Thursday, 6 December 2012

♥इक ख्वाब नया..♥


♥♥♥♥♥♥♥इक ख्वाब नया..♥♥♥♥♥♥
दर्द को क्यूँ भला कमजोरी बनाया जाये!
अपनी हिम्मत से चलो दर्द मिटाया जाये!

क्या हुआ जो ये मेरा ख्वाब टूटकर बिखरा,
चलो इक ख्वाब नया फिर से सजाया जाये!

आज के नेता तो रहते इसी फिराक में बस,
कौन से मुद्दे पे जनता को लुभाया जाये!

कब कहाँ मिलता है नफरत से ज़माने में कुछ,
आओ इक दीप मोहब्बत का जलाया जाये!

"देव" जिन लोगों ने बख्शी हमे आज़ादी है,
उनके सजदे में चलो सर को झुकाया जाये!"

.............चेतन रामकिशन "देव"...............






Wednesday, 5 December 2012

♥हुनर..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हुनर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जिंदगी में चलो कोई हुनर इजाद करो!
न यूँ मायूसी में तुम जिंदगी बर्बाद करो!

जो तुम्हे दे के गया गम के अँधेरे यारों,
क्यूँ भला ऐसे रकीबों को कभी याद करो!

दर्द को बहने दो आँखों से आंसुओं की तरह,
क्यूँ उदासी से भला, जिंदगी नाशाद करो!

तुम यहाँ सीखो अंधेरों में उजाला करना,
न अँधेरे से कहीं जाने की फरियाद करो!

तेरे गम "देव" जिंदगी से चले जायेंगे,
अपने जज्बात तपाकर के जो फौलाद करो!

...........चेतन रामकिशन "देव"............

♥♥नया जनम..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥नया जनम..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नहीं मिले इस जनम में तो क्या, जनम कई अगले आने हैं!
अपनी रूहें मिल जाएँगी, अपने दो दिल मिल जाने हैं!

नए जनम में हम तुम सजनी, एक दूजे के बन जायेंगे!

न कोई मज़बूरी होगी, न घरवाले ठुकरायेंगे!
हम दोनों भी पंख लगाकर, छुएंगे इस नील गगन को,
जीवन पथ रेशम सा होगा, फूल खुशी के खिल जायेंगे!

नए जनम में मेरी सजनी, दीप मिलन के जल जाने हैं!

नहीं मिले इस जनम में तो क्या, जनम कई अगले आने हैं!"

..........................चेतन रामकिशन "देव"..........................

Tuesday, 4 December 2012

♥♥जिंदगी..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥जिंदगी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जब भी आंसू मेरी आँखों से छलक आया है!
जिंदगी तूने मुझे सीने से लगाया है!

रात हो कितनी भी गहरी यहाँ मेरे यारों,
हर सुबह फिर से उजाले का जिक्र आया है!

वो मुझे उम्र भर हरगिज़ भुला नहीं सकता,
जिसने एक रोज मुझे रूह में वसाया है!

जिंदगी में कभी गिरने से नहीं डरना तुम,
ठोकरों ने ही मुझे चलना फिर सिखाया है!

उसके ही नाम को रखती है याद ये दुनिया,
"देव" जिस शख्स ने, पत्थर में गुल खिलाया है!"

................चेतन रामकिशन "देव"...................










♥मधुरिमा .♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मधुरिमा .♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मधुरिका हो, मधुरिमा हो, तुम पूनम की धवल निशा हो!
तुम ही मेरी सहयोगी हो, तुम जीवन की सही दिशा हो!

तुम वीणा की मधुर ध्वनि हो, तुम भावुक हो, तुम्ही सजल हो!
तुम हो इत्र चमेली जैसा, तुम मोहक हो, तुम्ही कमल हो!
तुमसे मिलकर मेरा जीवन, इन्द्रधनुष के रंग रंगा है,
तुम पावन हो पूजा जैसी, तुम निश्चल हो, तुम्ही सरल हो!

तुम ही मेरा जीवन दर्शन, तुम ही मेरी जिजीविषा हो!
मधुरिका हो, मधुरिमा हो, तुम पूनम की धवल निशा हो!"

........................चेतन रामकिशन "देव"........................


Monday, 3 December 2012

♥♥सवेरा♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सवेरा♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रात भर माँ की दुआओं का असर होता रहा!
दर्द में भी जो बड़े चैन से मैं सोता रहा!

उसके ही ख्वाब हकीक़त का सफ़र पाते हैं,
ख्वाब की चाह में जो अपनी नींद खोता रहा!

