Wednesday, 2 May 2012

♥नारी( अनमोल चरित्र)♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥नारी( अनमोल चरित्र)♥♥♥♥♥♥♥

नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है!
हर एक रिश्ते में नारी, प्रेम का आभास होती है!
हमारे दुःख में देती साथ वो हमदर्द बनकर के,
सदा ही चन्द्र किरणों का धवल प्रकाश होती है!

यदि नारी नहीं होती तो, सब कुछ विषम होता!
नहीं सहयोगिता होती, नहीं जीवन सुगम होता!

है नारी हर्ष की रूपक, सुखद उल्लास होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है......

हर सम्बन्ध में कर्तव्य का पालन वो करती है!
पुरुष की जिंदगी में प्यार का हर रंग भरती है!
हमारी मुश्किलों में भी, हमे सहयोग देती है,
हमे वो भूल से भी दुःख तड़प देने से डरती है!

बिना नारी के तो संतान का न जन्म संभव है!
बिना नारी के तो संसार की रचना असंभव है!

है नारी पुष्पों की माला, यही अधिवास होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है......

न नारी धन की भूखी है, महज सम्मान चाहती है!
सरल व्यवहार चाहती है, वो स्वाभिमान चाहती है!
भले पूजन न तुम उसका करो, देवी के रूपों में,
पुरुष के जैसा समतापूर्ण, वो आह्वान चाहती है!

जहाँ नारी नहीं होती, वहां न हर्ष होता है!
बिना नारी पुरुष जीवन, नहीं उत्कर्ष होता है!

ये नारी सप्तरंगी किरणों का, आकाश होती है!
नहीं उपभोग की वस्तु, न नारी दास होती है!"

" नारी- संसार की रचना, कल्पना उसके बिना अधूरी है! नारी का अर्थ व्यापक है, वो उपभोग की वस्तु नहीं है, वो दास नहीं, वो धन और दौलत के अथाह भंडार नहीं चाहती, वो बस समता. स्वाभिमान और प्रेम चाहती है! तो आइये जरा चिंतन करें और नारी का सम्मान समता के साथ करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०३.०५.२०१२

उक्त रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!
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Tuesday, 1 May 2012

♥♥♥♥♥♥प्यार का फीका रंग..♥♥♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥प्यार का फीका रंग..♥♥♥♥♥♥♥♥

प्यार का रंग भी फीका सा पड़ गया अब तो,
न ही जूही है, नहीं चंपा, न चमेली है!

मेरी खुशियों पे भी ताला सा पड़ गया अब तो,
जिंदगी जिंदगी नहीं है अब पहेली है!

आज उसने भी मुझे देखा है हैरत से यूँ,
जबकि वो साथ पढ़ी और साथ खेली है!

जिंदगी से मुझे हर लम्हा ही मिले आंसू,
ऐसा लगता है के बस मौत अब सहेली है!"

"
आज प्रेम के इस रूप को लिखने का मन हुआ,
प्रेम यदि हर्ष देता है तो पीड़ा भी!"

चेतन रामकिशन "देव"
 

♥♥♥♥♥♥♥♥शालीनता..♥♥♥♥♥♥♥♥♥

हमको थककर के कभी चूर नहीं होना है!
हमको मानवता से न दूर कभी होना है!


लोग जो याद करें हमको ऐसा बनना है,
हमको भूले से भी मगरूर नहीं होना है!


लोग जो तंज कसें हमपर लूटमारी का,
हमको इस तरह, मशहूर नहीं होना है!"


..."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव"...

Sunday, 29 April 2012

♥♥♥♥♥♥♥♥मजहबी उन्माद..♥♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मजहबी उन्माद..♥♥♥♥♥♥♥

रंगों को भेद न हो, मजहबी उन्माद न हो!
अपने हाथों से कभी दंगा और फसाद न हो!

एक जैसे ही हैं हम, सारे जहाँ के मानव,
सरहद के नाम पर, हिंसा कोई विवाद न हो!

जीवन भर के हम संगी-साथी, 
प्यार का रंग कभी बर्बाद न हो!

प्यार में जैसे भी हालात हों सह लेना पर,
भूल से कभी नफरत का घर आबाद न हो!

प्यार के रंग में हम "देव" डूब जायें बस,
हर्ष की मुरली बजे, दुख का शंखनाद न हो!"

..."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"...

Friday, 27 April 2012


♥♥♥♥♥माँ का प्यार..♥♥♥♥♥♥♥



मेरे सर पर तुम्हारा हाथ और संग में दुआयें हैं!


ख़ुशी की रोशनी रोशन, बहुत महकी हवायें हैं!


मेरी माँ आपके इस प्यार का, आभार कैसे दूँ!


हैं सागर सी सरीखी माँ तो मैं जलधार कैसे दूँ!


मेरे जीवन में माँ ने हर्ष के, दीपक जलायें हैं!


मेरे सर पर तुम्हारा हाथ और संग में दुआयें हैं!"




मेरी माँ प्रेमलता जी को समर्पित पंक्तियाँ!


......"शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"......



Thursday, 26 April 2012


♥♥♥♥♥♥ज़िन्दगी के मायने.♥♥♥♥♥♥♥♥♥

किसी के दिल को करार दे दो, किसी के दिल को दुलार दे दो!
किसी की आँखों के अश्क पीकर, ख़ुशी की मीठी फुहार दे दो!
किसी को तालीमी नूर दे दो, किसी के मन को निखार दे दो!
पड़े किसी को अगर जरुरत, तो जिंदगी भी उधार दे दो!

........"शुभ-दिन"..........चेतन रामकिशन "देव"...........

Wednesday, 25 April 2012

♥उल्फ़त के दीपक.


♥♥♥उल्फ़त के दीपक.♥♥♥

आओ उल्फ़त के दीपक जला दो जरा!
आओ तुम नफरतों को भुला दो जरा!

हाथ में हाथ लेकर, मोहब्बत के संग,
तुम दिलों को दिलों से, मिला दो जरा!

ख़ार नफरत के तो बस बहाते लहू,
तुम गुलाबों के उपवन खिला दो जरा!"

..."शुभ-दिन"..चेतन रामकिशन "देव"..

♥कलमकार....♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥कलमकार....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम उठाकर लिखें चलो हम, सुन्दर-२ मनोभावों को!
कलम उठाकर लिखें चलो हम, सच्चाई के प्रभावों को!
कलमकार बनना है हमको, जात-धर्म से ऊपर उठकर,
कलम उठाकर लिखें चलो हम, गंगा जमुनी सद्भावों को!"
........"संध्या-प्रणाम"....चेतन रामकिशन "देव"..........


Tuesday, 24 April 2012

♥मन में उड़ान..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥मन में उड़ान..♥♥♥♥♥♥♥♥

उम्मीद के पंखों से, मन में उड़ान रखना!
तुम अपनी निगाहों में, आसमान रखना!

एक पल में नहीं बनता है इतिहास जहाँ में!
हर पल ही नहीं मिलता है उल्लास जहाँ में!
बातें बनाने भर से, कहाँ मिलती है विजय,
तुम्हें जो जीतना है तो करो, प्रयास जहाँ में!

तन से भले बूढ़े हो पर मन जवान रखना!
उम्मीद के पंखों से, मन में उड़ान रखना!"

..."शुभ-दिन"....चेतन रामकिशन "देव"...

Monday, 23 April 2012

♥हिंसा का प्रचलन..♥

♥♥♥♥♥♥♥हिंसा का प्रचलन..♥♥♥♥♥♥♥
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है!
आंसू किसी के देख के, होती नहीं दुखन है!
इस मुल्क में अब हो रही मजहब पे लड़ाई,
हर ओर देखो खून से रंजित हुआ अमन है!

गाँधी के नाम को भी, बर्बाद कर रहे हम!
आपस में लड़ रहे हैं, फसाद कर रहे हम!

भूमि है लाल खून से, सहमा हुआ गगन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है....

अब खून की गंगा भी बहाने में डर नहीं है!
नफरत की दीवारें हैं, अब कोई घर नहीं हैं!
लड़ते हैं लोग आजकल छोटी सी बात पर,
उनके दिलों में नेह का, कोई असर नहीं है!

गाँधी की शांति को वो कमजोर बताते हैं!
इस देश के वो लोग जो हथियार उठाते हैं!

खिलते हुए गुलाब का, सूखा हुआ चमन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है....

हिंसा से कभी रूह को आराम नहीं मिलता!
हिंसा से कभी दिल को ईनाम नहीं मिलता!
"देव" क्या पाओगे, हिंसा के पथ पे चलकर,
हिंसा के पथ पे कोई, भगवान नहीं मिलता!

