Friday, 21 September 2012




♥♥♥♥♥♥लक्ष्य..♥♥♥♥♥♥♥
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर, 
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!
आशा और साहस को अपने, 
जीवन से तुम खोने न दो!

हार गए तो क्या घबराना,
क्यूँ आँखों से नीर बहाना!
नजर लक्ष्य से हटने न दो,
फिर से अपने कदम बढ़ाना!

अपने मन की आशाओं को,
हार के डर से सोने न दो!
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर,
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!

नहीं गिराकर कभी किसी को,
तुम अपना स्थान बनाओ!
स्वच्छ भावना मन में लेकर,
तुम मेहनत के दीप जलाओ!

अपने कारण "देव" किसी की,
आँखों को तुम रोने न दो!
अपनी आंखे रखो लक्ष्य पर,
लक्ष्य को धूमिल होने न दो!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२२.०९.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!


Wednesday, 19 September 2012




♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हर्ष का वितरण....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हर्ष का वितरण करना होगा, सच का विचरण करना होगा!
प्रेम को उन्नत करने हेतु,  हमे समर्पण करना होगा!

नैतिकता के संवाहक बन,  मर्यादा का पालन करके,
अपने जीवन में लक्ष्यों को, चयनित और निर्धारण करके!
हम सबको जीवन के पथ में, शुद्ध आचरण करना होगा.....

नहीं पराजय से भय खाकर,  हमको भूमिगत होना है!
हमे सदा अपने जीवन में, साहस का अंकुर बोना है!
मन में भरके विजय की आशा, पुन: अवतरण करना होगा!"
........"शुभ-दिन"........चेतन रामकिशन "देव".............


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आँखों की बरसात..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रिमझिम रिमझिम बारिश जैसी, आँखों से बरसात हुई !
गम के साये में दिन निकला, और गम में ही रात हुई!

कल तो जो मेरी चाहत की, अम्बर से तुलना करता था,
आज उसी के हाथों देखो, मेरे प्यार की मात हुई!

जिधर भी देखो आज उधर ही, नफरत का धुआं उड़ता है,
इंसानों की कौम भी देखो, खुंखारों की जात हुई!

जो मिलने का वादा करके, वक़्त से पहले आ जाता था,
आज न जाने किस वजह से, उसको बड़ी अनात हुई!

"देव" जो मेरी तस्वीरों को, सिरहाने रखकर सोता था,
आज उसी इंसान से मानो, गैरों जैसी बात हुई!"

"अनात-देरी"

...............चेतन रामकिशन "देव"..................

Tuesday, 18 September 2012


♥♥♥♥♥♥शोषण से संघर्ष(एक आह्वान)♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपने मन की शक्ति को तुम, मन से बाहर लाना सीखो!
अपने अधिकारों की खातिर, तुम आवाज उठाना सीखो!
जीवन में शोषण के आगे, तुम नतमस्तक न हो जाना,
शोषण करने वालों की तुम, ईंट से ईंट बजाना सीखो!

कमजोरी के भाव जगाकर, जीवन यापन क्यूँ करते हो!
मौत तो एक दिन आनी ही है, तो मरने से क्यूँ डरते हो!

वीरों जैसे बनकर के तुम, मौत को गले लगाना सीखो!
अपने मन की शक्ति को, तुम मन से बाहर लाना सीखो...

सच को सच कहने की आदत और झूठ को झूठ कहो तुम!
शोषण से संघर्ष करो, यूँ आँख मूंदकर नहीं सहो तुम!
हार-जीत दोनों मिलती हैं, रणभूमि का यही नियम है,
नहीं हारकर हिम्मत छोड़ो, मुर्दा बनकर नहीं रहो तुम!

रणभूमि में हार क्यूँ पाई, इसका चिंतन करना होगा!
और दुबारा उन कमियों को, युद्ध से बाहर करना होगा!

इक दिन जीत मिलेगी हमको, ये खुद को समझाना सीखो!
अपने मन की शक्ति को तुम, मन से बाहर लाना सीखो...

जीवन में जो भय खाते हैं, वो इतिहास नहीं रच पाते!
वो जीते हैं मुर्दों जैसे और मुर्दा बनकर मर जाते!
"देव" न केवल तन से हमको, मन से भी जिंदा रहना है,
मन से मृतक होने वाले, कोई साहस न कर पाते!

इसी तरह चुपचाप रहे तो, शोषण-मुक्ति नही मिलेगी!
अंधकार ही रहेगा पथ में, कोई दीपिका नहीं जलेगी!

अपने मन को तुम निद्रा से, अब तो जरा जगाना सीखो!
अपने मन की शक्ति को, तुम मन से बाहर लाना सीखो!"

"शोषण- से भय खाकर, अपने आप को जीते जी मुर्दा बनाकर, अपने को कमजोर मानकर, जीवन में कोई युद्ध नहीं जीता जा सकता! जीवन में यदि शोषण से संग्राम करना है, तो अपने आप को तन से नहीं, मन से भी जिन्दा रखना होगा! तो आइये चिंतन करें......................."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१९.०९.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित..
रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

♥♥♥♥♥♥♥♥मन की चहल-पहल...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मन की चहल-पहल खोई है, खुशियों की दुनिया रोई है!
न जाने क्यूँ मेरी किस्मत, लम्बे अरसे से सोई है!

जो मेरे जीवन को अक्सर, अमृत से सिंचित करते थे,
आज उन्ही अपनों ने देखो, नफरत की क्यारी बोई है!

आज तो अपने ही अपनों का, गले काटने पर आतुर हैं,
आज दिलों से ने जाने क्यूँ, अपनायत की शै खोई है!

ऐसा करने वाले बिल्कुल, रोयेंगे और पछतायेंगे,
जिन लोगों ने मजलूमों के, खून से ये धरती धोई है!

"देव" देखिए एक दिन वो भी, मेरी चाहत को तरसेंगे,
आज वो जिनकी वजह से मेरी, रूहानी चाहत रोई है!"

.............,........चेतन रामकिशन "देव"...................."

♥♥♥♥♥♥♥♥मन की चहल-पहल...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मन की चहल-पहल खोई है, खुशियों की दुनिया रोई है!
न जाने क्यूँ मेरी किस्मत, लम्बे अरसे से सोई है!

