प्रेम तुम्हारा हर संकट में, हमको बल करता है प्रेषित,
अपनी आँखों की निंदिया भी, हमें समर्पित कर देता है!"
.....................चेतन रामकिशन "देव"......................

Wednesday, 22 February 2012

♥♥♥टीस...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥टीस...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कोई नजदीक रहकर भी मेरी परवाह नहीं करता,
कोई पर दूर रहकर भी, मेरी खातिर दुआ करता!

मेरे अपनों ने तो मुझको हमेशा घाव ही बख्शे,
कोई पर गैर होकर भी, मेरे दुःख की दवा करता!

मेरे अपनों ने तो मेरी ख़ुशी को जमके लूटा था,
कोई पर गैर होकर भी, मुझे खुशियाँ फिदा करता!

रगों का खून मिलने भर से अपनापन नहीं आता,
आजकल खून का रिश्ता ही, ज्यादा दगा करता!

किसी पे जुल्म होने का तमाशा देखते हैं "देव",
यहाँ मजलूम के हक में, नहीं कोई निदा करता!"


"जिंदगी में ऐसे पल भी आते हैं जिसमे खूने के रिश्ते तक बदल जाते हैं~ जीवन भर साथ देने की बात करने वाले और वादा करने वाले बदल जाते हैं, तो दिल में एक तीस उठती है! कुछ शब्द जोड़ने का प्रयास किया है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२२.०२.२०१२

Monday, 20 February 2012

♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!
माँ की छवि बड़ी प्यारी है, माँ तो है अभिराम!

माँ का अर्थ बड़ा व्यापक है, माँ का ह्रदय विशाल!
माँ के आशीर्वाद से थमती, समस्याओं की चाल!
माँ की लोरी करती झंकृत, माँ देती मधुर दुलार,
माँ का ज्ञान हमारे साथ में, बनकर रहता ढाल!

माँ के मन में कभी न आते, दुरित भावना माम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम...

माँ के नाम भले कितने हों,  एक है जीवन दर्शन!
अम्मी हो या माँ हो मम्मी, सभी प्यार का दर्पण!
भले ही इस जीवन और जग में, ढेरों हों सम्बन्धी,
जीवन में पर विस्मृत न हो, अपनी माँ का अर्पण!

माँ की ममता के आगे न लगता कभी विराम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!

सदा ही संतानों के हित में, माँ करती है त्याग!
सदा सुनाती है माँ हमको, प्यार का मीठा राग!
माँ का वंदन यदि नही तुम करते हो जीवन में,
व्यर्थ है पूजन करने जाना, हरिद्वार, प्रयाग!

माँ का वंदन किये बिना तो, निष्फल है हर काम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!"


"माँ- प्रक्रति की सबसे अनमोल रचना! यूँ तो हर एक सम्बन्ध चाहें पिता हो, भाई हो, बहिन हो, मित्र हों, पति हो या पत्नी, अपनत्व तो देते ही हैं परन्तु माँ का अपनत्व इन सबसे बढ़कर है! ये सब हों और माँ न हो तो जीवन में ममता नहीं मिलती क्यूंकि ममता माँ के ही ह्रदय से ही उद्भव होती है, तो आइये माँ का सम्मान करें!"

 माँ की ममता को समर्पित रचना....

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२१.०२.२०१२