हिंसा का पाठ जिंदगी, सुधार नहीं सकता!
हिंसा का रंग जिंदगी, निखार नहीं सकता!

न जाने शांति का, कब होना आगमन है!
गाँधी के मुल्क में भी, हिंसा का प्रचलन है!"


" महात्मा गाँधी का ये देश, हिंसा की आग में धधक रहा है! हिंसा कभी मजहब की तो कभी किसी के हकों को लूटने की! किन्तु अशांति पैदा करके आप तन का, धन का और दुरित भावना का उल्लास तो ले सकते हैं, पर रूह और ह्रदय का सुकूं नहीं! तो आइये चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२४.४.२०१२

सर्वाधिकार सुरक्षित!
ये रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

Sunday, 22 April 2012

♥मधुर व्यवहार.♥


♥♥♥♥♥♥♥मधुर व्यवहार.♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सुन्दर ही सोच रखना, ऊँचे विचार रखना!
छोटी सी जिंदगी है उत्तम व्यवहार रखना

कागज़ के नोट से न मिलता सकूं जहाँ में
सदभाव, शान्ति से, मन में सुधार रखना!

नफरत सदा सिखाती आपस में बैर रखना !
हर इक के वास्ते तुम, ह्रदय में प्यार रखना

सुन्दर ही सोच रखना, ऊँचे विचार रखना!"

रचना संपादन-
माँ प्रेमलता जी

...."शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव"....


Saturday, 21 April 2012

♥अंगारों की राह...♥



♥♥♥♥♥♥अंगारों की राह...♥♥♥♥♥♥♥
अंगारों की राह पे चलना सीख लिया!
मैंने भी दीपक सा जलना सीख लिया!

हार-जीत में रहता हूँ, मैं एक जैसा,
मैंने आबो-हवा में ढलना सीख लिया!

अब मेरी पहचान भी नफरत भूल गई,
मैंने नफरत को भी छलना सीख लिया!"

.."शुभ-दिन".चेतन रामकिशन "देव"....


Wednesday, 18 April 2012

♥बेरोजगार युवा...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥बेरोजगार युवा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
पढ़-लिखकर भी युवा देश का, रोजगार को भटक रहा है!
उनका पेट है भूख से खाली, आंख से आंसू छिटक रहा है!

लेकिन देश की सरकारों को, उनकी कोई फ़िक्र नही है!
युवा की खातिर रोजगार का, करता कोई जिक्र नहीं है!

युवा वर्ग कुंठित होकर, देखो फांसी पर लटक रहा है!
पढ़-लिखकर भी युवा देश का, रोजगार को भटक रहा है!"
.................चेतन रामकिशन "देव"........................
दिनांक--१८.०४.२०१२

Tuesday, 17 April 2012

♥सुन्दर सितार..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सुन्दर सितार..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमारे दिल का सुकून हो तुम, हमारे दिल का करार हो तुम!
हमारे जीवन की चांदनी हो, हमारे मन का निखार हो तुम!
तुम्हारी चाहत में मेरे हमदम, खुशी हवा में घुली-मिली है,
तुम्हारी बोली बड़ी ही प्यारी के जैसे झंकृत सितार हो तुम!"
......................चेतन रामकिशन "देव"......................

Friday, 13 April 2012

♥♥बाबा साहब..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥बाबा साहब..♥♥♥♥♥♥♥♥
तुम अपने अधिकार सीखिए बाबा से!
शिक्षा का विस्तार सीखिए बाबा से!
शोषण के सम्मुख बाबा न झुके कभी,
शक्ति का उद्गार सीखिए बाबा से!

बिन संघर्ष के नहीं विजेता बन सकते!
बिना संगठन दुश्मन पे न तन सकते!

शोषण पर प्रहार सीखिए बाबा से!
तुम अपने अधिकार सीखिए बाबा से.....

घोर अभावों में रहकर भी नाम किया!
युगों-२ तक याद रहे वो काम किया!
बाबा साहब नमन आपको करते हैं,
आपने शोषित वर्गों का उत्थान किया!

हमें बाबा के पदचिन्हों पर चलना होगा!
तिमिर में भी दीपक जैसे जलना होगा!

जीवन का आधार सीखिए बाबा से!
तुम अपने अधिकार सीखिए बाबा से!"


बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के जन्म-दिवस पर हार्दिक बधाई और आह्वान की जाति-धर्म से ऊपर उठकर
ज्ञान पुरुष के पदचिन्हों पर चलकर शिक्षा, संघर्ष और संगठन को उन्नत करें!

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१४.०४.२०१२




Wednesday, 11 April 2012

♥माँ के दर्शन..♥


♥♥♥♥माँ के दर्शन..♥♥♥♥
सुन्दर भोर में माँ के दर्शन,
जब भी हमको मिल जाते हैं!

रात रात भर मुरझाए से,
फूल भी क्षण में खिल जाते हैं!

इस दुनिया माँ के सम्मुख,
कुछ लिखने को शब्द नहीं है!

इस दुनिया में माँ के जैसी,
कोई छवि उपलब्ध नहीं है!

माँ के प्यार से वायु में भी,
अणु ख़ुशी के घुल जाते हैं!

सुन्दर भोर में माँ के दर्शन,
जब भी हमको मिल जाते हैं!"

........"शुभ-दिन"............

माँ को प्रणाम

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१२.०४.२०१२


♥कौमी एकता..♥♥


♥♥♥♥कौमी एकता..♥♥♥♥
उम्मीदों को पंख लगाने आया हूँ!
सरहद की दीवार गिराने आया हूँ!

हिन्दू-मुस्लिम से प्यारे होते इन्सां,
मैं मजहब की आग बुझाने आया हूँ!

मुल्कों की जागीर नहीं हैं रास मुझे,
मैं चाहत का जहाँ वसाने आया हूँ!

नहीं चाहिए मुझको बम, बारूद कोई,
मैं फूलों की खेप बिछाने आया हूँ!

"देव" ये सच है मैं हूँ एक पंछी लेकिन,
मानवता का पाठ पढ़ाने आया हूँ!"

........चेतन रामकिशन "देव"..........
दिनांक--११.०४.२०१२

Sunday, 8 April 2012

♥सपनों की राजकुमारी..♥


♥♥♥सपनों की राजकुमारी..♥♥♥
तुम मेरे सपनों की राजकुमारी हो!
चंदा की किरणों के जैसी प्यारी हो!
देह मात्र का तुमसे न सम्बन्ध मेरा,
तुम तो मेरी रूह की नातेदारी हो!

तुमसे ही कायम मेरी जीवन धारा!
तुमसे ही मेरे जीवन का उजियारा!

हंसती गाती तुम कोई फुलवारी हो!
तुम मेरे सपनों की राजकुमारी हो....

जब भी तुम मेरे सपनों में आती हो!
मेरा घर और आंगन भी महकाती हो!
उस क्षण तो बढ़ जाती है सुन्दरता भी,
जब तुम लाज में अपने नयन झुकाती हो!

तुमसे ही मैंने आगे बढ़ना सीखा!
प्रेममयी शब्दों को भी पढना सीखा!

इस जग की भीड़ से तुम न्यारी हो!
तुम मेरे सपनों की राजकुमारी हो!"

"
प्रेम, जिससे भी वो, वही उसके जीवन में श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करता है! प्रेम सकारात्मकता प्रदान करता है! प्रेम की भाषा से अनपढ़ व्यक्ति भी, स्वयं को जाग्रत कर लेता है! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०९.०४.२०१२

"मेरी प्रेरणा को समर्पित रचना"

सर्वाधिकार सुरक्षित!




Saturday, 7 April 2012

♥अधूरा सफर...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥अधूरा सफर...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सिमट गया है सफर इश्क का, वादे जनम-२ के टूटे!
दिल में दर्द की आई सुनामी और आँखों से आंसू फूटे!

जो मुझको खुशियाँ के लम्हे, देने में सबसे आगे था,
आज उसी ने आगे बढ़कर, मेरी खुशियों के पल लूटे!

तन्हा-तन्हा जाने कैसे, उम्र को अपनी काट सकूँगा,
मुझको पार लगाने वाले, लोग भी बीच सफर में छूटे!"
.................चेतन रामकिशन "देव"......................

♥♥प्यार की हँसी...♥♥



♥♥♥♥♥♥♥प्यार की हँसी...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चेहरा तेरे प्यार में हँसता और धड़कन गाती रहती है!
सुबह,शाम और भरी दुपहरी, याद तेरी आती रहती है!

तेरे प्यार में साथी मुझको, जीने का अंदाज मिला है!
और तुम्हारे छूने भर से, मरुभूमि में सुमन खिला है!