जो मेरे जीवन को अक्सर, अमृत से सिंचित करते थे,
आज उन्ही अपनों ने देखो, नफरत की क्यारी बोई है!

आज तो अपने ही, अपनों का, गले काटने पर आतुर हैं,
आज दिलों से ने जाने क्यूँ, अपनायत की शै खोई है!

ऐसा करने वाले बिल्कुल, रोयेंगे और पछतायेंगे,
जिन लोगों ने मजलूमों के, खून से ये धरती धोई है!

"देव" देखिए एक दिन वो भी, मेरी चाहत को तरसेंगे,
आज वो जिनकी वजह से मेरी, रूहानी चाहत रोई है!"

.....,........चेतन रामकिशन "देव"...................."

Monday, 17 September 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥दिल की चुभन...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दिल में एक चुभन रहती है, मन में एक अगन रहती है!
आँखों में आंसू की लड़ियाँ, जीवन में उलझन रहती है!

ये सच है कुछ दिन पहले तक, नयन में अश्रुधार नहीं थी!
न ही दिल टुकड़े टुकड़े था, और गमों की मार नहीं थी!
मैं भी हँसता था जी भर के, मैं भी गाता मुस्काता था,
पानी चाही जीत हमेशा और चिंतन में हार नहीं थी!

लेकिन ये बदलाव देखिए, तब से जीवन में आया है!
जब से मेरे अपनों ने ही, मेरे दिल को ठुकराया है!
जो खुद को कहते थे अक्सर, मेरे दुख का सच्चा साथी,
आज उन्ही के दुख से देखो, नीर नयन में भर आया है!

यही सोचकर इस जीवन की, ये बस्ती निर्जन रहती है!
दिल में एक चुभन रहती है, मन में एक अगन रहती है!"


.....................चेतन रामकिशन "देव"......................

Saturday, 15 September 2012

♥प्रेम की जल-तरंग.♥


♥♥♥♥♥♥♥प्रेम की जल-तरंग.♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलो सखी हम दूर जहाँ पर, करे न कोई तंग!
एक दूजे के साथ रहें हम, सात जनम तक संग!
सपनों की छोटी सी दुनिया, आओ करैं तैयार,
आसमान के इन्द्रधनुष से, भर दें उसमें रंग!

धन-दौलत से भी बढ़कर है, सखी जहाँ में प्रीत!
इसी प्रीत की छाँव में हमको, रहना है मनमीत!

प्रेम की अनुभूति पाकर के, मन में उठी तरंग!
चलो सखी हम दूर जहाँ पर, करे न कोई तंग....

सपनों की ये दुनिया देखो, होगी जब तैयार!
आसमान से भी बरसेगी, प्रेम की मधुर फुहार!
भ्रमर का गुंजन होगा और कोयल का संगीत,
हरियाली के हाथों होगा, जीवन का श्रंगार!

सखी तुम्हारे साथ लिखेंगे, हम भी प्रेम के गीत!
सखी तुम्हारे साथ मिलेगी, जीवन पथ में जीत!

सखी तुम्हारे प्रेम ने बदला, इस जीवन का ढंग!
चलो सखी हम दूर जहाँ पर, करे न कोई तंग....

चन्द्रकिरण जैसे उज्जवल है, सखी प्रेम का नाम!
इसी प्रेम के पथ पर चलकर, मिलता है आराम!
प्रेम जहाँ होता है उस घर, होते नहीं विवाद,
प्रेम नहीं बाजार की वस्तु, नहीं है इसका दाम!

प्रेम तो मन की चंचलता है, प्रेम सुगन्धित फूल!
"देव" प्रेम चुनता है देखो, जीवन पथ से शूल!

प्रेम की शक्ति से मिलती है, मन को एक उमंग!
चलो सखी हम दूर जहाँ पर, करे न कोई तंग!"


"प्रेम-का अर्थ बड़ा व्यापक है! विभिन स्वरूप हैं प्रेम के,
जिस सम्बन्ध में वो स्वरूप, निहित होता है, वो अपनत्व देता है! मार्गदर्शन करता है,
दुःख दर्द बांटता है और जीवन पथ को सरल और सदभाव पूर्ण बनाता है! तो आइये प्रेम का सम्मान करें !"

सर्वाधिकार सुरक्षित!
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१६.०९.२०१२ 


♥♥♥♥महंगाई.♥♥♥♥♥
आसमान छूती महंगाई!
बेकारी ने ली अंगडाई!
आम आदमी की आँखों में,
आंसू की बदली घिर आई!

देश की सत्ता अंधी होकर,
जनता का शोषण करती है!
घोटाले और लूटपाट कर, 
बस अपना पोषण करती है!

राज धर्म का पालन करना,
भूल गए हैं सत्ताधारी!
भूल गए निर्धन की पीड़ा,
भूल गए उनकी लाचारी!

आम आदमी के घर देखो,
दर्द भरी मायूसी छाई!
आसमान छूती महंगाई!
बेकारी ने ली अंगडाई!"

.........चेतन
रामकिशन "देव".......

Friday, 14 September 2012

♥जीते जी..♥


♥♥♥♥जीते जी..♥♥♥♥
जीते जी मरने की बातें!
मुश्किल से डरने की बातें!
न जाने क्यूँ इस जीवन को,
तहस नहस करने की बातें!

क्या रखा है इन बातों में, इन बातों से क्या मिलना है!
जब अंकुर को सींचोगे तुम, तभी तो आगे गुल खिलना है!
ये जीवन है और जीवन का सुख-दुख से है गहरा नाता,
पर हमको जिंदादिल रहकर, जीवन में आगे चलना है!

क्यूँ आंसू से भिगो रहे दिन,
क्यूँ गीली रखते हो रातें!
जीते जी मरने की बातें!
मुश्किल से डरने की बातें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१५.०९.२०१२

Thursday, 13 September 2012

♥♥♥♥♥♥हिंदी एक महीप...♥♥♥♥♥♥♥♥
भाषायें तो बहुत हैं किन्तु, हिंदी एक महीप!
आओ जलायें सारे जग में, हम हिंदी का दीप!

