Monday, 8 July 2013

♥♥नया गीत..♥♥

♥♥♥♥♥♥नया गीत..♥♥♥♥♥♥♥
आशाओं के मैं नए शब्द लेकर,
के फिर से नया गीत लिखने लगा हूँ!

पिया है जहर मैंने, जब से ये सच का,
के पहले से सुन्दर, मैं दिखने लगा हूँ!

गिरा हूँ मगर फिर से उठने की हिम्मत,
के इन बाजुओं में बचाकर रखी है!

मैं मिलता हूँ हंसकर रक़ीबों से अपने,
के मैंने तो नफरत भुलाकर रखी है!

नहीं है जरुरी के इस जिंदगी में,
खुशी ही खुशी हमको मिलती रहेगी,

इसी वास्ते मैंने अपनी हंसी में,
के पीड़ा गमों की छुपाकर रखी है!

खुशी और गमों के, मैं इन आंसुओं को,
देखो तसल्ली से, चखने लगा हूँ!

आशाओं के मैं नए शब्द लेकर,
के फिर से नया गीत लिखने लगा हूँ..

कभी तो मिलेगी मुझे मेरे मंजिल,
हताशा में रहने से, क्या फायदा है!

पता है के जब झूठ, आये पकड़ में,
तो फिर झूठ कहने से, क्या फायदा है!

सुनो "देव" अपनी निगाहों से देखो,
निगाहें मिलाकर यहाँ पे रहो तुम,

के तुम दर्द में भी, तलाशो खुशी को,
यूँ मायूस रहने से, क्या फायदा है!

मैं शब्दों से अपने, मोहब्बत की बातें,
के सबकी हथेली पे, रचने लगा हूँ!

आशाओं के मैं नए शब्द लेकर,
के फिर से नया गीत लिखने लगा हूँ!"

.........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक-०९.०७.२०१३

Sunday, 7 July 2013

♥कठिन रास्ते..♥


♥कठिन रास्ते..♥

कठिन रास्ते हैं, 
सफर भी है मुश्किल,
मगर फिर भी चलने को जी कर रहा है!

अँधेरा घना है,
चिरागों की तरह,
मगर फिर भी जलने को जी कर रहा है!

मैं जब भी तलाशी जो लेता हूँ दिल की,
सिवा गम के कुछ भी तो मिलता नहीं है!

बहारें खुशी की नहीं आयीं अब तक,
के जीवन में गुल कोई खिलता नहीं है!

मगर फिर भी गम की,
दहकती अगन में,
के मेरा पिघलने को जी कर रहा है!

कठिन रास्ते हैं, 
सफर भी है मुश्किल,
मगर फिर भी चलने को जी कर रहा है...


गमों की ये रातें सताती हैं मुझको,
गमों के भी ये दिन भी रुलाते रहे हैं!

के अब तक तो टूटे हैं सारे ही सपने,
मगर ख्वाब हम फिर सजाते रहे हैं!

मुझे "देव" खुद से है इतनी मोहब्बत,
के मैं दर्द में भी, जिये जा रहा हूँ!

मुझे जितने आंसू दिए जिंदगी ने,
के मैं हंसके उनको, पिये जा रहा हूँ!

गमों की घुटन है,
मगर फिर भी मेरा,
के देखो मचलने को जी कर रहा है!

कठिन रास्ते हैं, 
सफर भी है मुश्किल,
मगर फिर भी चलने को जी कर रहा है!"

...चेतन रामकिशन "देव"...
दिनांक-०७.०७.२०१३


♥♥प्रेम के नियम..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम के नियम..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ 
न परिभाषा पता प्रेम की, न ही कोई नियम जानता!
इसीलिए मैं खुद को अब तक, प्रेम के काबिल नहीं मानता!
लोग यहाँ पर प्रेम में देखो, अपने अपने पक्ष बतायें,
किसी के दिल पे क्या बीती है, कोई देखो नहीं जानता!

प्रेम समर्पण की नीति है, लोग मगर इसको न मानें!
अपनी धुन में रहें वो डूबे, भाव किसी के न पहचानें!
अपने प्रेम को उच्च समझकर, औरों को कमतर आंकेंगे!
आंख से परदे नहीं हटाकर, किसी के दिल में वो झाकेंगे!