तू गर्मी में घटा के जैसी, इस दिल पर छाती रहती है!
चेहरा तेरे प्यार में हँसता और धड़कन गाती रहती है!"
................चेतन रामकिशन "देव"....................


Friday, 6 April 2012

♥दृढ इच्छा शक्ति..♥


♥दृढ इच्छा शक्ति..♥♥♥
हमको तूफानों से न घबराना है!
तेज आँधियों में भी दिया जलाना है!

झूठ हमे खींचेगा अपनी ओर मगर,
हमको सच्चाई के पथ पे जाना है!

जीवन में मुश्किल के पल भी आयेंगे,
हमें मगर मुश्किल में भी मुस्काना है!

माँ के क़दमों में जन्नत होती यारों,
हमको माँ के आगे शीश झुकाना है!

इस दुनिया को याद जो मरके भी आयें,
"देव" हमें कुछ ऐसा करके जाना है!"
...."शुभ-दिन"..चेतन रामकिशन "देव"..

Wednesday, 4 April 2012


♥♥मुफ़लिस का रोना..♥♥♥♥
ये सैलाब नहीं बस मेरी आंखों का,
इस सैलाब में हर मुफ़लिस का रोना है!

मुफ़लिस का जीवन कटता है इस तरहा,
जैसे अपनी लाश को जिन्दा ढोना है!

नेता कुछ दिन में ही अरबपति बनते,
लगे सियासत में कोई जादू-टोना है!

मुफ़लिस की उम्मीद को हर कोई तौड़े,
हर सरकार का कद पहली से बौना है!

"देव" न जाने मुफ़लिस कब तक रोएगा,
जाने कब तक उसके साथ ये होना है!"

"
देश में दिन प्रतिदिन निर्धनता बढती जा रही है!
इस देश में नेता महीनों में अरबपति हो जाते हैं! इस देश में उद्योगपति महीनों में अरबपति हो जाते हैं, और निर्धन, मजदूर, किसान उम्र के पूरे ६०-७० साल में भी लखपति नहीं हो पाता! कितनी भयावह दशा है, तो आइये चिंतन करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०५.०४.२०१२

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रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!


♥प्यार में दूरी..♥


♥♥♥♥♥प्यार में दूरी..♥♥♥♥♥♥
जब तू आँखों से मेरी दूर चला जाता है!
हो हवा तेज भी पर साँस नहीं आता है!

मेरे आंसू भी इस तरह से यार बहते हैं,
जैसे के बाढ़ में, सैलाब उमड़ आता है!

वो भी चाहता है मेरे आसपास ही रहना,
काम हर रोज मगर कोई निकल आता है!

प्यार में दूरियां करती हैं इस कदर तन्हा,
एक दिन भी यहाँ बरसों की तरह आता है!

"देव" आता है लौटकर तो ऐसे मिलता है,
जैसों बरसों का गया लौटके घर आता है!


"महबूब के बिना सब कुछ सूना सूना लगता है! एक दिन भी सालों जैसा लगता है, आंसू भी आते हैं, नींद तो आती ही नहीं, पर
जब मिलन होता है तो प्रेम पहले से भी ज्यादा होता है! वाकई प्रेम बड़ा अनमोल है, तो आइये प्रेम करें!


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०४.०४.२०१२

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Monday, 2 April 2012

♥गाँधी चित्रित नोट..♥


♥♥♥गाँधी चित्रित नोट..♥♥♥
गाँधी चित्रित नोट के सब दीवाने हैं,
पर गाँधी की राह कोई चलता ही नहीं!

हमने हिंसा के दिन इतने दीर्घ किये,
नफरत का सूरज देखो ढलता ही नहीं!

खून बहाकर भी होता अफ़सोस नहीं,
बर्फ किसी की आँखों से गलता ही नहीं!

पर इस बात का इल्म कभी भी कर लेना,
इस हिंसा से कोई गुल खिलता ही नहीं!

"देव" न दौलत की खातिर रिश्ते बेचो,
बस दौलत से रूह को सुख मिलता ही नहीं!"


"
जरा सोचें, एक तरफ तो नफरत से कुछ भी तो नहीं मिलता, बस बहता है खून, जलती हैं चितायें, टूटता है मानवता का रिश्ता, छूटते हैं अपने जबकि दूसरी तरफ प्रेम और सदभाव से, गुल खिलते हैं, मानवीयता का सम्बन्ध मजबूत होता है! तो आइये चिंतन करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक- ०३.०४.२०१२

"शुभ-दिन"

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♥माँ की छवि...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ की छवि...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
माँ से ही रौनक है घर की, महक रही है गुलों की क्यारी!
हमारी माँ है बहुत दयालु, हमारी माँ है बहुत ही प्यारी!
ईश्वर ने सोचा वो कैसे, सभी को इक जैसा प्यार देंगे,
इसी सोच के दृष्टिगत ही, ईश ने माँ की छवि उतारी!

हमारा लालन, हमारा पालन, हमारा जीवन सुधारती है!
शहद से मीठे मधुर वचन से, हमारी माँ ही पुकारती है!

माँ का त्याग बड़ा अनुपम है, वो पीड़ा देखो सहे हमारी!
माँ से ही रौनक है घर की, महक रही है गुलों की क्यारी!"


" माँ, सबसे अनमोल छवि! व्याख्या के लिए शब्दकोष लघु लगता है!
इतना बड़ा कद है माँ का!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०२.०४.२०१२

मेरी प्यारी दोनों माताओं के लिए!

Friday, 30 March 2012

♥ये कैसा अष्टमी पूजन..♥


♥♥♥♥♥♥♥ये कैसा अष्टमी पूजन..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
निरा व्यर्थ है उनका पूजन, जो पुत्री को हीन समझते!
पुत्र को कहते राजा भैया और पुत्री को दीन समझते!
ढोंग मात्र लगता उनका, अष्टमी कन्या पूजन करना,
जो पुत्रों को वीर बताकर, कन्याओं को क्षीण समझते!

दुरित सोच को धारण करके, कन्या पूजन नहीं सुहाता!
इस ढोंग दिखावे के वंदन से, माँ का मन भी न हर्षाता!

जो पुत्री को कंटक कहकर, पुत्रों को शालीन समझते!
निरा व्यर्थ है उनका पूजन, जो पुत्री को हीन समझते....

अपनी सोच बदलकर देखो, कन्या पूजन करना सीखो!
जो पुत्रों का सम्मान करो तो, पुत्री का भी करना सीखो!
हमे सिखाते हैं नवरात्रे, कन्या शक्ति का पोषण करना,
मन से अपने भेद मिटाकर, दोनों को एक करना सीखो!

चन्दन तिलक लगाने भर से, कोई पुजारी न बन जाता!
जिसकी सोच हो मदिरा जैसी, वो गंगाजल न बन पाता!

जो पुत्री को अनपढ़ कहकर, पुत्रों को प्रवीण समझते!
निरा व्यर्थ है उनका पूजन, जो पुत्री को हीन समझते!"


"
सोच बदलनी होगी, नवरात्र मात्र उपवास रखकर, कन्याओं को भोजन खिला देने का नाम नहीं है, सही अर्थों में ये नवरात्र हमें नारी को पुत्रों/ पुरुषों के समान अपनत्व, सम्मान, रक्षा, शिक्षा और समानता दिलाने की सीख देते हैं! यदि हम ऐसा न करते हुए, वंदन करते हैं तो व्यर्थ ही है! तो आइये चिंतन करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-३१.०३.२०१२

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रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व में प्रकाशित!


♥♥♥♥♥रूह का मिलन...♥♥♥♥♥♥♥
रूह से रूह का जब मिलन हो गया!
तब से गंगा सा पावन ये मन हो गया!

मानो तन से कोई वास्ता ही नहीं,
उष्ण चिंतन का जैसे शमन हो गया!

प्रेम ने जब से राधा बनाया तुम्हें,
मैं भी तब से तुम्हारा किशन हो गया!

जब भी कुदरत ने तुमको बनाया धरा,
मेरा कद भी सरीखे-गगन हो गया!

जब सखी तुम सुगंधों की वाहक हुईं,
"देव" का रूप खिलकर सुमन हो गया!"

"
प्रेम, एक बहुत सुन्दर एहसास! सिर्फ युगलों तक सीमित नहीं होती ये अविरल प्रवाहित होने वाली धारा! प्रेम, जहाँ होता है वहां आत्मविश्वास, शक्ति, सोच दृढ होती है! तो आइये प्रेम करें!"

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक--३०.०३.२०१२

"अपनी प्रेरणा को समर्पित मेरी पंक्तियाँ!"

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Wednesday, 28 March 2012

♥रक्त में बारूद..♥



♥♥♥♥रक्त में बारूद..♥♥♥♥
अंत होता जा रहा है, प्रेम का, सदभाव का!
प्रचलन बढ़ने लगा है,रक्त, हिंसा,घाव का!

