Saturday, 3 November 2012

♥अपना ग़म ..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥अपना ग़म ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दुनिया में सिर्फ अपना ही ग़म खास नहीं है!
है कौन जिसे खुशियों की तलाश नहीं है!

कोई ऐसा आदमी मुझे बताओ तो यारों,
जिसकी नजर में आंसुओं का वास नहीं है!

क्यूँ तरसें उनके वास्ते जो छोड़कर गए,
जीवन किसी के नाम का ही दास नहीं है!

उम्मीद क्या है उनसे जो वो देंगे नसीहत,
जिन लोगों को सच्चाई ही खुद रास नहीं है!

वो लोग नहीं "देव" कभी जीत सकेंगे,
जिन्हें खुद के बाजुओं पे ही विश्वास नही है!"

.......... (चेतन रामकिशन "देव") .............

Friday, 2 November 2012

♥जीवन का भार.♥


♥♥♥♥♥♥♥जीवन का भार.♥♥♥♥♥♥♥♥
जीवन का भार हंसके उठाने का दम भरो!
आकाश को धरती पे झुकाने का दम भरो!

भगवान के दरबार में तुम जाने से पहले,
रोते हुए इन्सां को, हंसाने का दम भरो!

मजहब की लड़ाई से भला क्या मिला कभी,
तुम प्यार के अल्फाज सिखाने का दम भरो!

नेताओं तुम अपनी ही तिजोरी न भरो बस,
तुम देश को धनवान बनाने का दम भरो!

मैं "देव" हूँ लेकिन मुझे पाषाण न कहो,
पत्थर में भी तुम फूल खिलाने का दम भरो!"

......... (चेतन रामकिशन "देव") ............


♥♥♥♥♥♥♥♥तुम्हारा साथ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम्हारे साथ होने से, मेरा दुःख क्षीण होता है!
तुम्हारे प्रेम की उर्जा से, मन प्रवीण होता है!

तुम्हारे प्रेम की शक्ति, मुझे बलवान करती है!
मुझे आगे बढाती है, मुझे गुणवान करती है!
तुम्हारे प्रेम की शैली, किताबों सी सुधारक है,
उजाला हमको देती है, तिमिर जीवन से हरती है! 

तुम्हारे प्रेम के सत्संग में, ये मन लीन होता है!
तुम्हारे साथ होने से, मेरा दुःख क्षीण होता है!"

.............. (चेतन रामकिशन "देव") ...............


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रीत की वर्षा ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रीत की वर्षा से भीगा तन, मन भी हुआ विभोर!
सखी तुम्हारे प्रेम से देखो, मन में नाचें मोर!
सखी न हमसे नयन चुराना, न जाना तुम दूर,
सखी कभी न टूटे अपने, प्रेम की कच्ची डोर!

सखी हमारे मन को भाए, ये तेरा सिंगार!
सखी तुम्हारे प्रेम से होता, उर्जा का संचार!

निशा भी होती प्रेम से तेरे और तुम्ही से भोर! 
प्रीत की वर्षा से भीगा तन, मन भी हुआ विभोर...

सखी जगत में प्रेम से ऊँचा, नहीं कोई सम्बन्ध!
सखी प्रेम फूलों की डाली, चन्दन भरी सुगंध!
सखी तुम्हारे प्रेम से मन को मिलता है उल्लास,
सखी तुम्हारे प्रेम से होता, खुशियों का प्रबंध! 

सखी तुम्हारे प्रेम से मन में, जगे हैं कोमल भाव!
सखी तुम्हारे प्रेम सुझाये, मुझको नए सुझाव!

सखी प्रेम की न कोई सीमा, न ही कोई छोर!
प्रीत की वर्षा से भीगा तन, मन भी हुआ विभोर..

सखी प्रेम के बिना तो देखो, धनिक भी होता दीन!
सखी प्रेम से ही होता है, मन भक्ति में लीन!
सखी तुम्हारे प्रेम से देखो, नवल हुआ है "देव",
सखी प्रेम से होता है मन, कोमल और शालीन!

