Tuesday, 29 December 2015

♥♥चांदनी रात...♥♥

♥♥♥♥♥चांदनी रात...♥♥♥♥♥
चांदनी रात हो रही फिर से। 
ख़्वाब में बात हो रही फिर से। 

एक अरसे से इतना सूखा था,
आज बरसात हो रही फिर से। 

तेरी तस्वीर में भी आई दमक,
ये करामात हो रही फिर से। 

सारे आकाश में हैं, मैं और तुम,
यूँ मुलाकात हो रही फिर से। 

रेशमी डोर से बंधे हम तुम,
ऐसी सौगात हो रही फिर से। 

सज गयी तू दुल्हन की तरह से,
आज बारात हो रही फिर से। 

"देव " न ख्वाब तोड़कर जाना,
देखो प्रभात हो रही फिर से। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२९.१२.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Monday, 28 December 2015

♥तपस्या...♥

♥♥♥♥♥तपस्या...♥♥♥♥♥♥♥
अनुभूति की हत्या कर दी। 
खंडित प्रेम तपस्या कर दी। 
जिसका पथ आसान किया था,
उसने जटिल समस्या कर दी। 

मेरे मन को भेद दिया है,
निर्ममता के प्रहारों से। 
मेरे भावों को काटा है,
विष में डूबी तलवारों से।  
मेरे नयनों को अश्रु का,
जीवन भर अभिशाप दे दिया,
मैंने दी थी कुशल कामना,
उसने मुझको श्राप दे दिया। 

जो सौगंध उम्र भर की थी,
उसने  क्षण में मिथ्या कर दी।  
जिसका पथ आसान किया था,
उसने जटिल समस्या कर दी...

सक्षम थे वो सुन सकते थे,
मुझ याचक के प्रस्तावों को। 
वो चाहते तो भर सकते थे,
छूकर के मेरे घावों को। 
पर न समझा मर्म को मेरे,
रौंद दिया है घायल मन को। 
निरपराधी होकर बोला,
दंड मेरे भावुक जीवन को। 

मेरे शत्रु के संग मिलकर,
विजय की स्वयं प्रतिज्ञा कर दी। 
जिसका पथ आसान किया था,
उसने जटिल समस्या कर दी। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२८.१२.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Friday, 25 December 2015

♥खुद्दारी...♥

♥♥♥♥♥♥खुद्दारी...♥♥♥♥♥♥♥
अपना दिन तो बहुत कठिन था, 
अपनी रात बहुत भारी है। 
फिर भी शिकवा नहीं किसी से,
मुझमे इतनी खुद्दारी है। 
मेरे दिल के टुकड़े करके,
वो खुशियों के दीप जलायें,
नहीं पता क्यों इस दुनिया में,
मतलब की नातेदारी है। 

कड़ी धूप में जिसकी खातिर
ठंडक को मेरे साये थे। 
खुशबु से भरने को जिसके,
घर में गुलशन महकाये थे।  
जिसके पांवों में पायल के,
जोड़े बांधे बहुत प्यार से,
छुड़ा लिया वो हाथ भी उसने,
जिसमें कंगन पहनाये थे। 

बहुत कठिन है ये सब लिखना,
साँसों तक में दुश्वारी है।   
नहीं पता क्यों इस दुनिया में,
मतलब की नातेदारी है...

चलो करें वो जो उनका मन,
मिन्नत करके हार गया हूँ। 
जब पीड़ा ही किस्मत में है,
तो ये दुःख स्वीकार गया हूँ। 
"देव " हमारे दिल के भीतर,
एक लावा भर गया दर्द का,
बन बैठा हूँ मैं विस्फोटक,
मार के दिल को, पार गया हूँ। 

अपने ग़म के साथ मैं तन्हा,
चंहुओर दुनिया सारी है। 
नहीं पता क्यों इस दुनिया में,
मतलब की नातेदारी है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२५.१२.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Thursday, 24 December 2015

♥निर्मोही...♥♥

♥♥♥♥♥निर्मोही...♥♥♥♥♥
अश्रुपूरित नयन हो गये। 
सारे सपने दहन हो गये।  
मेरे शब्द बताकर झूठे,
सच्चे उनके कहन हो गये। 
निर्मोही होकर वो मुझसे,
तोड़ गए सम्बन्ध नेह का,
नहीं पता के उनको कैसे,
क्षण विरह के सहन हो गये। 

मैं भी रूप किसी मानव का,
पत्थर सा निष्प्राण नहीं था। 
मेरा मन भी फूल सा कोमल,
विष में डूबा वाण नहीं था। 
हो करवद्ध किया था मैंने,
उनसे अपना भाव निवेदन,
तोड़ दिया मेरे हृदय को,
जबकि मुझको त्राण नहीं था। 

घाव मिले हैं, शूल भी देखो,
कुंठा के उत्पन्न हो गये। 
नहीं पता के उनको कैसे,
क्षण विरह के सहन हो गये.... 

