Sunday, 19 January 2014

♥♥माँ का आँचल ...♥♥

♥♥♥♥♥माँ का आँचल ...♥♥♥♥♥
अपने हाथों से मेरे केश संवारे माँ ने!
मेरे बिगड़े हुए सब काम सुधारे माँ ने!
माँ के हाथों की छुअन में तो एक जादू है,
मेरे दामन में जड़े देखो सितारे माँ ने!  

माँ के आँचल में मेरी, रात, सहर होती है!
माँ को हर लम्हा मेरी कितनी फिकर होती है!

मेरी खुशियों को किये दुख में गुजारे माँ ने!
अपने हाथों से मेरे केश संवारे माँ ने.....

माँ मुझे प्यार बहुत, मुझको दुआ देती है!
माँ घुटन में भी मुझे देखो हवा देती है!
मेरे दुख दर्द में ममता का सहारा देकर,
मेरे हर मर्ज़ में माँ मुझको दवा देती है!

दर्द के साये मेरे सर से उतारे माँ ने!
अपने हाथों से मेरे केश संवारे माँ ने....

सारी दुनिया में नहीं, माँ सा है किरदार कोई!
नहीं देता है यहाँ, माँ की तरह की प्यार कोई!
"देव" दुनिया में अपनी माँ का दिल दुखाये जो,
उससे बढ़कर नहीं होता है, गुनहगार कोई!

जीतने को मुझे हर दांव हैं हारे माँ ने! 
अपने हाथों से मेरे केश संवारे माँ ने!"

......चेतन रामकिशन "देव"…....
दिनांक-१९.०१.२०१४

(अपनी माँ कमला देवी एवं माँ प्रेमलता जी को समर्पित)

Friday, 17 January 2014

♥♥बरसात का शोर...♥♥

♥♥♥♥♥बरसात का शोर...♥♥♥♥♥♥♥
प्यार तेरा मुझे बूंदो में नजर आता है!
मुझे बरसात का ये शोर बहुत भाता है!

जब भी पलकों में अपनी बूंद छुपाई मैंने,
तेरी जुल्फ़ों का बदन देखो भीग जाता है!

तेरे एहसास में डूबी हुयी बारिश पाकर,
मेरा हर दिन यहाँ अच्छे से गुजर जाता है!

जब झरोखे से गिरी बूंद तुझे छूती हैं,
तेरे चेहरे का कमल और निखर जाता है!

मैं हथेली पे तेरी जब भी रखूं बूंदों को,
गौर से देख मेरा नाम उभर आता है!

भीगी जुल्फ़ों में मेरे घर में जो देखूं तुमको,
चाँद आंगन में मेरे घर के उतर आता है!

"देव" चेहरे पे मेरे ताजगी बिखर जाये,
जब भी बरसात का लफ्ज़ों में जिकर आता है! "

.............चेतन रामकिशन "देव"…...........
दिनांक-१७.०१.२०१४

Thursday, 16 January 2014

♥♥♥दोस्ती...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥दोस्ती...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दोस्ती प्यार के रंगों की एक निशानी है! 
नही एहसान नहीं कोई बदगुमानी है!

कोई सौदा नहीं होता है दोस्ताने में,
दोस्ती में कोई धोखा न बेईमानी है!

दोस्त सच्चे बड़ी मुश्किल से मिला करते हैं,
दोस्ती दुनिया में कुदरत की मेहरबानी है!

उसको मिल जाये यहाँ धरती पे खुदा देखो, 
दोस्त की जिसने भी दुनिया में कद्र जानी है!

जान कुर्बान तलक दोस्तों पे कर दे जो,
दोस्ती में वही जज्बा है, वो रवानी है!

फूल सरसों के खिलें दोस्तों के चेहरे पर,
दोस्ती पाक है, अम्बर सी आसमानी है!

"देव" किस्मत ने मुझे नेक दोस्त बख्शे हैं,
दोस्ती में ही मुझे जिंदगी बितानी है!"

............चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-१७.०१.२०१४

Wednesday, 15 January 2014

♥♥♥दीदार का हक़ ♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥दीदार का हक़ ♥♥♥♥♥♥♥
दर्द मासूम है धीरे से इसे, सहला दो!
मेरे कुछ गीत सुनाकर के इसे बहला दो!

दर्द के चेहरे पे देखो है जमी धूल बहुत,
अपने एहसास की बूंदों से इसे नहला दो!

नफरतों के लिए न कोई खुले दरवाजा,
प्यार तुम चारों तरफ, इतना यहाँ फैला दो!

होने को तो यहाँ देखो हैं बहुत ही अपने,
अपने दीदार का हक़ मुझको मगर पहला दो!

जब जरुरत हो तुम्हें प्यार की हवाओं की,
अपनी दिल को मेरी बस्ती में जरा टहला दो!

ये तेरे ख्वाब मुझे रात भर हँसायेंगे,
अपना आँचल मेरी आँखों पे अगर फैला दो!

"देव" आ जायेगा पल भर में सामने तेरे,
तुम हवाओं से भी मिलने की खबर कहला दो! "

...........चेतन रामकिशन "देव"…...........
दिनांक-१५.०१.२०१४

Tuesday, 14 January 2014

♥♥...बड़ी चुप चुप ♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥...बड़ी चुप चुप ♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दिन भी खामोश था, अब रात बड़ी चुप चुप है!
आईने से भी मुलाकात बड़ी चुप चुप है!

मेरे कानों में जो घुंघरू की तरह बजती थी,
आज वो देखिये बरसात बड़ी चुप चुप है!

आदमी माने नहीं लाख भी समझाने पर,
तब से इंसानियत की जात बड़ी चुप चुप है!

जीत जाता तो मेरा जश्न मनाती दुनिया,
हो गया तनहा मैं ये, मात बड़ी चुप चुप है!

बिन दहेजों के थमी रहती यहाँ पर डोली,
घर में मुफ़लिस के, ये बारात बड़ी चुप चुप है!

नहीं मालूम हमें लेने कब चली आये,
मौत के देखो ये, सौगात बड़ी चुप चुप है!

"देव" आँखों में मेरी देख के समझ जाना,
प्यार की राह में हर बात बड़ी चुप चुप है!"

...........चेतन रामकिशन "देव"…........
दिनांक-१४.०१.२०१४

Monday, 13 January 2014

♥♥दर्द की राह...♥♥

♥♥♥♥♥दर्द की राह...♥♥♥♥♥
दर्द की राह पे जब भी सहे छाले मैंने!
अपने आंसू बड़ी हिम्मत से संभाले मैंने!

नहीं लिख सकता ग़ज़ल, गीत न कहानी मैं,
सिर्फ स्याही से किये शब्द ये काले मैंने! 

उसने ही मेरी चाहतों को बेअसर बोला,
रूह तक जिसको यहाँ की थी हवाले मैंने,

सामने देखो नयी कोंपलें निकल आयीं,
तेरे एहसास जो ये ओस में डाले मैंने!
  
भर गया खुशबु से आंगन का हर कोई कोना,
फूल जो सूखे, किताबों से निकाले मैंने!

मेरी तन्हाई में ये मुझसे बात कर लेंगे,
इसीलिए रहने दिये घर में ये जाले मैंने!

"देव" दुश्मन ने कमी कोई भी नहीं की पर,
अपनी हिम्मत से यहाँ खतरे ये टाले मैंने!"

......चेतन रामकिशन "देव"…....
दिनांक-१३.०१.२०१४

Sunday, 12 January 2014

♥♥तुम पराये हो...♥♥

♥♥♥♥♥तुम पराये हो...♥♥♥♥♥
हाँ सही है के तुम पराये हो!
पर मेरे दिल में तुम समाये हो!

अब तो उस ख़त को मुझको दे भी दो,
जिसको अरसे से तुम छुपाये हो!

है वहम मेरा या हक़ीक़त है,
क्या मुझे दिल में तुम वसाये हो!

दूर करके मैं तुम्हें जी न सकूँ,
मेरे इतने करीब आये हो!

देखकर चाँद तुमको लगता ये,
जैसे अम्बर में मुंह छुपाये हो!

घर का दरवाजा बंद करके तुम,
मेरी ग़ज़लों को गुनगुनाये हो!

"देव" अनपढ़ मैं कुछ नहीं जानूं,
प्यार तुम ही मुझे सिखाये हो! "

......चेतन रामकिशन "देव"…....
दिनांक-१२.०१.२०१४

Saturday, 11 January 2014

♥♥रिश्तों की बुनियाद...♥♥

♥♥♥♥♥♥रिश्तों की बुनियाद...♥♥♥♥♥♥♥♥
रूह के नूर से रिश्तों को जो निभाता है!
वो बिछड़ के भी हमें याद बहुत आता है!

नहीं कोहरा न उसे रात ये डिगा पाये, 
जिसे अँधेरे में जलने का हुनर आता है!

हाथ पे हाथ के रखने से न मिले मंजिल,
वही जीते जो यहाँ खुद को आजमाता है!

उसको आकाश भी रखता है अपने आँचल में,
अपनी उल्फत से जो दुनिया को जगमगाता है!

जिसका दिल टूट गया हो कभी मोहब्बत में,
उसको दुनिया में नहीं कुछ भी यहाँ भाता है!

उसे मालूम है रोटी की तड़प दुनिया में,
किसी भूखे के लिए जिसको तरस आता है! 

"देव" उस शख्स को हमदर्द नहीं कहता मैं,
मेरे ज़ख्मों पे नमक, जो भी गर लगाता है!"

............चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-११.०१.२०१४

Friday, 10 January 2014

♥♥फूल बनकर तेरे...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥फूल बनकर तेरे...♥♥♥♥♥♥♥♥
फूल बनकर तेरे आंगन में खिला करता हूँ!
दीप बनकर तेरे कमरे में जला करता हूँ!
मुझको पहचान जरा हूँ मैं वही तो हमदम,
जो तुझे रात को ख्वाबों में मिला करता हूँ!

तो अगर रोये तो मैं भी उदास रहता हूँ!
तेरे साये की तरह तेरे पास रहता हूँ!
धूप में भी मैं तेरे साथ साथ तपकर के,
रात में चांदनी जैसा लिबास रहता हूँ! 

बनके पर्दा तेरी खिड़की का, हिला करता हूँ!
फूल बनकर तेरे आंगन में खिला करता हूँ....