सखी प्रेम से रंग जायेगा, जिस दिन ये संसार!
उस दिन देखो गिर जाएगी, नफरत की दीवार!

चलो छोड़ कर नफरत लोगों, बढ़ो प्रेम की ओर! 
प्रीत की वर्षा से भीगा तन, मन भी हुआ विभोर!"

"
प्रीत-एक ऐसी अनुभूति जिसमे, न कोई भेद, न कोई हिंसा, न धन की लालसा न गरीबी का अभिशाप! प्रेम, जीवन में सार्थक परिणामों का सारथि बनता है, बशर्ते प्रेम, अपने मूल से न भटके और समर्पण भावना निहित हो! तो आइये प्रेम करें.."

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक-०२.११.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

Thursday, 1 November 2012

♥दिल की आह..♥


♥♥♥♥दिल की आह..♥♥♥♥
दिल से आह नहीं मिटती है!
उसकी चाह नहीं मिटती है!

जिस पर गम के कांटे न हो,
ऐसी राह नहीं मिलती है!

जाने क्यूँ मेरे जीवन में,
पतझड़ की बेला आई है!

जाने क्यूँ मेरे जीवन में,
आंसू की बदली छाई है!

जाने क्यूँ ये दर्द का कोहरा,
जीवन का रस्ता रोके है,

जाने क्यूँ मेरी किस्मत भी,
गम के डर से घबराई है!

शीतल जल की बारिश से भी,
गम की दाह नहीं मिटती है! 

दिल से आह नहीं मिटती है!
उसकी चाह नहीं मिटती है!"

. (चेतन रामकिशन "देव") .











Wednesday, 31 October 2012


♥♥♥पुत्री( एक फुलवारी)♥♥♥
पुत्री को अभिशाप न समझो!
उसके जन्म को पाप न समझो!

तुम उसकी मीठी वाणी को,
क्षुब्ध ऋषि का श्राप न समझो!

मात्र पुत्र की आशा में न,
ईश के सम्मुख शीश झुकाओ!

पुत्री भी ईश्वर की कृति,
उसे भी हंसकर गले लगाओ!

बिन पुत्री के मानव जीवन का,
श्रंगार नहीं होता है,

घर भी रहता सूना सूना,
जितना चाहो उसे सजाओ!

पुत्री जैसी फुलवारी को,
कंटक सा संताप न समझो!  

पुत्री को अभिशाप न समझो!
उसके जन्म को पाप न समझो!"

... (चेतन रामकिशन "देव") ...

सर्वाधिकार सुरक्षित!
रचने मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित! 

Tuesday, 30 October 2012

♥ लड़ने की कला ♥


♥♥♥♥♥♥♥ लड़ने की कला ♥♥♥♥♥♥♥♥
तू अपने मन से घोर निराशा का नाश कर,
तू दर्द से लड़ने की कला का विकास कर,
तू अपने आप में ही सिमटना नहीं मानव,
आकाश में उड़ने के तू अवसर तलाश कर!

तू अपने विचारों को न लाचार बनाना!
तू युद्ध से पहले ही कभी हार न जाना!

तू हार के भय से नहीं खुद को हताश कर!
तू अपने मन से घोर निराशा का नाश कर..

साधन विहीन होने से कमजोर न होना!
तू अपने मन से चेतना के भाव न खोना!
देखो उन्हें जो सड़कों की बत्ती में पढ़े थे,
जो लोग न साधन का कभी रोये थे रोना!

तू खुद को अंधेरों का न गुलाम बनाना!
दुनिया जो करे याद, ऐसा नाम कमाना!

तू "देव" दर्द छोड़ के, हंसमुख लिबास कर!
तू अपने मन से घोर निराशा का नाश कर!"

.......... (चेतन रामकिशन "देव") ...........






♥♥♥♥♥♥आंसुओं का समुन्दर..♥♥♥♥♥♥♥
नफरत ही सही तुमने मुझे कुछ तो दिया है!
इतनी बड़ी दुनिया में मुझे तन्हा किया है!