गलत नहीं इस जीवन में, बहुभाषा का ज्ञान!
किन्तु अपने हाथ से न हो, हिंदी का अपमान
हिंदी के आंचल में सिमटी, भारत की संस्कृति,
देश के माथे की बिंदी का, आओ करें सम्मान!

जिससे मोती स्फुट होता, हिंदी है वो सीप!

भाषायें तो बहुत हैं किन्तु, हिंदी एक महीप!

बड़ी मधुरता स्फुट करता, हिंदी का प्रयोग!
हिंदी को न मानो मित्रों, पिछड़ेपन का रोग!
अन्य बोलियों से ये हिंदी, न रखती है बैर,
हिंदी भी प्रकट करती है, प्रेम तत्व का योग!

शब्दकोष को उज्जवल करती, हिंदी बन प्रदीप!
भाषायें तो बहुत हैं किन्तु, हिंदी एक महीप!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१४ सितम्बर २०१२,हिंदी दिवस!

♥♥♥♥♥♥♥♥♥तुम्हारी जरुरत♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सूनी घर की चाहरदिवारी, सूना घर का आंगन!
सूख गया तुलसी का पौधा, टूट गया है दर्पण!
कमरे की सब तस्वीरें भी, चुप चुप सी रहती हैं,
रंग पड़ गए फीके उनके, सिमट गया है योवन !

मैं अपना क्या हाल बताऊ, जान जरा सी नहीं बदन में!
दिन कटता है पल पल तन्हा, रात कट रही करुण रुदन में!

खिड़की के परदे खिसका कर, हाथ को चेहरे तले लगाकर,
अपनी दोनों अंखियो से मैं, अश्कों की धारा बरसा कर!

पल-पल, लम्हा, मिनट-मिनट, तेरा  इंतजार करता हूँ!
पैमाने से नप ना पाय, तुम्हें इतना प्यार करता हूँ………

बिन तेरे ये सुबह अधूरी, तुम बिन है ये शाम अधूरी!
कौनसी ऐसी बात पे तुमने, कर डाली मीलों सी दूरी!
तुम कहती थी जीते जी मैं, साथ नहीं छोडूंगी पल को,
कौन सी ऐसी बात हुयी जो, जाना इतना बना जरुरी!

मैं अपना क्या हाल बताऊ, जान जरा सी नहीं बदन में!
गर्दन रखकर सिरहाने पे, ताकता रहता दूर गगन में!

चेहरे पर जुल्फें बिखराकर, दूर दूर तक नयन घुमाकर!
पैर में छाले पड़ जाने पर, चरण पादुका हाथ उठाकर!

पल-पल, लम्हा, मिनट-मिनट, तेरा  इंतजार करता हूँ!
पैमानों से नप ना पाय, तुम्हें इतना प्यार करता हूँ………



"इंतजार की एक सीमा होती है, जब इंतजार हद से ज्यादा बढ़ जाता है और द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष की भावनाओं को नहीं समझते हुए दूर रहता है, तब निश्चित रूप से वेदना होती है!

यही वेदना उकेरने का प्रयास-----चेतन रामकिशन (देव ) "

Wednesday, 12 September 2012

♥♥आशा की मुस्कान♥♥
आशा की मुस्कान सजाकर,
अपने मन से तिमिर मिटाकर,
तोड़के बंधन जात धर्म के,
एक दूजे को गले लगाकर!

इक मानव जब इस नीति पर, अपना जीवन यापन करता!
मानवता के पाठ का वो जब, दुनिया में अध्यापन करता!

तब तब देखो मानवता का,
स्तर फिर से बढ़ जाता है!
संबंधों के आभूषण पर,
रंग नेह का चढ़ जाता है!

हिंसा की दीवार गिराकर,
लालच का हर दीप बुझाकर,
आओ चलो जीते हैं जीवन,
मानवता के फूल खिलाकर!"


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१२.०९.२०१२ 

Tuesday, 11 September 2012

♥माँ की छवि महान..♥


♥♥♥♥♥♥माँ की छवि महान..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
माँ की ममता फूलों जैसी, माँ की छवि महान!
माँ की सूरत में दिखता है, धरती पर भगवान!
जब भी माँ के हाथ से मिलता, मस्तक को स्पर्श,
मिलता है साहस जीवन को, खिलती है मुस्कान!

माँ तो माँ है, माँ का कोई होता नहीं विकल्प!
माँ करती है संतानों का, जीवन कायाकल्प!

माँ अपनी संतान का हर पल, करती है उत्थान!
माँ की ममता फूलों जैसी, माँ की छवि महान....

माँ बच्चों का पालन करती, देती उन्हें दुलार!
माँ बच्चों को देती अपने, दूध की मीठी धार!
माँ बच्चों को देती हर पल सच्चाई की सीख,
माँ बच्चों के जीवन पथ से, चुन लेती है खार!

माँ बच्चों के हर्ष की खातिर, भूले अपना दर्द!
माँ से बढ़कर नहीं है कोई, दुनिया में हमदर्द!

माँ प्रथम शिक्षक बनकर के, हमको देती ज्ञान!
माँ की ममता फूलों जैसी, माँ की छवि महान...

माँ की इस अनमोल छवि को, है शत शत प्रणाम!
मधुर से भी मधुकर लगता है, माँ का प्यारा नाम!
हमको बिना सुलाए रहती, माँ निंदिया से दूर,
माँ बच्चों की खातिर भूले, अपने सुख, आराम!

माँ की एक दुआ से बनते,"देव" हजारों काज!
माँ का नाम सदा पावन है, कल को चाहें आज!

हिंसा, लोभ, कपट से रहता, माँ का दिल अनजान!
माँ की ममता फूलों जैसी, माँ की छवि महान!"

"
माँ-एक ऐसी छवि, जिसका कोई विकल्प नहीं! नारी त्याग का पर्याय है, किन्तु उस नारी में, माँ का रूप सबसे ज्यादा वन्दनीय और त्यागी है! माँ, अपनी संतान के हित के लिए, अपने जीवन के एक एक पल को समर्पित कर देती है! माँ को नमन!"

अपनी माँ प्रेमलता जी को समर्पित रचना!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-११.०९.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!





Tuesday, 28 August 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आओ चलो आकाश में आओ, हम इतना ऊँचा उड़ते हैं,
जहाँ नज़र की पहुँच में देखो, दंगा और फसाद नहीं हो!