मैं तेरे गीत के एहसास की धुनों में हूँ!
कभी खुशियां कभी थोड़ी सी अनबनों में हूँ!
बनूँ तन्हाई में तेरी मैं, घडी की टिक टिक,
कभी शामिल तेरी जुल्फों की उलझनों में हूँ!

बनके परछाईं तेरे साथ चला करता हूँ!
फूल बनकर तेरे आंगन में खिला करता हूँ....

मैं तेरे पाओं में पायल की तरह बजता हूँ!
मैं तेरे हाथ में कंगन की तरह सजता हूँ!
"देव" आँखों में तेरी बनके मैं काजल रहता,
तेरी ऊँगली में अंगूठी की तरह सजता हूँ!

अपने चेहरे से तेरी खुशबु मला करता हूँ!
फूल बनकर तेरे आंगन में खिला करता हूँ!

............चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-१०.०१.२०१४

Thursday, 9 January 2014

♥♥♥कुंदन..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥कुंदन..♥♥♥♥♥♥♥
आंच में तपकर कुंदन बनना!
यहाँ सुगन्धित चंदन बनना!
लोग करें जो तुम्हे विभूषित,
तुम सबका अभिनंदन बनना!

लक्ष्य पे अपने निश्चय करना!
सच्चाई की तुम जय करना!
सफ़र भले ही लम्बा हो पर,
धीरे धीरे तुम तय करना!

पुलकित करना हरियाली को,
तुम फूलों के कंगन बनना!
लोग करें जो तुम्हे विभूषित,
तुम सबका अभिनंदन बनना।।

आसमान के तारों जैसे!
जल की मधुर फुहारों जैसे!
तुम लोगों को ख़ुशी बांटना,
बनकर हसीं बहारों जैसे!

घायल के घावों को भरकर,
मानवता का वंदन बनना!
लोग करें जो तुम्हे विभूषित,
तुम सबका अभिनंदन बनना।।

किसी के दिल पे ठेस लगे न!
मन में हिंसा द्वेष जगे न!
"देव" तुम्हारे कोमल दिल में,
कोई भी आवेश जगे न!

नहीं देखना बस धनिकों को,
निर्धन का भी वंदन बनना!
लोग करें जो तुम्हे विभूषित,
तुम सबका अभिनंदन बनना।।

......चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-०९.०१.२०१४

Tuesday, 7 January 2014

♥♥♥तेरे ख़त...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥तेरे ख़त...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आंच में गम की तेरे ख़त को जलाने निकला !
अपने एहसास को मिट्टी में मिलाने निकला!

तेरी उम्मीद में जागीं जो रात भर तनहा,
अपनी उन आँखों को, कुछ देर सुलाने  निकला!

फूल फिर से न कोई, दिल को मेरी छलनी करे,
अपने दामन में यहाँ, ख़ार खिलाने निकला! 

दर्द के गहरे अँधेरे से दूर होने को,
चाँद की रोशनी मैं खुद को दिलाने निकला! 

बिना बरसात के सूखा है, जिंदगानी में,
मैं इसी वास्ते आँखों को रुलाने निकला!

तेरी नादानी थी या जानकर किया तूने,
तेरे हर जुर्म को मैं हँसके भुलाने निकला! 

"देव" एक रोज यहाँ फिर नयी सुबह होगी,
अपने दिल को ये भरोसा मैं दिलाने निकला!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…..........
दिनांक-०७.०१.२०१४

Monday, 6 January 2014

♥♥मशीनो का आदमी...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मशीनो का आदमी...♥♥♥♥♥♥♥♥
पीड़ा से मन आनंदित है, अश्रु से श्रंगार हो रहा!
भावनाओं की फसल काटकर, शूलों का सत्कार हो रहा!
प्रेम की किरणें लुप्त हो रहीं, अब घृणा से मन ग्रसित है,
मानवता की देह पे देखो, अब घातक प्रहार हो रहा!

मिन्नत, करुणा और निवेदन, की कोई परवाह नहीं है!
सड़क पे कोई मरता लेकिन, किसी के दिल में आह नहीं है!
शीतकाल के हिम में जमकर, कोई निर्धन मर जाता है,
पर धनिकों के पास में देखो, अनुभूति की दाह नहीं है!

आज मशीनो की दुनिया में, पत्थर दिल संसार हो रहा!
पीड़ा से मन आनंदित है, अश्रु से श्रंगार हो रहा.....

आज आदमी अरब से ऊपर, लेकिन इंसां लुप्त हो गए!
भले पड़ोसी चीखे रोये, हम निद्रा में सुप्त हो गए!
आज वफ़ा और अपनायत के, भाव जमीं में गड़े हुए हैं,
हम रुपयों की चकाचोंध के, अंधकार में गुप्त हो गए!

बेदर्दी में आज आदमी, पत्थर दिल किरदार हो रहा!
पीड़ा से मन आनंदित है, अश्रु से श्रंगार हो रहा!

प्रेम ग्रन्थ में प्रेम नहीं है, बस काले अक्षर दिखते हैं!
नकली सूरत मुंह पर जड़कर, लोग यहाँ सुन्दर दिखते हैं!
"देव" यहाँ कहना आसां है, लेकिन करना बड़ा ही मुश्किल,
कलमकार भी छोटे दिल से, बड़ी बड़ी बातें लिखते हैं!

आज आदमी का दुनिया में, दयाहीन किरदार हो रहा!
पीड़ा से मन आनंदित है, अश्रु से श्रंगार हो रहा!"

"
आज मशीनों की दुनिया में, इंसान लुप्त हो रहे हैं, बेशक आदमियों की भीड़ बढाकर हमने कीर्तिमान स्थापित किये हों, बेशक हमने बड़ी बड़ी इमारतें बनाकर गगन छूने का प्रयास कर लिया हो, भले ही हमने पद सँभालने के बाद बहुत बहुत बड़े व्याख्यान दे लिए हों, पर अपना दिल ही बड़ा न कर पाये, इंसान ही न बन पाये तो ये ऊंचाइयां किस काम की, तो आइये चिंतन करें और इंसान बनने का प्रयास करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०७.०१.२०१४

"
सर्वाधिकार सुरक्षित, मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित "

♥♥बंदिशे...♥♥

♥♥♥♥♥बंदिशे...♥♥♥♥♥♥
प्यार पे बंदिशे लगाने को!
लोग कहते हैं ज़हर खाने को!

चाँद भी छुप गया है अम्बर में,
नहीं तारे हैं जगमगाने को!

मेरे छप्पर से रिस रहा पानी,
न जगह अब है सर छुपाने को!

गम को गीतों में कर लिया शामिल,
दर्द बाकी है गुनगुनाने को!

मान जाओ के अब न रूठे रहो,
फूल लाया हूँ मैं मनाने को!

दर्द से दिल झुलस रहा लेकिन,
नकली चेहरा है मुस्कुराने को!

मर गया मैं दफ़न हुयी चाहत,
एक सबक मिल गया ज़माने को!

तुमसे विनती है दिल नहीं तोड़ो,
कम नहीं लोग दिल दुखाने को!

"देव" तुमसे नहीं गिला शिक़वा,
है जनम मेरा दर्द पाने को!"

.....चेतन रामकिशन "देव"…...
दिनांक-०६.०१.२०१४

Sunday, 5 January 2014

♥♥कर्ज़दार...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥कर्ज़दार...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कभी नेता कभी अफसर का वो शिकार बना!
कभी वो सेठ के रुपयों का कर्ज़दार बना!
नहीं दो वक़्त की रोटी भी उसके हाथों में,
कभी बीमार तो मुफ़लिस कभी लाचार बना!

सर्द रातों में न उस पर रजाई होती है!
उसके ज़ख्मों की यहाँ कब दवाई होती है!

ठण्ड से मर गया तो वो ही ईश्तहार बना!
कभी नेता कभी अफसर का वो शिकार बना....

नहीं आटा न उसे दाल मयस्सर होती!
उसके सर को नहीं तिरपाल मयस्सर होती!
"देव" एक पल के लिए चैन सुकूं पाने को,
उसको चादर न कोई शाल मयस्सर होती!

उसकी संतान कुपोषित यहाँ रह जाती है!
जिंदगी उसकी यहाँ दर्द में बह जाती है!

वो बिना ज़ुर्म के ही, देखो गुनहगार बना!
कभी नेता कभी अफसर का वो शिकार बना!"

..............चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-०५.०१.२०१४

Saturday, 4 January 2014

♥♥आईना देख के...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आईना देख के...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कभी रोकर कभी हंसकर के, सफ़र काट लिया!
आईना देख के दुख दर्द, अपना बाँट लिया!

जिसने ज़ख्मों पे मेरे, देखो लगाया मरहम,
भीड़ से उसको अलग, मैंने यहाँ छाँट लिया!

उम्र भर जिसने उसे छाँव, यहाँ बख्शी थी,
उस लकड़हारे ने उस पेड़ को भी काट लिया!

सर छुपाने के लिए एक जरा, छप्पर भी,
इस बुरे वक़्त की दीमक ने यहाँ चाट लिया!

मेरे एहसास ने जब चाँद को, छूना चाहा,
कभी समझाया, कभी मैंने उसे डाँट लिया!

जिसने पाला था उसे, अपने खूँ पसीने से,
उसी बेटे ने गला उसका, मगर काट लिया!

"देव" कुदरत ने यहाँ आदमी, जो भेजा था,
उसे हिन्दू कभी मुस्लिम ने, यहाँ बाँट लिया!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…..........
दिनांक-०४.०१.२०१४

Friday, 3 January 2014

♥♥♥तुम्हारा ख़त...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥तुम्हारा ख़त...♥♥♥♥♥♥♥
कभी रोता है मेरा दिल कभी मुस्काया है!
गुमशुदा दिल की तलाशी में तुझे पाया है!

इसी उम्मीद में के, तेरे वापसी होगी,
ख़त किताबों में तेरा, आज तक छुपाया है!

तेरी तस्वीर से मैं रुबरु हुआ जब भी,
चाँद से बढ़के तेरा चेहरा, नजर आया है!

लोग कहते हैं मुझे तुमसे प्यार है क्यूंकि,
मेरी आँखों में तेरा अक्स, उभर आया है!

तेरे एहसास के घुंघरू मेरी बोली में हैं,
तेरे छूने से मेरा रंग, निखर आया है!

