Tuesday, 8 December 2015

♥♥सितारे...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥सितारे...♥♥♥♥♥♥♥
तुम तो आकाश के सितारे हो। 
मेरे महबूब कितने प्यारे हो। 

सारी दुनिया को है तेरी ख्वाहिश,
रश्क़ है हमको, तुम हमारे हो। 

बांसुरी कानों में कोई गूंजे,
नाम जब तुम मेरा पुकारे हो। 

बिन तेरे मेरा न वजूद कोई,
तुम मेरी नाव के किनारे हो। 

लड़खड़ाने का डर नहीं है मुझे,
क्यूंकि तुम जो मेरे सहारे हो। 

मेरी आँखों में नींद न तुम बिन,
रात तुम भी तो यूँ गुजारे हो। 

" देव " किरदार ये तेरा चमके,
रंग मेरा भी तुम निखारे हो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०८.१२.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Monday, 7 December 2015

♥♥♥♥फ़टी चादर..♥♥♥♥♥

दर्द दिन रात ही परोसा है। 
अब किसी पे नहीं भरोसा है। 

मैंने जिसके लिये दुआयें कीं,
देखो उसने ही मुझको कोसा है। 

आई दौलत तो मुझको भूल गया,
मैंने पाला है जिसको पोसा है। 

मुफ़लिसी मेरी और फ़टी चादर,
उसपे ठंडी हवा का बोसा है। 

"देव " आँगन तो मेरा छोड़ दिया,
पर वो उस दिन से बेघरो सा है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०७.१२.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "   

Saturday, 28 November 2015

♥♥देश टुकड़ों में...♥♥

♥♥♥♥♥देश टुकड़ों में...♥♥♥♥♥♥
देश टुकड़ों में बंट रहा फिर से। 
आपसी प्यार घट रहा फिर से। 

जिसकी छाँव में कोई फर्क नहीं,
पेड़ वो आज कट रहा फिर से। 

दिन दहाड़े भी अब सताये डर,
नाम इज़्ज़त का लुट रहा है फिर से। 

न बुरे वक़्त में कोई आया,
झुंड झूठों का छंट रहा फिर से। 

तोड़ना चाहें, कोई जोड़े नहीं,
हर कोई रंज रट रहा फिर से। 

लफ्ज़ जो दूरियां बढ़ाने लगें,
हर कोई उनपे डट रहा फिर से। 

"देव" इंसानियत बचेगी कहाँ,
बम ये नफरत का फट रहा फिर से। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२८.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Friday, 27 November 2015

♥♥अमानत...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥अमानत...♥♥♥♥♥♥♥
प्यार की तेरे जो अमानत है। 
मुझपे कुदरत कि ये इनायत है। 

तुमको पाकर के मिल गया है सुकूं,
न ही शिकवा है, न शिकायत है। 

तुझको छूने की भी हुयी ख्वाहिश,
चूम लूँ तुमको क्या इजाजत है। 

तेरी ज़ुल्फ़ें छुपायें चेहरे को,
कितनी मासूम ये शरारत है। 

तुम दुआओं में, हो मेरी शामिल,
तुझको चाहना मेरी इबादत है। 

"देव" आ जाओ मुझसे मिलने को,
सिर्फ तुमसे ही दिल को राहत है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२७.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Thursday, 26 November 2015

♥आलम...♥

♥♥♥♥♥♥आलम...♥♥♥♥♥♥♥
मुल्क का आज कैसा आलम है। 
देखो जिस ओर भी नया ग़म है। 

आदमी होके आदमी में फरक,
आज इंसानियत बड़ी कम है। 

मुफ़लिसी का मैं दर्द कैसे लिखूं,
पेट भूखा है और नही दम है। 

रात भर जागके गुजारा करूँ,
तेरे जाने से आँख ये नम है। 

मेरे अरमानों का गला घोंटा,
तू भी कातिल से अब कहाँ कम है। 

है दवा महंगी कैसे होगी शिफ़ा,
साथ बीमारियों का मौसम है। 

"देव" तकदीर है या दुश्वारी,
मुझको पानी नहीं, उन्हें रम है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२७.११.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Friday, 20 November 2015

