Thursday, 4 October 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथरीला पथ.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जीवन का पथरीला पथ भी, एक दिन समतल हो जायेगा!
घनी अमावस स्याह रात का, रंग धवल भी हो जायेगा!

किन्तु ऐसा तब ही होगा, जब तुम आशावान बनोगे!
जात-धर्म से ऊपर उठकर, जब अच्छे इन्सान बनोगे!
अपने मन से कमजोरी के, भावों को तुम मुक्ति देकर,
शक्ति के संवाहक बनकर, तुम जिस दिन बलवान बनोगे!

जब तुम अच्छा सोचेगे तो, मन भी निर्मल हो जायेगा!
जीवन का पथरीला पथ भी, एक दिन समतल हो जायेगा..

ये सच है के जीवन पथ में, बड़े बड़े दुख के क्षण आते!
दिल भी खून के आंसू रोता, आँखों से आंसू बह जाते!
किन्तु इस जीवन में देखो, बिना दर्द रक्खा क्या है,
दर्द भरे ये क्षण ही देखो, जीवन में शक्ति भर जाते!

आज दर्द को सहन करो तुम, इक दिन अच्छा कल आयेगा!
जीवन का पथरीला पथ भी, इक दिन समतल हो जायेगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०५.१०.२०१२ 






Wednesday, 3 October 2012




♥♥♥♥♥♥♥बनावटी चेहरे..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आजकल रूह के रिश्ते की बात क्या करनी,
लोग तो पल में मोहब्बत को, भुला देते हैं!

आजकल देखिये ज़माने का ये हाल हुआ,
घर के मुखिया ही, आज घर को जला देते हैं!

जिन पर रखो यकीन, अर्श पे ले जाने का,
लोग वो देखिये, मिटटी में मिला देते हैं!

जो किये करते हैं, दावे यहाँ अपनेपन के,
लोग वो नींव ईमारत की हिला देते हैं!

"देव" शायद यही दस्तूर है मोहब्बत का,
बेवफा लोग ही, वफ़ा का सिला देते हैं! "

............चेतन रामकिशन "देव"...........

Tuesday, 2 October 2012


♥♥♥♥♥♥यादें(अतीत का दर्पण)♥♥♥♥♥♥♥
याद एक रोज बहुत, तुमको मेरी आएगी!
बीते लम्हों की झलक, तुमको भी रुलाएगी!
तुमको याद आयेंगे, जब मेरी आंख के आंसू,
तो तुम्हारी भी आंख, अश्क से भर जाएगी!

भूल से भी तुम्हें बदनाम, मगर करता नहीं!
आपकी तरह झूठ को, सलाम करता नहीं!

झूठ की दुनिया, कब तलक यूँ जगमगाएगी!
याद एक रोज बहुत, तुमको मेरी आएगी....

रूह का रिश्ता भी, पल भर में मिटाया तुमने!
अपने ही हाथ से घर अपना, जलाया तुमने!
तुम तो कहते थे के, रिश्ता है सात जन्मों का,
और कुछ लम्हों में, हर रिश्ता भुलाया तुमने!

भरी दुनिया में मुझे, तनहा तुमने छोड़ दिया!
बड़ी बेदर्दी से दिल, तुमने मेरा तोड़ दिया!

मेरे दिल की ये आह, तुमको भी तड़पाएगी!
याद एक रोज बहुत, तुमको मेरी आएगी....

प्यार में मैं नहीं, हम बनके जिया जाता है!
आंसू एक दूजे का हंसकर के पिया जाता है!
"देव" हैं प्यार में, कुर्बानियां बहुत सारी,
उनका इल्जाम तक, सर अपने लिया जाता है!

प्यार के बिन तो ये संसार बस पराया है!
कहाँ नफरत से भला. कुछ यहाँ मिल पाया है!

प्यार के बिन तो ये, दुनिया भी सिमट जाएगी!
याद एक रोज बहुत, तुमको मेरी आएगी!"

" यादें-किसी के चले जाने के बाद भी, उसकी मौजूदगी को हमारे दिल में जिन्दा रखती हैं! कोई व्यक्ति भले ही हमारे प्रेम, हमारे अपनत्व का अंत करके चला जाये, किन्तु यादें उसे भी एक रोज जाकर बीते लम्हों की झलक दिखाती हैं! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०३.०१०.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥चलें निखरने.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलो रात की बाहों में हम, सपनो को आगोश में भरने!
कुछ जाने, अपने लोगों से, प्यार भरी दो बातें करने!
उनके बाजु पर सर रखकर, सुननें कोई गीत-कहानी,
धवल चांदनी में चंदा की, आओ चलें हम लोग निखरने!"