झूठ को सम्मान अब, मिल रहा है इस तरह,
हो रहा जर्जर बदन अब, सत्य के प्रभाव का!

सोच अब तो मजहबी, हावी हुई है इस तरह,
मानो चप्पू खो गया है, प्रेम की हर नाव का!

रक्त में जैसे घुली मिली हो, अब कोई बारूद,
अब तो मानव हो गया, पर्याय बस दुर्भाव का!

हो रहा दृष्टित के अब तो "देव" भी पाषाण हों,
प्रचलन आकर न रोके, वो दमन, परिभाव का!"

"आज जिधर भी देखो, उधर ही आदमी ही आदमी के रक्त का प्यासा है! निर्धन पर जुल्म हो रहे हैं, पर भगवान भी चुप हैं! कैसा आलम है! जाने, यहाँ अब तो अपने रक्त में भी विस्फोटक की गंध आती है! हमे चिंतन करना होगा, वरना देश की हर गली, हर चौराहा रक्त-रंजित होगा.."

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२९.०३.२०१२

Tuesday, 27 March 2012


♥♥♥♥ये आपकी मोहब्बत..♥♥♥♥
तेरे प्यार ने हमदम मेरे, इतना असर किया है!
पतझड़ से भरी राह को, तुमने शज़र किया है!

मेरी आँखों में नूर रहता है और चेहरे पे हँसी,
तेरे प्यार ने हमदम मुझे, फूलों सा कर दिया है!

जब से मिली है हमको मोहब्बत की चाँदनी,
चाहत ने स्याह रात को, पूनम सा कर दिया है!

मुश्किल के खौफ से, कभी रुकते नहीं कदम
हमदम तुम्हारे प्यार ने, मुझको निडर किया है!

सिक्कों को, सोने, चांदी को, रखूँगा मैं कहाँ,
तेरे प्यार की दौलत ने, मेरे घर को भर दिया है!"

"जिसके पास प्यार की अनमोल दौलत है, वो नोट, सिक्कों के अभाव में भी खुश होकर जीता है, क्यूंकि प्यार की दौलत तो अनमोल है! तो आइये सिक्कों के लिए, प्यार की अनमोल दौलत को पैरों से न कुचलें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२७.०३.२०१२

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Monday, 26 March 2012

♥♥♥माँ के आंसू..♥♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ के आंसू..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
आज मेरी करतूत से देखो, माँ की आंख से आंसू निकले!
लाज बड़ी आती है खुद पे, हम किसी सोच के बेटे निकले!

पश्चाताप बहुत है हमको, इस दिल से आंसू गिरते हैं!
माँ का ह्रदय दुखाकर देखो, बच्चे भी न खुश रहते हैं!
माँ तो सागर के जैसी हैं, माफ़ तो आखिर कर ही देंगी,
माँ के होठों पे हरदम ही, आशीषों के गुल खिलते हैं!

माँ का कोमल प्यार देखकर, पत्थर के भी दिल हैं पिघले!
आज मेरी करतूत से देखो, माँ की आंख से आंसू निकले!"

"
 माँ का दिल दुख दुखाने के बाद भी माँ अपने बच्चे को न सिर्फ माफ़ करती है अपितु
उसे सीने से लगा लेती है! माँ एक सागर जैसी होती हैं!
माँ अनमोल होती है, इतनी दयालु की शब्द नहीं हैं!"

मुझे अपनी दोनों माताओं पर गर्व है! आपको भी होगा, क्यूंकि माँ के बिन संसार अधूरा है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-२६.०३.२०१२

Friday, 23 March 2012

♥♥माँ (एक सहेली)♥♥


♥♥♥♥♥माँ (एक सहेली)♥♥♥♥♥♥♥
एक सहेली के जैसे माँ, बच्चों की बातें सुनती है!
सदा सहारा देकर के माँ, बच्चों के सपने बुनती है!

बच्चे भी अपनी पीड़ा को, सबसे पहले माँ से कहते!
माँ का गर स्पर्श मिले न, तो बच्चे मुरझाये रहते!
कभी-२ तो बच्चों के संग, माँ बन जाए छोटी बच्ची,
और कभी गलती करने, बच्चे माँ का गुस्सा सहते!

अपने बच्चों के जीवन से, माँ देखो कांटे चुनती है!
एक सहेली के जैसे माँ, बच्चों की बातें सुनती है!"

................चेतन रामकिशन "देव"....................

Thursday, 22 March 2012

♥♥ये कैसे संत.?♥♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ये कैसे संत.?♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
संत को चोला ओढ़ा लेकिन रखते गलते विचार!
अपने शब्दों से करते हैं, अम्ल सी विषमय धार!

इनकी "आर्ट ऑफ़ लिविंग" देखिए ऐसे मैले पाठ पढ़ाती!
निर्धन बच्चे लगें नक्सली, उनकी शिक्षा भी नहीं सुहाती!
इन लोगों ने क्या समझा है,निर्धन की संतान को आखिर,
निजी स्कूल की संतानें क्या, मानव शिशु नहीं कहलाती!

ऐसे संत क्यूँ करते आखिर, शब्दों का अत्याचार!
संत को चोला ओढ़ा लेकिन रखते गलते विचार!"

....चिंतन के साथ "शुभ-दिन"...चेतन रामकिशन "देव".....
 

♥♥प्रेम-योग्यता..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम-योग्यता..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
या तो प्रेम के नियमों का मैं पालन करने योग्य नहीं था!
या फिर स्तर और तुलना में, आपके मैं सुयोग्य नहीं था!

किन्तु मेरे निवेदन की तो, लाज आपको रख लेनी थी!
इस भिक्षुक की खाली झोली, प्रेम से अपने भर देनी थी!
प्रेमरहित जीवनधारा में,क्या धन,क्या सोना,क्या चांदी,
व्याकुलता को मेरी समझकर, प्रेम की वर्षा कर देनी थी!

मैं प्रेम आत्मा से करता था, प्रेम हमारा भोग्य नहीं था!
या तो प्रेम के नियमों का मैं पालन करने योग्य नहीं था!"
.....................चेतन रामकिशन "देव"..........................
" कभी कभी जीवन में ऐसे पल आते हैं, कोई किसी के प्रेम निवेदन को समझता नहीं, जबकि द्वितीय पक्ष की प्रेम सहमति प्रथम पक्ष को अत्यंत हर्ष दे सकती है, परन्तु ऐसा प्राय: नहीं होता और एक व्यक्ति पीड़ित हो जाता है! उस पीड़ा को अपने शब्दों में उकरने भर की कोशिश की है! "

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Tuesday, 20 March 2012

♥बचपन के सुनहरे दिन..♥



♥♥♥♥♥♥♥♥बचपन के सुनहरे दिन..♥♥♥♥♥♥♥
वो बचपन के सुनहरे दिन, मुझे जब याद आते हैं!
मेरे सब दोस्त मेरे दिल से अपना दिल मिलाते हैं!
नहीं नफरत, नहीं हिंसा, नहीं छल होता है मन में,
वो एक दूजे के दिल में, प्यार के दीपक जलाते हैं!

मगर जब उम्र बढ़ने से, वो बचपन बीत जाता है!
हर एक इन्सान फिर जाति-धर्म के गीत गाता है!

चिराग-ए-ईश्क बचपन के, सभी फिर टूट जाते हैं!
वो बचपन के सुनहरे दिन, मुझे जब याद आते हैं...

वो बचपन भी बहुत प्यारा, बहुत रंगीन होता था!
कभी हंसकर दिखाता था,कभी ग़मगीन होता था!
नहीं कोई भेद होता था किसी भी दोस्त के मन में,
हर एक बस झूमता गाता, ख़ुशी में लीन होता था!

मगर जब उम्र बढ़ने से, वो बचपन लुप्त होता है!
तो अपनापन हमारी सोच से, फिर सुप्त होता है!

वो मिटटी, कांच से निर्मित, खिलौने फूट जाते हैं!
वो बचपन के सुनहरे दिन, मुझे जब याद आते हैं...

मैं अक्सर सोचता हूँ,काश वो बचपन नहीं जाता!
तो कम से कम ज़माने को,खराबा खून ना भाता!
नहीं फिर "देव" ये दंगे, कहीं नफरत नहीं होती,
हंसी के फूल खिल जाते, दुखों का दौर ना आता!

मगर जब उम्र बढ़ने से, वो बचपन दूर हो जाता!
खुशी का वाकया हर इक, पलों में चूर हो जाता!

वो बचपन के सभी एहसास, मन से छूट जाते हैं!
वो बचपन के सुनहरे दिन, मुझे जब याद आते हैं!"