बिना समर्पित प्रेम की मंजिल, अपने मन में नहीं ठानता!
न परिभाषा पता प्रेम की, न ही कोई नियम जानता....

यदि प्रेम के भाव समझकर, साथ साथ तुम चलकर देखो!
कभी जरुरत पड़े तो देखो, एक दूजे पे मिटकर देखो!
"देव" प्रेम का नाम बताकर, भाव बोझ प्रेषित न करना,
प्रेम हमारा अमर रहेगा, यदि रूह से मिलकर देखो!

बिना समर्पण के भावों को, प्रेम मैं हरगिज नहीं मानता!
न परिभाषा पता प्रेम की, न ही कोई नियम जानता!"

....................चेतन रामकिशन "देव"......................
दिनांक-०७.०७.२०१३

Saturday, 6 July 2013

♥♥आशिकी♥♥

♥♥आशिकी♥♥
ये आशिकी है,
या है मोहब्बत,
नहीं पता है ये बेकरारी!

बिना तुम्हारे,
रहूँ मैं कैसे,
मुझे है आदत हुई तुम्हारी!

तुम्हे ही सोचूं,
तुम्हे ही देखूं,
तुम्हारी बातें ही कर रहा हूँ!

तुम्हारे बिन है,
तड़प बहुत ही,
के जिंदा होकर भी मर रहा हूँ!

तेरी जुदाई के,
आंसुओं ने,
है मेरी सूरत बहुत निखारी!

ये आशिकी है,
या है मोहब्बत,
नहीं पता है ये बेकरारी...

तुम्हारी चाहत नहीं मरेगी,
अटूट है तुमसे, 
मेरी चाहत!

हाँ ये भी सच है बिना तुम्हारे,
हमारे दिल को,
नहीं है राहत!

मैं "देव" लेकिन तुम्हारी धुन में,
ये अपना जीवन,
गुजारता हूँ,

उम्मीद है मेरे टूटे दिल को,
कभी तो होगी,
तेरी इनायत!

इन्हीं उम्मीदों के दम पे मैंने,
के देखो अपनी,
उमर गुजारी!"

...चेतन रामकिशन "देव"...
दिनांक-०६.०७.२०१३

♥♥हसरतों की होली..♥♥

♥♥♥हसरतों की होली..♥♥♥
क्यूँ हसरतों की जली है होली,
क्यूँ गम दीवाली मना रहे हैं!
हमारे आंसू सिसक सिसक कर,
क्यूँ दर्द की धुन सुना रहे हैं!

जो आज दिल से ये पूछा मैंने,
जरा चुभन की वजह बताओ!
क्यूँ रो रही हैं तेरी निगाहें,
है कौन सा गम मुझे दिखाओ!
मगर ये दिल सुनता ही नहीं है,
हजारों मिन्नत करो भी इससे,
जहाँ भी देखे, उदासी इसकी,
भले ही सीने में दिल छुपाओ!

क्यूँ मेरे जीवन के गुजरे लम्हे,
मुझे यूँ बेबस बना रहे हैं!
क्यूँ हसरतों की जली है होली,
क्यूँ गम दीवाली मना रहे हैं...

कई दफा ये कहा है दिल से,
न गुजरे लम्हों को याद करना!
हमेशा जीना तू जोश भरके,
ग़मों से देखो, कभी न डरना!
तू "देव" के संग, खुशी से रहकर,
भुला दे पीड़ा, भुला दे आंसू,
है जान जब तक, तू खुल के जी ले,
न जीते जी तू, यहाँ पे मरना!

तेरी हताशा को देखकर के,
इरादे मातम मना रहे हैं!
क्यूँ हसरतों की जली है होली,
क्यूँ गम दीवाली मना रहे हैं!"

...चेतन रामकिशन "देव".....
दिनांक-०६.०७.२०१३


Thursday, 4 July 2013

♥♥तेरी तस्वीर..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी तस्वीर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!
तुझसे मिलने को दिल तरसा, नयनों ने बरसातें की हैं!