मैं तुमसे शिकायत भी यार कर नही सकता,
रब ने ही वसीयत में, मुझे दर्द दिया है!

तुम मुझको आंसुओं की, ये बूंदें न दिखाओ,
मैंने तो आंसुओं का समुन्दर भी पिया है!

जाने क्यूँ दर्द ज़ख्मों से बाहर निकल आया,
ज़ख्मों का तसल्ल्ली से रफू तक भी किया है! 

तुम "देव" मुझे कोई उजाला न दिखाओ,
अब मेरा ही दिल मानो कोई जलता दिया है!"

........... (चेतन रामकिशन "देव") ..............


Monday, 29 October 2012

♥माँ(एक वटवृक्ष)♥


♥♥♥♥♥♥♥♥माँ(एक वटवृक्ष)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दुनिया में कोई माँ की जगह ले नहीं सकता!
कोई माँ की तरह प्यार हमे दे नहीं सकता!
यूँ तो हजारों रिश्ते हैं, जीवन के सफर में,
पर माँ की तरह कोई दुआ दे नहीं सकता!

माँ प्रेम की गंगा है माँ प्रेम की जमुना!
माँ के अटूट प्रेम की होती नहीं तुलना!

माँ की तरह दुलार कोई दे नहीं सकता!
दुनिया में कोई माँ की जगह ले नहीं सकता...

माँ प्रेम की देवी है, माँ स्नेह की परी!
माँ की मधुर पुकार भी स्नेह से भरी!
माँ दीप की ज्योति की तरह रौशनी देती,
माँ ने ही अपने दूध से ये चेतना भरी!

माँ प्रेम का प्रकाश है, माँ प्रेम की किरण!
माँ रखती है हम पर सदा ममता का आवरण!

माँ की तरह बहार कोई दे नहीं सकता!
दुनिया में कोई माँ की जगह ले नहीं सकता...

माँ जब भी अपनों बच्चों को सीने से लगाये!
जिस ओर भी देखो, वहीँ ममता नजर आये!
सुन "देव" माँ का प्यार है, बेहद ही सुगन्धित,
माँ की छवि में रहते हैं, भगवान के साये!

माँ प्रेम का भंडार है, माँ प्रेम का सागर!
खुश हो नही पाओगे कभी माँ को सताकर!

माँ की तरह विचार कोई दे नहीं सकता!
दुनिया में कोई माँ की जगह ले नहीं सकता!"

"
माँ, एक दिव्यशक्ति, ममता का सागर, प्रेम का नीला आसमान, दुलार की सरिता, अपनत्व की ज्योति, सचमुच माँ अनमोल है! जीवन पथ में अनेकों संबंधों के पश्चात भी माँ का सम्बन्ध प्रमुख इसीलिए है क्यूंकि हम माँ से हैं, रिश्ते माँ से उपजे हैं..माँ वटवृक्ष है और हम मात्र शाखायें..आइये माँ को नमन करें!"

"अपनी दोनों माताओं माँ कमला जी और माँ प्रेम लता जी को समर्पित रचना"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-३०.१०.२०१२

(सर्वाधिकार सुरक्षित)
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

♥आपकी निकटता ♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आपकी निकटता ♥♥♥♥♥♥♥♥
निकटता आपकी पाकर मेरा मन हर्ष पाता है!
तुम्हारी बाहों में आकर मेरा दिल गुनगुनाता है!

जो तुम मेरी निगाहों से जरा भी दूर जाती हो!
कसम से कह रहा हूँ मैं, बड़ा ही याद आती हो!
मुझे मालूम है के तुम भी मेरे बिन अधूरी हो,
मेरी तस्वीर तुम भी अपने सीने से लगाती हो!

उधर दिल आह भरता है, इधर आंसू बहाता है!
निकटता आपकी पाकर मेरा मन हर्ष पाता है!"

............. (चेतन रामकिशन "देव") ...............

♥♥♥♥♥♥बाल्मीकि(अद्भुत चरित्र)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
थे अद्भुत बाल्मीकि जी, धवल उनकी रामायण है!
नहीं दुनिया में उन जैसा कोई दूजा उदहारण है!