तू ही शामिल मेरी पूजा में, इबादत में तू,
मेरे आँचल में वफ़ा बनके, तू समाया है!

"देव" होने को तो दुनिया है खूबसूरत ये,
हाँ मगर दिल को मेरे, तू ही यहाँ भाया है!" 

...........चेतन रामकिशन "देव"….......
दिनांक-०३.०१.२०१४

Thursday, 2 January 2014

♥♥तेरी पाकीज़गी...♥♥

♥♥♥♥♥तेरी पाकीज़गी...♥♥♥♥♥♥♥
तू मेरे साथ है तो ये जहान मेरा है!
ये जमीं मेरी है ये, आसमान मेरा है!

जब से चाहत ने तेरी, सोच निखारी मेरी,
तब से गीता भी मेरी और कुरान मेरा है!

बचपने में जो कभी तेरे लिया गोदा था,
आज भी पेड़ पे दिल का निशान मेरा है!

भले तुझको मेरे घर आये एक अरसा हुआ,
आज भी तुझसे खिला ये, मकान मेरा है!

तेरी पाकीज़ा मोहब्बत का असर है हमदम,
तुझको पाकर बड़ा पावन ईमान मेरा है!

जिंदगी है मेरी आसान तेरे होने से,
बिन तेरे हर घड़ी बस, इम्तिहान मेरा है!

"देव" तू मेरी चुभन, मेरा दर्द समझेगा,
उस खुदा की तरह तू, इतमिनान मेरा है!"

............चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-०२.०१.२०१४

Sunday, 29 December 2013

♥♥प्यार की बूंद...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥प्यार की बूंद...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपने आंसू मुझे दे दो, यहाँ पीने के लिए!
बूंद एक प्यार की दे दो, मुझे जीने के लिए!

उम्र भर झेली बहुत, मैंने ग़मों की लहरें,
जरा बन जाओ किनारा के, सफ़ीने के लिए!

जिंदगी बिन तेरे ये मेरी है पतझड़ जैसी,
तुम्ही हो बन सजावट के, करीने के लिए!

तेरे छूने से मेरे, ज़ख्म ये भर जायेंगे,
नहीं फिर होगी जरुरत, इन्हें सीने के लिए!

धूप की आंच में भी, सोख ले जो लहराकर,
मैं वो बन जाऊं हवा, तेरे पसीने के लिए!

बिना तेरे यहाँ पल भर भी न गुजारा हो,
दूर न जाना कभी, साल, महीने के लिए!

"देव" हर ओर मुझे प्यार नज़र आये बस,
ऐसा माहौल बना दो, जरा जीने के लिए!"

..........चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-२९.१२.२०१३

Saturday, 28 December 2013

♥♥गांव का देवता...♥♥

♥♥♥♥♥♥गांव का देवता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खेत खलियान में बोकर के अन्न के दाने,
गांव का देवता दुनिया का, उदर भरता है!

इतना करके भी उसे, हक़ नहीं मिलता वाजिब,
चंद रुपयों में ही वो, अपनी गुजर करता है!

उसकी आँखों में खिंची, लाल लकीरें देखो,
दर्द का अपनी निगाहों में, समर भरता है!

उसपे पड़ती हैं यहाँ, लाठियां सरकारों की,
अपने हक़ के लिए, वो जब भी जिकर करता है!

न चुके उससे अगर सूद, असल कुछ भी तो,
उसकी फसलों पे सेठ, तिरछी नजर करता है!

उसको राहों में यहाँ, सब ही बिछायें कांटे,
पैदा सबके लिए जो देखो, शज़र करता है!

"देव" हक़दार है ये, देवता इबादत का,
चोट खाकर भी सदा, सबकी फिकर करता है!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…...........
दिनांक-२८.१२.२०१३

Friday, 27 December 2013

♥♥जलते घोंसले...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥जलते घोंसले...♥♥♥♥♥♥♥♥
दर्द होता है यहाँ, घाव जो छिल जाते हैं!
ख्वाब जब सारे यहाँ ख़ाक में मिल जाते हैं!

घर उजड़ने का दर्द, पूछो उन परिंदों से,
आग में जिनके यहाँ घोंसले जल जाते हैं!

ए अमीरों जरा उनकी तड़प को जानो तुम,
जिन गरीबों के बदन, शीत में गल जाते हैं!

आज अपनों पे यकीं, मुझको जरा सा भी नहीं,
सब बुरे वक़्त में, पल भर में बदल जाते हैं!

रेशमी खोल में वो देखो कोयला निकला,
झूठ के लेप से अब रूप बदल जाते हैं!

जिंदगी उनकी ग़मों के, लिबास में होती,
जिनके अरमां यहाँ, शीशे से पिघल जाते हैं!

"देव" मुझको नहीं आता, वो तरीका कैसे,
लोग औरों को गिराकर के, संभल जाते हैं!"

...........चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-२७.१२.२०१३

♥♥महकमे वाले...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥महकमे वाले...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
महकमे वाले बड़ा नेक काम करने लगे!
गीली लकड़ी को अलावों के नाम करने लगे!

मेज के नीचे से रुपयों की हुयी फरमाइश,
झूठ को तब से वो झुककर सलाम करने लगे!

जब से गुंडों को हमने, अपना बनाया नेता,
तब से वो देखो, वतन तक नीलाम करने लगे!

जिनको माँ बाप ने, भेजी थी रकम पढ़ने,
आज वो लड़के शराबों से, शाम करने लगे!

एक बापू था हमें जिसने, अमन सिखलाया,
मारके गांधी को हम, कत्लेआम करने लगे!

आज टीवी पे खुलेआम, दिखे नंगापन,
हम सभी खुद को, हवस का गुलाम करने लगे! 

"देव" उल्फत के लिए, जिनसे मिन्नतें की थीं,
लोग वो प्यार का किस्सा, तमाम करने लगे!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…...........
दिनांक-२७.१२.२०१३

Thursday, 26 December 2013

♥♥हवाओं की घुटन ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥हवाओं की घुटन ...♥♥♥♥♥♥♥♥
मखमली धूप से भी, अब तो तपन लगती है!
है हवा खूब मगर, फिर भी घुटन लगती है!

मौत आई भी नहीं, फिर भी इतना ख़ामोशी,
जिंदगी दर्द के बंजर में, दफ़न लगती है!

जो कहे करते थे, नफरत का हश्र है खूनी,
प्यार की बात उन्हें, आज वजन लगती है!

वो तमाशाई हैं, जो दर्द न समझ पाये,
आज इंसानियत मिटटी में, दफ़न लगती है!

किसकी फितरत यहाँ कैसी है, समझना मुश्किल,
बर्फ के हाथ से भी, अब तो जलन लगती है!

मेरी तक़लीफ़ को सुनते हैं, भले कांटे हैं,
मिला जब फूल से तो, मुझको छिलन लगती है!

"देव" तुमसे है गुजारिश, न शिफा  करना तुम,
इन दवाओं से तो, ज़ख्मों में दुखन लगती है!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…........
दिनांक-२६.१२.२०१३

Tuesday, 24 December 2013

♥♥♥वसीयत...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥वसीयत...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अपना दिल बेच दिया, तुमने ये नीयत बेची!
चंद पैसों के लिए, तुमने हक़ीक़त बेची!

अपनी पहचान, यहाँ अपने दबदबे के लिए,
प्यार की तुमने यहाँ देखो, वसीयत बेची!

खूबसूरत ये बदन का लिबास बेच दिया,
तुमने ईमान यहाँ और ये सीरत बेची!

एक ऊँची यहाँ पत्थर की हवेली के लिए,
तुमने पुरखों की वसाई, यहाँ जीनत* बेची!

दिल नहीं भरता यहाँ, सच की अठन्नी पाकर,
अपने हाथों से यहाँ, अपनी गनीमत* बेची!

देह पे रंग के भसम*, खुद को बड़ा मान लिया,
ऐसे लोगों ने ही पर, अपनी शरीअत* बेची!

"देव" दुनिया में नहीं, ऐसे बशर बेहतर हों,
जिसने माँ बाप के लफ्जों के, नसीहत बेची!"

..............चेतन रामकिशन "देव"…..........
दिनांक-२४.१२.२०१३

गनीमत*-काफी, शरीअत*-ईश्वरीय मार्ग, जीनत*-शोभा, भसम*-भस्म 

Monday, 23 December 2013

♥♥गमगीनी ♥♥

♥♥♥♥♥♥गमगीनी ♥♥♥♥♥♥♥♥
बढ़ी महंगाई ने चूल्हे की, तपन छीनी है!
मुफलिसों के यहाँ न दाल है, न चीनी है!

जिसने वादे थे किये, हर घडी के हमदर्दी के,
उसी नेता के यहाँ जश्न है, रंगीनी है!

सोचके रोज ही मुफलिस यहाँ चुप हो जाये,
उसे मर मर के यहाँ, जिंदगी ये जीनी है!

बेचना चाहे भी गर, तो न खरीदे कोई,
सुरा अश्कों को उसे, जिंदगी भर पीनी है!

बड़ा मासूम वो दुनिया की चाल क्या जाने,
उसे तो आज भी मिट्टी की महक भीनी है!

नहीं जीते जी, नहीं मरके, कोई भी उसका,
अपने हाथों से उसे, अपनी कबर* सीनी है!

"देव" मुफलिस के यहाँ, कैसे तरक्की लिखूं,
उसके जीवन में तो बस, हर घड़ी गमगीनी है!"

..............चेतन रामकिशन "देव"…............ 
दिनांक-२३.१२.२०१३





Sunday, 22 December 2013

♥♥आंगन का चाँद...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥आंगन का चाँद...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
जिंदगानी को चलो हंसके, गुजारा जाये!
चाँद को आओ के आंगन में, उतारा जाये! 

कौन है जिसकी जिंदगी में नहीं दर्दो-गम,
अपनी किस्मत को चलो, खुद ही संवारा जाये!

जितनी शिद्दत से हमने, चेहरे को दमकाया है,
उतनी शिद्दत से चलो, दिल को निखारा जाये!

न ही हिन्दू, नहीं मुस्लिम, न ईसाई, न सिख,
आदमी बनके चलो, सबको पुकारा जाये!

युद्ध में जो भी मिले, जीत या फिर नाकामी,
जंग से पहले नहीं, होंसला हारा जाये!