एक पल में ही यहाँ देखो बदलती किस्मत,
आज वो हँसता है, जो सारी उम्र रोता रहा!

उसके ही दिल में प्यार की फसल जवान हुई,
प्यार के बीज जो दिल की जमीं में बोता रहा! 

मुझे भी दर्द है पर "देव" मैं मायूस नहीं,
रात के बाद सवेरा भी यहाँ होता रहा!"

..............चेतन रामकिशन "देव"..................




♥धवल चांदनी ♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥धवल चांदनी ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आसमान से चाँद ने देखो, धवल चांदनी बरसाई है!
सपनों का उपहार समेटे, निशा सुनहरी घिर आई है!

तारों को मुख मंडल देखो, खिला है सुन्दर फूलों जैसा!
रात का उत्सव इतना प्यारा, है सावन के झूलों जैसा!

रात की रानी की खुश्बू ने, सारी दुनिया महकाई है!
आसमान से चाँद ने देखो, धवल चांदनी बरसाई है!"

...............चेतन रामकिशन "देव"..................

Sunday, 2 December 2012

♥आखिर कैसे....♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आखिर कैसे....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मज़हब की चिंगारी से तुम, घर घर आग लगाते क्यूँ हो !
इन्सां होकर तुम इन्सां का, आखिर खून बहाते क्यूँ हो !

अपने पांव में खार चुभे तो, आंसू की बारिश कर बैठे,
फिर तुम औरों की राहों में, ज़ख़्मी खार बिछाते क्यूँ हो !

रूखी सूखी खाकर देखो, चिथड़ों में माँ बाप पड़े हैं,
फिर ईश्वर को किस चाहत में, मीठा भोग लगाते क्यूँ हो !

ख्वाबों को पूरा करने में, भूख प्यास भी बुझ जाती है,
कुर्बानी की सोच नहीं तो, फिर ये ख्वाब सजाते क्यूँ हो !

"देव" किसी से है चाहत तो, उसको तुम होठों पे लाओ,
बिना कहे, अंजाम सोचकर, अपना प्यार छुपाते क्यूँ हो!"

.......................चेतन रामकिशन "देव".........................

Saturday, 1 December 2012

♥प्रकृति का अलंकरण♥


♥♥♥प्रकृति का अलंकरण♥♥♥
तुम चंदा की धवल किरण हो!
प्रकृति का अलंकरण हो!
तुम जीवन की समृद्धि हो,
हर पीड़ा का निराकरण हो!

तुम कल कल बहती सरिता हो!
तुम चन्दन जैसी सुचिता हो!
तुम शब्दों की भावुक क्षमता,
तुम मेरे मन की कविता हो!

तुम ही भावों का विश्लेषण,
तुम ही कर्ता, तुम्ही करण हो!
तुम जीवन की समृद्धि हो,
हर पीड़ा का निराकरण हो!"

.......चेतन रामकिशन "देव".......



Thursday, 29 November 2012

♥♥लफ्जों की रौशनी..♥♥


♥♥♥♥♥♥लफ्जों की रौशनी..♥♥♥♥♥♥♥
रौशनी प्यार की लफ्जों में उतर जाने दो!
गम के सैलाब को आँखों से बिखर जाने दो!

अपने चेहरे को बहुत माँज लिया है तुमने,
आओ कुछ वक्त जरा दिल को निखर जाने दो!

मेरे अपनों ने तो हर वक्त ही छला मुझको,
आज इस अजनबी बस्ती में ठहर जाने दो!

मुझको मालूम है खुशियों का दौर आएगा,
कारवां दर्द का जीवन से गुजर जाने दो!

"देव" मैं चुप हूँ मुझे कुछ भी नहीं कहना है,
मेरी खामोशी को कुछ देर संवर जाने दो!"

.............चेतन रामकिशन "देव".............










♥दिल का हाल..♥


♥♥♥♥♥♥♥दिल का हाल..♥♥♥♥♥♥
हाल दिल का सुनाने से क्या फायदा!
यूँ ही आंसू बहाने से क्या फायदा!

वो जिन्होंने मुझे पल में ठुकरा दिया,
उनको अपना बताने से क्या फायदा!

बन गए ज़ख्म दिल के जो नासूर अब,
उन पे मरहम लगाने से क्या फायदा!

प्यार करना है तो तुम करो रूह से,
यूँ ही रस्में निभाने से क्या फायदा!

जो है तकदीर में "देव" मिल जायेगा,
यूँ किसी को गिराने से क्या फायदा!"