या तो व्याकुलता न समझें,
या संवेदनहीन हो गये। 
मैं पीड़ा में खूब कराहा,
वो सुख में आसीन हो गये। 
" देव " हमारी स्मृति में,
उनकी छवि वसी गहरे से,
और वो हमको विस्मृत करके,
किसी और में लीन हो गये। 

पीड़ा के इन प्रहारों से,
हम तो मरणासन्न हो गये। 
नहीं पता के उनको कैसे,
क्षण विरह के सहन हो गये। "


........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२४.१२.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "    




Tuesday, 22 December 2015

बुझा बुझा सा मन


♥♥♥♥बुझा बुझा सा मन...♥♥♥♥♥
तुम बिन रिक्त हुआ है आँगन,
तुम बिन बुझा बुझा सा है मन। 
तुम बिन क्षमता थमी कर्म की,
तुम बिन थका थका सा है तन। 

तुम बिन नदियों का तट सूना,
तुम बिन बगिया मुरझाई है। 
तुम बिन आँखों में लाली है,
नींद तनिक भी न आई है। 
तुम बिन पत्र लिखावट भूले,
शब्दों की आँखों में आंसू,
तुम बिन है गहरी मायूसी,
कंटक माला उग आई है। 

तुम बिन पौधे सूख गये हैं,
आग में झुलसा है सारा वन। 
तुम बिन क्षमता थमी कर्म की,
तुम बिन थका थका सा है तन... 

तुम बिन अन्न नहीं उगता है,
खेतों की रौनक गायब है। 
तुम बिन पंछी मौन हो गये,
अब न चिड़ियों का कलरव है। 
"देव " तुम्हारी प्रतीक्षा में,
सुबह से लेकर साँझ हो गयी,
नहीं है ध्वनि वाध यंत्र में, 
न तुम बिन कोई उत्सव है। 

तुम बिन मेरा मोल नहीं कुछ,
मिटटी सा मेरा ये कण कण। 
तुम बिन क्षमता थमी कर्म की,
तुम बिन थका थका सा है तन। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२२.१२.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Sunday, 20 December 2015

♥कच्ची मिट्टी सा दिल...♥

♥♥♥♥♥♥♥कच्ची मिट्टी सा दिल...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भावुकता है छिन्न भिन्न सी, घाव हुये हैं, रक्त बहा है। 
मैं ही जानूं कैसे मैंने, इतने दुःख का वार सहा है। 
मेरे मन में जिसकी छवियाँ, दीर्घकाल से स्थापित थी,
उसने मेरे सत्य प्रेम को, क्षण भर में ही झूठ कहा है। 

नहीं पता कि ऐसा करके, उनको क्या कुछ मिल पायेगा। 
या उनका चेहरा दमकेगा, या फिर आँगन खिल जायेगा। 
मेरे मन पे अंकित आखर, देख के भी अनदेखा करते,
नहीं पता था जीवन पथ पे, पीड़ा का बादल छायेगा। 

विस्मृत मेरा प्रेम किया तो, किंचित क्या फिर शेष रहा है  
भावुकता है छिन्न भिन्न सी, घाव हुये हैं, रक्त बहा है..... 

सोच रहा हूँ भावुकता को, अपनायत को बौना कर दूँ। 
प्रेम भूलकर, लूट मार कर, घर में चांदी सोना भर दूँ। 
"देव " वो सुन्दर है फूलों सा, मुझसे क्या नाता रखेगा,
तिमिर घना एकाकीपन का, मैं खुद को ही बेघर कर दूँ। 

कच्ची मिट्टी सा कोमल दिल, टुकड़े होकर शेष रहा है। 
भावुकता है छिन्न भिन्न सी, घाव हुये हैं, रक्त बहा है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२०.१२.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Tuesday, 8 December 2015

♥♥सितारे...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥सितारे...♥♥♥♥♥♥♥
तुम तो आकाश के सितारे हो। 
मेरे महबूब कितने प्यारे हो। 