♥लिबास...♥♥


♥♥♥♥♥♥लिबास...♥♥♥♥♥♥♥
रेशमी सा लिबास हो जाओ। 
तुम मेरे पास पास हो जाओ। 

मेरी मुस्कान तुमको मिल जाये,
जब कभी तुम उदास हो जाओ। 

है दुआ मेरी उस खुदा सा ये,
एक तुम मेरे ख़ास हो जाओ। 

जीत की खुशियां हों मुबारक पर,
हार से न हताश हो जाओ। 

इस जनम "देव " तुम हो मेरे मगर,
हर जनम तुम ही काश हो जाओ। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२०.११.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Monday, 16 November 2015

♥लौ ...♥

♥♥♥♥♥♥♥लौ ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कोई लौ बनके तुम उजाला करो। 
न ही नफरत से रंग काला करो। 

सारी दुनिया को याद आओगे,
काम ऐसा जरा निराला करो। 

जी रहे जिसमें वो ही पल जीवन,
काम कल पर न कोई टाला करो। 

जिंदगी खुद की बस, नहीं होती,
फ़र्ज़ भी सबका तुम संभाला करो। 

"देव " हर धर्म से जो पावन हैं,
फूल इंसानियत के पाला करो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१६.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Thursday, 12 November 2015

♥♥प्रेम के फूल...♥♥

♥♥♥♥♥प्रेम के फूल...♥♥♥♥♥
प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते। 
आँख पढ़ लेती आँख की भाषा,
होठ बेशक ही सिल गये होते। 

तेरे आने की राह मन में है। 
तुझको पाने की चाह मन में है। 
तुम दवा प्यार की मुझे दे दो,
बिन मिले तुमसे आह मन में है। 

तुम जो मिलते तो आह भी मिटती,
गम के पर्वत भी हिल गये होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते....

मेरे ख़्वाबों की तुम पनाह करो। 
प्यार वाली जरा निगाह करो।  
साथ रहने की आरज़ू दिल में,
प्यार का प्यार से निकाह करो। 

तुम जो छू लो अगर मेरा दामन, 
मेरे सब दाग धुल गए होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते....

तुम से बस इतनी सी गुजारिश है। 
साथ दो आपका, ये ख्वाहिश है। 
"देव " तुम आओगे तो झूमे घटा,
प्यार तेरा ख़ुशी की बारिश है। 

देखकर अपना ये मिलन सब खुश,
बागवां सारे खिल गये होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१२.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Tuesday, 10 November 2015

♥झालर ...♥

♥♥♥♥♥झालर ...♥♥♥♥♥♥
हर आँगन में खुशहाली हो। 
ऐसी सबकी दीवाली हो। 
रंग बिरंगी झालर दमकें,
रात नहीं ग़म से काली हो। 

नफरत के शोले बुझ जायें,
चिंगारी तक शेष रहे न। 
मानवता से प्यार करें सब,
किंचित भी आवेश रहे न। 
दीप जलें बस अपनेपन के,
न रंजिश हो, नहीं लड़ाई,
घुल मिल जायें हम आपस में,
बैर तनिक भी, द्वेष रहे न। 

बच्चों की हों नयी शरारत,
गोद किसी की न खाली है। 

रंग बिरंगी झालर दमकें,
रात नहीं ग़म से काली हो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१०.११.२०१५  
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Saturday, 3 October 2015

♥याद तुम्हारी...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥याद तुम्हारी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
याद तुम्हारी आयेगी तो, चाँद का मैं दीदार करूँगा।
पास रहो या दूर रहो तुम, मैं तो तुमसे प्यार करूँगा।

भाती हो तुम मेरी रूह को, सौंप दिया है तुमको तन, मन,
मुझको तुम खुशियां या गम दो, मैं हंसकर स्वीकार करूँगा।

मुझे बताना मेरा मिलना, यदि जो तुमको नहीं सुहाये,
तो मैं तेरे घर आँगन की, देहरी को न पार करूँगा।

मेरी माँ ने मुझे सिखाया, अतिथियों का स्वागत करना,
तुम भी तो दिल की मेहमां हो, मैं तेरा सत्कार करूँगा।

तुम बोलो के या न बोलो, या फिर मुझसे नज़र चुराओ,
लेकिन मैं तेरे रस्ते पे, न कोई दीवार करूँगा।

तेरे दिल की कोमल परतें, कभी न दुःख की धूप में झुलसें,
मैं अपनी चाहत की शबनम से, हर पल बौछार करूँगा।

"देव" तुम्हारी सूरत दिल की, दीवारों पर छपी हुयी है,
तुम्हे भूलकर जीवन नौका, बोलो कैसे पार करूँगा। "
........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-०३.१०.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Wednesday, 30 September 2015

♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मुझे आंसू भी दे डाले, मेरा दिल भी दुखाया है। 
किसी ने रात मेरे घर का दीपक, फिर बुझाया है। 
मेरी गलती महज इतनी, मैं सच का साथ दे बैठा,
ये दुनिया झूठ की थी पर, समझ में मुझको आया है। 

मगर मैं झूठ के लफ़्ज़ों को, कैसे मुंह बयानी दूँ। 
बहुत सोचा के झूठे पेड़ को, कैसे मैं पानी दूँ। 
बताओ "देव" कैसे बोल दूँ तेज़ाब को अमृत,
सिखाओ मैं अंधेरों को, भला क्यों जिंदगानी दूँ। 

सही है झूठ तो पुस्तक में, फिर क्यों सच पढ़ाया है।   
ये दुनिया झूठ की थी पर, समझ में मुझको आया है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०१.१०.२०१५  
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Wednesday, 23 September 2015

♥ इंतजार की आंच...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥ इंतजार की आंच...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मुझ बिन तरस रहा होगा वो, रोकर बरस रहा होगा वो।
इंतजार की आंच में देखो, कैसे झुलस रहा होगा वो।
मुझको तो एक लम्हे को भी, खाली आँगन नहीं सुहाता,
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो।

पेड़ से कोई पत्ता टूटे, देखके डाली भी रोती है।
यदि कोई अपना बिछड़े तो, आँख भले ये कब सोती है।
कांटो के बिस्तर सी यादें, उसको पल पल चुभती होंगी,
मिलना चाहा, नहीं मिल सके, शायद ये किस्मत होती है।

नशा न उतरा आज भी उसका, शायद चरस रहा होगा वो।
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो ....

होती है तकलीफ बहुत ही, जुदा यदि चाहत होती है।
नहीं चैन मिल पाता दिल को, और नहीं राहत होती है।
"देव " मुझे मालूम है लेकिन, मेरे हाथ में वक़्त नहीं है,
वक़्त यदि जो रुख बदले तो, रूह यहाँ आहत होती है।

बारिश के बिन कड़ी धूप में, व्याकुल, उमस रहा होगा वो।
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो। "

........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-२३.०९.१५
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Sunday, 20 September 2015

♥♥कश...♥♥

♥♥♥♥♥♥कश...♥♥♥♥♥♥♥
सिगरेट के धुयें के कश में। 
नहीं जिंदगी मेरे वश में। 

थाने, जुर्म, कचहरी कम हों,
मसले जो सुलझें आपस में। 

मुश्किल हम पर भारी होंगी,
अगर कमी आयी साहस में। 

मर्यादा भी तार तार है,
नेता उतरे निरा बहस में। 

शबनम की एक बूंद मिली न,
गम की ज्वाला और उमस में। 

औरत भी इज़्ज़त के लायक,
गुंडे भूले यहाँ हवस में। 

"देव" ये लम्बी रात कटे न,
सांस घुटी हैं, यहाँ कफ़स में। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२०.०९.१५ 
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Monday, 14 September 2015

♥♥ सपनों के कण... ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ सपनों के कण... ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिखरे हैं सपनों के कण कण, जिन सपनों को रात बुना था। 
चीख हुयी ज़ोरों की दिल से, मगर किसी ने नहीं सुना था। 
देह तड़पती रही सड़क पर, अरमानों का कत्ल हो गया,
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था। 

ये पत्थर का जहाँ है शायद, पत्थर की दुनिया दारी है। 
कोई तड़पकर मर जाये पर, सबको अपनी जां प्यारी है। 
बेरहमी से लोग किसी के, जज़्बातों की हत्या करते,
निर्दोषों के पांव में बेड़ी, कातिल की खातिरदारी है। 

अनदेखा करते हैं उनको, दर्द वो जिनका कई गुना था। 
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था …

वादा करके तोड़ दिये हैं और ऊपर से भ्रम करते हैं। 
लोग यहाँ सदमा देने का, बड़ा ही लम्बा क्रम करते हैं। 
"देव" यहाँ घड़ियाली आंसू, मगर रिक्त दिल अपनेपन से,
नहीं मिले २ वक़्त की रोटी, निर्धन कितना श्रम करते हैं। 

सींचा जिसको, छाया न दी, बीज वो शायद जला भुना था। 
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१५.०९.१५ 
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Friday, 11 September 2015