तुझको अपने पास बिठाकर, दिल का हाल बताना चाहूँ!
बिन तेरे कितना तड़पा हूँ, मैं तुमको दिखलाना चाहूँ!
लेकिन देखो "देव" विरह की, ये बेला पूरी नहीं होती,
भले विरह के भावों को मैं, कितना भी झुठलाना चाहूँ!

तुम बिन मैंने जाग जाग कर, देखो पूरी रातें की हैं!
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!"

....................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-०४.०७.२०१३

♥♥तेरी तस्वीर..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी तस्वीर..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!
तुझसे मिलने को दिल तरसा, नयनों ने बरसातें की हैं!

तुझको अपने पास बिठाकर, दिल का हाल बताना चाहूँ!
बिन तेरे कितना तड़पा हूँ, मैं तुमको दिखलाना चाहूँ!
लेकिन देखो "देव" विरह की, ये बेला पूरी नहीं होती,
भले विरह के भावों को मैं, कितना भी झुठलाना चाहूँ!

तुम बिन मैंने जाग जाग कर, देखो पूरी रातें की हैं!
आज तेरी तस्वीर से मैंने, घंटों तक फिर बातें की हैं!"

....................चेतन रामकिशन "देव".................
दिनांक-०४.०७.२०१३

Wednesday, 3 July 2013

♥♥निर्धन का गलियारा..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन का गलियारा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है!
निर्धन के सपनों में देखो, न सुन्दर संसार कोई है!
यहाँ हुकूमत का हर नेता, करता अपने हित की बातें,
निर्धन का जो हित करती हो, न ऐसी सरकार कोई है!

सड़क किनारे फुटपाथों पर, निर्धन अक्सर मर जाते हैं!
और देश के नेता केवल, झूठे आंसू बिखराते हैं!

कुदरत भी मासूम को मारे, न दोषी को मार कोई है!
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है...

एक ही दल की बात नहीं है, सब दल ऐसा ही करते हैं!
जनता का धन लूटपाट कर, बस अपनी झोली भरते हैं!
"देव" हमें अब इन लोगों से, युद्ध की रचना करनी होगी,
इसीलिए तो हावी हैं ये, हम जो लड़ने से डरते हैं!

दमन यदि सहते जायेंगे, तो उद्धार नहीं हो सकता!
निर्धन अपने जीवन का फिर, रचनाधार नहीं हो सकता!

श्वेत वस्त्र पहनें नेता पर, न उम्दा किरदार कोई है!
न छप्पर है, न आंगन है, और न घर में द्वार कोई है!"

.....................चेतन रामकिशन "देव"......................
दिनांक-०४.०७.२०१३

♥♥मिलेंगे हम तुम..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मिलेंगे हम तुम..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
यकीं है मुझको दुआ पे अपनी, जहाँ में फिर से मिलेंगे हम तुम!
विरह के मौसम का अंत होगा, के फूल बनकर खिलेंगे हम तुम!

जुदाई हो चाहें कितनी लम्बी, मगर मिलन की न आस टूटे!
ये तन मिले ने भले ही तन से, मगर न रूहों का साथ छूटे!
मैं "देव" दिल से सदा तुम्हारा, यकीन तेरा रहेगा कायम,
कभी जो रूठें तो मान जायें, कभी न दिल की ये प्रीत रूठे!

जहाँ भी हमको दुआयें देगा, के साथ फिर से चलेंगे हम तुम!
यकीं है मुझको दुआ पे अपनी, जहाँ में फिर से मिलेंगे हम तुम!"

.........................चेतन रामकिशन "देव"................................
दिनांक-०३.०७.२०१३

Tuesday, 2 July 2013

♥♥प्यार का आइना.♥♥

♥♥♥♥प्यार का आइना.♥♥♥♥♥♥
वो मेरे प्यार का, आइना तक नहीं!
ख्वाब जिसने मेरा, एक बुना तक नहीं!

फूल कागज के बस वो, दिखाता रहा,
ख़ार लेकिन कभी, एक चुना तक नहीं! 

जिसके अश्कों को, मैंने पिया रात दिन,
दर्द उसने मेरा पर, सुना तक नहीं!

वो तो अपनी सजावट में उलझा रहा,
ज़ख्म उसने मेरा एक, गिना तक नहीं!

"देव" वो प्यार मेरा, क्या समझेगा अब,
जिसने धड़कन को मेरी, सुना तक नहीं!"