"
बचपन, न कोई भेद, न कोई नफरत ! धर्म जाति से ऊपर,
एक दूसरे की खुशी में लीन, एक दूजे के साथ साथ भोजन करने के पल, जब भी याद आते हैं तो आज के रक्त रंजित माहौल को देखकर लगता है कि, कहाँ आ गए हम ?"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२०.०३.२०१२


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Monday, 19 March 2012

♥मुफ़लिसी के ज़ख्म..♥

♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मुफ़लिसी के ज़ख्म..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥ 
मुफ़लिस के ज़ख्मों से देखो, बूंद खून की रिसती रहती!
उसके जीवन की डोरी भी, भूख प्यास से घिसती रहती!
इस दुनिया में मुफलिस के, हालातों का ऐसा आलम है,
उसकी तो हर एक खुशी ही, गम के हाथों पिसती रहती!"
........"शुभ-दिन".........चेतन रामकिशन "देव"...........

♥तुम बिन ♥

♥तुम बिन ♥

तुम बिन
मेरी साँस अधूरी


तुम बिन है
हर बात अधूरी!


बिना तुम्हारे 
आंख में आंसू,


तुम बिन है,
दिन रात अधूरी!


तुमसे दूर नहीं भाते हैं,
मुझको चंदा और सितारे!


इन शब्दों से कह नहीं सकती,
हमदम तुम हो कितने प्यारे!"


चेतन  रामकिशन "देव

Saturday, 17 March 2012

♥खूनी माहौल...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥खूनी माहौल...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
स्वयं की पीड़ा, पीड़ा लगती, दर्द और का लगे बहाना!
दौलत के समकक्ष देखिए, दिल का रिश्ता भी बैगाना!
कैसी बेदर्दी का आलम, इन्सां ही इन्सान का दुश्मन,
आज बहुत ही सस्ता लगता, इंसानों का खून बहाना!"
........."शुभ-दिन"..........चेतन रामकिशन "देव"......

Friday, 16 March 2012

♥भ्रूण में बालिका...♥


♥♥♥♥भ्रूण में बालिका...♥♥♥♥♥
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला!
उसके पालन का देखो इरादा टला!

मात को उसका आगम नहीं भा रहा!
और पिता क्रोध में देखो चिल्ला रहा!
मानो सारी हंसी को ग्रहण लग गया,
गीत खुशियों के, कोई नहीं गा रहा!

हर्ष की धूप का मानो सूरज ढला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला.....

पुत्र होता तो खुशियों में होते मगन!
गीत गाते सभी, घर में होता हवन!
बालिका देखकर हर खुशी मिट गई,
देखो रोने लगे हर किसी के नयन!

बालिका से ही होती जलन क्यूँ भला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला......

बालिका भी तो मानव की संतान है!
न ही निर्जीव है, न ही निष्-प्राण है!
बालिका भी तो है "देव" इन्सान ही,
उसकी सूरत में भी देखो भगवान है!

बालिका से ही होता क्यूँ हमको गिला!
भ्रूण में बालिका है,पता जब चला!"


"बालिका की भ्रूण हत्या, अभी भी बदस्तूर जारी है!
एक तरफ कन्या को देवी का रूप मन जाता है और दूसरी तरफ उसको दुनिया देखने से पहले ही कुचल दिया जाता है! आखिर हम क्यूँ नहीं समझते, कि बालिका भी सजीव है और वो भी पुत्र की तरह ही आवश्यक है! तो आइये जरा चिंतन करें! "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१७.०३.२०१२


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♥हंसी और हिम्मत..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥हंसी और हिम्मत..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
चलो जरा हंसकर भी देखो, यूँ मुंह लटकाकर क्यूँ बैठे हो!
चलो स्याह से बाहर आओ, तिमिर में आकर क्यूँ बैठे हो!
कभी हैं गम तो कभी खुशी है और जीवन है नाम इसी का,
चलो बढ़ो हिम्मत से आगे, तुम घबराकर क्यूँ बैठे हो!"
......."शुभ-दिन"...........चेतन रामकिशन "देव".........

♥सिर्फ तुम....♥



♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥सिर्फ तुम....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिना तुम्हारे मेरे हमदम, मैं हूँ इक पत्थर की  मूरत,
इस दुनिया में बिना रूह के तन का कोई मोल नहीं है!
किसी और के पीछे देखो, नहीं भागता मेरा मनवा,
मेरे दिल में खोट न कोई, नियत डांवा-डौल नहीं है!"
..............चेतन रामकिशन "देव".......................

Thursday, 15 March 2012

♥आदमी या दैत्य...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥आदमी या दैत्य...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हम सिक्कों की खनक में सारी अपनायत को भुला रहे हैं!
हम दौलत की प्यास में देखो, रिश्तों में विष मिला रहे हैं!
"देव" सुना था यहाँ शवों की, मुक्ति अग्नि से होती थी,
आज मगर हम दानव बनकर, जिन्दों को भी जला रहे हैं!"
.........."शुभ-दिन"......चेतन रामकिशन "देव".............


♥♥इंतज़ार..♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥इंतज़ार..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हमदम मेरे मुझे तुम इतना इंतज़ार क्यूं करवाते हो !
दिन बीते यादो में तेरी, रात को तारे गिनवाते हो!
मेरी बेचैनी का तुम पर, कोई असर नहीं होता है,
और परेशां मुझे देखकर, तुम छुप-२ के मुस्काते हो!"

"
प्रेम का हिस्सा है इंतजार और शरारत! शरारत में जब हमदम छुपकर इंतजार की तड़प देखते हैं तो एक असीम प्रेम अनुभूति मिलती है और उससे ज्यादा आनंद तब आता है जब द्वितीय पक्ष रूठ जाता है और उसे मनाया जाता है! "

चेतन रामकिशन "देव"

Wednesday, 14 March 2012

♥खुदा..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥खुदा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
खुदा का नूर जब भी चांदनी बनकर बरसता है!
अँधेरा दूर होता है, नया सूरज निकलता है!

यहाँ कानून के दर पर भले इन्साफ न हो पर .
वहां उसकी अदालत में, सही इंसाफ मिलता है!

यहाँ इन्सान मनमानी भला कब तक चलाएगा,
खुदा जब रूठ जाता है तो सारा जग दहलता है!

कभी मायूस न होना खुदा जो साथ न दे तो,
खुदा भी आदमी का इम्तिहां लेने निकलता है!

खुदा की शान में मैं और ज्यादा " देव" क्या लिखूं
नहीं दिखता मगर हर शे पे उसका हुक्म चलता है!"


"
उस अद्रश्य शक्ति को चाहें जिस नाम से पुकारो, उसका अस्तित्व तो कहीं न है, वो भले ही न दिखता हो पर उसके अस्तित्व को सही रखने पर सुखमय, सफलता भी देता है, और जब उसी के अस्तित्व को नजरंदाज किया जाता है तो वो कभी सुनामी, कभी जलजले, कभी हार देकर मानव को पुन सचेत भी करता है! मेरा ये मानना है, आपका क्या मानना है?

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१४.०२.२०१२


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Sunday, 11 March 2012

♥♥वीर नरेंद्र...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥वीर नरेंद्र...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सत्य के पथ पर चला सदा वो, शत्रु को ललकारा!
अपने आप को घिरा देख भी, वो हिम्मत न हारा!
हे दिव्यपुरुष ये नाम तुम्हारा, सूरज सा चमकेगा,
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा!

देश की इन सरकारों से पर आस नहीं है इंसाफी की!
है लूली सरकार को आदत, इन गुंडों की बैसाखी की!

जल्द ही वो दिन आएगा, हिल जाएगा शासन सारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, नरेंद्र जी नाम तुम्हारा.....

देश की और सूबे की सत्ता, अब गुंडों से भरी पड़ी है!
सच्चाई का गला दबाने, जगह जगह ये फौज खड़ी है!
लेकिन सच्चाई का सूरज नहीं अमावस से मरता है,
झूठ हो चाहें कितना भारी लेकिन सच ने जंग लड़ी है!

हमे जागना होगा लोगों, युद्ध भी इनसे करना होगा!
सत्ता के गलियारों को, शुद्ध भी हमको करना होगा!

इन गुंडों से जंग लडेगा, एक दिन पूरा देश हमारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा.....

मेरे देश के लोगों सीखो, इस सुपुत्र की कुर्बानी से!
जंग लड़ो इस गुंडेपन से, मक्कारी से बेईमानी से!
नहीं नींद से जागोगे तो, यूँ ही लुटना-मरना होगा,
चलो बचाओ आगे आकर, देश को ऐसी वीरानी से!