पंख पसारे साथ रहें हम, एक दूजे के साथ हमेशा,
भूले से भी इन हाथों से, अपनायत बरबाद नहीं हो!"

♥♥♥♥♥♥♥चेतन रामकिशन "देव"♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥

Sunday, 26 August 2012

♥करुण निवेदन.♥♥


♥♥♥करुण निवेदन.♥♥♥♥
करुण निवेदन करके देखा,
और याचना भी की मन ने!

किन्तु फिर भी प्रेम के बादल,
नहीं छा सके इस जीवन में!

जिसकी यहाँ जरुरत होती,
वो ही पास नहीं आते हैं!

और अपने दिल के ही टुकड़े,
मानो पत्थर बन जाते हैं!

होती है मायूसी किन्तु,
नहीं समझते समझाने से,

अपनायत के निशां देखिए,
मानो दिल से मिट जाते हैं!

रंग बड़े बदरंग हुए हैं,
नीर बहाया ने उपवन ने!

करुण निवेदन करके देखा,
और याचना भी की मन ने!"

.............चेतन रामकिशन "देव".....


♥♥मन की घुटन.♥♥♥♥
घुटा घुटा मेरा मन क्यूँ है!
दर्द से ये अपनापन क्यूँ है!

चारों तरफा भीड़ है लेकिन,
दिल में ये सूनापन क्यूँ है!

न जाने क्यूँ तन्हाई के,
बादल जीवन पर छाते हैं!

और सितारे खुशियों वाले,
न जाने क्यूँ छुप जाते हैं!

जिन राहों पर कदम रखोगे,
कांटे चुभते हैं पैरों में,

और न जाने क्यूँ जीवन से,
जलते दीपक बुझ जाते हैं!

दिल रोता है, रूह सिसकती,
और मेरा जर्जर तन क्यूँ है!

घुटा घुटा मेरा मन क्यूँ है!
दर्द से ये अपनापन क्यूँ है!"

..........चेतन रामकिशन "देव"...................

Friday, 24 August 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥अनमोल-प्रेम ♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारा प्रेम अमर है, प्रेम बड़ा अनमोल!
सखी बहुत सुन्दर लगते हैं, मधुर प्रेम के बोल!

सखी तुम्हारे प्यार से मेरे, जीवन में श्रृंगार!
गंगा जैसा निर्मल है ये, सखी तुम्हारा प्यार!
सखी तुम्हारे प्रेम से, हमको मिलता है उत्कर्ष,
सखी तुम्हारे प्रेम से बहती, चन्दन की रसधार!

सखी तुम्हारे दर्शन करता, मन की आंखे खोल!
सखी तुम्हारा प्रेम अमर है, प्रेम बड़ा अनमोल.....

सखी तुम्हारे प्रेम से मिलते, मेरे कलम को भाव!
सखी तुम्हारे प्रेम से भरते, क्षण में गहरे घाव!
सखी तुम्हारा प्रेम है कोमल, जैसे हो प्रसून,
सखी तुम्हारे प्रेम में हिंसा, न कोई दुर्भाव!

सखी तुम्हारे प्रेम के आगे, धन-दौलत बेमोल!
सखी तुम्हारा प्रेम अमर है, प्रेम बड़ा अनमोल.....

तन तो होता नश्वर, किन्तु जीवित रहता प्यार!
प्रेम है अमृत रस जैसा, जिससे खिलता संसार!
पतझड़, सावन ,सर्दी हो या खिले बसंत बहार ,
"देव" प्रेम तो हर मौसम में करता है मनुहार!

तुमसे ही इतिहास बनेगा और तुम ही भूगोल!
सखी तुम्हारा प्रेम अमर है, प्रेम बड़ा अनमोल!"
"
प्रेम-एक अनमोल अनुभूति! एक अनमोल सोच! एक अनमोल और निश्चल भावना! जहाँ शुद्ध प्रेम होता है, वहां जीवन हर्षित होता, वहां जीवन पुलकित होता है! वहां समस्याओं से लड़ने के लिए शक्तियां मिलती है! प्रेम के तीन शब्द, जब ह्रदय की गहराई से किसी को कहे जाते हैं, तो वे शब्द पीड़ा में दवा, प्यास में पानी और जीवन के संघर्ष के समतुल्य अनुभूति प्रदान करते हैं! तो आइये................"

"अपने भावनात्मक प्रेम को समर्पित रचना"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२५.०८.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पूर्व प्रकाशित!
♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जाने क्यूँ ऐसा लगता है, वक़्त अचानक बदल गया है!


जब भी सांसें लेता हूँ तो सीने में खंजर चुभता है!


अक्सर कोशिश करता हूँ मैं, हंसने, मुस्काने की लेकिन,


बाहर से बेशक हँसता हूँ, पर भीतर से दिल दुखता है!



.................चेतन रामकिशन "देव"......................
♥♥♥♥♥♥♥दिल का एहसास...♥♥♥♥♥♥♥♥
दिल के एहसास को कैसे मैं बदल सकता हूँ!
हमसफर आपके बिन कैसे मैं चल सकता हूँ!

मैं अगर दीप हूँ तो तुम मेरी बाती जैसी,
बिना बाती के भला, कैसे मैं जल सकता हूँ!

तुमको ही देखके, दीवानगी बढती मेरी,
हर किसी के लिए, कैसे मैं मचल सकता हूँ!

आपके प्यार से खुशबू है मेरे जीवन में,
प्यार के फूल को, कैसे मैं मसल सकता हूँ!

अपने दिल पे जो मैंने नाम लिखा है तेरा,
"देव" इस नाम को, कैसे मैं बदल सकता हूँ!"

..........चेतन रामकिशन "देव".............
♥♥♥♥♥♥♥♥♥सपनों की क्यारी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सपनों की छोटी सी क्यारी, उजड़ गई खिलने से पहले!
चलते चलते खुशी देखिये, बिछड़ गई मिलने से पहले!

बिना बुलाए मेहमानों से, गम मेरे जीवन में आये!
जिनको मैंने अपना समझा, निकले वो ही लोग पराये!
रिश्तों की दुनिया में देखो, पल भर में परिवर्तन आया,
मेरी आंख में देख के आंसू, मेरे अपने भी मुस्काये!