............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-०२.०७.२०१३

Monday, 1 July 2013

♥♥दो कदम.. ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥दो कदम.. ♥♥♥♥♥♥♥
दो कदम भी मेरे साथ चल न सके!
जो तिमिर में दीया बनके जल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके!

प्रेम का जिनके मन, कोष कोई नहीं!
दर्द देकर कहें, दोष कोई नहीं!
ऐसे लोगों को इन्सान कैसे कहूँ,
तोड़कर दिल जिन्हें रोष कोई नहीं!

रंग चाहत का मैं उनपे क्या डालता,
जो मेरे सुख में देखो, मचल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके..

दिल किसी का, दुखाकर मैं सो न सकूँ!
बीज नफरत का मैं दिल में बो न सकूँ!
"देव" ये मेरी आदत है और आरजू,
झूठ का रिश्ता मैं देखो, ढ़ो न सकूँ!

मन को उम्मीद है, कल को बदलेंगे वो,
दर्द के आज पल जो, बदल न सके!
ऐसे लोगों को कैसे मैं अपना कहूँ, 
आह सुनकर मेरी जो पिघल न सके!"

..........चेतन रामकिशन "देव".........
दिनांक-०२.०७.२०१३

Sunday, 30 June 2013

♥♥माँ( एक अनमोल शख्सियत)♥♥

♥♥माँ( एक अनमोल शख्सियत)♥♥
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं!
धरती पे माँ के जैसा, कोई खुदा नहीं!
आया जो बुरा वक़्त तो, अपने बदल गए,
माँ ऐसे वक़्त में भी, होती जुदा नहीं!

माँ है तो रोशनी है, माँ है तो खुशी है!
माँ है तो आदमी के, अधरों पे हंसी हैं!

माँ की छुअन से बढ़कर, कोई दवा नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं...

पोषण की भावना है, नेकी का पाठ है!
माँ सूर्य की लाली है, पूनम की रात है!
दुनिया की कोई उलझन, उसको न सताए,
जिस आदमी के सर पे, जो माँ का हाथ है!

माँ प्रेम की घोतक है, ममता की खान है!
बच्चों से उसकी खुशियाँ, बच्चों में जान है!

बच्चों की गलती माँ को, लगती खता नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं....

माँ है तो जिंदगी में, कोई कमी नहीं!
माँ से बड़ा न अम्बर, और ये जमीं नहीं!
सुन "देव" माँ के दिल को, कोई ठेस न देना,
माँ को यहाँ रुलाकर, कोई सुखी नहीं!

माँ प्रेम का सागर है, आशाओं की नदी!
ममता है अमर माँ की, देखो युगों, सदी!

माँ की तरह बच्चों पर, कोई फिदा नहीं!
माँ की दुआ के जैसी, कोई दुआ नहीं!"


"
माँ-एक ऐसी शख्शियत, जिसका वजूद इंसान के जीवन में, सर्वोच्च है! माँ, है तो जन्म है, माँ है तो ममता है, माँ है तो लालन, पालन, पोषण है! माँ, दुनिया में माँ का कोई विकल्प नहीं, तो आइये माँ, को नमन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०१.०७.२०१३

"मेरी ये रचना, मेरी माँ कमला देवी जी एवं प्रेम लता जी को समर्पित"
"
सर्वाधिकार सुरक्षित"
मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!




♥♥चाँद से सुन्दर..♥♥

♥♥♥♥♥♥चाँद से सुन्दर..♥♥♥♥♥
तु मिली है मुझे मेरी तकदीर से,
अच्छे लोगों की वरना कमी है बहुत!

लोग तो चाँद को, यूँ ही सुन्दर कहें,
वरना तू चाँद से भी, हसीं है बहुत!

भीगकर मेरा मन, मेरा तन झूमता,
ये मोहब्बत की बारिश, घनी है बहुत!

एक पल को भी, तू दूर जाना नहीं,
मेरी आँखों में तुम बिन, नमी है बहुत!

न सताओ मुझे, अब तो आ जाओ तुम,
रात अपने लिए ही, थमी है बहुत!

तू मिली तो मुझे, देख ऐसा लगा,
मेरी तकदीर सच में, धनी है बहुत!