सारी दुनिया को है तेरी ख्वाहिश,
रश्क़ है हमको, तुम हमारे हो। 

बांसुरी कानों में कोई गूंजे,
नाम जब तुम मेरा पुकारे हो। 

बिन तेरे मेरा न वजूद कोई,
तुम मेरी नाव के किनारे हो। 

लड़खड़ाने का डर नहीं है मुझे,
क्यूंकि तुम जो मेरे सहारे हो। 

मेरी आँखों में नींद न तुम बिन,
रात तुम भी तो यूँ गुजारे हो। 

" देव " किरदार ये तेरा चमके,
रंग मेरा भी तुम निखारे हो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०८.१२.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Monday, 7 December 2015

♥♥♥♥फ़टी चादर..♥♥♥♥♥

दर्द दिन रात ही परोसा है। 
अब किसी पे नहीं भरोसा है। 

मैंने जिसके लिये दुआयें कीं,
देखो उसने ही मुझको कोसा है। 

आई दौलत तो मुझको भूल गया,
मैंने पाला है जिसको पोसा है। 

मुफ़लिसी मेरी और फ़टी चादर,
उसपे ठंडी हवा का बोसा है। 

"देव " आँगन तो मेरा छोड़ दिया,
पर वो उस दिन से बेघरो सा है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०७.१२.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "   

Saturday, 28 November 2015

♥♥देश टुकड़ों में...♥♥

♥♥♥♥♥देश टुकड़ों में...♥♥♥♥♥♥
देश टुकड़ों में बंट रहा फिर से। 
आपसी प्यार घट रहा फिर से। 

जिसकी छाँव में कोई फर्क नहीं,
पेड़ वो आज कट रहा फिर से। 

दिन दहाड़े भी अब सताये डर,
नाम इज़्ज़त का लुट रहा है फिर से। 

न बुरे वक़्त में कोई आया,
झुंड झूठों का छंट रहा फिर से। 

तोड़ना चाहें, कोई जोड़े नहीं,
हर कोई रंज रट रहा फिर से। 

लफ्ज़ जो दूरियां बढ़ाने लगें,
हर कोई उनपे डट रहा फिर से। 

"देव" इंसानियत बचेगी कहाँ,
बम ये नफरत का फट रहा फिर से। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२८.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Friday, 27 November 2015

♥♥अमानत...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥अमानत...♥♥♥♥♥♥♥
प्यार की तेरे जो अमानत है। 
मुझपे कुदरत कि ये इनायत है। 

तुमको पाकर के मिल गया है सुकूं,
न ही शिकवा है, न शिकायत है। 

तुझको छूने की भी हुयी ख्वाहिश,
चूम लूँ तुमको क्या इजाजत है। 

तेरी ज़ुल्फ़ें छुपायें चेहरे को,
कितनी मासूम ये शरारत है। 

तुम दुआओं में, हो मेरी शामिल,
तुझको चाहना मेरी इबादत है। 

"देव" आ जाओ मुझसे मिलने को,
सिर्फ तुमसे ही दिल को राहत है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२७.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Thursday, 26 November 2015

♥आलम...♥

♥♥♥♥♥♥आलम...♥♥♥♥♥♥♥
मुल्क का आज कैसा आलम है। 
देखो जिस ओर भी नया ग़म है। 

आदमी होके आदमी में फरक,
आज इंसानियत बड़ी कम है। 

मुफ़लिसी का मैं दर्द कैसे लिखूं,
पेट भूखा है और नही दम है। 

रात भर जागके गुजारा करूँ,
तेरे जाने से आँख ये नम है। 

मेरे अरमानों का गला घोंटा,
तू भी कातिल से अब कहाँ कम है। 

है दवा महंगी कैसे होगी शिफ़ा,
साथ बीमारियों का मौसम है। 

"देव" तकदीर है या दुश्वारी,
मुझको पानी नहीं, उन्हें रम है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२७.११.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Friday, 20 November 2015

♥लिबास...♥♥


♥♥♥♥♥♥लिबास...♥♥♥♥♥♥♥
रेशमी सा लिबास हो जाओ। 
तुम मेरे पास पास हो जाओ। 

मेरी मुस्कान तुमको मिल जाये,
जब कभी तुम उदास हो जाओ। 

है दुआ मेरी उस खुदा सा ये,
एक तुम मेरे ख़ास हो जाओ। 

जीत की खुशियां हों मुबारक पर,
हार से न हताश हो जाओ। 

इस जनम "देव " तुम हो मेरे मगर,
हर जनम तुम ही काश हो जाओ। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२०.११.२०१५   
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Monday, 16 November 2015