♥शब्दों का श्रृंगार...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥शब्दों का श्रृंगार...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
शब्दों का श्रृंगार बनो तुम, मैं कविता रचना चाहता हूँ। 
बिना तुम्हारे न जाने क्यों, लिखने से बचना चाहता हूँ। 
मेरे शब्दों को अपना लो, बस मेरी इतनी सी ख्वाहिश,
न पुस्तक की मुझे तमन्ना, और नहीं छपना चाहता हूँ ,

तुम इतनी पावन प्यारी हो, शब्द समर्पित तुमको कर दूँ। 
मन करता तेरे आँचल में, भावों का जल अर्पित कर दूँ। 

तुम्हें मानकर प्रेम की देवी, नाम तेरा जपना चाहता हूँ। 
शब्दों का श्रृंगार बनो तुम, मैं कविता रचना चाहता हूँ। 

शब्द कोष के हर पन्ने में, तुम मुझको प्रेरित करती हो। 
तुम हो मेरी अनुभूति में, हर क्षण मेरा हित करती हो। 
 "देव" तुम्हारा प्रेम परिचय, कविता का आधार बन गया,
तुम शब्दों का अलंकार बन, मेरा मन मोहित करती हो। 

शायद प्रेम इसी को कहते, सब कुछ पूर्ण निहित होता है। 
जब देनी हो प्रेम परीक्षा, तब विष भी अमृत होता है। 

हम तुम दोनों साथ रहें बस, मैं ऐसा सपना चाहता हूँ। 
शब्दों का श्रृंगार बनो तुम, मैं कविता रचना चाहता हूँ। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१२.०९.१५ 
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Sunday, 6 September 2015

♥♥विवशता...♥♥

♥♥♥♥♥विवशता...♥♥♥♥♥
दो पल सुकूं नहीं जीने को।
नहीं प्यास में जल पीने को।
नहीं दवाई बीमारी में,
न कपड़ा लत्ता सीने को।

बुझती आँखों पे न चश्मा,
न सोने को दरी, खाट है।
तरस तरस के मिलती रोटी,
न जीवन में ठाठ बाट है।
झूठी जनसेवा के नाटक,
करने से न थमे गरीबी,
धनिक कुचलते बेरहमी से,
निर्धन के संग मार काट है।

लोग मजाकों में लेते हैं,
पीड़ा का जीवन जीने को।
नहीं दवाई बीमारी में,
न कपड़ा लत्ता सीने को...

बेटी बिन ब्याही घर में है,
देने को कुछ माल नहीं है।
फसलों को कुदरत ने रौंदा,
हंसी ख़ुशी का हाल नहीं है।
"देव " नहीं पैरों में चप्पल,
और पांवों में फटी बिबाई,
नहीं भुजाओं में दम बाकी,
और क़दमों में चाल नहीं है।

काश हो निर्धन की सुनवाई,
विवश न हो अश्रु पीने को।
नहीं दवाई बीमारी में,
न कपड़ा लत्ता सीने को। "

........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-०७.०९.१५
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Saturday, 15 August 2015

♥♥वर्षा का जल...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥वर्षा का जल...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सावन तुम बिन शुष्क शुष्क है, तुम वर्षा का जल बन जाओ। 
बिना तुम्हारे पथ दुर्गम है, साथ चलो तुम बल बन जाओ। 
सखी ये मेरी प्रेम तपस्या, उसी दिवस तो सफल बनेगी,
आज, अभी के साथ साथ तुम, अगर हमारा कल बन जाओ। 

दीर्घकाल तक, जनम जनम तक, साथ तेरा पाना चाहता हूँ। 
इस सृष्टि के हर युग में मैं, साथ तेरे आना चाहता हूँ। 
तुम शब्दों की संवाहक बन, कविता की रचना कर देना,
और मैं बनकर कंठ सुरीला, भाव तेरे गाना चाहता हूँ। 

दिवस, रात तुम साँझ, सवेरे, तुम्ही पहर, तुम पल बन जाओ। 
सावन तुम बिन शुष्क शुष्क है, तुम वर्षा का जल बन जाओ ... 