........चेतन रामकिशन "देव"..........

Wednesday, 28 November 2012

♥दर्द से साक्षात्कार..♥

♥♥दर्द से साक्षात्कार..♥
दर्द से आंखे चार करेंगे!
खुशियों का सत्कार करेंगे!

जो कुछ भी ये देगा जीवन,
हम उसको स्वीकार करेंगे!

यदि अश्क होंगे आँखों में,
जो हम उनका पान करेंगे!

बस अपनी खुशियों की खातिर,
नहीं दर्द प्रदान करेंगे!

जीवन के हर मौसम को हम,
सह लेंगे हँसते मुस्काते,

कभी दर्द में ग़ज़ल लिखेंगे,
कभी खुशी में गान करेंगे!

जीवन में हर मुश्किल से हम,
जोशीली ललकार करेंगे!

जो कुछ भी ये देगा जीवन,
हम उसको स्वीकार करेंगे!"

...चेतन रामकिशन "देव"...

Tuesday, 27 November 2012

♥ओ हमनवा..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥ओ हमनवा..♥♥♥♥♥♥♥♥
तुमको खुदा बना लिया मैंने ओ हमनवा!
तुमको दुआ बना लिया मैंने ओ हमनवा!

अब दर्द मुझे कोई भी सता नहीं सकता,
तुमको दवा बना लिया मैंने ओ हमनवा!

जब भी मुझे घेरा है अँधेरे ने कभी तो,
तुमको दिया बना लिया मैंने ओ हमनवा!

सब मेरे ही अंदाज के कायल हैं आजकल,
तुमको अदा बना लिया मैंने ओ हमनवा!

ए "देव" कोई गम की घुटन मुझको नही है,
तुमको हवा बना लिया मैंने ओ हमनवा!


............चेतन रामकिशन "देव".............

Monday, 26 November 2012

♥निर्धन (पीड़ा का पर्याय)♥


♥♥♥♥♥निर्धन (पीड़ा का पर्याय)♥♥♥♥♥
ग्राम देवता पीड़ा में है, श्रमिक भी है तंग!
इनका जीवन तिमिर भरा है, नहीं हर्ष के रंग!
भूख, शीत से मरते रहते, रोज ही निर्धन लोग,
देश के नेता फिर भी देखो, नहीं हैं इनके संग!

मनरेगा की मजदूरी भी होती भी इतनी अल्प!
कैसे उस मजदूर के घर में होगा कायाकल्प!

नेता इनका हाल देखकर, कभी न होते दंग!
ग्राम देवता पीड़ा में है, श्रमिक भी है तंग...

महंगाई से खिला खिला, देश का हर बाजार!
रोज ही देखो दामों बढाती, ये अंधी सरकार!
नेताओं के घर में होता, उत्सव का माहौल,
निर्धन की आँखों से बहती, केवल अश्रुधार!

रात रात में बढ़ जाते हैं, बाजारों में दाम!
महंगाई ने छीन लिया है, लोगों का आराम! 

आम आदमी के जीवन की खोने लगी उमंग!
ग्राम देवता पीड़ा में है, श्रमिक भी है तंग...

उत्पीड़न से बचना है तो करो जरा संघर्ष!
इस तरह से चुप रहने से, नहीं मिलेगा हर्ष!
"देव" तुम्हें अब बनना होगा, साहस का प्रतीक,
हाथ पे हाथ धरे रहने से, नहीं कोई निष्कर्ष!

आम आदमी कर लो मन में, शक्ति का संचार!
बिन शक्ति के होगा उन पर यूँ ही अत्याचार!

अधिकारों को पाना है तो करनी होगी जंग!
ग्राम देवता पीड़ा में है, श्रमिक भी है तंग!"

"
आम आदमी-देश का आम आदमी, चाहें वो किसान हो या मजदूर, या फिर माध्यम वर्ग का जीवन यापन करने वाला व्यक्ति, हर किसी को कभी महंगाई तो कभी सरकार के नए नए गलत नियमों की मार झेलनी पड़ती है! जब तक आम आदमी नहीं जागेगा तब तक ये उत्पीड़न होता रहेगा..इसीलिए युद्ध की तैयारी करनी ही होगी! तो आइये चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२७.११.२०१२ 

"सर्वाधिकार सुरक्षित"
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!





♥दर्द की मुस्कान..♥


♥♥♥♥♥♥♥दर्द की मुस्कान..♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं जब से अपने आप को समझाने लगा हूँ!
उस दिन से दर्द में भी मुस्कुराने लगा हूँ!