चलो उनकी तरह हम अपने मन को स्वच्छता देंगे!
हम अपनी सोच को चिंतन, बहुत ही सभ्यता देंगे!
तभी तो त्याग पाएंगे, ये हिंसा, द्वेष और लालच,
जब अपनी आत्मा को, ज्ञान से हम दिव्यता देंगे!

कभी पथभ्रष्ट होने से नहीं मिलता निवारण है!
थे अद्भुत बाल्मीकि जी, धवल उनकी रामायण है!"

..(प्रकट दिवस पर महर्षि बाल्मीकि को नमन)...

................(चेतन रामकिशन "देव")..................

Sunday, 28 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥तुम्हारे वास्ते..♥♥♥♥♥♥♥
सीने में दिल धड़क रहा तुम्हारे वास्ते!
चेहरा मेरा दमक रहा तुम्हारे वास्ते!
गालों पे भी देखो बड़ी सुर्खी ये छाई है,
कंगना मेरा खनक रहा तुम्हारे वास्ते!

तुम साथ हो तो देखो ये मौसम हसीन है!
आकाश भी प्यारा लगे, सुन्दर जमीन है!
तुम्हे देख के मिलती है, जमाने की हर ख़ुशी,
तेरे प्यार पे हमदम मुझे इतना यकीन है!

मन का चमन महक रहा तुम्हारे वास्ते!
मेरा ये दिल बहक रहा तुम्हारे वास्ते!
सीने में दिल धड़क रहा तुम्हारे वास्ते!
चेहरा मेरा दमक रहा तुम्हारे वास्ते!"

..........(चेतन रामकिशन "देव").........


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥नयी पीढ़ी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
नयी पीढ़ी तो मानो इश्क की बीमार लगती है!
सलाह तालीम की उसको बड़ी बेकार लगती है!

यहाँ पर एक माँ देती दुआ लम्बी उम्र की तो,
कहीं माँ गर्भ में कन्या का भी संहार करती है!

तुम अपने चेहरे को झूठी हंसी में कैद कर लेना,
यहाँ सूरत भी दिल के हाल का इजहार करती है!

खुदा भी इन गरीबों से नजर शायद फिर बैठा,
तभी कुदरत गरीबों पे ही ज्यादा मार करती है!

मुझे जब याद आती "देव" उन खोये बुर्जुर्गों की, 
नजर ये चाँद का घंटों तलक दीदार करती है!"

...........(चेतन रामकिशन "देव").................





Saturday, 27 October 2012


♥♥♥♥सुख की प्रकृति..♥♥♥♥
प्रेम से रिक्त ह्रदय न करना,
समस्याओं से भय न करना,
तुम औरों को पीड़ा देकर,
अपने को सुखमय न करना!

जो औरों को पीड़ा देकर, बस अपना हित कर जाते हैं!
वही लोग अपनी आँखों से, एक दिन देखो गिर जाते हैं!
लोग भला वो इस दुनिया में, कहाँ कोई इतिहास बनाते,
जो अपने जीवन में देखो, नाकामी से डर जाते हैं!

तुम मिथ्या की जय न करना!
गलत लक्ष्य को तय न करना!
"देव" किसी के जीवन में तुम,
दुःख का सूर्य उदय न करना!

प्रेम से रिक्त ह्रदय न करना,
समस्याओं से भय न करना!"

.....(चेतन रामकिशन "देव")......


♥♥♥♥♥♥♥♥♥दिल के लफ्ज़.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं अपने दिल के लफ्जों की तहरीर लिख रहा हूँ!
ग़ालिब कभी मुंशी तो कभी मीर लिख रहा हूँ!

मैं एक मुसाफिर हूँ, मोहब्बत के सफ़र का,
राँझा कभी मजनूं तो कभी हीर लिख रहा हूँ!

न झूठ की रंगत न कोई सोच पे पहरा,
मैं मुल्क के हालात की तस्वीर लिख रहा हूँ!