नफरतों से नहीं मिलता है, ज़माने में कुछ,
अपनी लफ्जों से मोहब्बत को, उभारा जाये!

"देव" वो जिनकी झलक, रूह में समाई है,
प्यार में उनके चलो, दिल को भी हारा जाये!" 

...........चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-२२.१२.२०१३

Saturday, 21 December 2013

♥ टूटा पत्ता...♥

♥♥♥♥♥♥♥♥ टूटा पत्ता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
एक करीबी से मेरा, आज यूँ रिश्ता टूटा!
पेड़ की शाख़ से जैसे कोई पत्ता टूटा!

जिसको चाहा था यहाँ मैंने रूह से अपनी,
उसी इंसां की नजर में है, मेरा दिल झूठा!

सोंधी मिट्टी से उसे, फिर से शक्ल देकर भी,
मेरी किस्मत का घड़ा, आज तलक है फूटा!

आज मैंने भी रखे, अपने कदम मंजिल पर,
जिंदगी का ये सफ़र, मुझसे जो पीछे छूटा!

कोशिशें करके भी न, सी सका ज़ख्म अपने,
आज अपना ही हुनर देखो है, मुझसे रूठा!

मिन्नतें कितनी करो, कोई समझता ही नहीं,
चाहें मुफलिस का यहाँ, भूख से जीवन छूटा!

"देव" ये प्यार अगर, जुर्म है तो बतलाओ,
 कौन है वो जो बिना प्यार के खाली छूटा!"

...........चेतन रामकिशन "देव"….........
दिनांक-२२.१२.२०१३

Friday, 20 December 2013

♥♥♥रहें न रहें♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥रहें न रहें♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरे अल्फाज़ सजा लो, के हम रहें न रहें!
मुझे सीने से लगा लो, के हम रहें न रहें!

याद करना तो मुझे तुम न बहाना आंसू,
मेरे जज़्बात चुपाने को कहें या न कहें!

तुम्हें अनदेखा करूँ तो न गिला करना तुम,
मैं हूँ पत्थर मेरे आंसू ये बहें या न बहें!

जिनके माँ बाप ने मुश्किल से जिन्हे पाला है,
उनके बच्चे भला मुश्किल को सहें या न सहें!

झोपड़ी पल में गरीबों की, गिरा दी जायें,
और ये कब्जे अमीरों के, ढहें या न ढहें!

अपनी यादों को मेरी, ग़ज़लों से अलग न करो,
मेरे ये लफ्ज़ बिना तेरे, रहें या न रहें!

"देव" हम खानाबदोशों का यही जीवन है,
हैं जहाँ आज वहाँ कल में, रहें या न रहें!"
   
........चेतन रामकिशन "देव"…......
दिनांक-२०.१२.२०१३

Wednesday, 18 December 2013

♥♥♥आदमी...♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आदमी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हार को जीत में करने का हुनर पैदा कर!
मुश्किलों से जो लड़े ऐसा जिगर पैदा कर!

आदमी है तो तेरा प्यार आदमी से बढे,
अपने एहसास में तू ऐसा असर पैदा कर!

झील आंसू की जो मिलकर विलीन हो जाये,
अपने ज़ज्बात में तू ऐसा समर पैदा कर!

गुनगुनाये जो हर एक शख्स तेरे लफ्जों को,  
अपनी ग़ज़लों में जरा ऐसी बहर पैदा कर!

चैन छीना हो जिसने, मुल्क का अमन लुटा,
ऐसे दुश्मन के लिए खूँ में ज़हर पैदा कर!

जहाँ बेटी को मिले प्यार मायके जैसा,
अपने बर्ताब से वो प्यारा सा घर पैदा कर!

"देव" पत्थर भी बना तो भी पूजा जायेगा,
तू मगर आदमी बनने की, फ़िक़र पैदा कर!"

............चेतन रामकिशन "देव"…...........
दिनांक-१९.१२.२०१३

Friday, 13 December 2013

♥♥होंसले का दीया..♥♥

♥♥♥♥होंसले का दीया..♥♥♥♥
जिंदगानी में गम समाया है!
दिल मगर फिर भी मुस्कुराया है!

जब भी घेरा मुझे अँधेरे ने,
होंसले का दीया जलाया है!

उसको बख्शी हैं बस दुआ मैंने,
दिल मेरा जिसने भी दुखाया है!

जीतने का जूनून है दिल को,
मैंने किस्मत को आजमाया है!

दिल मेरा दमके मोतियों की तरह, 
मैंने दुःख में इसे तपाया है!

न पड़ेगी नजर ज़माने की,
तुझको पलकों में जो छुपाया है!

"देव" दिल को सुकून है जब से,
दोस्त बिछड़ा जो लौट आया है!"

....चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-१३.१२.२०१३

Wednesday, 11 December 2013

♥♥चांदनी रात..♥♥

♥♥♥♥चांदनी रात..♥♥♥♥♥
चांदनी रात का असर होगा!
कभी रोशन हमारा घर होगा! 

साथ तेरा जो मुझको मिल जाये,
फिर किसी बात का न डर होगा!

कोई मुश्किल न रास्ता रोके,
माँ के सजदे में जो ये सर होगा!

अपनी मंजिल को ढूँढ लेंगे हम,
अपने हाथों में जो हुनर होगा!

रूह में जब तुम वसा लूंगा,
तेरा दीदार हर पहर होगा!

कैसे अधरों से फूल बरसेंगे,
अपने लफ्जों में जब जहर होगा!

"देव" जिस रोज होगा अपना मिलन,
महका महका सा ये शहर होगा!"

....चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-११.१२.२०१३

Tuesday, 10 December 2013

♥♥♥तेरी जीत...♥♥♥

♥♥♥♥♥तेरी जीत...♥♥♥♥♥♥
हारकर तेरी जीत बन जाऊं!
गुनगुनाओ तो गीत बन जाऊं!

नाम के प्यार की नहीं ख्वाहिश,
गर निभाओ तो मीत बन जाऊं!

धूप की जब तपन सताए तुम्हे,
ओस की तरह शीत बन जाऊं!

तेरी आँखों की मैं खुशी के लिए, 
फूल सरसों का पीत बन जाऊं!

तेरी चाहत की चांदनी मलकर,
मैं भी पावन पुनीत बन जाऊं!

याद करके जो सीख ले दुनिया,
ऐसा दिलकश अतीत बन जाऊं!

"देव" हंसकर के जो निभायें सब,
प्यार की ऐसी रीत बन जाऊं!"

....चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-१०.१२.२०१३

Monday, 9 December 2013

♥♥दोस्त बनकर...♥♥

♥♥♥♥♥दोस्त बनकर...♥♥♥♥♥♥
दोस्त बनकर रक़ीब मत करना!
तुम मुझे बदनसीब मत करना!

क्या हुआ पास जो नहीं दौलत,
दिल से खुद को गरीब मत करना!

बिन तेरे मैं जो जी नहीं पाऊँ,
मुझको इतना करीब मत करना!

लोग पढ़कर के जो करें रंजिश,
खुद को ऐसे अदीब मत करना!

जिनको न कद्र हो मोहब्बत की,
"देव" उनको हबीब मत करना!"

......चेतन रामकिशन "देव"……
दिनांक-०९.१२.२०१३

Sunday, 8 December 2013

♥♥♥मिसाल ...♥♥

♥♥♥♥♥मिसाल ...♥♥♥♥♥♥
बाद मरने के भी मिसाल रहे!
जिंदगी इतनी बेमिसाल रहे!

हर अँधेरा वज़ूद खो देगा,
अपने हाथों में जो मशाल रहे!

भूल से भी दुखे किसी का दिल,
अपने दिल को मगर मलाल रहे!

हमने दुनिया में क्या किया आकर,
अपने आपे से ये सवाल रहे!

प्यार मुझको जहां में जबसे हुआ,
हर घड़ी उसका ही ख्याल रहे!

रौंद दें जो वतन के दुश्मन को,
खून में अपने वो उबाल रहे!

"देव" वो रात में भी जगमग हो,
जिसके दिल में यहाँ ज़माल रहे!"

........चेतन रामकिशन "देव"……।
दिनांक-०८.१२.२०१३

Saturday, 7 December 2013

♥♥शीत ऋतू की लंबी रातें...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥शीत ऋतू की लंबी रातें...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है!
सपनों में भी दस्तक देता, मेरे दिल को ऐसा गम है!
बेचैनी का कोहरा छाया, धवल उजाला भी बेदम है,
बदन हमारा कांप रहा और, ओस दुखों की बेहद नम है!

न कोई हमदर्द मिला है, दिल की बातें दिल में रह गईं!
सारी खुशियां और उम्मीदें, पलक झपकते देखो बह गईं!

छांटे से भी छंट नहीं पाता, दिल पे छाया इतना तम है!
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है....

जब भी कुछ लिखना चाहा तो, भाव गमों के ही आते हैं!
सुबह सवेरे दिवस रात में, गम के बादल छा जाते हैं!
"देव"जिसे तुम अपना मानो, लोग वही क्यूँ खो जाते हैं,
जिनसे चाहत की आशा हो, वो ही नफरत बो जाते हैं!

नहीं पता कब दिन निकलेगा, इसी सोच में लग जाता हूँ!
गर भूले से झप्पी आये, तो ख्वाबों में जग जाता हूँ!

पीड़ा की बरसात कराये, कितना बेदर्दी मौसम है!
शीत ऋतू की लंबी रातें, नींद मगर आँखों में कम है!"

..................चेतन रामकिशन "देव"….............
दिनांक-०७.१२.२०१३

Friday, 6 December 2013

♥♥रंग प्रेम का...♥♥

♥♥♥रंग प्रेम का...♥♥♥♥
प्रेम ऋषि की बोली जैसा!
प्रेम सुखद रंगोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा!

प्रेम, भावना की ज्योति है!
प्रेम सदा उज्जवल मोती है!
प्रेम हो जिसके मन में उसकी,
सोच नहीं विकृत होती है!

प्रेम सुगन्धित फूलों सा है,
प्रेम है चन्दन, रोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा …।

प्रेम सलिल एहसासों में है!
प्रेम अटल विश्वासों में है!
"देव" प्रेम है प्रेरक शक्ति,
प्रेम नवल प्रयासों में है!