....."शुभ-रात्रि".............चेतन रामकिशन "देव"...........

Sunday, 30 September 2012


♥♥♥♥♥प्रीत(एक अमूल्य अनुभूति)♥♥♥♥♥♥♥♥
मन की कोमल अनुभूति में, जग गयी देखो प्रीत!
एक अनजाने शख्स को मैंने, बना लिया मनमीत!

फूलों की टहनी से लिखा, दिल पर उसका नाम!
छवि बहुत प्यारी है उसकी, जैसे हो गुलफ़ाम!
जब से मेरे मन जागी है, उसके प्रेम की सोच,
तब से देखो खिली खिली है, मेरी सुबहो-शाम!

उसकी बोली लगती जैसे, वीणा का संगीत!
मन की कोमल अनुभूति में, जग गयी देखो प्रीत!

उसके सपनों से रौशन है, मेरी तो हर रात!
मेरे सीने पर सर रखकर, करती है वो बात!
महक रहा उसकी खुशबु से, ये अपना घर आंगन,
उससे बतियाते बतियाते, हो जाती प्रभात!

उसकी सूरत दिखती पहले, लिखुब ग़ज़ल या गीत!
मन की कोमल अनुभूति में, जग गयी देखो प्रीत!

जिस दिन मेरा प्रेम निवेदन करेगी वो स्वीकार!
उस दिन देखो हो जायेगा, जीवन में श्रृंगार!
लेकिन कोई शर्त नहीं, वो बदले में दे प्रेम.
कभी प्रेम में हाँ होती है, और कभी इनकार!

"देव" प्रेम एहसास है जिसमे, नहीं हार, न जीत!
मन की कोमल अनुभूति में, जग गयी देखो प्रीत!"

" प्रीत-की अनुभूति जब भी कोमल मन में जगती है, तो जीवन सचमुच खिला खिला हो जाता! भले की कोई अनजाना व्यक्ति आकर ह्रदय में प्रेम की दस्तक दे, लेकिन वो फिर भी अपना लगता है! प्रेम की अनुभूति के ये शब्द बहुत कर्णप्रिय होते हैं, इन शब्दों में एक सरगम होती है! तो आइये इस सरगम में खो जायें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०१.१०.२०१२

"रचना अपनी अनदेखी प्रेम की अनुभूति समर्पित!"


सर्वाधिकार सुरक्षित!



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मन का रिश्ता.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रेम से पूर्ण रखो ह्रदय को, द्वेष से मुक्त रखो तुम मन को!
मन से मन का रिश्ता जोड़ो, न देखो तुम केवल तन को!

धन, दौलत, सोने, चांदी से, न आंको अच्छाई किसी की,
धन-दौलत को धवल मानकर, नहीं स्याह समझो निर्धन को!

तुम मदिरा और नशे में बहकर, न मुंह मोड़ो कर्तव्यों से,
तुम बनकर के नशे के आदी, नहीं नाश करना यौवन को!

तुम जीवन के पदचिन्हों में, इतना आकर्षण तो भर दो,
लोग जो तुमसे प्रेरित होकर, करें सफल अपने जीवन को!

"देव" निराशा से तुम अपने, जीवन की हिम्मत न हारो,
एक दिन अपनी मेहनत से तुम, कर लोगो के स्पर्श गगन को!"

..."शुभ-दिन".............चेतन रामकिशन "देव".....................

Friday, 28 September 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मानवता का दीप..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपने मन से मानवता का, दीप कभी न बुझने देना!
तुम शोषण के आगे अपना, शीश कभी न झुकने देना!

अपने शब्दों में मर्यादा और नैतिकता का पालन कर,
अपने शब्दों से श्रोता का, ह्रदय कभी न दुखने देना!

युद्द में देखो विजय-पराजय, किसी के हिस्से तो आनी है,
बिना लड़े ही अपने मन का, जोश कभी न चुकने देना!

मिथ्या के धुंधले मेघा में, सच का सूरज छुपेगा कब तक,
इसीलिए अपने हाथों से, सत्य कभी न बिकने देना!

जिसको पढ़कर देश में दंगा, हिंसा, द्वेष के अंकुर फूटें,
"देव" तुम अपने कलम को ऐसा, काव्य कभी न लिखने देना!"