किस्मत का भी हाल देखिये, बिगड़ गई बनने से पहले!
सपनों की छोटी सी क्यारी, उजड़ गई खिलने से पहले!"

....................चेतन रामकिशन "देव"......................

Tuesday, 21 August 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जहाँ वासना की आशा हो, वहां पे सच्चा प्यार नहीं है!
जो दिल की पीड़ा न समझे, वो अपना दिलदार नहीं है!

दुनिया में दौलत पाने को, क्यूँ अपना ईमान बेचना,

कौन उन्हें कहता है अच्छा, सच जिनका किरदार नहीं है!

वही लोग एकजुटता करके, विजय पताका फहराते हैं,

जिनके दिल में जात-धर्म की, खड़ी कोई दीवार नहीं है!

सोने, चांदी, घर, जमीन की सभी वसीयत चाहते लेकिन,

उन बूढ़े माँ बाप के आंसू का, कोई हकदार नहीं है!

आबादी तो "देव" मुल्क की, एक अरब से ऊपर पहुंची,

लेकिन अब अशफाक, भगत की, मुल्क में पैदावार नहीं है!"


चेतन रामकिशन "देव"


Monday, 20 August 2012

♥खुशी और गम...♥



♥♥♥खुशी और गम...♥♥♥
जीवन की इस राह में देखो,
फूल भी होंगे, शूल भी होंगे!

नीम की छाया मिले कभी तो,
झाड़ी और बबूल भी होंगे!

ये जीवन है और जीवन का,
सुख दुःख से गहरा नाता है!

कभी पराजय मिलती है तो,
कभी विजयपथ मिल जाता है!

कभी यहाँ अपनों के दुःख से,
होता है मायूस कोई तो,

और कभी अपनायत पाकर,
अपना चेहरा खिल जाता है!

"देव" इसी जीवन में दुश्मन,
और यहीं मकतूल भी होंगे!

जीवन के पथ में तो देखो,
फूल भी होंगे, शूल भी होंगे!"

(मकतूल-प्रेमी)

...."शुभ-दिन".....चेतन रामकिशन "देव".....



Sunday, 12 August 2012

♥उम्दा किरदार..♥

♥♥♥♥♥उम्दा किरदार..♥♥♥♥♥♥
शब्दों का संसार रचाने निकला हूँ!
मैं उम्दा किरदार निभाने निकला हूँ!

बंदूकों ओर तलवारों की दुनिया में,
शब्दों को हथियार बनाने निकला हूँ!

प्रेम रहित लोगों के दिल तर करने को,
मैं पानी की धार बनाने निकला हूँ!

लोग सभी मजहब के जहाँ एक साथ रहें,
मैं ऐसा घरवार बनाने निकला हूँ!

जिनके हक को लूट रहे हैं खद्दरधारी,
मैं उनको अंगार बनाने निकला हूँ!"

.......चेतन रामकिशन "देव".......







Saturday, 11 August 2012

♥आशाओं के दीप..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आशाओं के दीप..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपने घर भी होगी इक दिन खुशियों की बरसात!
छंट जायेंगे गम के बादल, खिल जाएगी रात!

थाम के ऊँगली उम्मीदों की, चलो लक्ष्य की ओर,
मेहनत से ही दे सकते हो, तुम मुश्किल को मात!

बस अपने मकसद की खातिर, ठगना नहीं यकीन,
जिसको सुनकर दूर हों अपने, न कहना वो बात!

जाति-धर्म के नाम पे कोई, न करना तुम भेद,
सबसे ऊँची है दुनिया में, मानवता की जात!

"देव" सुनो तो इस दुनिया में, होता उसका नाम,
जिसके ह्रदय में जिन्दा हों, दूजे के जज्बात!"

......"शुभ-दिन"......चेतन रामकिशन "देव".....



Friday, 10 August 2012



♥♥♥♥♥♥♥♥निर्धन की बेबसी.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान!
बिना दवा के निकल रही है, मजदूरों की जान!
क्या समझेंगे सत्ताधारी, इन लोगों का दर्द,
उनको दुख की परिभाषा का, नहीं है कुछ भी ज्ञान!

बड़े दर्द में, आंसू पीकर, जीते हैं ये लोग!
और देश के नेता करते, बस इनका उपयोग!

फिर भी इनको देते माफ़ी, ये निर्धन इन्सान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान...

इन मजलूमों के संग होते, रोज ही अत्याचार!
इनके तन पर करते अफसर, लाठी की बौछार!
नहीं बीज कृषक को मिलता और न मिलता खाद,
इनकी फसल का दाम भी देखो, कम देती सरकार!

न अफसर, न नेता, देखो सुनते इनकी आह!
इनको तो हर पल होती है, धन-दौलत की चाह!

निर्धन लोगों के अधरों से, चली गयी मुस्कान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान...

जाने कब तक रहेंगे, इनके दर्दनाक हालात!
इनके हिस्से कब आयेंगे, हंसी भरे दिन रात!
इनके इष्ट "देव" भी इनका, नहीं समझते दर्द,
जाने कब इनके घर होगी, खुशियों की बरसात!

निर्धन लोगों के जीवन में, कदम कदम पर शूल!
इनके जीवन में नहीं खिलते, आशाओं के फूल!

निर्धन लोगों की चीखों को, नहीं सुने भगवान!
भूख से जर्जर देश का निर्धन, कर्ज से दुखी किसान!"

"
देश-कुछ चुनिन्दा, चंद लोगों के अमीर होने से, खुशहाल नहीं होता! देश उस वर्ग के खुश होने से खुशहाल होता है, जो वर्ग खेत में फसल बोकर लोगों का पेट भरता है, जो वर्ग पहाड़ काट काट कर रास्ते तैयार करता है! देश को खुशहाली देनी है तो पहले इस निर्धन वर्ग को खुशहाल करना होगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-११.०८.२०१२




Monday, 6 August 2012

♥♥माँ का स्वरूप..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ का स्वरूप..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दो अक्षर का नाम है माँ का, किन्तु इसमें जगत समाया!
अपनी नींद की परवाह न कर, पहले माँ ने मुझे सुलाया!
मुझे खिलौने देकर के माँ, मुस्काने का अवसर देती,
और मेरा रोना सुन माँ ने, मुझको अपने गले लगाया!