प्रेम जनम है, प्रेम गति है,
है परिणय की डोली जैसा!
प्रेम दीवाली और ईद में,
रंग प्रेम का होली जैसा!"

....चेतन रामकिशन "देव"…।
दिनांक-०६.१२.२०१३

Thursday, 5 December 2013

♥♥तुम्हारे हाथ की छुअन...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥तुम्हारे हाथ की छुअन...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं!
तेरे प्यार में बनके दीपक, घने तिमिर में जलना चाहूं!
निशा दिवस के हर लम्हे में, सखी तुम्ही से मिलना चाहूं,
छुअन तुम्हारे हाथ की पाकर, मैं फूलों सा खिलना चाहूं!

तुमसे ही अभिषेक हमारा और तुम्ही से अभिनंदन है!
सखी तुम्हारी एहसासों से, मेरे दिल में स्पंदन है!

तेरे प्यार की नरम धूप को, मैं चेहरे पे मलना चाहूं!
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं....

हम दोनों आपस में मिलकर, जीवन पथ तैयार करेंगे!
साथ खुशी को बाँटेंगे हम, कांटे भी स्वीकार करेंगे!
"देव" सदा हम एक दूजे का, प्रेम निहित सत्कार करेंगे,
हम दोनों एकजुट होकर के, हर मुश्किल को पार करेंगे! 

यदि जलाशय न होगा तो, अपने आंसू पी लेंगे हम!
एक दूजे के ज़ख्मों को भी, प्यार-वफ़ा से सी लेंगे हम!

मेरी सांस में घुल जाओ, मैं तेरी सांस में घुलना चाहूं!
बहुत कठिन है ये जीवनपथ, साथ तुम्हारे चलना चाहूं!"

...............चेतन रामकिशन "देव"…............
दिनांक-०५.१२.२०१३

Wednesday, 4 December 2013

♥♥रेशमी एहसास..♥♥

♥♥♥♥♥♥रेशमी एहसास..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मेरे एहसास में रेशम की तरह रहती हो!
कभी गंगा कभी झेलम की तरह बहती हो!

मेरे आँखों में दमकती हो मोतियों की तरह,
मेरी आवाज़ में सरगम की तरह रहती हो!

न उदासी मेरे चेहरे पे, ठिकाना ढूंढे,
प्यार के मखमली मौसम की तरह रहती हो!

जड़ लिया तुमको मोहब्बत की हर निशानी में,
मेरे जज़्बात में नीलम की तरह रहती हो!

"देव" तुमसे ही मेरी हर सुबह निराली है,
रात में चांदनी पूनम की तरह रहती हो!"

..........चेतन रामकिशन "देव"….......
दिनांक-०५.१२.२०१३

♥♥हथकरघे की सूनी डोरी ♥♥

♥♥♥♥♥♥हथकरघे की सूनी डोरी ♥♥♥♥♥♥♥♥
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है!
गांधी का चरखा भी देखो, अब लोगों ने ठुकराया है!
हाँ ये सच है नयी मशीनें, काम बड़ी जल्दी करती हैं,
लेकिन देखो इनके कारण, कामगार मन मुरझाया है!

मनरेगा की मजदूरी से, नहीं साल भर चूल्हा जलता!
देश के भोले मजदूरों को, नहीं खुशी का लम्हा मिलता!

हर नेता ने, हर अफसर ने, इनके दुख को झुठलाया है!
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है...

आज फावड़े धूल फांकते, नयी मशीनें दमक रहीं हैं!
आज कुदालें चुप रहतीं और दरांती सुबक रही हैं!
"देव" मशीनें चलें भले पर, मजदूरों की शामत न हो,
उसके घर में भूख प्यास से, जान किसी की आहत न हो!

देश के भोले मजदूरों ने, हर पल ही बलिदान किया है!
खून पसीना खूब बहाकर, भारत को बलवान किया है!

देख के मजदूरों की हालत, आँख में पानी भर आया है!
हथकरघा सूना सूना है, दौर मशीनों का आया है!"

..................चेतन रामकिशन "देव"…..............
दिनांक-०५.१२.२०१३

Tuesday, 3 December 2013

♥♥अपना ईमां..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥अपना ईमां..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चंद सिक्कों के लिए अपना ईमां मत बेचो!
तुम सियासत के लिए सच की दुकां मत बेचो!

बड़ी मेहनत से गरीबों ने घर बनाये हैं,
अपनी कोठी के लिए उनके मकां मत बेचो!

रोक सकते हो तो रोको ज़हर की चिमनी को,
किसी मज़लूम के चूल्हे का धुआं मत बेचो!

जो बुजुर्गों ने हमें प्यार वफ़ा सिखलाई,
अपनी नफरत के लिए तुम वो निशां मत बेचो!

आबरू है यहाँ लड़की को जान से ज्यादा,
अपनी बहशत के लिए उसका जहां मत बेचो!

भले दुनिया में हक़ीक़त की डगर मुश्किल है,
अपनी आसानी को पर, सच के बयां मत बेचो!

"देव" कुछ तो यहाँ रक्खो लिहाज कसमों की,
अपने मतलब के लिए, अपनी जबां मत बेचो!"

.............चेतन रामकिशन "देव"…..........
दिनांक-०३.१२.२०१३

Monday, 2 December 2013

♥♥♥कट जायेगा सफ़र ..♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥कट जायेगा सफ़र ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा!
मिल जायेगी हमें सफलता, यदि लक्ष्य का होश रहेगा!
फूल खिलेंगे पतझड़ में भी, जब तक मन में जोश रहेगा, 
किस्मत कैसे सुधरेगी जब, मेहनत में ही दोष रहेगा!

नाकामी के भाव संजोकर, नहीं उजाला मिल सकता है!
बिन साहस के कोई सपना, नहीं जहां में खिल सकता है!

नहीं रहो तुम भाग्य भरोसे, वरना तो अफसोस रहेगा!
कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा.....

आसमान के तारे अपनी, झोली में तुम भरना सीखो!
नही रहो तुम सहमे सहमे, खुद को साबित करना सीखो!
"देव" नहीं तुम भूले से भी, नाकामी से डरना सीखो,
नहीं हारकर मुरझाना तुम, जोश रगों में भरना सीखो!

नहीं सीखकर आता कोई, ज्ञान सभी को जग में मिलता! 
जो करते हैं कदर प्यार की, उन्हें प्यार का सागर मिलता!

तभी मिला सकते हो नजरें, जब ये मन निर्दोष रहेगा!
 कट जायेगा सफ़र ख़ुशी से, मन में गर संतोष रहेगा!"

...................…चेतन रामकिशन "देव"…..............
दिनांक-०२.१२.२०१३ 

Sunday, 1 December 2013

♥♥♥गुमसुम चाँद..♥♥♥

♥♥♥♥गुमसुम चाँद..♥♥♥♥
गुमसुम चाँद दिखाई देता!
गम का शोर सुनाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता!

लम्हे दिन के कटे न तुम बिन,
निशा मेरी खामोश गुजरती!
तुम बिन सावन पतझड़ सा है,
सूनी ये मधुमास गुजरती!

आह मेरे अधरों से निकले,
कोई नहीं दवाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता …

आँख से आंसू बह जाते हैं,
दुख के बादल मुस्काते हैं!
बिना तुम्हारे इस दुनिया में,
हम तो तन्हा रह जाते हैं!

शीत ऋतू में तन मन कांपे,
कोई न गरम सिकाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता …

शब्दों में भी दर्द जगा है,
गीत खुशी के लिख नहीं पाता!
"देव" तुम्हारे बिन आँखों को,
कोई सपना दिख नहीं पाता!

सब देते हैं छिलन खार की,
कोई नहीं नरमाई देता!
बिना तुम्हारे मेरा चेहरा,
पीड़ा की परछाई देता!"

..…चेतन रामकिशन "देव"…..
दिनांक-०१.१२.२०१३

Saturday, 30 November 2013

♥खुशियों की बारिश..♥

♥♥♥♥♥♥खुशियों की बारिश..♥♥♥♥♥♥♥
धवल चांदनी रात का आगमन हो!
मोहब्बत के जल से धुला सबका मन हो!
न हिंसा रहे, न ही नफरत दिलों में,
हो खुशियों की बारिश के फैला अमन हो!

जलें दीप मन में, उजालों का रंग हो!
यहाँ जिंदगी में खुशी सबके संग हो!

न कोई हो तन्हा, न कोई दुखन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो...

न हिन्दू न हमको मुसलमान बनकर!
यहाँ हमको जीना है इंसान बनकर!
नहीं हमको देने हैं आंसू किसी को,
यहाँ हमको जीना है मुस्कान बनकर!

मोहब्बत भरे जब यहाँ दिल मिलेंगे!
तो जीवन में खुशबु के गुलशन खिलेंगे!

न दिल में जहर हो, न कोई अगन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो....

सफ़र ये हक़ीक़त का आसान होगा!
अगर दिल में अपने जो ईमान होगा!
सुनो "देव" उस घर की बढ़ जाये रौनक,
वो जिस घर में बेटी का सम्मान होगा!

मोहब्बत से बढ़कर खजाना नही है!
हमें दिल किसी का दुखाना नहीं है!

हो दिल सबका उजला, भले काला तन हो!
धवल चांदनी रात का आगमन हो!"

....…चेतन रामकिशन "देव"…....
दिनांक-३०.११.२०१३

Friday, 29 November 2013

♥♥चांदनी रात के उजालों से..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥चांदनी रात के उजालों से..♥♥♥♥♥♥♥
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे!
अपने दिल की तमाम नफरत को, प्यार के भाव से भुला देंगे!
ख्वाब तेरे तुम्हारी आँखों के, अपने हाथों से हम खिला देंगे,
तन का रिश्ता तो बस पलों का है, रूह से रूह हम मिला देंगे!

तेरे कदमों के साथ चलकर के, मंजिलों की तलाश करनी है!
अपने जीवन की ये डगर हमदम, तेरी चाहत से खास करनी है!

गोद में मेरी, सर को रख देना, प्यार से हम तुम्हें सुला देंगे!
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे......

जिंदगी का सिंगार तुमसे है, हर तड़प का क़रार तुमसे है!
होने को तो है ये जहाँ लेकिन, मेरा तो सिर्फ प्यार तुमसे है!
"देव" पतझड़ से मेरे जीवन में, प्यार की ये फुहार तुमसे है,
फूल जैसे खिला मेरा चेहरा, जिंदगी में बहार तुमसे है!