"देव" तुम बिन, मुझे कुछ नहीं चाहिए,
तुमसे ही मेरी दुनिया, बनी है बहुत!"

........चेतन रामकिशन "देव"........
दिनांक-३०.०६.२०१३

Friday, 28 June 2013

♥♥गम से डरना नहीं ..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥गम से डरना नहीं ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गम से डरना नहीं जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे!
अपने मन के इरादों को जिन्दा रखो, एक दिन जीत पर तुम पहुँच जाओगे!

दिल न छोटा करो दर्द को देखकर, दर्द को अपनी हिम्मत बनाकर रहो!
हर गलत सोच को मन से मुक्ति दिला, रूह से अपनी नजरें मिलाकर रहो!
अपने दिल को मोहब्बत से रौशन करो, नफरतों से यहाँ कुछ भी मिलता नहीं,
तुम मिटाकर निराशा का काला तिमिर, मन में आशा का दीपक जलाकर रहो!

दर्द की आह भी देखो दब जाएगी, सब्र का गीत जो तुम यहाँ गाओगे!
गम से डरना जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे...

ख्वाब देखो नए रोशनी के लिए, तंग दिल बनके तुम देखो रहना नहीं!
अपने हक के लिए तुम करो युद्ध भी, तुम हकों का दमन देखो सहना नहीं!
"देव" दुनिया में तुमको मिले दर्द पर, तुम किसी की खुशी को नहीं लूटना,
सच के साथी बनो, सच के प्रहरी बनो, सच को भूले से भी झूठ कहना नहीं!

तुम नजर रखके मंजिल पे मेहनत करो, एक दिन सारी दुनिया पे तुम छाओगे!
गम से डरना जिंदगी में कभी, आज हैं गम मगर, कल खुशी पाओगे!"

.............................चेतन रामकिशन "देव".....................................
दिनांक-२८.०६.२०१३

♥♥प्यार की कोशिश..♥♥

♥♥♥♥♥प्यार की कोशिश..♥♥♥♥♥♥
तुमको तुमसे चुराने की कोशिश में हूँ!
तुमको अपना बनाने की कोशिश में हूँ!

तुमसे मैं प्यार करता हूँ कितना सनम,
बस तुम्हें ये जताने की कोशिश में हूँ!

पढ़ लो चाहत को मेरी, निगाहों में तुम,
तुमसे नजरें मिलाने की कोशिश में हूँ!

एक अरसे से तरसा, महक के लिए,
प्यार का गुल खिलाने की कोशिश में हूँ!

"देव" तुमको किसी की नजर न लगे,
तुमको दिल में छुपाने की कोशिश में हूँ!"

............चेतन रामकिशन "देव"...........
दिनांक-२८.०६.२०१३

Thursday, 27 June 2013

♥♥♥इरादे..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥इरादे..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला!
बेशक ही जिंदगी में, गम है बहुत मिला!
उम्मीद है एक दिन, ये हालात बदलेंगे,
मिट जाएगा जीवन से, ये दुख का जलजला!

गम भी है, दर्द भी, यहाँ पर है खुशी भी!
आंसू हैं, बेबसी भी, चेहरे पे हंसी भी!

कांटे हों चाहें कितने, पर फूल है खिला!
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला...

यूँ बैठकर के कोई, काम होता नहीं है!
बेकार से हुनर का, दाम होता नहीं है!
तुम "देव" जरा देख लो, इतिहास की तरफ,
नाकारा आदमी का, नाम होता नहीं है!

मेहनत के भरोसे जो, अपना काम करते हैं!
ऐसे ही लोग जग में, अपना नाम करते हैं!

साहस हो इरादों में तो, पर्वत भी है हिला!
आशाओं के दीये हैं, ख्वाबों का सिलसिला!"

............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२७.०६.२०१३

♥♥देख के तुझको.♥♥

♥♥♥♥♥♥♥देख के तुझको.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
देख के तुझको मेरे दिल को, खुशी मिलती है!
तेरी चाहत से मोहब्बत की, कली खिलती है!

मैंने जिस ओर भी देखा, नजर घुमाकर के,
तुम्हारे प्यार की दुनिया ही, सजी मिलती है!