निशा में तुम हो धवल चन्द्रमा, और दिवस में तुम दिनकर हो। 
तुम धरती की हरियाली में, इन्द्रधनुष का तुम अम्बर हो। 
"देव" तुम्हारे कदम पड़े तो, आँगन में खुशियां आयीं हैं,
तुम फूलों की खुशबु में हो, तुम मीठी हो, तुम मधुकर हो। 

जिसकी छाँव में सपने देखूं, तुम ऐसा आँचल बन जाओ। 
सावन तुम बिन शुष्क शुष्क है, तुम वर्षा का जल बन जाओ। "

........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-१५.०८.२०१५ 
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♥कैसी आज़ादी...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कैसी आज़ादी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बेटी जब महफूज नहीं तो आखिर कैसी आज़ादी है। 
नाम पे मजहब के दंगे हैं, जगह जगह पे बर्बादी है। 
चंद अरबपतियों का होना, नहीं देश के सुख का सूचक,
आँख से परदे हटें तो देखो, भूखी कितनी आबादी है। 

बेटी जब अँधेरे में भी, सही सलामत घर आयेगी। 
उस दिन ही सच्चे अर्थों में, ये आजादी मिल पायेगी। 

सज़ा मिले क्यों बेगुनाह को, दूर पकड़ से उन्मादी है। 
आँख से परदे हटें तो देखो, भूखी कितनी आबादी है....

आज़ादी का मतलब देखो एक सूत्र में बंध जाना है।  
आज़ादी का मतलब घर घर दीपक जल जाना है। 
"देव" वतन में सबको रोटी, कपड़ा, घर भी है आज़ादी,
आज़ादी का मतलब देखो, भ्रष्ट तंत्र का मिट जाना है। 

रोजगार के बिन युवकों की, जीवन धारा अवसादी है। 
बेटी जब महफूज नहीं तो आखिर कैसी आज़ादी है। "

........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-१५.०८.२०१५ 
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Tuesday, 11 August 2015

♥♥प्रश्न...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रश्न...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नहीं आग्रह, नहीं निवेदन, न प्रस्ताव, नहीं वाचन है।
प्रेम पथिक हूँ, भाव मार्ग पर, सदा तुम्हारा अभिवादन है।
स्मृति और छवि तुम्हारी, रहे मेरे व्याकुल नयनों में,
तुम बिन जीवन सूखा पौधा, और तुम बिन एकाकीपन है।
हाँ अयोग्य-सापेक्ष तुम्हारे, पर तुम जैसे बन नहीं सकता ।
मैं काजल सा, श्वेत वर्ण बन, अम्बर से भी छन नही सकता।
किन्तु फिर भी प्रीत का अंकुर उदय हुआ मेरे मन में।
जरा बताओ प्रश्न हमारा, प्रेम है क्या वर्जित जीवन में....
तुमने मेरा पक्ष सुना न, मनोदशा को जान सके न। 
मैं भी तुम जैसा मानव हूँ, बात कभी तुम मान सके न। 
मेरे पांवों में भी कांटे, चुभकर देखो रक्त निकलता,
एकपक्षीय ऐनक से तुम, मेरा दुख पहचान सके न।
द्वार पे तुमने ताले जड़कर, प्रतिबन्ध किये दर्शन में। 
जरा बताओ प्रश्न हमारा, प्रेम है क्या वर्जित जीवन में...
ज्यादा कुछ भी नहीं कहूँगा, केवल मैं इतना कहता हूँ। 
जरा सोचना उस बिंदु को, जिस स्थल पे मैं रहता हूँ। 
"देव" यदि तुम मेरी विरह के, भावों को अनुभूत करोगे,
तो तुम भी आश्चर्य करोगे, कैसे मैं जीवित रहता हूँ।
तुम बिन जग ऐसा लगता है, जैसे मैं हूँ निर्जन वन में। 
जरा बताओ प्रश्न हमारा, प्रेम है क्या वर्जित जीवन में। "
..................चेतन रामकिशन "देव"…….................
दिनांक-११.०८.२०१५ 
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Monday, 10 August 2015

♥♥बदनसीब...♥♥

♥♥♥♥♥बदनसीब...♥♥♥♥♥♥
कोई जब बदनसीब होता है। 
दर्द कितना करीब होता है। 

बस्तियां ढहतीं वो इशारों में,
जिनमें घर घर गरीब होता है। 

एक अरबों में, एक पाई में,
क्या सभी कुछ नसीब होता है। 

बेटा हो कोख में, तो खुशियां मनें,
बेटी पे दिल अजीब होता है। 

"देव" ये दर्द, कई गुना बढ़ता,
वक़्त जब भी रक़ीब होता है। "


.....चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-१०.०८.२०१५   
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