तेरी राहों के सारे काँटों को, अपने हाथों से दूर करना है!
प्यार को ये जहां गुनाह कहे, मुझको पर ये कसूर करना है!

तेरे जीवन की रौशनी को हम, अपना दिल भी यहाँ जला देंगे!
चांदनी रात के उजालों से, प्यार का दीप हम जला देंगे!"

..............…चेतन रामकिशन "देव"…........................
दिनांक-२९.११.२०१३ 

Thursday, 28 November 2013

♥♥♥मोहब्बत तुम्हारी..♥♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मोहब्बत तुम्हारी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मोहब्बत घुली है फिजा में तुम्हारी, के उपवन भी देखो महकने लगा है!
मचलता है मन बस तुम्हारी ही खातिर, तुम्हारे लिए दिल बहकने लगा है!  
भले एक चुप्पी है होठो पे लेकिन, ये दिल धीमे धीमे चहकने लगा है,
तुम्हारी मोहब्बत का एहसास करके, मेरा दिल ख़ुशी से लहकने लगा है! 

तुम्हारी जरुरत है दिल को हमेशा, भले दिन हो हमदम, भले रात हो!
न दौलत की हसरत कभी मेरे दिल को, है ख्वाहिश यही बस तेरा साथ हो!

मुलाकात की एक तमन्ना जगी है, मुलाकात को दिल चहकने लगा है! 
मोहब्बत तुम्हारी घुली है फिजा में, के उपवन भी देखो महकने लगा है....

खनक चूड़ियों की बजे स्वर तुम्हारा, के तुमसे ही भावों का उद्भव हुआ है!
के टूटी है चुप्पी तुम्ही से ग़मों की, के तुमसे ही जीवन में वैभव हुआ है!
सुनो "देव" आंगन में रौनक है तुमसे, के तुमसे ही जीवन में कलरव हुआ है,
मैं हर्षित हूँ पाकर तुम्हारी मोहब्बत, के तुमसे ही जीवन में उत्सव हुआ है!

अँधेरा मिटे एक झलक से तुम्हारी, तुम्हारी मोहब्बत उजालों का रंग है!
है तू मेरे जीवन में लाली सुबह की, के तू चांदनी की तरह मेरे संग है!

के तू बन गई है मोहब्बत की बारिश, के जब भी मेरा मन दहकने लगा है!
मोहब्बत तुम्हारी घुली है फिजा में, के उपवन भी देखो महकने लगा है!"

.........................…चेतन रामकिशन "देव"…...........................
दिनांक-२८.११.२०१३

Wednesday, 27 November 2013

♥♥उजाला ..♥♥

♥♥♥♥♥♥उजाला ..♥♥♥♥♥♥♥
अंधेरों से बढ़कर उजाला रहेगा!
ये सूरज हमेशा निराला रहेगा!

महज खूबसूरत बदन को न समझो,
अगर दिल हमारा जो काला रहेगा!

यहाँ जीत जायेगी एक दिन हक़ीक़त,
भले सच पे कितना भी ताला रहेगा!

नहीं लोग देखो वो इंसान होंगे,
वो नफरत का जिस दिल में जाला रहेगा!

जो लोगों को जीते मोहब्बत से अपनी,
वही देखो दुनिया में आला रहेगा!

नहीं मैं डिगूंगा कभी अपने पथ से,
कसम का तुम्हारी हवाला रहेगा!

 सुनो "देव" कैसे बनोगे शहद तुम,
जो अधरों में विषधर का छाला रहेगा!"

.....…चेतन रामकिशन "देव"….....
दिनांक-२८.११.२०१३

Sunday, 24 November 2013

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥पथिक हूँ मैं...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!
नहीं देखो नफरत मुझे छू सकेगी, मोहब्बत की मुझपे निशानी है जब तक! 
ये मेरा कलम यूँ ही चलता रहेगा, अधूरी ये मेरी कहानी है जब तक,
नहीं अपने अधरों को मैं चुप करूँगा, के आवाज़ हक़ की उठानी है जब तक! 

कभी दुख कभी सुख नियम जिंदगी का, नियम के मुताबिक ही जीते रहेंगे!
कभी अश्क़ गालों तलक बह उठे तो, कभी अपने अश्कों को पीते रहेंगे!

नहीं उफ़ करेंगे कभी भूल से भी, के दिल में हमारे जवानी है जब तक....
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!

नजर अपनी मंजिल पे रखकर सदा ही, कदम हमको अपने बढ़ाने पड़ेंगे!
नहीं जिंदगी में खुशी सिर्फ मिलती, ग़मों के भी पत्थर उठाने पड़ेंगे!
सुनो "देव" हमको हुनर जीत के ये, के जीवन को अपने सिखाने पड़ेंगे,
हमें नफरतों की ये स्याही बहाकर, मोहब्बत के गुलशन खिलाने पड़ेंगे!

मुझे आज से ही शुरुआत करनी, मैं कल पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ!
यक़ीनन यहाँ मौत आनी है सबको, इसी वास्ते मैं नहीं डर रहा हूँ!

नहीं अपने लफ्जों को मैं चुप करूँगा, ये आवाज़ मन की सुनानी है जब तक...
पथिक हूँ मैं ऐसे ही चलता रहूँगा, के मेरे बदन में रवानी है जब तक!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव"….......................
दिनांक-२४.११.२०१३

Friday, 22 November 2013

अगर चांदनी बन मेरा..

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥अगर चांदनी बन मेरा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम!
बिखर जाऊंगा बनके लाली सुबह की, अगर सूर्य बनकर के प्रभात दो तुम!
मैं हंसकर करूँगा सफर साथ पूरा, जो हाथों में मेरे अगर हाथ दो तुम,
मेरे दिल में खुशियों की फसलें उगेंगी, अगर प्यार की एक बरसात दो तुम!

जो तुम साथ में हो तो चांदी क्या सोना, मोहब्बत तुम्हारी मुझे है जरुरी!
बिना तेरे कुछ भी नहीं मेरा जीवन, इनायत तुम्हारी मुझे है जरुरी!

मुझे देके हमदम सुबह सुबह प्यारी, सितारों से सुन्दर सजी रात दो तुम!
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम.....

नज़ारे ख़ुशी के तुम्ही से हैं हमदम, मेरी जिंदगी का सहारा तुम्ही हो!
तुम्ही मेरी हिम्मत, यकीं मेरा तुमसे, के तूफां में मेरा किनारा तुम्ही हो!
सुनो "देव" मेरे कलम में वसे तुम, के शब्दों में भावों की धारा तुम्ही हो,
तुम्हे पाके देखो खिला मेरा जीवन, के किस्मत का मेरी सितारा तुम्ही हो!

है तुमसे ही सीखी इबादत ये मैंने, तेरे साथ ने मुझको पावन किया है!
मेरे मन को बख्शे मोहब्बत के बादल, के तुमने मेरे दिल को सावन किया है!

शहद मेरे कानों में घुलने लगेगा, अगर प्यार वाली मधुर बात दो तुम!
दमकने लगूंगा के मैं चाँद बनकर, अगर चांदनी बन मेरा साथ दो तुम!"

.........................…चेतन रामकिशन "देव"..............................
दिनांक-२२ .११.२०१३

Friday, 15 November 2013

♥♥ख्वाबों के दीपक ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ख्वाबों के दीपक ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ!
मोहब्बत की बातें मैं करता हूँ हर पल, नहीं नफरतों का जहर जानता हूँ!
जो दिल ने कहा मेरे वो लिख रहा हूँ, नहीं मैं ग़ज़ल की बहर जानता हूँ!
जो लोगों को लूटे यकीं छलनी करके, मैं देखो नहीं वो हुनर जानता हूँ!

अँधेरा है बेशक मगर अपने दिल को, उजालों का झिलमिल ये आकाश देना!
जो समझो यहाँ दर्द तुम आदमी का, जरा अपने दिल को वो एहसास देना!

मुझे है मोहब्बत हक़ीक़त से देखो, नहीं झूठ की मैं लहर जानता हूँ!
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ...

मैं ख्वाबों के दीपक जलाने लगा हूँ, मैं सपनों की दुनिया वसाने लगा हूँ!
मैं लफ्जों को कागज़ पे लिखने लगा हूँ, मैं भावों की सरिता बहाने लगा हूँ!
सुनो "देव" अपने ग़मों को मैं देखो, इरादों की लौ पर तपाने लगा हूँ!
मैं अपने ही हाथों से जीवन को अपने, हुनर जीतने का सिखाने लगा हूँ!

कभी हारकर भी नहीं हारना तुम, नहीं अपने जीवन को तुम श्राप मानो!
तपोगे तो कुंदन भी बन जाओगे तुम, सदा अपने दुख को गरम ताप मानो!

नहीं होता जब तक यकीं मुझको खुद पर, मैं अपने इरादे नहीं ठानता हूँ!
गमों का सफ़र है, कठिन जिंदगी है, मगर हार फिर भी नहीं मानता हूँ!"

............................…चेतन रामकिशन "देव"..................................
दिनांक-१५.११.२०१३ 

Thursday, 14 November 2013

♥♥मोहब्बत की खुशबु ...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मोहब्बत की खुशबु ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ!
तेरे प्यार की इस धवल रोशनी से, के मैं चांदनी सा निखरने लगा हूँ!
तुम्हारी छूअन से मैं फूलों की तरह, के बनकर के खुशबु बिखरने लगा हूँ!
तुम्हारे बिना था अमावस के जैसा, के अब बनके सूरज उभरने लगा हूँ!

तुम्हारी मोहब्बत के ये सिलसिले अब, नहीं आखिरी सांस तक कम करेंगे!
कभी तेरी आँखों में जो होंगे आंसू, तो हम अपनी आँखों को भी नम करेंगे!

तुमसे मोहब्बत हुई इतनी ज्यादा, के तुमसे बिछड़ने से डरने लगा हूँ!
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ.....

हैं तुमसे अनोखी हमारी ये रातें, के तुमसे अनोखे मेरे दिन हुए हैं!
तुम्हारी मोहब्बत से है खुशगवारी, के खुशियों से भीगे ये उपवन हुए हैं!
सुनो "देव" तेरी मोहब्बत से मन में, के चन्दन के मिश्रण से उबटन हुए हैं!
तुम्हारी मोहब्बत से पूजन किया है, तुम्हारी मोहब्बत से वंदन हुए हैं!