प्यारी माँ की पावन ममता, बड़े सुनहरे रंग भरती है!
माँ बच्चों के हित में हरदम, हर संभव कोशिश करती है!

माँ ने खुद भूखा रहकर के, पहले देखो मुझे खिलाया!
दो अक्षर का नाम है माँ का, किन्तु इसमें जगत समाया!"


.................चेतन रामकिशन "देव".......................







Sunday, 5 August 2012

♥♥♥♥♥♥♥♥सच्चा दोस्त..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमेशा सुख में भी, दुःख में भी अपने साथ होते हैं!
ये ऐसे लोग ही दुनिया में, सच्चे दोस्त होते हैं!

ये सच्चे दोस्त आपस में, कभी रंजिश नहीं रखते,
वो इक दूजे के जीवन में, खुशी के बीज बोते हैं!

नहीं रिश्ता दिखावे का, नहीं मन में कपट होता,
वो इक दूजे के दुख में, अपना भी सुख चैन खोते हैं!

भले हों तन जुदा लेकिन, वो रूह से दोस्ती करते,
वो इक दूजे के आंसू , अपने आँचल में समोते हैं!

"देव", दुआ करता ईश्वर से, दोस्त मेरे खुश रहें सदा,
जो मेरे सुख में हँसते हैं, जो मेरे दुःख में रोते हैं!"

...............चेतन रामकिशन "देव"....................

♥ऐसा भी होता है अक्सर♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥ऐसा भी होता है अक्सर♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कभी कभी जीवन में देखो, जब गम के बादल छा जाते!
और जब अपने शत्रु बनकर, देखो हमको बहुत सताते!

इस दिल में रहने वाले भी, जब अपना मुंह मोड़ के चलते!
और लोग मज़बूरी का जब, लाभ उठाकर हमको छलते!

तब तब सोचो इस जीवन में, वक़्त परीक्षा वाला आया!
मुश्किल में भी दृढ रहकर के, कुछ करने का अवसर आया!

जो अपनी आँखों के आंसू, पानी की भांति पी जाते!
जो अपने गहरे ज़ख्मों को, अपने हाथों से सी जाते!

वही लोग पीड़ा में तपकर, देखो तो कुंदन हो जाते!
और वही तारे बनकर के, इक दिन आसमान चमकाते !"

..................चेतन रामकिशन "देव".....................

Thursday, 2 August 2012

♥♥दीप शिखा सी तुम♥♥♥


♥♥दीप शिखा सी तुम♥♥♥
जीवन पथ में दीप जले हैं!
अंधकार के रंग ढले हैं!
जब से तुम जीवन में आईं,
सखी हजारों फूल खिले हैं!

तुम अपनी मीठी वाणी से
तन मन शीतल कर देती हो!
तुम चिंतन में शुद्धि देकर,
चित् को निश्चल कर देती हो!

सखी तुम्हारी सच्चाई से,
मिथ्या ने भी होठ सिले हैं!

जब से तुम जीवन में आईं,
सखी हजारों फूल खिले हैं.....

तुमसे उपवन की हरियाली!
तुमसे मेरे घर खुशहाली!
तुमसे ही चंदा जगमग है,
तुमसे ही सूरज की लाली!

"देव" तुम्हारी प्रीत से देखो,
वाणी में मकरंद घुले हैं!

जब से तुम जीवन में आईं,
सखी हजारों फूल खिले हैं!"

"प्रेम- एक ऐसी भावना जिसके ग्रहण करने से, मनुज के जीवन में हर्ष, प्रसन्नता, संघर्ष करने की प्रेरणा, अग्रसर होने की भावना पैदा होती है! प्रेम, समर्पण भाव के साथ जब जीवन पथ में समाहित होता है, तो निश्चित रूप से उस पथ में दीप जल जाते हैं!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०३.०८.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

♥प्रीत जुड़ी है मन की....♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रीत जुड़ी है मन की....♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुमसे प्रीत जुड़ी है मन की, तुमसे ही रंगत यौवन की!
तुमसे ही मेरे शब्दों को, शक्ति मिलती है सृजन की!

मेरा हाथ पकड़ चलती हो, तुम मुझको प्रेरित करती हो!
तुम मेरे जीवन में हर क्षण, साहस और शक्ति भरती हो!
मेरी पीड़ा को तुम अपनी, पीड़ा सदा समझती आईं,
मेरी कुशल कामना हेतु, ईश्वर से विनती करती हो!

तुम ही मेरी सम्रद्धि हो, तुम ही उपलब्धि जीवन की!
तुमसे ही मेरे शब्दों को, शक्ति मिलती है सृजन की!"

....................चेतन रामकिशन "देव".........................

Tuesday, 31 July 2012

♥दर्द(शक्तिपुंज)♥


♥♥♥दर्द(शक्तिपुंज)♥♥♥
दर्द बहुत सहना सीखा है!
आंसू बन बहना सीखा है!
लेकिन इसी दर्द से मैंने,
जिंदादिल रहना सीखा है!

दर्द मिला है जब से दिल को,
तब से हिम्मत बढ़ी हमारी!
और हमने आंसू से सींची,
ये अपने जीवन की क्यारी!

हमने दर्द के इन शब्दों से,
सच को सच कहना सीखा है!
लेकिन इसी दर्द से मैंने,
जिंदादिल रहना सीखा है!

ये सच है एक दौर में,
पीड़ा ने नाकामी दी थी!
मुझे रुलाया था जी भरके,
तूफान और सुनामी दी थी!

फिर भी देखो इसी दर्द से,
खुशबु बन बहना सीखा है!
लेकिन इसी दर्द से मैंने,
जिंदादिल रहना सीखा है!"

" दर्द-जब जीवन मिला है तो दर्द भी मिलना स्वाभाविक ही है! ये सच है कि दर्द की सुनामी की गति अत्यंत तीव्र होती है, किन्तु यदि उस तीव्रता के प्रकाश को शक्तिपुंज की तरह अपने में समाहित कर लिया जाये तो यक़ीनन, दर्द हमे मजबूत करता है! तो आइये दर्द को शक्तिपुंज बनायें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०१.०८.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

♥न जाने कैसे...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥न जाने कैसे...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
रूह को पीड़ा, आंख को आंसू, गम से झोली भर देते हैं!
लोग न जाने किन हाथों से, दिल को ज़ख़्मी कर देते हैं!