जब भी देखा है मैंने, रात की गहराई में,
बस तेरे ख्वाब की, दुनिया ही वसी मिलती है!

अपने दिल में जो मैंने झांक के देखा हमदम,
तेरी सूरत की हसीं एक, परी मिलती है!

"देव" उस वक्त मेरा रंग निखर जाता है,
तेरे एहसास की जिस रोज नदी मिलती है!"

............चेतन रामकिशन "देव"..............
दिनांक-२७.०६.२०१३

Tuesday, 25 June 2013

♥♥विश्वास ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥विश्वास  ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी!
प्यार की दूरी कितनी हो पर, है उसमें एहसास जरुरी!
मानवता के पथ पे देखो, अच्छाई इतनी आवश्यक,
जैसे भू के सिरहाने पर, होता है आकाश जरुरी!

जो बस अपने हित की सोचें, वो मानवता खाक करेंगे!
जिनके मन में पाप भरा हो, वो क्या जग को पाक करेंगे!

मानवता में एक दूजे की, पीड़ा का आभास जरुरी!
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी....

झूठ बोलकर जो औरों के, दामन को गंदा करते हैं!
जो खुद होकर झूठ के पुतले, औरों की निंदा करते हैं!
"देव" जहाँ में उन लोगों को, एक दिन पछताना होता है,
जो मुफलिस का खून बेचकर, बस अपना धंधा करते हैं!

ऐसे लोगों ने ही जग में, मानवता को क्षीण किया है!
दुनिया को अँधेरा देकर, अपना घर प्रवीण किया है!

ऐसे लोगों से दूरी को, हर पल है प्रयास जरुरी!
रिश्ता चाहें जो भी हो पर, है उसमें विश्वास जरुरी!"

..................चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-२६.०६.२०१३

♥♥भीग गए अल्फाज ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥भीग गए अल्फाज ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे!
बड़े भाग्य से आया हमदम, प्रेम तुम्हारा मेरे द्वारे!
मैं लफ्जों की सुन्दरता से, करता हूँ सिंगार तुम्हारा,
तेरी मांग में भरता हूँ मैं, अनुभूति के चाँद सितारे!

मन को तुमसे प्रेम बहुत है, सखी बड़ी मनभावन हो तुम!
हरियाली सी हरी भरी हो, गंगाजल सी पावन हो तुम!

सखी तुम्हारे भीतर दिखते, कुदरत के नायाब नजारे!
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे...

तेरे प्यार के एहसासों से, जीवन में खुशियाँ आती हैं!
तेरे प्यार से अंतर्मन पे, भावों की बदली छाती हैं!
"देव" तुम्हारे प्यार से मुझको, अपनायत का बोध हुआ है,
सखी तुम्हारे प्यार की कलियाँ, मेरे मन को महकाती हैं!

प्यार यहाँ कुदरत जैसा है, प्यार का कोई मोल नहीं है!
शब्दकोश में प्रेम से बढ़कर, देखो कोई बोल नहीं है!


सखी तुम्हारे प्रेम से मैंने, अपने मन के दोष निखारे!
सखी तुम्हारे एहसासों से, भीग गए अल्फाज हमारे!"

.............चेतन रामकिशन "देव"............
दिनांक-२५.०६.२०१३

Monday, 24 June 2013

♥♥चलें कुछ दूर...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥चलें कुछ दूर...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलें कुछ दूर हाथों में पकड़कर हाथ हम दोनों!
यकीं है सात जन्मों तक, रहेंगे साथ हम दोनों!

सुबह से शाम हो जाये, सवेरा या नया आये,
करेंगे एक दूजे से सदा ही, बात हम दोनों!

तुम्हारा दर्द मेरा है, मेरा हर गम तुम्हारा है,
करेंगे अपनी आँखों से, यहाँ बरसात हम दोनों!

चलेंगे साथ मिलकर के कंटीले रास्तों पर भी,
हर एक मुश्किल दे देंगे, यहाँ पर मात हम दोनों!

तुम्हारे बिन नहीं कटता है, देखो "देव" एक भी दिन,
रहेंगे चांदनी बनकर, यहाँ हर रात हम दोनों!"

...............चेतन रामकिशन "देव"................
दिनांक-२४.०६.२०१३