तुम्हारे बिना कुछ नहीं जिंदगी में, तुम्हारी जरुरत है अंतिम समय तक!
तुम्हारी मोहब्बत घुले शाम बनकर, तुम्हारी मोहब्बत हो सूरज उदय तक!

है तेरी फिकर मुझको खुद से भी ज्यादा, दुआ तेरी खातिर मैं करने लगा हूँ!
मैं लफ्जों में संगीत भरने लगा हूँ, तेरे प्यार में मैं संवरने लगा हूँ!"

..........................…चेतन रामकिशन "देव".................................
दिनांक-१४.११.२०१३

Tuesday, 12 November 2013

♥♥हमारी निगाहों से...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हमारी निगाहों से...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमारी निगाहों से चाहत बयां हो, तुम्हारी नजर से मोहब्बत बयां हो!
तुम्हें देखें हम एक खुदा की नजर से, तुम्हारी नजर से इबादत बयां हो!
तुम्हारी दुआओं में शामिल रहूँ मैं, तुम्हारी नजर से इनायत बयां हो,
तुम्हें अपने दिल में वसाकर रहूँ मैं, तुम्हारी नजर से हिफाज़त बयां हो!

तुम्हारी मोहब्बत को पाकर देखो, मैं फूलों की तरह से खिलने लगा हूँ!
सलीका मुझे आ गया जिंदगी का, मैं तितली के रंगों से मिलने लगा हूँ!

मुझे देखकर तुमको आये सुकूं और तुम्हारी नजर से भी राहत बयां हो! 
हमारी निगाहों से चाहत बयां हो, तुम्हारी नजर से मोहब्बत बयां हो....

हमारी खुशी में तुम्हारी खुशी हो, तुम्हारी खुशी में हमारी खुशी हो!
हमारे अधर पे हो मुस्कान तुमसे, तुम्हारे अधर पे हमारी हँसी हो!
हमारे रंगों से जहाँ खूबसूरत, तुम्हारे रंगों से ये दुनिया हसीं हो,
हमारी मोहब्बत में हो तेरी पूजा, तुम्हारी मोहब्बत में मन्नत वसी हो!

महकने लगा हूँ, चहकने लगा हूँ, मैं ख्वाबों की दुनिया सजाने लगा हूँ!
तुम्हारी मोहब्बत ने बदला नजरिया, मैं सबको गले से लगाने लगा हूँ!

सुनो "देव" मैं गर सताऊँ तुम्हे जो,  तुम्हारी नजर से शरारत बयां हो!
हमारी निगाहों से चाहत बयां हो, तुम्हारी नजर से मोहब्बत बयां हो!"

.…चेतन रामकिशन "देव"…...
दिनांक-१२.११.२०१३

Friday, 8 November 2013

♥♥आशाओं के फूल....♥♥


♥♥♥♥♥आशाओं के फूल....♥♥♥♥♥♥
आशाओं के फूल चुनेंगे!
नए नवेले स्वप्न बुनेंगे!
मधुर भावना, मधुर कामना का,
सुन्दर संगीत सुनेंगे !

कभी हारकर अपना साहस, सहमे सहमे नहीं रहेंगे!
राहों में यदि कंटक होंगे, तो हम उनकी चुभन सहेंगे!

यदि हार भी जाते हैं तो, जीत का फिर प्रयास करेंगे!
हम धरती से आसमान तक, उड़ने का अभ्यास करेंगे!

नहीं कुशल हो सकते जब तक,
अपनी गलती नहीं गिनेंगे!
मधुर भावना, मधुर कामना का,
सुन्दर संगीत सुनेंगे…।

हम कागज़ की नाव बनाकर, तैराकी का अधिगम लेंगे!
हम पीड़ा के सात सुरों से, संघर्षों की सरगम लेंगे!

हम जीवन के अंतिम क्षण तक, न थक कर विश्राम करेंगे!
मानवता के पैर पूजकर, अपने चारों धाम करेंगे!

"देव" सदा अपने कर्मों से,
मानवता की शान बनेंगे!
मधुर भावना, मधुर कामना का,
सुन्दर संगीत सुनेंगे!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०९.११.२०१३ 

Wednesday, 6 November 2013

♥♥मोहब्बत की चांदनी....♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मोहब्बत की चांदनी....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम्हारी मोहब्बत की इस चांदनी ने, के मिटटी से सोना मुझे कर दिया है!
के आँखों को मेरी दिखाए हैं सपने, के खुशियों से आंगन मेरा भर दिया है!
तुम्ही ने बहाकर के भावों की सरिता, मेरी लेखनी को अमर कर दिया है,
के जीता हूँ हंसकर मैं गाकर के अब तो, के तुमने हंसी का असर कर दिया है!

मोहब्बत की बातें सुहानी लगे हैं, के जबसे तुम्हारी मोहब्बत मिली है!
के जीवन में बरसी ये सावन की बारिश, के साँसों में तेरी ही खुशबु घुली है!

मैं आँखों के सपने सजाने लगा हूँ, के तुमने ही ऐसा हुनर कर दिया है!
तुम्हारी मोहब्बत की इस चांदनी ने, के मिटटी से सोना मुझे कर दिया है....

मेरे साथ रहना सदा जिंदगी भर, मैं पल भर की दूरी नहीं सह सकूंगा!
के साँसों के बिन तो मैं जी लूंगा शायद, मगर बिन तुम्हारे नहीं रह सकूंगा!
बिना तेरे थम जाए मेरी रवानी, के मैं बनके सागर नहीं बह सकूंगा,
के पढ़लो मेरी आँखों में "देव" चाहत, मैं लफ्जों से कुछ भी नहीं कह सकूंगा!

मैं तेरे ख्यालों में जीता हूँ क्यूंकि, तुम्हे प्यार दिल से मैं करने लगा हूँ!
तुम्हारी मोहब्बत की इस चांदनी से, के मैं रोशनी सा निखरने लगा हूँ!

के तुमने ही जीवन के पतझड़ को मेरे, के हाथों से छूकर शज़र कर दिया है!
तुम्हारी मोहब्बत की इस चांदनी ने, के मिटटी से सोना मुझे कर दिया है!"

........................…चेतन रामकिशन "देव"…............................

दिनांक-०६.११.२०१३

Tuesday, 5 November 2013

♥♥लफ्जों की मोहब्बत....♥♥

♥♥♥♥♥लफ्जों की मोहब्बत....♥♥♥♥♥♥♥
सवेरा लिखा है,
उजाला लिखूंगा,
के मैं रोशनी का सितारा लिखूंगा!

भले घिर गया हूँ, 
मैं तूफां में लेकिन,
मैं कश्ती का अपनी किनारा लिखूंगा!

भले दर्द है पर,
ये है सांस जब तक,
मैं जीवन का अपना गुजारा लिखूंगा!

न नफरत से नाता है,
मेरे कलम का,
मैं चाहत का दिलकश नजारा लिखूंगा! 

है लफ्जों से मुझको, मोहब्बत बहुत ही,
इसी वास्ते मैं यूँ लिखने लगा हूँ!

कभी बनके सूरज मैं लफ्जों में शामिल,
कभी चाँद बनकर के, दिखने लगा हूँ!

मैं धरती में जमती,
नयी एक लता को,
के पेड़ों के बल का सहारा लिखूंगा!

सवेरा लिखा है,
उजाला लिखूंगा,
के मैं रोशनी का सितारा लिखूंगा ....

नहीं खवाब अपने,
के तोडूंगा खुद ही,
मैं उनको सजाने की कोशिश करूँगा!

मैं लफ्जों से अपने,
मोहब्बत की बूंदें,
के लोगों के दामन में हर पल भरूंगा!

सुनो "देव" नफरत,
करो चाहें मुझसे,
मैं लेकिन नहीं तुमसे नफरत करूँगा!

ये दामन है मेरा,
के फूलों की तरह,
मैं काँटों के जैसी न फितरत करूँगा!

के खेतों में जलती,
झुलसती फसल को,
मैं लफ्जों से पानी की धारा लिखूंगा! 

सवेरा लिखा है,
उजाला लिखूंगा,
के मैं रोशनी का सितारा लिखूंगा!"


….....…चेतन रामकिशन "देव"………।
दिनांक-०६.११.२०१३

♥♥देखने सोचने में....♥♥

♥♥♥♥♥देखने सोचने में....♥♥♥♥♥♥♥
देखने सोचने में, वक़्त नहीं ज़ाया करो!
हम तो आ जायेंगे एक पल में, तुम बुलाया करो !

मैं तो नादां हूँ, मुझे प्यार नहीं आता है,
अपने लफ्जों से मुझे प्यार, तुम सिखाया करो!

चांदनी से मेरे चेहरे की, सजावट करके,
तोड़कर तारे मेरी मांग को, तुम लाया करो!

बिन तेरे दिन न मेरी, रात गुजरती देखो,
एक पल को ही सही, पास मेरे आया करो!

रात का स्याह अँधेरा, जो डराये तुमको,
एक दीपक मेरी यादों का, तुम जलाया करो!

धूप सूरज की मेरे पाओं, जलाये जब भी,
बनके सावन की घटा, मुझपे सखी छाया करो!

"देव"  नफरत का असर, खुद ही ये मिट जायेगा,
प्यार के गीत मुझे, हर घड़ी सुनाया करो!"

…....…चेतन रामकिशन "देव"…....... 
दिनांक-०५.११.२०१३

Saturday, 2 November 2013

♥मक़सद सिर्फ उजाले का हो...

♥♥♥♥मक़सद सिर्फ उजाले का हो...♥♥♥♥♥
दीप जलें या सीने का दिल, मक़सद सिर्फ उजाले का हो!
न झगड़ा हो जात-मजहब का, न गोरे, न काले का हो!

काश दीवाली के मौके पर, कंडीलों से वो घर दमकें,
अब तक जिस आंगन से नाता, बस मकड़ी के जाले का हो!

एक दूजे से प्यार करें सब, नहीं सियासत आग लगाये,
नहीं धार हो तलवारों में , न प्रशिक्षण भाले का हो!