देकर के नेक इन्सां को मैं दिल से सलामी, 
नेताओं का बिकता हुआ ज़मीर लिख रहा हूँ!

वो लोग देखो "देव" को भुलाने लगे हैं,
मैं जिनके लिए प्यार की जागीर लिख रहा हूँ!"

............(चेतन रामकिशन "देव")..............

Friday, 26 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दिल की मुलाकात..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दिल तुमसे मिलना चाहता है, चुपके चुपके तन्हाई में!
धवल चांदनी की रंगत में, शीतल-शीतल पुरवाई में!

तुमसे मिलने की आशा में, दिल की सूरत दमक रही है!
और दिल के आंगन में देखो, मानो कोयल चहक रही है!
जब से इस दिल की आँखों ने, देखा सुन्दर स्वप्न तुम्हारा,
तब से इस दिल की राहों में, मानो चन्दन महक रही है!

दिल तुमको ही देख रहा है, अब तो खुद की परछाई में!
दिल तुमसे मिलना चाहता है, चुपके चुपके तन्हाई में!

दिल कहता अपनी आँखों से, उनके पथ में बिछ जाना है!
वो समझाता है अधरों को, उन्हें देखकर मुस्काना है!
पाठ पढ़ाता है हाथों को, तुम उनका अभिवादन करना,
और वो कहता है कदमों से, तुमको उनके संग आना है!

"देव" भी देखो खड़ा साथ में, दिल की हिम्मत अफजाई में!
दिल तुमसे मिलना चाहता है, चुपके चुपके तन्हाई में!"

.................(चेतन रामकिशन "देव").......................

Thursday, 25 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जीवन(एक चुनौती ).♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जब जीवन को एक चुनौती समझ के तुम व्यतीत करोगे!
जात-धर्म से ऊपर उठकर, जब मानव से प्रीत करोगे!
अपनी आंखे लक्ष्य पे रखकर, यकीं करोगे जब मेहनत पर,
वो दिन ऐसा होगा जिस दिन, हर मंजिल पर जीत करोगे!

जो जीवन में कंटक सहकर भी आगे बढ़ते जाते हैं!
वही लोग एक दिन दुनिया में तारे बनकर छा जाते हैं!

जिस दिन अपने चिंतन में तुम, साहस का संगीत भरोगे!
जब जीवन को एक चुनौती समझ के तुम व्यतीत करोगे...

दुरित सोच के पोषक बनकर, तुम मन की शक्ति न खोना!
तुम अपने हाथों से जग में, नफरत के अंकुर न बोना!
जो कल पर छोड़ोगे सब कुछ, तो कुछ भी न मिल पायेगा,
इसीलिए अपने जीवन में, तुम आलस की नींद न सोना!

जो बे-संसाधन होकर भी, कुछ करने का प्रण करते हैं!
वही लोग एक दिन दुनिया में, लोगों को प्रेरित करते हैं!

जीते जी मृत हो जाओगे, जो उर्जा को शीत करोगे!
जब जीवन को एक चुनौती समझ के तुम व्यतीत करोगे...

मुश्किल तो आएँगी पथ में, जीवन केवल सरल नहीं है!
घनी अमावस भी आती हैं, जीवन केवल धवल नहीं है!
"देव" नहीं जीवन में केवल, हरियाली का आंचल होता,
लेकिन अपने बल के आगे कोई, मुश्किल सबल नहीं है!

जो मन में उर्जा भर कर के, मुश्किल से डटकर लड़ते हैं!
वही लोग एक दिन दुनिया में, मंजिल की सीढ़ी चढ़ते हैं!

जिस दिन साहस के पुष्पों से, जीवन को अभिनीत करोगे!
जब जीवन को एक चुनौती समझ के तुम व्यतीत करोगे!"