जो कंधे पर सर रखकर के, जन्म जन्म की कसमें खाते!
जो हाथों में हाथ डालकर, प्यार भरे नगमे दोहराते!
जो कहते हैं तुमसा कोई, नहीं जमाने में कोई दूजा,
जो आंगन को रोशन करने, साँझ-सवारे दीप जलाते!

यही लोग न जाने कैसे, घर से बेघर कर देते हैं!

दिल को पीड़ा, आंख को आंसू, गम से झोली भर देते हैं!"

.....................चेतन रामकिशन "देव"...........................

♥खामोशी की जुबान..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥खामोशी की जुबान..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खामोशी की लक्ष्मण रेखा, बीच खिंची है हम दोनों के,
लेकिन फिर भी आँखों से ही, एक दूजे की बात हुई!

नाम पढ़ा कई बार उसी का, और उसे देखा पलकों में,
बस उसको ही सोच सोच कर, शाम से लेकर रात हुई!

उनसे मिले बिना जीवन में, रहती थी तन्हाई लेकिन,
उनकी नजदीकी से देखो, खुशियों की बरसात हुई!

खिला खिला है मेरा चेहरा, उसकी चाहत के रंगों से,
लोग समझते मेरे संग में, कौनसी ये करामात हुई!

"देव" मैं उनकी अपनायत को, पाकर मालामाल हुआ हूँ,
वही हमारी दौलत, शोहरत, वही मेरी सौगात हुई!"

......................चेतन रामकिशन "देव"......................

Sunday, 29 July 2012

♥एहसास के लम्हे...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥एहसास के लम्हे...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जब मेरी पलकों की चिलमन, अश्कों से नम हो जाती है!
तब तब मेरे दिल की उलझन, कुछ पल को कम हो जाती है!

मैं और मेरी तन्हाई को, जब भी उसका साथ मिला है,
तब तब देखो रात अमावस, खिल के पूनम हो जाती है!

उम्मीदों के आसमान पर, जब जब पंख पसारे मैंने,
मेरी माँ की दुआ देखिये, पंखों का दम हो जाती है!

मजहब से ऊपर उठकर के, जब भी मुझसे मिला है कोई,
आँखों को अच्छा लगता है, दिल में सरगम हो जाती है!

"देव" न जाने कैसे जीते, लोग जहाँ में पत्थर बनकर,
यहाँ देखिये नरमी से ही, दुनिया हमदम हो जाती है!"

.................चेतन रामकिशन "देव".....................

Saturday, 28 July 2012

♥जीवन पथ..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जीवन पथ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जिनसे दिल को ठेस लगे, कुछ ऐसे मंज़र आते हैं!
आँखों के सब सपने देखो, पल भर में ही खो जाते हैं!

जो दावे करते हैं अक्सर, राहों से कांटे चुनने के,
वही लोग न जाने कैसे, पथ में कंटक बो जाते हैं!

धन दौलत वालों को बेशक, डर से नींद नहीं आती हो,
लेकिन मेहनतकश तो देखो, सड़कों पे भी सो जाते हैं!

ये सच है के अब अपनों में, अपनायत की कमी हुई है,
लेकिन फिर भी गैर देखिए, संग साथ में रो जाते हैं!

"देव" मेरे शब्दों को देखो, मेरे दुःख का अंदाजा है,
जब भी मेरे आंसू बहते, ये भी गुमसुम हो जाते हैं!"

...................चेतन रामकिशन "देव"....................


Friday, 27 July 2012

♥भारत(हमारा घर)..♥


♥♥♥♥♥भारत(हमारा घर)..♥♥♥♥♥
इस भारत को दिशाहीन न होने दो!
इस भारत की इज्ज़त तुम न खोने दो!
आओ देश के हित में काम करें ऐसे,
माँ जननी को सुबक सुबक न रोने दो!

मातृभूमि का जो सम्मान नहीं होगा!
विश्वपटल पर हिंदुस्तान नहीं होगा!

मातृभूमि का तुम अपमान न होने दो!
इस भारत को दिशाहीन न होने दो.....

खंड-खंड तुम भारत को करना छोड़ो!
जात-धर्म के नाम पे तुम लड़ना छोड़ो!
सब आपस में एकजुटता का प्रण लेकर,
तुम भारत के दुश्मन से डरना छोड़ो!

देशप्रेम के भावों का, श्रंगार करो!
माँ जननी की सेवा और सत्कार करो!

माँ जननी का रंग रूप न खोने दो!
इस भारत को दिशाहीन न होने दो.....

इस भारत की मिटटी को प्रणाम करो!
जग में ऊँचा तुम भारत का नाम करो!
अपने मनसूबे पूरे करने के लिए,
इस भारत को "देव" नहीं नीलाम करो!

जन्मभूमि पे फूलों की बौछार करो!
देश के सभी शहीदों का आभार करो!

ध्वज तिरंगे को मैला न होने दो!
इस भारत को दिशाहीन न होने दो!"

"
भारत-जिस धरती पर जन्म लिया हमने, जिस मिट्टी पर अपना जीवन यापन किया हमने, बहुत महान होती है जन्मभूमि, वन्दनीय, पूजनीय और गर्व करने योग्य! तो आइये हमेशा शहीदों को नमन करते हुए, देश का सम्मान करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२८.०७.२०१२

रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!









♥♥♥माँ♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥माँ♥♥♥♥♥♥
ममता का स्पर्श है माँ!
हर बच्चे का हर्ष है माँ
अच्छी बात हमे सिखलाती,
जीवन का आदर्श है माँ!

माँ ईश्वर की अनुपम कृति,,
दयावान स्वरुप!
गर्मी में शीतल वायु है
और सर्दी में धूप!

ममता का स्पर्श है माँ!
हर बच्चे का हर्ष है माँ

माँ शक्ति है, माँ रक्षक है!
माँ बच्चों की संरक्षक है!
सत्य पथों पर हमे चलाए,
माँ ज्ञानी है, माँ शिक्षक है!

माँ के मुख से बच्चे सुनते,
मधुर सुरीला गान!
माँ को देखके आ जाती है,
अधरों पे मुस्कान!