दुनिया में हर कोई नहीं हमदर्द है यारों,
ये सोचकर के सबसे गम छुपाने लगा हूँ!

क्या हो गया जो आज मुझे हार मिली है,
कल जीतने के ख्वाब फिर सजाने लगा हूँ!

दुनिया में मोहब्बत से बड़ी कोई शै नहीं,
मैं सबको मोहब्बत का गुर सिखाने लगा हूँ!

ए "देव" मुझे अपनी भी कमियों का पता है,
मैं अपनी नजर खुद से ही मिलाने लगा हूँ!


........... (चेतन रामकिशन "देव") .........

Sunday, 25 November 2012

♥तुम्हारे ख्वाब..♥


♥♥♥♥♥♥तुम्हारे ख्वाब..♥♥♥♥♥♥♥
जब से तुम मेरे ख्वाबों में आने लगे!
हम भी ख्वाबों की दुनिया सजाने लगे!

जब से तेरी हंसी का सहारा मिला,
हर घड़ी हम भी अब मुस्कुराने लगे!

जब भी तनहा अँधेरे ने घेरा मुझे,
तेरी यादों के दीपक जलाने लगे!

मैं जो रूठा तो तुमने मनाया मुझे,
हम तुझे रूठने पर मनाने लगे!

"देव" तुमसे न बढ़कर कोई भी ख़ुशी,
तेरी चाहत में हर गम भुलाने लगे!
..... (चेतन रामकिशन "देव") .....




Saturday, 24 November 2012

♥हुसैन को नमन..♥


♥♥♥♥♥♥♥हुसैन को नमन..♥♥♥♥♥♥♥
मन से नमन हुसैन को, दिल से सलाम है!
वीरों का वीर, साहसी, ये उनका नाम है!
न तुम दमन के सामने मस्तक को झुकाना,
इंसानियत के नाम ये उनका कलाम है!

वो सत्य के पथ पे ही बलिदान कर गए!
इंसानियत के नाम का सम्मान कर गए!

इन्सान बनके रहने का उनका पयाम है!
मन से नमन हुसैन को, दिल से सलाम है!"

.......... (चेतन रामकिशन "देव") ..........

Friday, 23 November 2012

♥प्रेम की पाठशाला ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम की पाठशाला ♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नहीं गणित है, न अंग्रेजी, प्रेम कोई प्रमेय नहीं है!
रंग भेद की दुर्नीति सा, कोई प्रेम में हेय नहीं है!

प्रेम की भाषा मधुर है सबसे, इसका सीमित क्षेत्र नहीं है!
वो भी समझे छुअन प्रेम की, जिसके मस्तक नेत्र नहीं हैं!

प्रेम धवल करता है मन को, इसका दूषित ध्येय नहीं है!
नहीं गणित है, न अंग्रेजी, प्रेम कोई प्रमेय नहीं है!"

............. (चेतन रामकिशन "देव") ..................

Wednesday, 21 November 2012

♥दर्द और दवा ♥


♥♥♥♥दर्द और दवा ♥♥♥
बिना दर्द के दवा कहाँ है,
बिना घुटन के हवा कहाँ है,
चोट लगे न जब तक खुद को,
तब तक रब से दुआ कहाँ है!

रिश्ते तो हैं ताश के पत्ते,
जब तब देखो ढह जाते हैं!
लोग यहाँ पर भीड़ में देखो,
तनहा तनहा रह जाते हैं!
लेकिन तुम अपने जीवन को,
नहीं टूटकर गिर जाने दो,
वही लोग दृढ बनते एक दिन,
जो पीड़ा को सह जाते हैं!

बिना आग के धुआं कहाँ है!
बिना दिवस के निशा कहाँ है!
चोट लगे न जब तक खुद को,
तब तक रब से दुआ कहाँ है!"

... (चेतन रामकिशन "देव") .....

♥तेरे प्रेम की दमक♥


♥♥तेरे प्रेम की दमक♥♥♥
तेरे प्यार से दमक रहा हूँ,
जैसा तारा नीलगगन में!
हर्ष की वर्षा बरस रही है,
जब से तुम आई जीवन में!

तू गंगा जसी जल धारा 
तेरा मुख है चाँद सा प्यारा,,
जीवन में उपवन महका है,
जब से तूने दिया सहारा!

तुझे आत्मा से चाहा है,
तू ही चिंतन और मनन में!
तेरे प्यार से दमक रहा हूँ,
जैसा तारा नीलगगन में!

..चेतन रामकिशन "देव"...