"
जीवन-जब चुनौती के साथ जिया जाता है तो हमारे कर्मों में उत्कृष्ट क्षमता का विकास होता है! जीवन में, सुख की बेला आती हैं तो दुःख का वज्रपात भी! किन्तु जो दुःख सहने की शक्ति को, अपने मन में समाहित कर लेते हैं, वे लोग निश्चित जीवन में उर्जावान बनकर, लक्ष्य प्राप्ति की ओर रुख करते हैं....तो आइये चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२६.१०.२०१२ 

"सर्वाधिकार सुरक्षित"
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!


♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरी याद ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तन्हाई में जब मुझको तेरी याद आ गयी!
तो गम की घटा फिर से मेरे दिल पे छा गयी!

जब याद में मिलना था तो बेहद सुखद लगा,
जब आई जुदाई तो, वो मुझको सता गयी!

आया जो बुरा वक़्त तो अंजाम ये हुआ,
साहिल पे आती कश्ती भी मुझको डुबा गयी!

अब मेरी नजर चाँद पे रूकती ही नहीं है,
जब से ये गम की रात, मेरे दिल को भा गयी!

उसने तो "देव" मुझको गिराया था बहुत पर,
कुदरत मुझे हर बार ही जीना सिखा गयी!"

.............(चेतन रामकिशन "देव")...............







Wednesday, 24 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥आम आदमी(क्रांति का दूत)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आम आदमी नींद से जागो, तुम्ही क्रांति ला सकते हो!
तुम ही फिर से आजादी के, दीपक यहाँ जला सकते हो!

खुद को दीन समझना छोड़ो, हमे जुल्म से टकराना है!
लूट मार की हमें न चाहत, हमको अपना हक पाना है!
हमको अपनी रगों का देखो, खून गर्म करना ही होगा,
शीश झुकाने से अच्छा तो, रण भूमि में मर जाना है!

देश के काले अंग्रेजों की, तुम ही नींव हिला सकते हो!
आम आदमी नींद से जागो, तुम्ही क्रांति ला सकते हो...

शोषण करने वालों का डर, अपने जीवन में न भरना!
अपना मन निर्भीक बनाकर, युद्ध कला को विकसित करना!
रणभूमि में बिगुल बजाकर, तुम करना आरम्भ युद्ध का,
तुम शत्रु की फौज देखकर, अणु बराबर भी न डरना!

तुम उर्जा के वाहक बनकर, हिम के पिंड गला सकते हो!
आम आदमी नींद से जागो, तुम्ही क्रांति ला सकते हो...

किन्तु जब तक सोए हो तुम, तब तक मुक्त नहीं हो सकते!
रहोगे यूँ ही सहमे सहमे, साहस युक्त नहीं हो सकते!
"देव" यदि स्वीकार्य है तुमको, यही गुलामी इस जीवन में,
तो तुम केवल दीन रहोगे, शक्ति पुंज नहीं हो सकते!

तुम शक्ति पहचानो अपनी, गगन को भू पर ला सकते हो!
आम आदमी नींद से जागो, तुम्ही क्रांति ला सकते हो!"

"
देश में लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले, आम जनों को जात धर्म की आग और महंगाई की तपिश में झोंकने वाले, सफेदपोशों से मुकाबला करना है तो, आम आदमी को नींद से जागना होगा, अपनी सुप्त अवस्था से मुक्ति पाकर, क्रांति का अग्रदूत बनना होगा..तभी आम आदमी को उसके अधिकारों की प्राप्ति हो सकेगी!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२५.१०.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!


♥♥♥♥♥♥गम का दीदार.♥♥♥♥♥♥♥
गम का बड़े करीब से दीदार किया है!
हाँ मैंने भी दुनिया में कभी प्यार किया है!

मेरे लफ्जों में देखो नहीं कोई भी बनावट,
अश्कों से मैंने लफ्जों का सिंगार किया है!

अब रंग सियासत का भी चौखा हुआ यारों,
नेताओं ने जब से इसे बाजार किया है!

जिस शख्स को चाहती रही, वो पूजती रही,
उसने ही तो इज्ज़त को तार-तार किया है!

वो लोग मुझे "देव" बहादुर नहीं लगे,
जिन लोगों ने पीछे से, मुझपे वार किया है!"

.............(चेतन रामकिशन "देव")............