ममता का स्पर्श है माँ!
हर बच्चे का हर्ष है माँ!"

"
अपनी माँ "प्रेमलता" जी को समर्पित पंक्तियाँ!"

चेतन रामकिशन "देव"

Tuesday, 24 July 2012

♥जाने क्यूँ..♥


♥♥♥♥♥जाने क्यूँ..♥♥♥♥♥
जाने क्यूँ लिखना चाहता है!
ये दिल कुछ कहना चाहता है!
जाने क्यूँ ये दर्द समझकर,
आंसू बन बहना चाहता है!

जन्म से इस दिल में न कोई, नफरत के लक्षण होते हैं!
हमी लोग इस दिल में देखो, लालच के अंकुर बोते हैं!

इसीलिए तो किसी के दुख में, ये दिल भी रोना चाहता है!
एक दूजे को समझ के अपना, प्रेम बीज बोना चाहता है!

हम इंसां अपने ही हित में, दिल को पत्थर बना रहे हैं!
भेदभाव के संबोधन से, प्यार के अक्षर भुला रहे हैं!

आज इसी बंधन की पीड़ा,
हम सब से कहना चाहता है!
जाने क्यूँ ये दर्द समझकर,
आंसू बन बहना चाहता है!"

"                            "
चेतन रामकिशन "देव"


Sunday, 22 July 2012

♥आँखों में पानी♥



♥♥♥♥♥♥♥♥आँखों में पानी♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरी आँखों में पानी है और धड़कन भी मंद!
बिना तुम्हारे सखी नहीं है, जीवन में आनंद!

बिना तुम्हारे दिन सूना है, और सूनी है रात!
बिना तुम्हारे शाम अधूरी और दुखी प्रभात!
बिना तुम्हारे शब्द हमारे, लगते हैं बेजान,
बिना तुम्हारे खुशी भी देखो, देती है आघात!

बिना तुम्हारे रचना भूले, हम कविता और छंद!
मेरी आँखों में पानी है और धड़कन भी मंद!"

.................चेतन रामकिशन "देव"...............


Friday, 20 July 2012

♥सत्ताधारी दानव..♥

♥♥♥♥♥♥सत्ताधारी दानव..♥♥♥♥♥♥♥♥
क़र्ज़ में डूबा ग्राम देवता, नौजवान बेकार! 
देश में लाखों भूखे पिंजर, मरने को तैयार!

देश के सत्ताधारी लेकिन, इनके दुख से दूर हुए!
घोटालों में जुटे हुए हैं, अपने मद में चूर हुए!
उनको कोई दुख हो तो, उपचार विदेशों में होता,
और घाव निर्धन के देखो, रिस रिस कर नासूर हुए!

राजनीति का रूप देखिए, जैसे हो व्यापार!
क़र्ज़ में डूबा ग्राम देवता, नौजवान बेकार!

सत्ता की चाभी मिलने पर, भूले सभी चुनावी वादे!
निर्धन को खुशियाँ देने के, छोड़ दिए हैं सभी इरादे!
सत्ता का सुख पाकर देखो, हर नेता पर रंग चढ़ा,
ओढ़ लिए हैं चोरों ने भी, संतों जैसे लाल लबादे!

जो भी मांग उठाए उस पर करते अत्याचार!
क़र्ज़ में डूबा ग्राम देवता, नौजवान बेकार!"

...............चेतन रामकिशन "देव"................

Thursday, 19 July 2012

♥प्यार का नज़ारा..♥


♥♥♥♥♥प्यार का नज़ारा..♥♥♥♥♥♥♥
मेरी आँखों में तेरे प्यार का नज़ारा है!
तेरा ये प्यार सनम मुझको बड़ा प्यारा है!


तेरे ही प्यार से जीवन में खुशहाली आई!
तेरे ही प्यार में होली और दिवाली आई!
मेरी आँखों में तेरा चेहरा बसा है हमदम,
तेरे यादों में निशा, सुबह की लाली आई!


तू मेरे सामने आ जाती है इक पल में ही,
मैंने आवाज दे, जब-जब तुझे पुकारा है...


तू तो हर पल ही मेरे प्यार के एहसास में है !
मेरे वादों, मेरी कसमो, मेरे विश्वास में है !
तेरी यादों से महकता है, मेरा घर हमदम,
तू मेरे प्यार के सतरंगी से, आकाश में है !


तू मेरे दुख का हमसफ़र, मेरा सहारा है!
मेरी आँखों में तेरे प्यार का नज़ारा है...


तेरे दीदार से, हर पल मेरा खिल जाता है!
खुदा से जो भी मैं मांगूं वाही मिल जाता है 
तेरे यौवन से देखो, चांदनी भी जलने लगी,
क्यूंकि ये चाँद तेरे आने पे शर्माता है !


"देव" की ज़िन्दगी को, तुमने ही संवारा है!
मेरी आँखों में तेरे प्यार का नज़ारा है!"


"
प्यार- सचुमच रंगत भरने वाला एहसास, जीवन को आत्मविश्वास से जोड़कर अग्रसर होने की शक्ति जहाँ प्यार देता है तो वहीँ, दुख के पलों में संवेदना देने का कार्य भी प्यार करने वालों को एक दूसरे से परस्पर प्राप्त होता है, तो आइये प्यार के इन सुखद और अनमोल पलों का एहसास करें!"


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२०.०७.२०१२

♥प्यार की खुशबू..♥

♥♥♥♥♥प्यार की खुशबू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्यार की रोली से, दुनियां को हम सजाते चलें 
ज़मी सजाते चलें, आसमा सजाते चलें

जिंदगी तो नहीं काफ़ी, मोहब्बतों के लिए
कीमती उम्र को, लड़ने में न गंवाते चलें!

प्रेम की खुशबू से महका दें हम जहां सारा, 
दुखी दिलों में खुशी की कली खिलाते चलें!

अपनी सच्चाई से रौशन, करें जमाने को,
ईमां के पथ पे वफ़ा के दिए जलाते चलें!

ख़ुलूस पैदा करें, अपनी हम दुआओं में,
प्यार की बोली से नफरत को हम मिटाते चलें!"

.............चेतन रामकिशन "देव"...............