गूंगे- बहरे नहीं बनो तुम, ताकत का दीदार कराओ!
सत्ता में शामिल गुंडों की, ये मैली सरकार गिराओ!

आओ कुचल दें मिल-जुलकर, गुंडागर्दी का ये नारा!
युगों युगों तक याद रहेगा, वीर नरेंद्र नाम तुम्हारा"

“मध्य प्रदेश में कार्यरत आई.पी.एस. नरेंद्र जैसे वीर पुरुष की कुर्बानी से सीख लेनी होगी! सत्ता में शामिल इन गुंडों को अपनी ताकत का एहसास करना होगा! यदि अपना अस्तित्व बचाना है, सच्चाई को जीवित रखना है तो चापलूसी करने की धारणा से स्वयं को मुक्त करना होगा! जागना होगा!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-१२.०३.२०१२


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♥♥जरुरत....♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥जरुरत....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
यदि भुलाना आसां होता, तो हम तुमसे फरियाद न करते!
सुबह से लेकर शाम ढले तक, बस तुमको ही याद न करते!
यदि तुम्हारे बिन रह लेते, तो क्यूँ विनती करते हम तुमसे,
तेरी याद में तड़प-तड़प कर, हम चैन-सुकूं बरबाद न करते!"
........................चेतन रामकिशन "देव".............................

Friday, 9 March 2012

♥♥यकीन-ए-इश्क..♥


♥♥♥♥♥♥♥♥यकीन-ए-इश्क..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मैं उनकी बेवफाई की, शिकायत भी नहीं करती!
न दिल में बैर रखती हूँ, बगावत भी नहीं करती !

मुझे उनके सिवा चेहरा,  कोई लगता नहीं उम्दा,
किसी को देख भरने की, शरारत भी नहीं करती!

मेरा दिल टूट भी जाये, हर इक टुकड़े में वो होगा,
यही सोचकर दिल की, हिफाजत भी नहीं करती!

बड़ी अनमोल होती है, ये दौलत प्यार की लेकिन,
मैं उनसे प्यार करने में, खसासत भी नहीं करती!

मुझे एहसास है के "देव" वो पत्थर भी पिघलेगा,
मैं उनकी याद से अपनी, जमानत भी नहीं करती!"

"
जिंदगी में प्रेम और अपनत्व की लौ जिसके प्रति जलती है, वो उसे अपना लगता है, चाहें द्वितीय पक्ष उसे नजरंदाज करता हो! आज इसी सोच को केन्द्रित करते हुए, इक लड़की के मन में होने वाले इस द्वन्द को इन शब्दों से जोड़ने की कोशिश की है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०९.०३.२०१२


उक्त रचना मेरे ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित!

Thursday, 8 March 2012

ये कैसी नारी-मुक्ति..


♥♥♥♥♥♥♥♥ये कैसी नारी-मुक्ति..♥♥♥♥♥♥♥♥
मंच-मात्र से भाषण देना, नारी का उत्थान नहीं है!
चंद नारियां उठी हैं ऊँची, बाकी की पहचान नहीं है!

नारी के उत्थान को हमको, गाँव-२ भी जाना होगा!
उसके अधिकारों के प्रति, उसे हमे समझाना होगा!
नारी को भी देना होगा, मूल-मंत्र शिक्षा का हमको,
नारी को भी मर्यादा का, ज्ञान हमे करवाना होगा!

हम सबको ये मानना होगा, नारी भी बेजान नहीं है!
चंद नारियां उठी हैं ऊँची, बाकी की पहचान नहीं है!"



"
आज महिला दिवस है! कुछ नारियों की बात छोड़ दें तो बहुसंख्यक नारियां अभी भी स्याह में गुम हैं, क्यूंकि जो नारियां उत्थान कर जाती हैं वे भी उनके विकास के लिए, उत्थान के लिए अपेक्षाकृत रचनात्मक कार्य नहीं कर पाती मात्र शहर की नारियों के उत्थान से नारी मुक्ति/ उत्थान असंभव है, क्यूंकि देश की बहुसंख्यक नारी गाँव में रहती है! तो उधर भी देखना होगा!"

"महिला शक्ति को नमन"
चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०८.०३.२०१२

Monday, 5 March 2012



♥♥♥♥♥♥♥♥समझा नहीं तुमने...♥♥♥♥♥♥♥
न जाने क्यूँ मेरे एहसास को समझा नहीं तुमने,
तुम्हे ही चाहा था मैंने तुम्हे दिल में वसाया था!

तुम्हारी आंख का आंसू हमेशा अपना ही समझा,
तुम्हारे दर्द को मैंने गले अपने लगाया था!

कभी तुम याद कर लेना, गए गुजरे हुए वो पल,
अँधेरी राह में तेरी कभी दीपक जलाया था!

तेरी यादों को सीने में दफन भी कर नहीं सकता,
तेरी यादों की खुश्बू में कभी मैं मुस्कुराया था!

भले ही भूल जाना तुम मुझे पत्थर नहीं कहना,
ये पत्थर काटकर मैंने, तेरा रस्ता बनाया था!"


"
प्रेम के एहसास को कोई समझकर भी अनदेखा कर देता है तो कोई किसी के काबिल नहीं होता!
पर प्रेम के भाव ये कैसे समझें कि कोई उसे नकार रहा है, क्यूंकि उस शख्स से अपनापन रोके भी तो कैसे जिसे वो अपने दिल में वसाकर वंदना करता है! प्रेम कभी मिट नहीं सकता, उसे उम्मीद होती है द्वितीय पक्ष उसका दर्द समझेगा! इसी दर्द को इन शब्दों से उकेरने का प्रयास किया है!  "

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक-०६.०३.२०१२


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Sunday, 4 March 2012

♥♥प्रेम-दीप...♥♥


♥♥♥♥♥♥♥प्रेम-दीप...♥♥♥♥♥♥
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी!
प्रेम का गीत तुमने सुनाया सखी!
प्रेम के रंगों में तुमने रंगकर हमें,
मेरे जीवन को सुन्दर बनाया सखी!

प्रेम से मेरा जीवन सरल कर दिया!
प्रेम से मेरा घर भी महल कर दिया!

गोद में शीश रखकर सुलाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी.....

प्रेम के तुमने देकर हमे शुभ-वचन!
क्रोध का अंत करके दिया है शमन!
मेरे जीवन को तुमने दिखाई दिशा,
स्वार्थ भावों की तुमने बुझाई दहन!

प्रेम से मेरा जीवन निखिल कर दिया!
मेरे पाषाण मन को सजल कर दिया!

प्रेम का पाठ तुमने पढाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी....

प्रेम का दीप मन में जले अनवरत!
प्रेम हिंसा के भावों को करता विरत!
प्रेम तुमने मुझे "देव" जबसे दिया,
न दुरित सोच है, न ही चिंतन गलत!

प्रेम से आत्मा को धवल कर दिया!
प्रेम से मेरा जीवन सबल कर दिया!

प्रेम का स्वप्न तुमने सजाया सखी!
प्रेम का दीप तुमने जलाया सखी!"

"
प्रेम, जीवन को न सिर्फ अपनत्व देता है अपितु प्रेम के द्वारा व्यक्ति को सकारात्मकता भी मिलती है! प्रेम के दीप जहाँ जलते हैं वहां पर हिंसा की सोच नहीं होती और व्यक्ति दुरित भावों को त्याग देता है! तो आइये प्रेम करें!


चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--०५.०३.२०१२


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♥मायूसी.....♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥मायूसी.....♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
बिना तुम्हारे मायूसी है, चैन-सुकूं सब कुछ खोया है!
आंखें भी अश्कों से भीगीं और सीने में दिल रोया है!
जिसने अपना हमको कहकर मेरे आंसू अपनाये थे,
आज उसी ने मेरी राह में, काँटों का पतझड़ बोया है!"
....................चेतन रामकिशन "देव"....................

Friday, 2 March 2012

♥♥हमजोली...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हमजोली...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
तेरी सूरत गुलों के जैसी, कोयल के जैसी बोली है!
रंग बिरंगी तितली जैसी, तू खुशियों की रंगोली है!
बुरे वक्त में साहस देती, अपनापन भी देती है तू,
तू ही मेरे दुःख को समझे, तू ही मेरी हमजोली है!"
.............चेतन रामकिशन "देव".......................

Wednesday, 29 February 2012

♥♥यूपी में मतदान..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥यूपी में मतदान..♥♥♥♥♥♥♥
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!
शेष चरण के लिए लगाई, हर नेता ने जान!

आज सांय के 5 वजे तक, होगा बस प्रचार!
नेता बाँट रहे जनता को, हाथ जोड़कर प्यार!
अपने दल को श्रेष्ठ बताकर देते हैं ये लोभ,
और दलों पर नेता करते, मन भरके प्रहार!