एक दिन मेहनत रंग लाएगी, नहीं इरादे डिगने देना,
खुद से ज्यादा यकीं कभी न, इस किस्मत के ताले का हो!

"देव" मुझे होली, दीवाली, ईद, दशहरा तब भायेगा,
जब खुद की पीड़ा से पहले, दुख मुफलिस के छाले का हो! "

...................…चेतन रामकिशन "देव"….....................
दिनांक-०३.११.२०१३

♥♥प्रेम का प्रभुत्व.♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥प्रेम का प्रभुत्व.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
दीप की ज्योति में अब तो, तेरा ही प्रभुत्व है! 
मेरे जीवन का सखी अब, तुझसे ही अस्तित्व है!

तुझको सुनकर मन भरे न, रात दिन सुनता रहूँ!
अपनी आँखों में तेरे बस, स्वप्न मैं बुनता रहूँ!
ओस की बूंदों से तेरा, नाम लिखकर हाथ पर!
तुझको देखूं सुबह उठकर, तुझको सोचूं रात भर! 

तुझसे ही जीवन में मेरे, फूल का ये सत्व है!
दीप की ज्योति में अब तो, तेरा ही प्रभुत्व है ....

आगमन जब से तुम्हारा, मेरे आंगन में हुआ है!
तब से हर दिन मेरा जीवन, प्रेम से पूरित हुआ है!
मैं तुम्हारे हाथ छू लूँ, जिस घड़ी जिस रोज भी,
ऐसा लगता है के रेशम, मैंने हाथों से छुआ है!

तुमसे ही सम्बन्ध मन का, तुमसे ही अपनत्व है!
दीप की ज्योति में अब तो, तेरा ही प्रभुत्व है! 

तेरा ये सानिध्य पाकर, मेरे मन में हर्ष है!
ये दीवाली है निराली, चांदनी का दर्श है!
"देव" तुमसा प्यारा कोई सारे जग में है नहीं,
तू ही मेरी प्रेरणा है, तू मेरा आदर्श है!

तू ही मेरी आत्मा के, प्रेम के अमरत्व है!
दीप की ज्योति में अब तो, तेरा ही प्रभुत्व है!"

..........…चेतन रामकिशन "देव"….............
दिनांक-०२.११.२०१३

"
सर्वाधिकार सुरक्षित, मेरी ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित"

Friday, 1 November 2013

♥♥♥उजियारा..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥उजियारा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खुशियों के दीपक जल जायें, बस हर घर में उजियारा हो!
हिंसा, नफरत, द्वेष रहे न, ये भारत इतना प्यारा हो!
एक दूजे के दर्द को समझें, प्यार करें, अपनायत रखें,
सब हो जायें एक दूजे के, सबका एक ही घर द्वारा हो!

ये त्यौहार यही कहते हैं, प्यार वफा की डोर न टूटे!
साथ रहे अच्छे लोगों का, कभी किसी का साथ न छूटे!

न अधरों पर कड़वाहट हो, न आँखों में अँधियारा हो!
खुशियों के दीपक जल जायें, बस हर घर में उजियारा हो....

एक दूजे के साथ सभी का, वक़्त ख़ुशी ये कट जाये!
नफरत का ये काला बादल, सारी दुनिया से छंट जाये!
"देव" जहाँ में सबसे पहले, जात हमारी इंसानों की,
एक दूजे की खुशियां अपनी, एक दूजे का दुख बंट जाये!

जब आपस में मिलकर के हम, जीवन का आगाज़ करेंगे!
उस दिन देखो खुले गगन में, हम खुलकर परवाज़ करेंगे!

नहीं दवा को तरसे कोई, न रोटी का दुखियारा हो!
खुशियों के दीपक जल जायें, बस हर घर में उजियारा हो!"

....................…चेतन रामकिशन "देव"…....................
दिनांक-०१.११.२०१३

♥♥निर्धन की आतिशबाजी..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥निर्धन की आतिशबाजी..♥♥♥♥♥♥♥♥
धन की वर्षा होती है पर, निर्धन के आँगन से बाहर,
निर्धन के आंगन में हर दिन, पीड़ा के अंकुर उगते हैं!

खून पसीने की मेहनत से, जो खेतों में अन्न उगाता,

उस कृषक के नंगे तन पे, सर्दी के कांटे चुभते हैं!

आज सवेरे नजर पड़ी जब, मेरी सड़कों, फुटपाथों पर,

बिना फुंकी आतिशबाजी को, निर्धन के बच्चे चुनते हैं! 

चाहें कोई सियासी हो या दफ्तर का कोई ऊँचा अफसर,

इन लोगों के कान भला कब, निर्धन की पीड़ा सुनते हैं!

"देव" भला वो क्या देखेंगे, निर्धन के दामन के कांटे,

जिन लोगों ने बचपन से ही, अय्याशी के सुख भुगते हैं!" 

................…चेतन रामकिशन "देव"…..................

दिनांक-01.11.2013

Wednesday, 30 October 2013

♥♥कलम की रोशनी ..♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कलम की रोशनी ..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम मुखर रखना है हमको, भाव नहीं मरने देना है!
ये आंसू हैं बड़े कीमती, इनको न झरने देना है!
लोग हमारा नाम देखकर, जो कोसें और लानत बख्शें,
हमको अपनेआपे से वो, काम नहीं करने देना है!

हमको ऊर्जा रखनी होगी, और हमको ये बल रखना है!
हमको अपने हाथ में देखो, इस भारत का कल रखना है!

हमको अपने जीते जी ये, वतन नहीं बिकने देना है!
कलम मुखर रखना है हमको, भाव नहीं मरने देना है!

हमको संयम रखना है पर, नहीं जवानी मृत करनी है!
अपने मन से कभी जीत की, सोच नहीं निवृत करनी है!
"देव" कभी ईमान बेचकर, न दौलत की हसरत रखना,
और निराशा के भावों से, नहीं सोच विकृत करनी है!

अपने छोटे जीवन में हम, बड़ी बड़ी मंजिल पायंगे!
कायरता की मृत्यु पाकर, नहीं जहाँ से हम जायेंगे!

न खोएंगे अपनी ऊर्जा, न खुद को डरने देना है!
कलम मुखर रखना है हमको, भाव नहीं मरने देना है"

...............…चेतन रामकिशन "देव"…..............
दिनांक-३०.१०.२०१३

Tuesday, 29 October 2013

♥♥शब्दों की अमरता...♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥शब्दों की अमरता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भले ही सांसें थम जायें पर, ये अल्फाज़ नहीं मरते हैं!
शब्द हमेशा दीपक बनकर, दुनिया को रौशन करते हैं!

कलम के नायक देह त्यागकर, दुनिया से बेशक जाते हैं,
किन्तु उनके शब्द जहाँ को, सूरज जैसे दमकाते हैं!

मौत की आहट पाकर के भी, सच्चे शब्द नहीं डरते हैं!
भले ही सांसें थम जायें पर, ये अल्फाज़ नहीं मरते हैं....

राजेंद्र से कलम के प्रहरी, मरकर के भी मर नहीं सकते!
लालच, मिथ्या और स्वार्थ से, वो समझोता कर नही सकते!

इन लोगों के शब्द ही देखो, मजलूमों का हित करते हैं!
भले ही सांसें थम जायें पर, ये अल्फाज़ नहीं मरते हैं...

 "देव" सदा ही याद रहेगा, शब्दों का संसार अमर है!
इन शब्दों में मानवता की, कोमलता का हरा शज़र है!

सच्चे और खरे शब्दों से, लोगों में ऊर्जा भरते हैं!
भले ही सांसें थम जायें पर, ये अल्फाज़ नहीं मरते हैं!"

................…चेतन रामकिशन "देव"….................
दिनांक-२९. १०. २०१३ 

Wednesday, 23 October 2013

♥♥आदमी..♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आदमी..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बहशियत को छोड़कर के, आदमी बनकर तो देखो!
तुम किसी मुफलिस के छाले, कुछ घड़ी गिनकर तो देखो!

रूह को आराम होगा और दिल भी चैन पाए,
तुम किसी बेघर की खातिर, घोंसला बुनकर तो देखो!

अपने आंसू, अपनी पीड़ा, कम लगेगी देखो उस दिन,
तुम किसी भूखे का दुखड़ा, कुछ घड़ी सुनकर तो देखो!

तब तुम्हे दुनिया में देखो, दर्द का एहसास होगा,
एक काँटा तुम किसी के, पांव से चुनकर तो देखो!

"देव" तुमको सारी दुनिया, अपने ही जैसी लगेगी,
छोड़कर काँटों की फितरत, फूल तुम बनकर तो देखो!"

..............…चेतन रामकिशन "देव"…................
दिनांक-२३.१०.२०१३

Tuesday, 22 October 2013

♥♥विश्वास...♥♥

♥♥♥♥विश्वास...♥♥♥♥
हर कोई दिन खास होगा,
मन में गर विश्वास होगा!

मंजिले नजदीक होंगी,
और मकसद पास होगा!

घर भी एक मंदिर लगेगा,
प्यार का जब वास होगा!

जो करेगा काम उम्दा,
उसका ही इतिहास होगा!

जीतने का बल बढे जब,
हार का एहसास होगा!

जो इरादे ठोस हों तो,
क़दमों में आकाश होगा!

"देव" जिस दिन हम मिलेंगे,
हर्ष का आभास होगा!"

.…चेतन रामकिशन "देव"….
दिनांक-२३.१०.२०१३

♥♥♥प्रेम के धागे...♥♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम के धागे...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रेम के धागों से निर्मित, आज ये आकाश लगता!
चंद्रमा भी आज देखो, मुझको मेरे पास लगता!

होने तो सारी दुनिया, सारा आलम खुबसूरत,
पर जहाँ में मेरे दिल को, एक तू ही खास लगता!

तेरी आंखे झील सी हैं, तेरी बोली में शहद में है,
और तेरा दिल ये मुझको, प्रेम का आवास लगता!

आँखों में आंसू तेरे बिन, और चहरे पर उदासी,
बिन तेरे मेरा ये जीवन, मुझको तो वनवास लगता!

"देव" जब से मिल गए हो, मुझको तुम इस जिंदगी में,
तब से हर दिन, हर सवेरा, मुझको तो मधुमास लगता!"

…............…चेतन रामकिशन "देव".....................
दिनांक-२२.१०.२०१३