रचनाकार-चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२९.०९.२०१२





♥♥♥♥♥♥♥♥बदलाव की चकाचोंध..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
वो क्या जानें मेरे प्यार को, मेरी चाह को, मेरी आह को,
जिन लोगों ने मेरे दिल का शीशा चकनाचूर कर दिया!

उन लोगों को बस मतलब है, केवल रूपये और पैसे से,
जिसने देख गरीबी मेरी, खुद को मुझसे दूर कर लिया!

जो अक्सर दावे करता था, मुझ पर जान लुटाने के भी,
आज उसी इंसान ने मुझको, मरने पर मजबूर कर दिया!

आज भला वो किन हाथों से, मेरे ज़ख्म की शिफ़ा करेंगे,
गुजरे वक़्त में जिन लोगों ने, ज़ख्म मेरा नासूर कर दिया!

"देव" देखिए लोग आज के, आँखों पर पट्टी बांधे हैं,
गुंडों को भी नेता कहकर, इन सबने मशहूर कर दिया!"

................चेतन रामकिशन "देव"........................

Thursday, 27 September 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥जीवन की चौखट.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जीवन की चौखट पर देखो, नया दिवस फिर से आया!
बाग़ में कोयल गीत सुनाये, और सूरज भी मुस्काया!

मन में आशा की बूंदे भर, जीवन को ताजा करना है!
न निंदा, उपहास किसी का, हमको जीवन में करना है!
हमको जीवन में रहना है, सच्चा और सरल बनकर के,
सच्चाई के संग जीना है, सच्चाई के संग मरना है!

ओस की बूंदों से धरती में, नव अंकुर भी उग आया!
जीवन की चौखट पर देखो, नया दिवस फिर से आया!"
................चेतन रामकिशन "देव"........................

♥♥♥♥♥♥♥आज भगत के जन्मदिवस पर.♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज भगत के जन्मदिवस पर, इतना प्रण तो करना होगा!
शोषण से लड़ने की खातिर, जोश रगों में भरना होगा!

हम लोगों के मुर्दापन से, नहीं भगत सिंह खुश हो सकते!
न ही हम उनके सपनों के, भारत का अंकुर बो सकते!
चित्र पे फूल चढ़ाने भर से, नहीं पूर्ण होती है भक्ति,
भय का खून रगों में भरके, नही भगत पैदा हो सकते!

देश की खातिर जीवन-यापन, देश की खातिर मरना होगा!
आज भगत के जन्मदिवस पर, इतना प्रण तो करना होगा!"

......................चेतन रामकिशन "देव"...............................

♥♥♥♥♥♥♥♥♥उनके शहर की हवा ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
उनके शहर की हवा भी मेरे, दिल को ज़ख़्मी कर जाती है!
मुझको उनकी याद दिलाकर, आंख में आंसू भर जाती है!

कई दफा इस हवा ने खुलकर, अपना दर्द बताना चाहा!
अपनी मज़बूरी का किस्सा, मुझको बहुत बताना चाहा!

सोच के पर उनकी बदनामी, कुछ कहने से डर जाती है!
उनके शहर की हवा भी मेरे, दिल को ज़ख़्मी कर जाती है!"

....................चेतन रामकिशन "देव".............................



♥♥♥♥♥♥♥♥♥उनके शहर की हवा ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
उनके शहर की हवा भी मेरे, दिल को ज़ख़्मी कर जाती है!
मुझको उनकी याद दिलाकर, आंख में आंसू भर जाती है!

कई दफा इस हवा ने खुलकर, अपना दर्द बताना चाहा!
अपनी मज़बूरी का किस्सा, मुझको बहुत बताना चाहा!

सोच के पर उनकी बदनामी, कुछ कहने से डर जाती है!
उनके शहर की हवा भी मेरे, दिल को ज़ख़्मी कर जाती है!"

....................चेतन रामकिशन "देव".............................


Wednesday, 26 September 2012



♥♥♥♥♥♥♥रहो अग्रसर जीवन पथ में.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रहो अग्रसर जीवन पथ में, मुश्किल से घबराना त्यागो!
मात्र नयन ही मत खोलो तुम, मन की निद्रा से भी जागो!

अभिमान से दूर रहो तुम, हिंसा का प्रयोग न करना!
धन-दौलत आनी जानी है, उसका कभी वियोग न करना!
काम करो कुछ ऐसा जिससे, जग में चमके नाम तुम्हारा,
अपने पद और अधिकार का, भूले से दुरूपयोग न करना!