कहीं मुलायम करते देखो माया का अपमान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

दमखम दिखता कांग्रेस में, माया भी तैयार!
और सपा ने भी ताने हैं,अपने सब हथियार!
भाजपा ने भगवा रंग का, खूब दिखाया झंडा,
और अजित नल से करते हैं, पानी की बौछार!

बीजेपी की निंदा करते, आज वही कल्याण!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान.....

६ तारीख को मिल जाएगी, जीत किसी को हार!
किसी की नैय्या डूबेगी तो, किसी की होगी पार!
किसी के दर तो जीत खुशी की दीप जला डालेगी,
"देव" पराजय कहीं पे देगी, आँखों में जलधार!

जाने किसको शूल मिलेंगे, किसका होगा मान!
छ: चरणों का बीत चूका है यूपी में मतदान!"

"उत्तर प्रदेश में ६ चरणों का चुनाव बीत चूका है और अंतिम चरण का चुनाव ३ मार्च को होगा! बसपा जहाँ दुबारा वापसी का जोरदार संकेत दे रही है तो वहीँ कांग्रस और रालोद भी जुटे हुए हैं! भाजपा, सपा और अन्य दल भी अपने अपने दावे ठोंक रहे हैं! ६ तारीख में ज्ञात हो जायेगा कि किसकी विजय हुयी, फ़िलहाल तो अंतिम चरण में वोट डालने का अनुभव लेते हैं!"


चेतन रामकिशन "देव"
०१-०३-२०१२


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Tuesday, 28 February 2012

♥आज का आदमी..♥


♥♥♥♥आज का आदमी..♥♥♥♥
आदमी क्यूँ बदलता जा रहा है!
भावना क्यूँ मसलता जा रहा है!

प्रेम से अब कोई मतलब नहीं है,
दिल को ऐसे कुचलता जा रहा है!

कौनसी हसरतें चाहता है जाने,
जाने किस ओर चलता जा रहा है!

देखकर और की खुशियाँ न जाने,
अपने-आपे में जलता जा रहा है!

"देव" अब खून के रिश्ते कहाँ हैं,
आदमी सबको छलता जा रहा है!"


" पता नहीं क्यूँ वक़्त बदला है या आदमी, पर आदमी अब आदमी जैसा दिखता तो है पर भीतर से इन्सानियत मरती जा रही है! तो आइये कोशिश करें के अपने भीतर के आदमी को जिन्दा रख सकें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२९.०२.२०१२

Sunday, 26 February 2012

♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥


♥♥♥♥♥♥♥मुफलिसी (दर्द का रिश्ता)♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
भूख प्यास का कफन लपेटे, मानो लाश के जैसा तन है!
गौर से देखो जरा इधर भी, मुफलिस का ऐसा जीवन है!

कोई तो चुनता कूड़ा रददी, एक वक़्त की रोटी खातिर,
कहीं किसी के हाथ में देखो, भीख मांगने का बर्तन है!

क्या नीति है मेरे मुल्क की, इतना अंतर करती है जो,
कोई तो तरसे पाई-२ को, किसी के हिस्से ढेरों धन है!

इनके दर्द की शिफा करे जो, देश में ऐसा नहीं सियासी,
छोटे से छोटा नेता भी, अब तो मुफलिस का दुश्मन है!

देख के इनके तंग हाल को "देव" निगाहें भर आती है,
मुफलिस के घर में तो देखो, साँझ सवेरे करुण रुदन है!"



"मुफलिसी में जीने वाले लोगों से ही पूछा जा सकता है कि, मुफलिसी का दर्द क्या होता है~ देश की नीतियां ऐसी हैं कि एक व्यक्ति पाई-पाई को तरसता है तो वहीँ एक व्यक्ति हजारों करोरों की सम्पत्ति का स्वामी होता है! राजनीति के सौदागर तो इनके जख्मों पर सिर्फ नमक छिड़कते हैं! इन मजलूमों को जागना होगा, इस घुटन से बचना है तो क्रांति तो लानी होगी!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--२७.०२.२०१२

Friday, 24 February 2012

♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम की वर्षा..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
सखी तुम्हारा प्रेम हमारे मन को आकर्षित कर देता है!
अधरों पर मुस्कान सजाकर, जीवन हर्षित कर देता है!
प्रेम तुम्हारा हर संकट में, हमको बल करता है प्रेषित,
अपनी आँखों की निंदिया भी, हमें समर्पित कर देता है!"
.....................चेतन रामकिशन "देव"......................

Wednesday, 22 February 2012

♥♥♥टीस...♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥टीस...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कोई नजदीक रहकर भी मेरी परवाह नहीं करता,
कोई पर दूर रहकर भी, मेरी खातिर दुआ करता!

मेरे अपनों ने तो मुझको हमेशा घाव ही बख्शे,
कोई पर गैर होकर भी, मेरे दुःख की दवा करता!

मेरे अपनों ने तो मेरी ख़ुशी को जमके लूटा था,
कोई पर गैर होकर भी, मुझे खुशियाँ फिदा करता!

रगों का खून मिलने भर से अपनापन नहीं आता,
आजकल खून का रिश्ता ही, ज्यादा दगा करता!

किसी पे जुल्म होने का तमाशा देखते हैं "देव",
यहाँ मजलूम के हक में, नहीं कोई निदा करता!"


"जिंदगी में ऐसे पल भी आते हैं जिसमे खूने के रिश्ते तक बदल जाते हैं~ जीवन भर साथ देने की बात करने वाले और वादा करने वाले बदल जाते हैं, तो दिल में एक तीस उठती है! कुछ शब्द जोड़ने का प्रयास किया है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२२.०२.२०१२

Monday, 20 February 2012

♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥माँ...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!
माँ की छवि बड़ी प्यारी है, माँ तो है अभिराम!

माँ का अर्थ बड़ा व्यापक है, माँ का ह्रदय विशाल!
माँ के आशीर्वाद से थमती, समस्याओं की चाल!
माँ की लोरी करती झंकृत, माँ देती मधुर दुलार,
माँ का ज्ञान हमारे साथ में, बनकर रहता ढाल!

माँ के मन में कभी न आते, दुरित भावना माम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम...

माँ के नाम भले कितने हों,  एक है जीवन दर्शन!
अम्मी हो या माँ हो मम्मी, सभी प्यार का दर्पण!
भले ही इस जीवन और जग में, ढेरों हों सम्बन्धी,
जीवन में पर विस्मृत न हो, अपनी माँ का अर्पण!

माँ की ममता के आगे न लगता कभी विराम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!

सदा ही संतानों के हित में, माँ करती है त्याग!
सदा सुनाती है माँ हमको, प्यार का मीठा राग!
माँ का वंदन यदि नही तुम करते हो जीवन में,
व्यर्थ है पूजन करने जाना, हरिद्वार, प्रयाग!

माँ का वंदन किये बिना तो, निष्फल है हर काम!
अदभुत रचना प्रकृति की, माँ है जिसका नाम!"


"माँ- प्रक्रति की सबसे अनमोल रचना! यूँ तो हर एक सम्बन्ध चाहें पिता हो, भाई हो, बहिन हो, मित्र हों, पति हो या पत्नी, अपनत्व तो देते ही हैं परन्तु माँ का अपनत्व इन सबसे बढ़कर है! ये सब हों और माँ न हो तो जीवन में ममता नहीं मिलती क्यूंकि ममता माँ के ही ह्रदय से ही उद्भव होती है, तो आइये माँ का सम्मान करें!"

 माँ की ममता को समर्पित रचना....

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---२१.०२.२०१२


Monday, 13 February 2012

♥आखिर ये विरोध क्यूँ?♥


♥♥♥♥♥♥♥♥आखिर ये विरोध क्यूँ?♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ!
प्रेम तो करता है अभिनंदित, है बिना प्रेम सब व्यर्थ!

इसी दिवस को बड़े शोर से, पश्चिम की संतान बताते!
किन्तु अपनी संतानों को, पश्चिम के परिधान दिलाते!
फादर, टीचर, मदर डेस क्या,पश्चिम का उपहार नहीं हैं,
इसी दिवस को क्यूँ आखिर, लुटता, डिगता मान बताते!

प्रेम न नैतिकता से करता, कभी मानव को अपदस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ...

दोहरी सोच का धारण करके, वैलेंटाइन नहीं रुकेगा!
हम पश्चिम को चाहेंगे तो, कैसे अंकुर नहीं उगेगा!
पश्चिम के रंगों में देखो हम सब बढ़ चढ़कर रंगते हैं,
जब देंगे अंग्रेजी शिक्षा, तो कैसे ये पैगाम थमेगा!