♥लौ ...♥

♥♥♥♥♥♥♥लौ ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कोई लौ बनके तुम उजाला करो। 
न ही नफरत से रंग काला करो। 

सारी दुनिया को याद आओगे,
काम ऐसा जरा निराला करो। 

जी रहे जिसमें वो ही पल जीवन,
काम कल पर न कोई टाला करो। 

जिंदगी खुद की बस, नहीं होती,
फ़र्ज़ भी सबका तुम संभाला करो। 

"देव " हर धर्म से जो पावन हैं,
फूल इंसानियत के पाला करो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१६.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "  

Thursday, 12 November 2015

♥♥प्रेम के फूल...♥♥

♥♥♥♥♥प्रेम के फूल...♥♥♥♥♥
प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते। 
आँख पढ़ लेती आँख की भाषा,
होठ बेशक ही सिल गये होते। 

तेरे आने की राह मन में है। 
तुझको पाने की चाह मन में है। 
तुम दवा प्यार की मुझे दे दो,
बिन मिले तुमसे आह मन में है। 

तुम जो मिलते तो आह भी मिटती,
गम के पर्वत भी हिल गये होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते....

मेरे ख़्वाबों की तुम पनाह करो। 
प्यार वाली जरा निगाह करो।  
साथ रहने की आरज़ू दिल में,
प्यार का प्यार से निकाह करो। 

तुम जो छू लो अगर मेरा दामन, 
मेरे सब दाग धुल गए होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते....

तुम से बस इतनी सी गुजारिश है। 
साथ दो आपका, ये ख्वाहिश है। 
"देव " तुम आओगे तो झूमे घटा,
प्यार तेरा ख़ुशी की बारिश है। 

देखकर अपना ये मिलन सब खुश,
बागवां सारे खिल गये होते। 

प्रेम के फूल खिल गये होते। 
हम जो आपस में मिल गये होते। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१२.११.२०१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Tuesday, 10 November 2015

♥झालर ...♥

♥♥♥♥♥झालर ...♥♥♥♥♥♥
हर आँगन में खुशहाली हो। 
ऐसी सबकी दीवाली हो। 
रंग बिरंगी झालर दमकें,
रात नहीं ग़म से काली हो। 

नफरत के शोले बुझ जायें,
चिंगारी तक शेष रहे न। 
मानवता से प्यार करें सब,
किंचित भी आवेश रहे न। 
दीप जलें बस अपनेपन के,
न रंजिश हो, नहीं लड़ाई,
घुल मिल जायें हम आपस में,
बैर तनिक भी, द्वेष रहे न। 

बच्चों की हों नयी शरारत,
गोद किसी की न खाली है। 

रंग बिरंगी झालर दमकें,
रात नहीं ग़म से काली हो। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१०.११.२०१५  
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Saturday, 3 October 2015

♥याद तुम्हारी...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥याद तुम्हारी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
याद तुम्हारी आयेगी तो, चाँद का मैं दीदार करूँगा।
पास रहो या दूर रहो तुम, मैं तो तुमसे प्यार करूँगा।

भाती हो तुम मेरी रूह को, सौंप दिया है तुमको तन, मन,
मुझको तुम खुशियां या गम दो, मैं हंसकर स्वीकार करूँगा।

मुझे बताना मेरा मिलना, यदि जो तुमको नहीं सुहाये,
तो मैं तेरे घर आँगन की, देहरी को न पार करूँगा।

मेरी माँ ने मुझे सिखाया, अतिथियों का स्वागत करना,
तुम भी तो दिल की मेहमां हो, मैं तेरा सत्कार करूँगा।

तुम बोलो के या न बोलो, या फिर मुझसे नज़र चुराओ,
लेकिन मैं तेरे रस्ते पे, न कोई दीवार करूँगा।

तेरे दिल की कोमल परतें, कभी न दुःख की धूप में झुलसें,
मैं अपनी चाहत की शबनम से, हर पल बौछार करूँगा।

"देव" तुम्हारी सूरत दिल की, दीवारों पर छपी हुयी है,
तुम्हे भूलकर जीवन नौका, बोलो कैसे पार करूँगा। "
........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-०३.१०.२०१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Wednesday, 30 September 2015

♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मुझे आंसू भी दे डाले, मेरा दिल भी दुखाया है। 
किसी ने रात मेरे घर का दीपक, फिर बुझाया है। 
मेरी गलती महज इतनी, मैं सच का साथ दे बैठा,
ये दुनिया झूठ की थी पर, समझ में मुझको आया है। 