मात-पिता की सेवा के बिन, तुम मंदिर-मस्जिद न भागो!
रहो अग्रसर जीवन पथ में, मुश्किल से घबराना त्यागो!"

........."शुभ-दिन"........चेतन रामकिशन "देव"............

Tuesday, 25 September 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जो मेरा अपना था .♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कल तक जो मेरा अपना था और मेरा हमसाया भी था!
मेरे दर्द में रोया था वो, और सुख में मुस्काया भी था!
जिसके कंधे पर सर रखकर, मैंने अक्सर अश्क बहाए,
जिसने मुझको बच्चा बनकर, छेड़ा और सताया भी था!

आज वही इनसान मेरे संग, गैरों सा बरताव कर रहा!
कल तक ख्वाब सजाने वाले, चूर हमारे ख्वाब कर रहा!

आज वही आंसू देता है, जिसने कभी हंसाया भी था!
कल तक जो मेरा अपना था और मेरा हमसाया भी था...

जो मुझसे अक्सर कहता था, अपना रिश्ता रूह तलक है!
तेरी सूरत में ए हमदम, दिखती रब की एक झलक है!
बिना तुम्हारे मेरा जीवन, है जीते जी मरने जैसा,
तेरे ही आगोश में हमदम, मेरी धरती और फलक है!

आज वही इन्सान देखिए, मेरे नाम से नफरत करता!
मेरी आँखों की घाटी में, वो आंसू की नदियाँ भरता!

वही ज़ख्म को दुखा रहा है, जिसने मरहम लगाया भी था!
कल तक जो मेरा अपना था और मेरा हमसाया भी था...

बदल गया वो उसका मन है, मुझको उससे नहीं शिकायत!
बेशक वो अब गम देता है, लेकिन याद है उसकी चाहत!
"देव" मोहब्बत में तो ऐसे, पल अक्सर आते रहते हैं,
कोई दिल को ज़ख़्मी करता, कोई दिल की करे हिफाजत!

मेरी नजरों में उसका कद, आज भी पहले ही जैसा है!
कल तक भी अपने जैसा था, आज भी अपने ही जैसा है!

वही लौटकर न आया क्यूँ, मैंने उसे बुलाया भी था!
कल तक जो मेरा अपना था और मेरा हमसाया भी था!"

" जीवन के पथ में अनेकों ऐसे जन भी मिलते हैं, जो बहुत अपना बताने के बाद भी, किसी को तनहा कर जाते हैं! जो परस्पर प्रेम के सम्बन्ध को, नष्ट/ जीर्ण/ प्रभावित कर जाते हैं, किन्तु उनकी याद फिर भी आती है, ये सोचकर की, उसने दुःख दिया तो क्या, कभी सुख भी उसी ने दिया था! हालाँकि ये वेदना के पल बहुत जानलेवा होते हैं, तो प्रयास किया जाये कि किसी को अपने कारन ये वेदना न मिले!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२६.०९.२०१२ 





♥प्रेम आराधना♥
प्रेम आराधना,
प्रेम सदभावना!
प्रेम सुमन है,
प्रेम साधना!

प्रेम को वासना से नहीं जोड़िए
प्रेम के पथ को तुम न कभी छोड़िए!

प्रेम ह्रदय की,
मधुर भावना!
प्रेम आराधना,
प्रेम सदभावना!

प्रेम रिमझिम सितारों का आकाश है!
प्रेम दिव्य छटा, प्रेम विश्वास है!

प्रेम सबके हितों की,
सरल भावना!
प्रेम आराधना,
प्रेम सदभावना!"

"शुभ-दिन"
चेतन रामकिशन "देव"


Saturday, 22 September 2012


♥♥♥♥♥♥नारी(एक दिव्य छवि..)♥♥♥♥♥♥
न ही नारी चरणपादुका, न कंटक, न शूल!
नारी है खिलते उपवन का, एक सुगन्धित फूल!
नारी वंदन की अधिकारी और पूजन के योग्य,
नारी के अपमान की देखो, कभी न करना भूल!

नारी दुःख-सुख की साथी है, नारी दे उत्साह!
नारी जीवन में करती है, खुशियों का प्रवाह!

नारी देती साथ भले ही, समय हो प्रतिकूल!
न ही नारी चरणपादुका, न कंटक, न शूल......

नारी का मन अभिमान से, रहता मीलों दूर!
नारी अपने प्रेम से करती, हम सबके दुख दूर!
हर रिश्ते के दायित्वों को, नारी करती पूर्ण,
धन-दौलत के मद में नारी, कभी न होती चूर!