हम सब हर्षित होकर रहते हैं, पश्चिम के अंतरस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ...

ये सच है एक दिवस में नहीं सिमटती प्रेम की धारा!
प्रेम तो व्यापक जीवन है, प्रेम रहित जीवन बेकारा!
वैलेंटाइन तभी रुकेगा, जब पश्चिम से मुख मोडेंगे,
दो नावों पे पग रखने से, न मिल पाए कभी किनारा!

"देव" हम सब ही करते हैं, इस पश्चिम को स्वस्थ!
युगल मात्र तक नहीं संकुचित, प्रेम का व्यापक अर्थ!"


"हम एक तरफ पश्चिम का आवरण अन्य सभी दिवसों को धूमधाम से मनाते हैं! पश्चिम की शिक्षा प्रणाली को हमने अपने बच्चों की जीवन धारा से जोड़ लिया है और हम दोहरी नीति के चलते वैलेंटाइन का विरोध करते हैं! आखिर क्यूँ, अपने आप से पूछिए, क्या ये उचित है? मेरे ख्याल से तो ये अनुचित है और तानाशाही है!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक--१४.०२.२०१२

Thursday, 9 February 2012

♥कलम का देवता...


♥♥♥♥♥♥♥♥कलम का देवता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
कलम का देवता बनना, नहीं आसान है इतना,
कलम सच्चाई का जज्बा, कलम बलिदान चाहता है!

नहीं हिन्दू, नहीं मुस्लिम, न सिख न पारसी कोई,
कलम का देवता हर ओर बस इन्सान चाहता है!

नहीं ख्वाहिश के उसके घर बहे दौलत भरा झरना,
नहीं मखमल दलाली की, वो बस ईमान चाहता है!

नहीं थमता कलम उसका, नहीं अल्फाज का सौदा,
सितारों की तरह अल्फाज की पहचान चाहता है!

कलम का देवता बनने की ख्वाहिश वो नहीं रक्खे,
हुकूमत से कलम के नाम जो एहसान चाहता है!"


" कलम के साथ वफादारी करने वालों को, हुकूमत से किसी प्रलोभन की कोई आकांक्षा नहीं होती, वो भूखे पेट रह सकता पर बिक नहीं सकता! आज हिंदुस्तान की सरकार (सोशल साईट) अभिव्यक्ति पर पाबन्दी लगाने चाहती है, पर देश के बड़े बड़े दिखने वाले रचनाकार, लेखक आवाज नहीं उठाते, मेरे ख्याल से कलम का देवता सो गया है!"

....चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---१०-०२-२०१२

Wednesday, 8 February 2012

♥♥हिंदुस्तान..♥♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥हिंदुस्तान..♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश!
जग में सबसे सुन्दर-२, भारत का गणवेश!

आगंतुक का स्वागत होता माथे तिलक लगाकर!
उनका मन भी हर्षित होता, इस भूमि पर आकर!
भारत भूमि की संस्कृति,  लगती उनको प्यारी,
वो भी इसको अपनाते हैं, अपना शीश झुकाकर!

उनको अद्भुत लगता है, भारत का परिवेश!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश....

इस भूमि के पटल पे होता, कई धर्मों का पालन!
सब धर्मों का सार सिखाता, मानवता का धारण!
मंदिर मस्जिद हमे सिखाते, प्यार भरा सदभाव,
गुरुद्वाए और चर्च में होता, प्रेम भरा उच्चारण!

प्यार भरी तकरीरें होतीं, प्यार भरे उपदेश!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश.....

जन्म हमारा हुआ यहाँ पर, बड़े भाग्य की बात!
एक दूसरे के सुख-दुःख में,सभी का रहता साथ!
"देव" हमारे इस भारत की, शान सभी से प्यारी,
रामू हामिद साथ में फिरते, थाम के अपने हाथ!

न देखें हम किसी देश को, मन में भरके द्वेष!
हिंदुस्तान के जैसा जग में, नहीं दूसरा देश!"

"भले ही इस देश में नेताओं ने नफरत के अंकुर बोकर, भ्रष्टाचार के द्वारा देश को कितने भी पीछे धकेलने की कोशिश की हो, पर फिर भी भारत जैसे देश कोई दूसरा नहीं है!"

चेतन रामकिशन "देव"

Wednesday, 1 February 2012


♥♥♥♥♥♥♥♥प्रेम एक आवश्यकता...♥♥♥♥♥♥♥♥♥
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी!
प्रेम से महक उठे घर-आंगन, प्रेम में झूमे चाहरदीवारी!
प्रेम बिना फीकी पड़ जाती, हर रिश्ते की रंग-रंगोली,
प्रेम के रंग से खिल जाती है, हर रिश्ते की नातेदारी!

प्रेम बिना इन्सान तो केवल,पत्थर का टुकड़ा होता है!
मन भी रहता उदासीन और दुखी-दुखी मुखड़ा होता है!

प्रेम बिना तो हो जाती है, मीठे जल की झील भी खारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी....

प्रेम बिना तो अपनायत की, होली निश जलती है!
प्रेम बिना माँ की ममता भी,हमको झूठी लगती है!
प्रेम बिना तो रस्म सी लगती, पूजा और इबादत,
प्रेम बिना मानव की बोली, तीरों जैसे चुभती है!

प्रेम रहित मानव तो बस, हिंसा के अंकुर बोता है!
नहीं जिंदगी जीता है वो, वो केवल जीवन ढोता है!

प्रेम रहित इन्सान तो केवल, होते कंटक के व्यापारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी...

ए इंसानों चलो प्रेम को, मन में धारण करना सीखो!
एक दूजे के घावों को तुम,प्रेम भाव से भरना सीखो!
बिना प्रेम के"देव" हमारा ये जीवन निष्फल होता है,
प्रेम भाव से एक दूजे को,अपने वश में करना सीखो!

प्रेम करो अपने जीवन से, प्रेम करो अच्छे कर्मों से!
प्रेम करो अच्छी बातों से,प्रेम करो तुम सब धर्मों से!

प्रेम की ताक़त से ही देखो, इस दुनिया में हिंसा हारी!
प्रेम से एक रंगत आती है,प्रेम से लगती दुनिया प्यारी!"


"प्रेम, इस छोटे से शब्द को अपने अंतर्मन में धारण करने मात्र से ये दुनिया अपनी लगने लगती है! इस संसार का हर व्यक्ति अपना लगने लगता है! प्रेम, समाज से जातिवाद, धर्मवाद, हिंसा, भेद-भाव, उंच-नीच मिटाने में सक्षम है, तो आइये प्रेम को धारण करें!"

चेतन रामकिशन "देव"
दिनांक---०२.०२.२०१२





Friday, 27 January 2012

♥मात शारदे की कृपा...♥


♥♥♥♥♥♥♥♥♥मात शारदे की कृपा...♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं!
आपके जन्मदिवस पर हे माँ, पुष्पों के उपवन खिलते हैं!

मात शारदे की कृपा से होती है, बुद्धि के चिंतन में वृद्धि!
आपके ही आशीष से मिलती, हमारे लेखन को सम्रद्धि!
मात शारदे यदि हमारे साथ में आपका स्नेह ना होता,
हमारे जीवन में न आती, कोई सफलता, न उपलब्धि!

हम शीश झुकाकर मात शारदे, तन्मय हो वंदन करते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं....

मात शारदे आपका पूजन हम सबको शक्ति देता है!
समस्याओं से संघर्षों की, हम सबको युक्ति देता है!
मात शारदे आपका वंदन, जीवन में उजियारा करता,
मात शारदे आपका वंदन, मिथ्या से मुक्ति देता है!

भक्ति भाव से मात शारदे, आपका अभिनन्दन करते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं....

मात शारदे सदा ही हमको, अपने स्नेह से सिंचित करना!
कोई भूल यदि हो जाए तो, क्रोध कभी ना किंचित करना!
"देव" आपका इक यही निवेदन, मित्रों के संग में करता है,
अपनी संतानों को हे माता, ममता से वंचित ना करना!

आपके ही आशीष से माता, ज्ञान के नव-अंकुर पलते हैं!
मनुज के मन में ज्ञान के दीप, आपकी कृपा से जलते हैं!"



" ज्ञान के देवी माँ सरस्वती जी के वंदन में, अभिनन्दन में, स्वागत में, सम्मान में, उक्त पंक्तियाँ जोड़ी हैं! मैं और आप सब तो अज्ञानी हैं, ज्ञान और विवेक तो माँ ही देती हैं! माँ को नमन करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि, उनकी कृपा सदा हम पर बनी रहे!"

चेतन रामकिशन "देव"

दिनांक---२८.०१.२०१२

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