मगर मैं झूठ के लफ़्ज़ों को, कैसे मुंह बयानी दूँ। 
बहुत सोचा के झूठे पेड़ को, कैसे मैं पानी दूँ। 
बताओ "देव" कैसे बोल दूँ तेज़ाब को अमृत,
सिखाओ मैं अंधेरों को, भला क्यों जिंदगानी दूँ। 

सही है झूठ तो पुस्तक में, फिर क्यों सच पढ़ाया है।   
ये दुनिया झूठ की थी पर, समझ में मुझको आया है। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-०१.१०.२०१५  
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। " 

Wednesday, 23 September 2015

♥ इंतजार की आंच...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥ इंतजार की आंच...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मुझ बिन तरस रहा होगा वो, रोकर बरस रहा होगा वो।
इंतजार की आंच में देखो, कैसे झुलस रहा होगा वो।
मुझको तो एक लम्हे को भी, खाली आँगन नहीं सुहाता,
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो।

पेड़ से कोई पत्ता टूटे, देखके डाली भी रोती है।
यदि कोई अपना बिछड़े तो, आँख भले ये कब सोती है।
कांटो के बिस्तर सी यादें, उसको पल पल चुभती होंगी,
मिलना चाहा, नहीं मिल सके, शायद ये किस्मत होती है।

नशा न उतरा आज भी उसका, शायद चरस रहा होगा वो।
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो ....

होती है तकलीफ बहुत ही, जुदा यदि चाहत होती है।
नहीं चैन मिल पाता दिल को, और नहीं राहत होती है।
"देव " मुझे मालूम है लेकिन, मेरे हाथ में वक़्त नहीं है,
वक़्त यदि जो रुख बदले तो, रूह यहाँ आहत होती है।

बारिश के बिन कड़ी धूप में, व्याकुल, उमस रहा होगा वो।
नहीं पता कि तनहा कैसे, सालों-बरस रहा होगा वो। "

........चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-२३.०९.१५
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "

Sunday, 20 September 2015

♥♥कश...♥♥

♥♥♥♥♥♥कश...♥♥♥♥♥♥♥
सिगरेट के धुयें के कश में। 
नहीं जिंदगी मेरे वश में। 

थाने, जुर्म, कचहरी कम हों,
मसले जो सुलझें आपस में। 

मुश्किल हम पर भारी होंगी,
अगर कमी आयी साहस में। 

मर्यादा भी तार तार है,
नेता उतरे निरा बहस में। 

शबनम की एक बूंद मिली न,
गम की ज्वाला और उमस में। 

औरत भी इज़्ज़त के लायक,
गुंडे भूले यहाँ हवस में। 

"देव" ये लम्बी रात कटे न,
सांस घुटी हैं, यहाँ कफ़स में। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-२०.०९.१५ 
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Monday, 14 September 2015

♥♥ सपनों के कण... ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ सपनों के कण... ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिखरे हैं सपनों के कण कण, जिन सपनों को रात बुना था। 
चीख हुयी ज़ोरों की दिल से, मगर किसी ने नहीं सुना था। 
देह तड़पती रही सड़क पर, अरमानों का कत्ल हो गया,
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था। 

ये पत्थर का जहाँ है शायद, पत्थर की दुनिया दारी है। 
कोई तड़पकर मर जाये पर, सबको अपनी जां प्यारी है। 
बेरहमी से लोग किसी के, जज़्बातों की हत्या करते,
निर्दोषों के पांव में बेड़ी, कातिल की खातिरदारी है। 

अनदेखा करते हैं उनको, दर्द वो जिनका कई गुना था। 
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था …

वादा करके तोड़ दिये हैं और ऊपर से भ्रम करते हैं। 
लोग यहाँ सदमा देने का, बड़ा ही लम्बा क्रम करते हैं। 
"देव" यहाँ घड़ियाली आंसू, मगर रिक्त दिल अपनेपन से,
नहीं मिले २ वक़्त की रोटी, निर्धन कितना श्रम करते हैं। 

सींचा जिसको, छाया न दी, बीज वो शायद जला भुना था। 
मगर किसी ने दुखियारे का, एक चिथड़ा भी नहीं चुना था। "

........चेतन रामकिशन "देव"…… 
दिनांक-१५.०९.१५ 
" सर्वाधिकार C/R सुरक्षित। "