नारी कोमल सरिता जैसी, एक निर्मल जलधार!
कानों में अमृत सा घोलें, नारी के उद्गार!

नारी धवला किरणों जैसी, न मिटटी, न धूल!
न ही नारी चरणपादुका, न कंटक, न शूल......

नारी भी जीवित प्राणी है, नहीं है वो पाषाण!
हमे हृदय से करना होगा, नारी का सम्मान!
"देव" बिना नारी के देखो, जग है रंग-विहीन,
घर, दम्पत्ति और जीवन की, नारी है मुस्कान!

नारी के इस दिव्य रूप को, शत-शत है प्रणाम!
हरियाली सी मनमोहक है, नारी जिसका नाम!

नारी की छाया से होते, दुख के क्षण अनुकूल!
न ही नारी चरणपादुका, न कंटक, न शूल!"

"नारी-जिसके बिना संसार की कल्पना ही नहीं की जा सकती! जो जन्म-दायित्री है तो वहीँ जीवन पथ में पग पग पर कभी पत्नी, कभी बहिन, कभी बेटी बनकर, हमे अपनत्व देती है! नारी की छवि वन्दनीय है, नारी नहीं चाहती कि उसकी देवी बनाकर आराधना की जाये, नारी तो केवल समानता का सम्मान चाहती है! आइये दिव्य स्वरूप नारी का सम्मान करें.................."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२३.०९.२०१२



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कलम की शक्ति....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम की शक्ति, शब्द संयोजन और भावना कम न करना!
अपने लेखन और चिंतन से, तुम मिथ्या का तम न करना!

सुन्दर और सच्चे शब्दों से, मानवता के दीप जलाना!
जात, धर्म और पूर्वाग्रह से, ऊपर उठकर कलम चलाना!

तुम शब्दों को दूषित करके, मानवता को नम न करना!
कलम की शक्ति, शब्द संयोजन और भावना कम न करना!"

.......................चेतन रामकिशन "देव"..............................

Friday, 21 September 2012




♥♥♥♥♥♥लक्ष्य..♥♥♥♥♥♥♥
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर, 
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!
आशा और साहस को अपने, 
जीवन से तुम खोने न दो!

हार गए तो क्या घबराना,
क्यूँ आँखों से नीर बहाना!
नजर लक्ष्य से हटने न दो,
फिर से अपने कदम बढ़ाना!

अपने मन की आशाओं को,
हार के डर से सोने न दो!
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर,
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!

नहीं गिराकर कभी किसी को,
तुम अपना स्थान बनाओ!
स्वच्छ भावना मन में लेकर,
तुम मेहनत के दीप जलाओ!

अपने कारण "देव" किसी की,
आँखों को तुम रोने न दो!
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर,
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२२.०९.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!


Wednesday, 19 September 2012




♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हर्ष का वितरण....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हर्ष का वितरण करना होगा, सच का विचरण करना होगा!
प्रेम को उन्नत करने हेतु,  हमे समर्पण करना होगा!

नैतिकता के संवाहक बन,  मर्यादा का पालन करके,
अपने जीवन में लक्ष्यों को, चयनित और निर्धारण करके!
हम सबको जीवन के पथ में, शुद्ध आचरण करना होगा.....

नहीं पराजय से भय खाकर,  हमको भूमिगत होना है!
हमे सदा अपने जीवन में, साहस का अंकुर बोना है!
मन में भरके विजय की आशा, पुन: अवतरण करना होगा!"
........"शुभ-दिन"........चेतन रामकिशन "देव".............


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आँखों की बरसात..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रिमझिम रिमझिम बारिश जैसी, आँखों से बरसात हुई !
गम के साये में दिन निकला, और गम में ही रात हुई!

कल तो जो मेरी चाहत की, अम्बर से तुलना करता था,
आज उसी के हाथों देखो, मेरे प्यार की मात हुई!

जिधर भी देखो आज उधर ही, नफरत का धुआं उड़ता है,
इंसानों की कौम भी देखो, खुंखारों की जात हुई!

जो मिलने का वादा करके, वक़्त से पहले आ जाता था,
आज न जाने किस वजह से, उसको बड़ी अनात हुई!

"देव" जो मेरी तस्वीरों को, सिरहाने रखकर सोता था,
आज उसी इंसान से मानो, गैरों जैसी बात हुई!"

"अनात-देरी"

...............चेतन रामकिशन "देव"..................